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युवा कर्मचारी की मौत पर वित्त मंत्री ने आखिर ऐसा क्या कहा कि कांग्रेस का चढ़ गया पारा?
अन्ना सेबेस्टियन पेरायिल पुणे की एक कंपनी में नौकरी करती थीं, लेकिन काम के अत्यधिक दबाव के चलते उनकी मौत हो गई. उनकी मां ने इसके लिए कंपनी की कार्य संस्कृति को जिम्मेदार ठहराया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अत्यधिक वर्क लोड के चलत पुणे की एक युवा कर्मचारी की मौत पर देश में बहस छिड़ी हुई है. इस बीच, केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कुछ ऐसा कह दिया है, जिससे विपक्ष का पारा चढ़ गया है. वित्त मंत्री का कहना है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी में स्ट्रेस मैनेजमेंट का विषय पढ़ाया जाना चाहिए, इससे विद्यार्थियों को अंदर से मजबूत बनने में मदद मिलेगी. कांग्रेस ने उनके बयान को क्रूर करार दिया है.
क्या है पूरा मामला?
अर्न्स्ट एंड यंग (EY India) इंडिया नामक कंपनी में कार्यरत अन्ना सेबेस्टियन पेरायिल की जुलाई में मौत हो गई थी. 2023 में सीए की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अन्ना ने ईवाई के पुणे कार्यालय को ज्वाइन किया था और महज चंद महीने में ही उनका निधन हो गया. अन्ना की मां ने ईवाई इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी को पत्र लिखकर कहा था कि उनकी बेटी पर काम का इतना बोझ डाला गया कि वह शारीरिक, भावनात्मक और मानसिक रूप से प्रभावित हुई. तब से कर्मचारियों के वर्क लोड को लेकर देश में बहस चल रही है.
दबाव झेलने में असमर्थ
इस बीच, चेन्नई के एक निजी मेडिकल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सीतारमण ने 26 वर्षीय अन्ना सेबेस्टियन पेरायिल का जिक्र किया. हालांकि, उन्होंने अन्ना या उनकी कंपनी का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया. सीतारमण ने कहा कि मैं एक मुद्दे पर चर्चा कर रही थी, जो पिछले दो दिन से सुर्खियों में है. सीए की पढ़ाई करने वाली एक युवती अपनी कंपनी में काम के दबाव को झेलने में असमर्थ थी और इसी वजह से उसकी मौत हो गई.
'अडानी का दर्द दिखता है'
वित्त मंत्री ने आगे कहा कि शिक्षण संस्थानों और परिवारों को बच्चों को तनाव प्रबंधन के गुर सिखाने चाहिए. उन्हें उनसे कहना चाहिए कि आप जो भी पढ़ाई करें, जो भी नौकरी करें, आपमें उससे जुड़ा तनाव झेलने की शक्ति होनी चाहिए. वहीं, फाइनेंस मिनिस्टर के इस बयान पर कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है. कांग्रेस के संगठन महासचिव के सी वेणुगोपाल ने सीतारमण ने कहा कि सत्तारूढ़ दल और वित्त मंत्री को केवल अडानी और अंबानी जैसे कॉर्पोरेट दिग्गजों का दर्द दिखाई देता, मेहनतकश युवा पीढ़ी का नहीं. बेरोजगारी के इस दौर में अन्ना जैसे प्रतिभाशाली यदि नौकरी पाने में सफल भी होते हैं तो भी लालची कॉरपोरेट कंपनियां उनका शोषण करती हैं.
इस तरह के आरोप घृणित
कांग्रेस लीडर ने आगे कहा कि वित्त मंत्री का यह सुझाव देकर अन्ना और उनके परिवार को दोषी ठहराना बेहद क्रूर है कि अन्ना को स्ट्रेस मैनेजमेंट के गुर सिखाये जाने चाहिए थे. पीड़ित पर इस तरह का आरोप लगाना घृणित है. उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों के कारण जो गुस्सा और घृणा महसूस होती है, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है. बता दें कि अन्ना सेबेस्टियन पेरायिल की मां का यह भी आरोप है कि उनकी बेटी के अंतिम संस्कार में कंपनी का कोई व्यक्ति शामिल नहीं हुआ था.
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