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पश्चिम एशिया में युद्धविराम से India Inc को राहत, घटेगा लागत का दबाव: क्रिसिल

क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में अब करीब 100 बेसिस प्वाइंट की गिरावट का अनुमान है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और युद्धविराम की स्थिति बनने से भारतीय कंपनियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. क्रिसिल रेटिंग्स की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और गैस आपूर्ति के सामान्य होने से कंपनियों पर लागत का दबाव कम होगा, जिससे कॉरपोरेट मुनाफे पर पड़ने वाला असर पहले के अनुमान से काफी कम रह सकता है.

मुनाफे पर असर का अनुमान हुआ कम

क्रिसिल रेटिंग्स के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में भारतीय कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन में अब करीब 100 बेसिस प्वाइंट की गिरावट का अनुमान है. यह अनुमान लंबे समय तक संघर्ष जारी रहने की स्थिति में लगाए गए पहले के अनुमान का लगभग आधा है. भूराजनतिक तनाव में कमी और होर्मुज जलडमरूमध्य के दोबारा खुलने से ऊर्जा बाजारों में स्थिरता आई है, जिससे आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हुआ है.

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से राहत

क्रिसिल ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने अनुमान में बदलाव करते हुए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 80 से 85 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान लगाया है. इससे पहले तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए 110 डॉलर प्रति बैरल का अनुमान लगाया गया था. वहीं, गैस आपूर्ति में व्यवधान अब केवल चार महीने तक रहने की संभावना जताई गई है, जबकि पहले इसके तीन तिमाहियों तक बने रहने का अनुमान था.

कम क्षेत्रों पर पड़ेगा दबाव

संशोधित अनुमान के अनुसार, अब केवल 10 सेक्टरों पर ही मार्जिन दबाव पड़ने की आशंका है, जबकि पहले 22 सेक्टरों पर असर पड़ने की संभावना जताई गई थी. भारत इंक का कुल ऑपरेटिंग मार्जिन अब लगभग 11 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जबकि संघर्ष से पहले यह 12 प्रतिशत रहने की उम्मीद थी.

एयरलाइंस और सिरेमिक सेक्टर पर रहेगा दबाव

रिपोर्ट के मुताबिक, एयरलाइंस और सिरेमिक उद्योग अभी भी दबाव में रह सकते हैं. इसकी वजह ईंधन लागत में बढ़ोतरी, रुपये की कमजोरी और सीमित मूल्य निर्धारण क्षमता है. इसके अलावा स्पेशियलिटी केमिकल्स, फ्लेक्सिबल पैकेजिंग और पॉलिएस्टर टेक्सटाइल जैसे कमोडिटी आधारित सेक्टरों में भी मार्जिन पर दबाव बना रह सकता है.

तेल विपणन और उर्वरक कंपनियों को फायदा

दूसरी ओर, ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और उर्वरक निर्माताओं को कच्चे माल की लागत घटने और आपूर्ति की स्थिति में सुधार का लाभ मिल सकता है. इन क्षेत्रों में लागत कम होने से मुनाफे में सुधार की संभावना जताई गई है.

मांग मजबूत, लेकिन जोखिम बरकरार

क्रिसिल का कहना है कि सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और स्थिर उपभोग मांग के कारण अर्थव्यवस्था की बुनियादी स्थिति मजबूत बनी हुई है. हालांकि रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अमेरिका और ईरान के बीच बनी समझ अभी अस्थायी है. इसके अलावा दोबारा बढ़ने वाले भूराजनतिक तनाव और कमजोर मानसून जैसी चुनौतियां कॉरपोरेट मुनाफे पर असर डाल सकती हैं.
 


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