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BW Flex Summit: बढ़ रहा है Co-Working ऑफिस का चलन!

2 ऐसी इंडस्ट्रीज जिन्होंने पिछले 2 साल के दौरान बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है तो वह हॉस्पिटैलिटी और को-वर्किंग स्पेस की इंडस्ट्री हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

BW बिजनेसवर्ल्ड (BW BusinessWorld) ने आज दिल्ली में BW Flexispaces समिट के पहले एडिशन का आयोजन किया. आयोजन की शुरुआत में BW बिजनेसवर्ल्ड के चीफ एडिटर और चेयरमैन डॉक्टर अनुराग बत्रा ने समिट में मौजूद लोगों को संबोधित किया और को-वर्किंग स्पेस की वृद्धि के बारे में अपने विचार भी साझा किए. 

इन दो इंडस्ट्रीज ने किया शानदार प्रदर्शन
डॉक्टर बत्रा ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए सभी लोगों का BW Flexispaces समिट में स्वागत किया. डॉक्टर बत्रा ने कहा कि उनके अनुसार अगर कोई 2 ऐसी इंडस्ट्रीज हैं जिन्होंने पिछले 2 साल के दौरान बहुत ही शानदार प्रदर्शन किया है तो वह हॉस्पिटैलिटी और को-वर्किंग स्पेस की इंडस्ट्री हैं. डॉक्टर बत्रा ने अपने संबोधन के दौरान बताया कि कोविड के दौरान बहुत से लोगों ने ऑफिस स्पेस और को-वर्किंग स्पेस को अलविदा कह दिया था. 

बढ़ रहा है को-वर्किंग स्पेस का क्षेत्र
अपने संबोधन के दौरान आगे डॉक्टर बत्रा ने बताया कि कोविड के दौरान ऑफिस स्पेस और को-वर्किंग स्पेस के क्षेत्र को झटका तो लगा था लेकिन इस क्षेत्र ने एक बार फिर से वापसी की है और अब यह क्षेत्र वृद्धि के रास्ते पर अग्रसर है. डॉक्टर बत्रा ने जानकारी साझा करते हुए कहा कि ऑफिस स्पेस की कुल संख्या में से 30% का इस्तेमाल को-वर्किंग स्पेस के तौर पर हो रहा है. को-वर्किंग स्पेस अब प्रमुख रूप से मुख्यधारा का हिस्सा बन रहे हैं. 

ज्यादा ऑफिस स्पेस मतलब ज्यादा को-वर्किंग स्पेस
डॉक्टर बत्रा ने अपने संबोधन के दौरान आगे बताया कि ऑफटेक के मामले में बैंगलोर, अन्य सभी शहरों से काफी आगे है. 2 साल पहले कुल ऑफिस स्पेस का 5% ही को-वर्किंग स्पेस के लिए इस्तेमाल होता था लेकिन अब यह आंकड़ा 20% तक जा पहुंचा है. इसके साथ ही अपने विचार प्रकट करते हुए डॉक्टर बत्रा ने कहा कि आने वाले 2 सालों में यह संख्या 50% तक भी पहुंच सकती है. 

बड़ा होगा को-वर्किंग स्पेस का क्षेत्र
डॉक्टर बत्रा ने कहा कि पहले कंपनियां को-वर्किंग के ट्रेंड को बहुत ज्यादा महत्त्व नहीं देती थीं लेकिन अब ऐसा नहीं है और ज्यादा से ज्यादा कंपनियां को-वर्किंग स्पेस के ट्रेंड पर प्रमुख रूप से ध्यान दे रही हैं. 2016 में को-वर्किंग स्पेस के तौर पर केवल 6.3 मिलियन स्क्वेयर-फुट का क्षेत्र उपलब्ध था जो 2019 में बढ़कर 30 मिलियन और फिर 2022 में बढ़कर 44 मिलियन टन पर पहुंच गया है. को-वर्किंग स्पेस क्षेत्र की वृद्धि पर डॉक्टर बत्रा ने कहा कि आने वाले समय में यह स्पेस अभी और बड़ा होगा और अब इस ट्रेंड की तरफ कंपनियों का झुकाव देखा जा रहा है.
 

यह भी पढ़ें: BW FLEX:Flex Space में टेक्‍नोलॉजी अहम भूमिका निभाने जा रही है

 


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