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SEBI के बोर्ड की होने वाली है महत्वपूर्ण बैठक, बुच के खिलाफ आरोपों पर भी होगी चर्चा!
सेबी प्रमुख माधबी पुरी बुच पर बीते कुछ समय में आरोपों के कई हमले हो चुके हैं. हिंडनबर्ग के बाद कांग्रेस ने भी उन्हें कठघरे में खड़ा किया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बाजार नियामक सेबी (SEBI) के बोर्ड की महत्वपूर्ण बैठक 30 सितंबर को होने वाली है. इस बैठक में सेबी चीफ माधबी पुरी बुच के खिलाफ आरोपों पर चर्चा हो सकती है. बुच पर हिंडनबर्ग द्वारा 10 अगस्त को लगाए गए आरोपों के बाद पहली बार यह बैठक हो रही है, इसलिए इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है.
आरोपों पर गंभीर है बोर्ड
माधबी पुरी बुच पिछले कुछ समय से निशाने पर हैं. हिंडनबर्ग के बाद कांग्रेस ने भी उन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. बताया जा रहा है कि सेबी चीफ पर लगाए गए आरोपों को बोर्ड ने गंभीरता से लिया है और इन पर मीटिंग में चर्चा निश्चित रूप से होगी. यह भी संभव है कि इस चर्चा से माधबी पुरी बुच खुद को अलग कर लें. एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि सेबी चेयरपर्सन पर लगे आरोपों को लेकर पहले से ही चर्चा चल रही है और बोर्ड मीटिंग में इस पर विस्तार से चर्चा हो सकती है.
बैठक का एजेंडा तय नहीं
वैसे, बैठक का एजेंडा अब तक तय नहीं पाया है. लेकिन यह तय है कि सेबी प्रमुख पर आरोपों को लेकर बैठक में चर्चा होगी. अमूमन इस तरह के मामलों को एजेंडा में लिस्ट नहीं नहीं किया जाता है. जानकारी के अनुसार, 30 सितंबर को होने वाली बैठक में सेबी द्वारा पेश किए गए 11 कंसल्टेंशन पेपर पर भी चर्चा संभव है. दरअसल, इन पेपर्स पर निवेशकों से सलाह की समयसीमा बीत चुकी है और अब बोर्ड की बैठक में इन पर अंतिम फैसला हो सकता है.
SEBI की भी आलोचना
माधबी पुरी बुच पर लगे आरोपों को लेकर सेबी भी लगातार आलोचना का सामना कर रहा है. हाल ही में सेबी ने RTI में माधबी पुरी बुच से जुड़ी जानकारी देने से इंकार कर दिया था, जिसे लेकर कांग्रेस ने उस पर निशाना साधा. सेबी ने उन मामलों की जानकारी देने से इंकार कर दिया, जिनसे सेबी चीफ माधबी पुरी बुच ने हितों की टकराव की वजह से खुद को अलग कर लिया था. SEBI ने कहा कि ऐसे मामलों की जानकारी आसानी से उपलब्ध नहीं है और इस तरह के मामलों का पता लगाने में उसके संसाधनों की बर्बादी होगी. ट्रांसपेरेंसी एक्टिविस्ट कोमोडोर लोकेश बत्रा (रिटायर्ड) ने RTI एक्ट के माध्यम से सेबी से जानकारी मांगी थी. इसके साथ ही सेबी ने बुच के उस डिक्लेरेशन की कॉपी देने से भी मना कर दिया है, जिसमें उन्होंने सरकार और सेबी के बोर्ड को अपने एवं अपने परिवार के फाइनेंशियल एसेट्स और शेयरों में निवेश के बारे में बताया था.
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