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पॉल्यूशन कम करने के लिए केंद्र सरकार खर्च करेगी 1.75 लाख करोड़, जानिए क्या है पूरा प्लान? 

केंद्र सरकार ने पॉल्यूशन कम करने के लिए देश के अलग अलग शहरों में 10 लाख इलेक्ट्रिक बसें चलाने की योजना बनाई है. इसमें लाखों करोड़ों रुपये खर्च किए जाएंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

देश में बढ़ते पॉल्यूशन के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा प्लान बनाया है. इसके लिए सरकार अर्बन मेगाबस मिशन के तहत देश के अलग अलग शहरों में 1 लाख इलेक्ट्रिक बसें चलाएगी. इस प्लान को अगले पांच साल में पूरा किया जाएगा. इस मिशन पर सरकार की ओर से 1.75 लाख करोड़ रुपये का बजट खर्च किया जाएगा. तो चलिए जानते हैं सरकार की ये पूरी योजना और इसका उद्देश्य क्या है?

ई-बसों के अलावा सड़कों का भी होगा निर्माण
इस अर्बन मेगाबस मिशन में बस स्टॉप, टर्मिनल और डिपो सहित इलेक्ट्रिक बसों और रिलेटिड इंफ्रा तैयार किया जाएगा. नई इलेक्ट्रिक बसों की शुरूआत के अलावा, मिशन में 5,000 किलोमीटर पैदल और साइकिल चलाने के लिए सड़कों का निर्माण शामिल होगा. 

कब लॉन्च होगा मिशन? 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मिशन 2025 में लॉन्च किया जाएगा और 2029-30 वित्त वर्ष तक इस मिशन को पूरा करने का टारगेट रखा गया है. केंद्र पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन की हिस्सेदारी बढ़ाना चाहता है ताकि अधिक से अधिक लोग अपने निजी वाहनों को निकालने के बजाय इसे प्राथमिकता देना शुरू कर दें.  दस लाख से अधिक शहरों में नॉन-पॉल्यूटिंग इलेक्ट्रिक वाहनों की शुरूआत का लक्ष्य के तहत 2030 तक पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन मोड की हिस्सेदारी को सभी मोटर चालित यात्राओं में 60 प्रतिशत और 2036 तक 80 प्रतिशत बढ़ाना है. वहीं, नॉन-मोटराइज्ड ट्रिप्स यानी साइकिल और पैदल ट्रिप को 2030 तक सभी शहरी यात्राओं का कम से कम 50 प्रतिशत तक बढ़ाना है.

ये है इस मिशन का उद्देश्य

मिशन के लिए बजट 1.75 लाख करोड़ होगा – जिसमें पांच साल की अवधि के दौरान बस संचालन के लिए व्यवहार्यता अंतर निधि के रूप में 80,000 करोड़ रुपये और बस स्टॉप जैसे सहायक बुनियादी ढांचे में सुधार और वृद्धि के लिए 45,000 करोड़ रुपये शामिल हैं. सूत्रों के अनुसार इस मिशन का उद्देश्य वायु प्रदूषण को कम करना, पब्लिक हेल्थ में सुधार करना और इकोनॉमी को बढ़ावा देना है.  इसके अलावा पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन को ट्रांसपोर्ट के साथ लोगों को पैदल चलने और साइकिल चलाने के लिए प्रो​त्साहित करना है.
 


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