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जुलाई में 23.44 करोड़ तक पहुंची डीमैट खातों की संख्या, लेकिन सक्रिय निवेशक नहीं बढ़े: रिपोर्ट
जुलाई में नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार 12.1 प्रतिशत बढ़ी, लेकिन एनएसई पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या में 1.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. 360 वन कैपिटल रिसर्च की रिपोर्ट में निवेशकों की बाजार भागीदारी कमजोर रहने की बात कही गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
भारत में डीमैट खातों की कुल संख्या जुलाई 2026 में बढ़कर 23.44 करोड़ हो गई. यह जून के मुकाबले 1.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी है. 360 वन कैपिटल रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार, बाजार की स्थिति में सुधार के चलते नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार में तेजी आई है. जुलाई में करीब 29 लाख नए डीमैट खाते जुड़े, जो पिछले महीने के मुकाबले 12.1 प्रतिशत अधिक है. इससे नए निवेशकों के बाजार से जुड़ने की रफ्तार में सुधार का संकेत मिलता है. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक नए खातों के जुड़ने की औसत रफ्तार अभी वित्त वर्ष 2025 और वित्त वर्ष 2026 के स्तर से नीचे बनी हुई है.
सीडीएसएल के खाते बढ़कर 18.83 करोड़
सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज लिमिटेड यानी सीडीएसएल के डीमैट खातों की संख्या जुलाई में बढ़कर 18.83 करोड़ हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई के दौरान सीडीएसएल में 23 लाख नए खाते जुड़े, जो जून के मुकाबले 11.6 प्रतिशत अधिक है. हालांकि, नए डीमैट खातों में सीडीएसएल की हिस्सेदारी 40 आधार अंक घटकर 81 प्रतिशत रह गई. इसके बावजूद जुलाई में पिछले पांच महीनों की तुलना में सबसे अधिक नए खाते सीडीएसएल से जुड़े. वहीं, नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड यानी एनएसडीएल के डीमैट खातों की संख्या बढ़कर 4.62 करोड़ हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
एनएसडीएल में जुलाई के दौरान करीब 5.5 लाख नए खाते जुड़े. नए खातों की संख्या में पिछले महीने की तुलना में 14.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई. इससे कुल नए डीमैट खातों में एनएसडीएल की हिस्सेदारी बढ़कर 19 प्रतिशत हो गई.
डीमैट खाते बढ़े, लेकिन सक्रिय निवेशक घटे
रिपोर्ट में सबसे अहम बात यह सामने आई कि डीमैट खातों की संख्या बढ़ने के बावजूद शेयर बाजार में सक्रिय निवेशकों की संख्या में खास बढ़ोतरी नहीं हुई है. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई पर सक्रिय ग्राहकों की संख्या 2026 के पहले सात महीनों में करीब 4.55 करोड़ के आसपास बनी रही. दिसंबर 2025 में यह संख्या करीब 4.48 करोड़ के निचले स्तर तक पहुंच गई थी.
जुलाई में एनएसई के सक्रिय ग्राहकों की संख्या महीने-दर-महीने करीब 1.8 प्रतिशत और साल-दर-साल 3.6 प्रतिशत घट गई. जून 2026 में सक्रिय ग्राहकों और कुल डीमैट खातों का अनुपात 19.4 प्रतिशत रहा, जो पिछले महीने की तुलना में 25 आधार अंक कम है. इसका मतलब है कि डीमैट खाते खुलने की रफ्तार सक्रिय निवेशकों की वृद्धि से कहीं अधिक है.
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग डीमैट खाते तो खोल रहे हैं, लेकिन यह अभी नियमित रूप से शेयर बाजार में निवेश या कारोबार करने वाले निवेशकों की संख्या में उसी अनुपात में बदलाव नहीं दिखा रहा है.
ग्रो ने बढ़ाई बाजार हिस्सेदारी
डिस्काउंट ब्रोकिंग बाजार में जुलाई के दौरान तीन प्रमुख कंपनियों की स्थिति बनी रही, लेकिन ग्रो ने अपनी बाजार हिस्सेदारी में बढ़ोतरी की. ग्रो की बाजार हिस्सेदारी 16 आधार अंक बढ़कर 28.9 प्रतिशत हो गई. वहीं, जेरोधा की हिस्सेदारी 8 आधार अंक घटकर 14.9 प्रतिशत रही. एंजेल वन की हिस्सेदारी 14.6 प्रतिशत पर बनी रही.
एंजेल वन के कुल ग्राहकों की संख्या जुलाई में महीने-दर-महीने 1.14 प्रतिशत बढ़कर 3.9 करोड़ हो गई. हालांकि, एनएसई पर कंपनी के सक्रिय ग्राहकों का अनुपात जून के 17.2 प्रतिशत से घटकर 17 प्रतिशत रह गया. पिछले 12 महीनों में ग्रो ने करीब 270 आधार अंक की बाजार हिस्सेदारी हासिल की है. वहीं, एंजेल वन की हिस्सेदारी में करीब 66 आधार अंक की गिरावट दर्ज की गई है.
बाजार में सुधार से बढ़ सकती है निवेशकों की भागीदारी
360 वन कैपिटल रिसर्च का मानना है कि बाजार की स्थिति में लगातार सुधार होने पर निवेशकों की भागीदारी बढ़ सकती है. इससे नए डीमैट खाते खुलने की रफ्तार और तेज हो सकती है, साथ ही ब्रोकरेज कंपनियों के सक्रिय ग्राहकों की संख्या में भी सुधार देखने को मिल सकता है.
रिपोर्ट के अनुसार, डिपॉजिटरी के साथ पंजीकृत सक्रिय कंपनियों की संख्या भी जुलाई में बढ़कर 1,66,757 हो गई. इसमें महीने-दर-महीने 1.19 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई. सीडीएसएल के साथ पंजीकृत कंपनियों की संख्या 1.09 प्रतिशत बढ़कर 50,228 हो गई, जबकि एनएसडीएल के साथ पंजीकृत कंपनियों की संख्या 1.24 प्रतिशत बढ़कर 1,16,529 पहुंच गई.
कुल मिलाकर जुलाई में डीमैट खातों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली, लेकिन सक्रिय निवेशकों की संख्या में गिरावट यह संकेत देती है कि नए खाते खुलने के बावजूद बाजार में नियमित भागीदारी अभी कमजोर बनी हुई है.
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