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क्या AGI ने HNG के बारे में दी गलत जानकारी, पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने किया बड़ा खुलासा?

कर्नाटक के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन का मानना है कि AGI ने CCI की मंजूरी के बारे में गलत जानकारी दी है जिससे स्टॉक एक्सचेंज डिस्क्लोजर रूल्स का उल्लंघन हुआ है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

पलक शाह

कर्नाटक उच्च न्यायालय (HC) और भारत के सर्वोच्च न्यायालय (SC) के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रमजीत सेन ने कहा है कि बाजार नियामक सेबी को शेयरधारकों को महत्वपूर्ण जानकारी का खुलासा करने में विफल रहने के लिए एजीआई ग्रीनपैक (AGI Greenpac's )और HNG दोनों के खिलाफ जांच के बाद कार्रवाई करनी चाहिए. अब इसके बाद सवाल खड़ा होता है कि क्या एजीआई ग्रीनपैक ने हिंदुस्तान नेशनल ग्लास (HNG) को खरीदने के अपने सौदे के बारे में स्टॉक एक्सचेंजों को महत्वपूर्ण और शेयर की कीमत को प्रभावित करने वाली जानकारी देने से परहेज किया?

स्टॉक एक्सचेंज डिस्क्लोजर रूल्स का हुआ उल्लंघन

बिजनेस वर्ल्ड (BW) ने न्यायमूर्ति सेन के खुलासे के बाद संबंधित दस्तावेज़ देखे हैं, जिसमें कहा गया है कि सौदे के लिए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) की सशर्त स्वीकृति के संबंध में AGI और HNG द्वारा सेलेक्टिव डिस्क्लोजर SEBI और स्टॉक एक्सचेंज डिस्क्लोजर रूल्स का उल्लंघन है. HNG से जुड़ी कॉर्पोरेट दिवालियापन समाधान प्रक्रिया (CIRP) लगभग दो साल तक चली है और कई विवादों में उलझी हुई है. भारत के सर्वोच्च न्यायालय के कम से कम दो पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और न्यायमूर्ति एन.वी. रमना ने उनके सौदे पर अपनी राय दी है जिसमें उन्होंने CIRP प्रक्रिया में खामियों को उजागर किया है. दस्तावेजों से पता चलता है कि न्यायाधीशों ने सौदे से संबंधित दस्तावेजों और जिन पक्षों से उनके विचार मांगे गए थे उनके आधार पर अपनी राय दी है.

लिस्टेड एंटिटी पर पड़ेगा प्रभाव 

न्यायमूर्ति सेन ने कहा कि स्टॉक एक्सचेंजों में AGI दी गई जानकारी से पता चलता है कि इसने खुद को सर्वश्रेष्ठ रूप में पेश करने के लिए सीसीआई (CCI) की मंजूरी के बारे में गलत जानकारी दी है. मेरा मानना है कि AGI द्वारा किए गए विनिवेश पर सीसीआई की मंजूरी के बारे में जानकारी एक ऐसी घटना है जिसका निस्संदेह लिस्टेड एंटिटी पर हानिकारक प्रभाव पड़ेगा और अधिक संभावना है कि यह घटना या पहले से ही सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी में रुकावट या परिवर्तन का कारण बनेगी. इसलिए, जब बाद में जनता को इस जानकारी के बारे में पता चलेगा तो बाजार पर इसका असर पड़ेगा.

2023 में CCI से प्रस्ताव को मिली थी मंजूरी

आपको बता दें कि AGI के रेजोल्यूशन प्लान को मार्च 2023 में CCI से सशर्त मंजूरी मिली थी. ऐसी शिकायतें थीं कि AGI द्वारा HNG का अधिग्रहण करने से उस सेक्टर में मोनोपोली पैदा होगी फिर भी CCI ने इस शर्त पर इस साझेदारी को अपनी मंजूरी दे दी कि AGI, HNG के ऋषिकेश संयंत्र को विनिवेश करने के लिए सहमत हो. यह अनिवार्यता के सिद्धांत (Doctrine of Necessity) के तहत ऋण समाधान प्रक्रिया (Debt Resolution Process) से जुड़े मामले में CCI द्वारा सशर्त स्वीकृत किया गया यह पहली मर्जर फाइलिंग थी. यह सार्वजनिक रूप से ज्ञात नहीं था कि किन शर्तों पर सहमति बनी थी. सुप्रीम कोर्ट के दो पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति ए.के. सीकरी और एन.वी. रमन्ना ने ऐसी सशर्त स्वीकृति के खिलाफ राय दी है, जिसके कारण मामले की CCI में नई व्यवस्था द्वारा जांच की आवश्यकता है.

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AGI के शेयर प्राइस का ड्रीम रन

अप्रैल और अक्टूबर के बीच, एजीआई के शेयर मूल्य में 236 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. विशेष रूप से, एजीआई ग्रीनपैक द्वारा 16.03.2023 को भेजे गए पत्र में स्टॉक एक्सचेंजों को CCI की मंजूरी की सूचना दी गई, लेकिन कंपनी यह उल्लेख करने में विफल रही कि दी गई मंजूरी AGI द्वारा प्रस्तावित अमेंडमेंट को एक्जीक्यूट करने की शर्त पर थी. AGI ने 16.03.2023 को अपने पत्र के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंजों को सूचित किया कि सीसीआई आदेश का अभी इंतजार करना होगा. लेकिन CCI का आदेश 19.04.2023 को अपलोड कर दिया गया था.

CCI ने दिया है विस्तृत विश्लेषण

CCI ने अपने आदेश में अमेंडमेंट के नतीजों का विस्तृत विश्लेषण दिया है, जिसमें कहा गया है कि ऋषिकेश प्लांट की उत्पादन क्षमता 400 टीपीडी है, जो HNG की कुल उपयोग की गई क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत है और इसमें 25 प्रतिशत की वृद्धि की जा सकती है. CCI के आदेश में कहा गया है कि AGI ने स्वीकार किया है कि ऋषिकेश प्लांट कंटेनर ग्लास बाजार के सभी चार सेगमेंट में मौजूद है और डिसइन्वेसमेंट से एल्को-बेवरेज (Alco-beverage) और एफएंडबी (F&B) सेगमेंट में लगभग 28 प्रतिशत और 15 प्रतिशत की वृद्धि समाप्त हो जाएगी.

निवेशकों पर काफी प्रभाव डालेगा

न्यायमूर्ति सेन का मानना है कि पोर्टफोलियो से ऐसी स्ट्रेटेजिक एसेट का डिसइन्वेसमेंट, निवेशकों की धारणा पर काफी प्रभाव डालेगा. उनका कहना है कि AGI को CCI के 15.03.2023 के आदेश में संशोधन का खुलासा करना चाहिए था, न कि CCI के कंटेंट में से सिर्फ अपने फायदे को चुनना था. यह स्पष्ट हो जाता है कि AGI ने सार्वजनिक डोमेन में संपूर्ण तथ्य रखने के बजाय HNG के अधिग्रहण और उससे होने वाले लाभों के बारे में 27.07.2023 के समाचार लेख में अधूरी जानकारी प्रकाशित करके जानबूझकर अपने निवेशकों के लिए संदेह पैदा करने का प्रयास किया.

SEBI के रेगुलेशन का उल्लंघन

न्यायमूर्ति सेन ने कहा कि AGI द्वारा प्रस्तावित डिसइन्वेसमेंट AGI और HNG द्वारा किए गए खुलासे में सामने नहीं आया है. इसमें शामिल प्राइस सेंसिटिविटी को देखते हुए, सीसीआई द्वारा दिए गए अप्रूवल के बारे में दी गई सूचना महत्वपूर्ण जानकारी होगी. इसलिए, HNG और AGI द्वारा ऐसी जानकारी का खुलासा न करना SEBI के सूचीबद्धता दायित्व और प्रकटीकरण आवश्यकताएँ (LODR) रेगुलेशन का उल्लंघन होगा और इन लिस्टेड एंटिटी की ओर से जानकारी को दबाने के समान होगा.

AGI ने दी चुनिंदा जानकारी
 
SEBI के डिस्क्लोजर नॉर्म्स इस तरह की गलत जानकारियों से बाजार की अटकलों को कम करने का काम करती हैं. महत्वपूर्ण जानकारियों के स्पष्ट न होने से बाजार में गलत सूचनाएं फैलती हैं. जिससे बाजार के परिणाम अव्यवस्थित हो जाते हैं और संबंधित बाजार में कंपटीशन पर काफी गलत प्रभाव पड़ता है. न्यायमूर्ति सेन का कहना है कि AGI को CCI के अप्रूवल से चुनिंदा जानकारी देने के बजाय 15.03.2023 के CCI के आदेश में दिए गए अमेंडमेंट का खुलासा करना चाहिए था.

AGI ने जानबूझकर संदेह पैदा किया

न्यायमूर्ति सेन ने कहा कि यह स्पष्ट रूप हो जाता है कि AGI ने सार्वजनिक डोमेन में संपूर्ण तथ्य रखने के बजाय, HNG के अधिग्रहण और उससे होने वाले लाभों के बारे में 27.07.2023 के समाचार लेख में अधूरी जानकारी प्रकाशित करके अपने निवेशकों के लिए जानबूझकर संदेह पैदा करने का प्रयास किया है. स्टॉक एक्सचेंजों को (LODR) रेगुलेशन के रूल्स 30 (10) के तहत किसी सूचीबद्ध कंपनी से किसी भी जानकारी या घटना पर स्पष्टीकरण मांगने का अधिकार है. यह स्पष्ट है कि पहले ही नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया ने 14 जून 2023 को निगरानी के माध्यम से बार-बार AGI शेयरों की मात्रा में वृद्धि के बारे में पूछताछ की थी.
 


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