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ऊर्जा संकट के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था 7.6% की दर से बढ़ेगी: रिपोर्ट

OECD ने यह भी कहा कि यदि मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम होता है या ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होती है, तो स्थिति बेहतर हो सकती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच भी भारत की अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ती हुई दिखाई दे रही है. ऑरगेनाइजेशन फॉर इकौनॉमिक कॉपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) की ताजा अंतरिम आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बनी रहेगी.

G20 देशों के मुकाबले भारत की स्थिति मजबूत
रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों में तेज़ उछाल और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान से आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ा है, फिर भी भारत की विकास दर अन्य G20 देशों की तुलना में कहीं अधिक मजबूत बनी हुई है.

OECD के मार्च 2026 के अंतरिम आर्थिक आउटलुक के मुताबिक, भारत की GDP वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में घटकर 6.1 प्रतिशत रह सकती है, जबकि 2027-28 में यह हल्की रिकवरी के साथ 6.4 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है. यह गिरावट मुख्यतः बढ़ती ऊर्जा आयात लागत, गैस की सीमित आपूर्ति और सरकारी प्रोत्साहन में कमी के कारण होगी.

मध्य पूर्व संकट से ऊर्जा कीमतों में उछाल
रिपोर्ट में बताया गया है कि Strait of Hormuz के जरिए ऊर्जा आपूर्ति पर पड़े असर के कारण कच्चे तेल की कीमतों में फरवरी के बाद से 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है. इसके साथ ही गैस और उर्वरक की कीमतों में भी तेज़ बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक महंगाई पर दबाव बढ़ा है.

भारत पर ऊर्जा आयात का बढ़ता दबाव
भारत जैसे ऊर्जा आयात पर निर्भर देश के लिए यह स्थिति अधिक चुनौतीपूर्ण है. OECD के अनुसार, संभावित कमी से निपटने के लिए भारत सहित कुछ एशियाई देशों ने उद्योगों के लिए ऊर्जा राशनिंग की शुरुआत भी की है. इससे उत्पादन गतिविधियों पर असर पड़ सकता है और आगामी वित्त वर्ष में वृद्धि दर पर दबाव बनेगा.

अमेरिकी टैरिफ में कमी से राहत
इन चुनौतियों के बावजूद, रिपोर्ट में भारत के पक्ष में कुछ सकारात्मक कारकों का भी उल्लेख किया गया है. अमेरिका की व्यापार नीति में बदलाव के बाद भारतीय निर्यात पर टैरिफ दरों में कमी आई है, जिससे ऊर्जा लागत के बढ़ते दबाव को कुछ हद तक संतुलित करने में मदद मिलेगी.

2025 की मजबूत आर्थिक नींव का लाभ
इसके अलावा, 2025 में राष्ट्रीय खातों में संशोधन के कारण भारत की आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत आधार पर थी. वैश्विक स्तर पर निजी खपत, निवेश और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों की बढ़ती मांग ने भी भारत की अर्थव्यवस्था को सहारा दिया.

महंगाई फिर बनेगी बड़ी चुनौती
हालांकि, महंगाई एक बड़ी चिंता बनकर उभर रही है. OECD का अनुमान है कि भारत में महंगाई दर 2025-26 के 2.0 प्रतिशत से बढ़कर 2026-27 में 5.1 प्रतिशत तक पहुंच सकती है, जो 2027-28 में घटकर 4.1 प्रतिशत हो सकती है.

निम्न आय वर्ग पर ज्यादा असर
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि निम्न आय वर्ग के परिवारों पर महंगाई का असर अधिक पड़ेगा, क्योंकि उनकी आय का बड़ा हिस्सा ऊर्जा पर खर्च होता है. वहीं परिवहन, धातु और पेट्रोकेमिकल जैसे ऊर्जा-गहन उद्योगों की लागत भी बढ़ेगी, जिसका बोझ अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी असर
वैश्विक स्तर पर OECD ने 2026 में आर्थिक वृद्धि दर 2.9 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो 2027 में मामूली बढ़कर 3.0 प्रतिशत हो सकती है. साथ ही, G20 देशों में महंगाई पहले के अनुमान से 1.2 प्रतिशत अधिक रहने की संभावना है.

OECD ने यह भी कहा कि यदि मध्य पूर्व में तनाव जल्द कम होता है या ऊर्जा आपूर्ति सामान्य होती है, तो स्थिति बेहतर हो सकती है. वहीं, यदि संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा कीमतें और बढ़ सकती हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है.

नीतिगत सुझाव
नीतिगत स्तर पर OECD ने सरकारों को सलाह दी है कि वे कमजोर वर्गों और व्यवसायों को लक्षित सहायता प्रदान करें, साथ ही ऊर्जा खपत को कम करने के लिए प्रोत्साहन बनाए रखें और वित्तीय संतुलन को बनाए रखने पर ध्यान दें.
 


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