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डॉ रेड्डी लेबोरेटरीज के शेयरों को लेकर आई बड़ी खबर, क्या आपने लगाया है पैसा?

फार्मा कंपनी डॉ रेड्डी लेबोरेटरीज के निवेशकों के लिए बड़ी खबर है. कंपनी ने अपने स्टॉक स्प्लिट करने के लिए रिकॉर्ड डेट फाइनल कर दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

दिग्गज फार्मा कंपनी डॉ रेड्डी लेबोरेटरीज (Dr. Reddy's Laboratories Ltd) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है. कंपनी अपने शेयरों को स्प्लिट करने वाली है और इसके लिए रिकॉर्ड डेट का भी ऐलान कर दिया गया है.  डॉ रेड्डी का एक शेयर 5 हिस्सों में बांटा जाएगा. स्टॉक स्प्लिट के लिए निर्धारित रिकॉर्ड डेट इसी महीने में है.

28 अक्टूबर रिकॉर्ड डेट 
डॉ रेड्डी लेबोरेटरीज ने एक एक्सचेंज फाइलिंग में बताया है कि 5 रुपए  के फेस वैल्यू वाले एक शेयर को 5 हिस्सों में बांटा जाएगा. इसकी रिकॉर्ड डेट 28 अक्टूबर रखी गई है. कंपनी ने जुलाई में एक शेयर पर 40 रुपए का डिविडेंड दिया था. इससे पहले 2023 में भी कंपनी ने एक शेयर पर 40 रुपए का डिविडेंड अपने निवेशकों को दिया था. स्टॉक मार्केट में प्रदर्शन की बात करें, तो कल डॉ रेड्डी लेबोरेटरीज के शेयर करीब 2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 6,642 रुपए पर बंद हुए. इस साल अब तक इस शेयर ने 14.09% का रिटर्न दिया है. जबकि पिछले एक साल में यह आंकड़ा 22.84% रहा है.

क्या होता है मार्केट स्प्लिट?
अब बात स्टॉक स्प्लिट की निकली है, तो यह भी जान लेते हैं कि आखिर ये क्या होता है. जैसा कि नाम से ही समझ आ रहा है स्टॉक स्प्लिट यानी शेयरों का विभाजन. इस प्रक्रिया के तहत कंपनी स्टॉक एक्सचेंज को सूचित करके एक निर्धारित तिथि पर अपने शेयरों को एक निश्चित अनुपात में बांट देती है. जिस अनुपात में कंपनी स्टॉक स्प्लिट करती है, उसी अनुपात में शेयरहोल्डर्स के शेयरों में बदलाव हो जाता है. उदाहरण के तौर पर, यदि आपके पास किसी कंपनी के 400 शेयर हैं और कंपनी स्टॉक स्प्लिट लाकर 1 शेयर को 2 में तोड़ देती है, आपके पास कंपनी के 800 शेयर हो जाएंगे. हालांकि, इससे उसकी निवेश की वैल्यू पर कोई असर नहीं होगा.  

क्यों पड़ती है इसकी जरूरत?
जब कंपनी के शेयर की डिमांड काफी ज्यादा होती है, लेकिन उसकी ऊंची कीमत के चलते छोटे निवेशक ना चाहते हुए भी दूरी बना लेते हैं, तो कंपनी स्टॉक स्प्लिट करती है. इस प्रक्रिया से महंगा शेयर सस्ता हो जाता है और छोटे निवेशक आसानी से निवेश कर सकते हैं. डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज का शेयर इस समय 6,642 रुपए पर मिल रहा है. एक शेयर के लिए इतना बड़ा अमाउंट इन्वेस्ट करना हर किसी के बस की बात नहीं. लेकिन शेयरों के बंटवारे के बाद जब इसकी कीमत कम हो जाएगी, तो छोटे निवेशक भी इसमें पैसा लगा पाएंगे. कुल मिलाकर कहें तो कोई कंपनी स्टॉक स्प्लिट केवल इसलिए करती है, ताकि छोटे निवेशकों को आकर्षित किया जा सके.

मार्केट कैप होता है प्रभावित?
क्या स्टॉक स्प्लिट से कंपनी के मार्केट कैप पर भी कोई असर पड़ता है? इस सवाल का जवाब है -ना. चलिए इसे एक उदाहरण के जरिए समझते हैं. पिज्जा अक्सर 4 टुकड़ों में विभाजित होता है, लेकिन यदि आप छह लोग खाने वाले हों तो आप अपने हिसाब से उसे छह हिस्सों में भी बांट सकते हैं. क्या आपके ऐसा करने से पिज्जा का साइज घट या बढ़ जाएगा? निश्चित तौर पर नहीं. ठीक इसी तरह, स्टॉक स्प्लिट से केवल शेयर के टुकड़े होते हैं, इससे कंपनी के मार्केट कैप पर कोई असर नहीं पड़ता. बस शेयरों की संख्या बढ़ जाती है. रही बात निवेशकों के फायदे की, तो शेयरों के विभाजन से उनके पास डिमांड वाले शेयरों को कम कीमत में खरीदने का मौका मिल जाता है.


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