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Domino's पिज्जा बनाने वाली कंपनी ने खरीदी Coca-Cola, 10,000 करोड़ रुपये में डील को मंजूरी
इस डील के जरिए जुबिलेंट (Jubilant) को कोका-कोला की मजबूत सप्लाई चेन का लाभ मिलेगा, जबकि कोका-कोला खुद ब्रांडिंग और रणनीतिक नियंत्रण पर फोकस कर सकेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत में प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने जुबिलेंट बेवरेजेज लिमिटेड (JBL) को हिंदुस्तान कोका-कोला होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (HCCH) में 40% हिस्सेदारी खरीदने की मंजूरी दे दी है. इस डील की अनुमानित कीमत लगभग 10,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है. इससे जुबिलेंट ग्रुप को देशभर में फैले कोका-कोला के वितरण नेटवर्क और आपूर्ति श्रृंखला में सीधी हिस्सेदारी मिलेगी. बता दें, भारत में Domino's की फ्रेंचाइजी भी जुबिलेंट के पास है.
स्थानीय साझेदारी को बढ़ावा
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज लिमिटेड (HCCB) भारत में 13 मैन्युफैक्चरिंग प्लांट्स का संचालन करती है, जहां विभिन्न प्रकार की कोल्ड ड्रिंक्स और सॉफ्ट ड्रिंक्स का निर्माण होता है. कोका-कोला की रणनीति है कि स्थानीय साझेदारों की भागीदारी बढ़ाकर वह अपने संचालन को अधिक लचीला और बाजार केंद्रित बना सके.
पहले भी हुई थी 2000 करोड़ की एक डील
यह पहली बार नहीं है जब कोका-कोला ने अपने संचालन में बदलाव की पहल की है. हाल ही में CCI ने कंधारी ग्लोबल बेवरेजेज के बॉटलिंग प्लांट्स को 2,000 करोड़ रुपये में खरीदने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी थी. यह दर्शाता है कि कोका-कोला भारत में अपनी बॉटलिंग यूनिट्स को स्थानीय कंपनियों को सौंपकर खुद ब्रांडिंग, मार्केटिंग और रणनीतिक नियंत्रण पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है.
डील से जुड़ी कंपनियों का परिचय
इस सौदे में शामिल हिंदुस्तान कोका-कोला होल्डिंग्स (HCCH) एक होल्डिंग कंपनी है जो अमेरिका स्थित कोका-कोला कंपनी की सहायक है. इसका संचालन प्रत्यक्ष रूप से भारत में नहीं होता. HCCH की सहायक कंपनी हिंदुस्तान कोका-कोला बेवरेजेज (HCCB) भारत में उत्पादन और बिक्री का कार्य संभालती है. वहीं, जुबिलेंट बेवरेजेज लिमिटेड और जुबिलेंट बेवको लिमिटेड जुबिलेंट भारतीया ग्रुप की नई कंपनियां हैं जो इस डील में निवेश कर रही हैं.
एफएमसीजी क्षेत्र में बदलाव का संकेत
यह डील भारत के एफएमसीजी (फास्ट मूविंग कंज्यूमर गुड्स) सेक्टर में बड़े बदलाव का संकेत देती है. वैश्विक कंपनियां अब भारतीय बाजार में गहराई से उतरने के लिए स्थानीय साझेदारों के साथ मिलकर काम करने को प्राथमिकता दे रही हैं. इससे संचालन की लागत में कटौती के साथ-साथ बाजार की बेहतर समझ विकसित करने में मदद मिलेगी.
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