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GST बढ़ोतरी पर CMAI ने जारी की चेतावनी, कहा- कपड़ा उद्योग को होगा नुकसान, जाएंगी नौकरियां

प्रस्ताव में कहा गया है कि Rs 1,500 से Rs 10,000 के कपड़ों पर ज्यादा GST लगेगा और Rs 10,000 से ऊपर के कपड़ों पर 28% कर लगेगा, जिससे उद्योग में चिंता बढ़ गई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अगुवाई वाले रेट रेशनलाइजेशन पर मंत्रियों के समूह (GoM) ने वस्त्र उद्योग के लिए जीएसटी (GST) ढांचे में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है. 2 दिसंबर 2024 को घोषित इन सिफारिशों के मुताबिक, 1,500 रुपये से 10,000 रुपये तक के कपड़ों पर जीएसटी दर बढ़ाकर 18% और 10,000 रुपये से ऊपर के कपड़ों पर 28% कर दिया जाएगा. इस कदम से उद्योग में उत्पादन, कीमत और ग्राहक मांग पर बुरा असर पड़ने की चिंता जताई जा रही है. 

वस्त्र उद्योग पर पड़ेगा प्रभाव

नए प्रस्तावों के तहत, Rs 1,500 तक के तैयार वस्त्रों पर 5 प्रतिशत GST लगेगा, लेकिन Rs 1,500 से Rs 10,000 तक के वस्त्रों पर 18 प्रतिशत GST लगेगा, और Rs 10,000 से ऊपर के वस्त्रों पर 28 प्रतिशत GST लगेगा. इस बदलाव के कारण, भारतीय वस्त्र उद्योग की वाणिज्यिक स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है. क्लोथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) ने इस प्रस्ताव पर चिंता जताई है. उनका कहना है कि इससे फॉर्मल रिटेल में दिक्कतें आएंगी, नौकरियां जा सकती हैं और उद्योग की वित्तीय स्थिति पर बुरा असर पड़ेगा. 

25 प्रतिशत आय की हो सकती है कमी

यह प्रस्ताव उपभोक्ताओं और व्यवसायों को अनौपचारिक बाजारों की ओर धकेल सकता है, जिससे कानूनी व्यापारियों का राजस्व कम हो सकता है और अवैध विक्रेताओं को फायदा हो सकता है. वस्त्र उद्योग पहले ही आर्थिक दबाव में है और छोटे व मझोले उद्योगों को इससे गंभीर नुकसान हो सकता है. भारत के हैंडलूम क्षेत्र में भी 25 प्रतिशत आय की कमी हो सकती है, जो 2 मिलियन कातने वालों को प्रभावित करेगा. ऊन उद्योग, जो 1.2 मिलियन कर्मचारियों को सहारा देता है, उसे भी भारी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है.

GST बढ़ने से बढ़ सकती हैं कपड़ों की कीमतें 

GST दर बढ़ने से कपड़ों की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे खासकर महिलाएं और कीमतों को लेकर संवेदनशील उपभोक्ता प्रभावित हो सकते हैं. इससे कपड़ों की खपत और कम हो सकती है. शादी जैसे खास मौकों के कपड़ों पर अधिक टैक्स से लोगों की आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है, खासकर जब उनकी बचत पहले से कम हो.  क्लोथिंग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (CMAI) का कहना है कि सरकार भले ही टैक्स से राजस्व बढ़ाना चाहती है, लेकिन ये बदलाव उद्योग में औपचारिकता (Formalisation) को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे उद्योग के नियमों का पालन कम होगा और टैक्स कलेक्शन भी घट सकता है.  

CMAI के अधिकारियों ने क्या कहा?

CMAI के अध्यक्ष संतोष कटारिया ने चिंता जताई कि ये बदलाव वस्त्र उद्योग को अस्थिर कर देंगे. उद्योग पहले ही ग्राहकों की घटती मांग और पूंजी की कमी से जूझ रहा है. उन्होंने बताया कि पहले की 5% समान GST दर से उद्योग को स्थिरता मिली थी और यह पूरे सप्लाई चेन में रुकावटें कम करने में मददगार थी. वहीं CMAI के चीफ मेंटर राहुल मेहता ने भी इन प्रस्तावों की आलोचना की. उनका कहना है कि कपड़ा उद्योग को बिक्री बढ़ाने के लिए सहायक नीतियों की जरूरत है, न कि टैक्स का अतिरिक्त बोझ. उन्होंने जोर दिया कि इस उद्योग का आर्थिक योगदान बहुत अहम है और सरकार को नीतियां बनाने से पहले सभी पक्षों से चर्चा करनी चाहिए ताकि बदलाव उद्योग के लिए फायदेमंद हों और मौजूदा समस्याएं न बढ़ें.

CMAI ने सरकार से किया ये अनुरोध

CMAI ने सरकार से अनुरोध किया है कि प्रस्तावित कर वृद्धि पर दोबारा विचार करें, क्योंकि उनका मानना है कि वर्तमान GST संरचना स्थिरता प्रदान करती है, नौकरियों को सुरक्षित रखती है और आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देती है. एसोसिएशन ने यह भी बताया कि कर दरों में असमानता है. उदाहरण के लिए, Rs 10,000 के कपड़े पर 28% कर लगाया जा रहा है, जबकि Rs 1.5 लाख के मोबाइल फोन पर केवल 18% कर है. CMAI ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाने की मांग की है, जो कपड़ा उद्योग में दीर्घकालिक स्थिरता और विकास को प्रोत्साहित करे. इन बदलावों पर सरकार का फैसला भारत के कपड़ा उद्योग के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकता है. यह उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लाखों लोगों को रोजगार देता है और देश के GDP में योगदान करता है.
 


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