BW Flex Summit: Flex Space में टेक्‍नोलॉजी अहम भूमिका निभाने जा रही है 

Flex Space में प्राइसिंग तय करने के कई महत्‍वपूर्ण कारक हैं. इनमें सबसे बड़ा कारक है प्रॉपर्टी की लोकेशन और दूसरा बड़ा कारक उसका ले आउट और डिजाइनिंग है. 

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Thursday, 03 August, 2023
BW Flex Space

BW Reality World के Flexi Spaces Conclave and Awards कार्यक्रम में पहुंचे इस क्षेत्र के नामी लोगों ने अपनी बात कही. किसी ने इस सेक्‍टर में प्राइसिंग को लेकर कहा कि उसे तय करने में किसकी अहम भूमिका है और किसी ने कहा कि आज रियल स्‍टेट का मार्केट कितनी तेजी से आगे बढ़ रहा है. मुंबई में हो रहे बिजनेस वर्ल्‍ड के इस इवेंट में BW Businessworld के एडिटर-इन-चीफ और एक्‍सचेंज4मीडिया के संस्‍थापक डॉ.अनुराग बत्रा भी मौजूद रहे. 

Colliers के मैनेजिंग डॉयरेक्‍टर और हेड ऑफ Flex, इंडिया ,अर्पित मेहरोत्रा ने कहा कि भारत में कुल 25 मिलियन ग्रास ऑफिस स्‍पेस दिया गया है उसमें फ्लेक्‍स का योगदान 18 प्रतिशत रहा है. हमें उम्‍मीद है कि इस साल के अंत तक ये 25 मिलियन तक हो जाएगा. अगर हम ये देखें कि दुनिया में क्‍या हो रहा है तो उसके अनुसार ये एक अच्‍छा स्‍टार्ट है. H1 23 में 4.5 मिलियन की ग्रोथ के बीच दिल्‍ली एनसीआर में सबसे ज्‍यादा 32 प्रतिशत मांग देखने को मिली, बैंग्‍लुरु 29 प्रतिशत इसी तरह चेन्‍नई में 17 प्रतिशत,  पुणे में 13 प्रतिशत की मांग देखने को मिली है. इस बीच एक नई चीज ये भी देखने को मिली है कि कई जगह नए हब बनकर सामने आए हैं. उनमें नोएडा एक्‍सप्रेस वे, नोएडा 62, पुणे में बानेर बालेवाली, जैसी जगहें उभरकर सामने आई हैं. 

100X.VC के फाउंडर एंड पार्टनर, निनाद कार्पे ने कहा कि मुझे लगता है कि फलेक्‍स स्‍पेस में टेक्‍नोलॉजी एक अहम किरदार निभाने जा रही है. आज अपने कस्‍टमर की जरूरत को समझने में तकनीक हमें बड़ा योगदान दे सकती है. जब कभी भी आप फ्लेक्‍स स्‍पेस में काम करते हैं तो उसमें हमें एक बड़ा कनवर्जन देखने को मिलता है. इस कनवर्जन में जब भी कोई एम्‍प्‍लॉयर वहां जाता है तो वहां का जो कर्मचारी है उसको उसके जरिए अनुभव मिलता है. मुझे लगता है कि बिना तकनीक के किसी भी तरह का कनवर्जन आसानी से नहीं होता है. 
Dev Accelerator Private Limited के को-फाउंडर उमेश उत्‍तमचंदानी ने कहा कि अगर कोरोना के बाद से स्‍पेस की डिमांड की बात करें तो हमारी कंपनी ने अभी तक 2000 मिलियन का स्‍पेस ऑक्‍यूपाइड करवा दिया है. ये हमारे पोर्टफोलियों में अब तक जुड़ चुका है. आज हमारी कंपनी की मौजूदगी 10 शहरो में है. आज हमारे पास आईटी, आईटीएस जैसे सेक्‍टर की कंपनियां आ रही हैं. अब तक अपने अनुभव से हम जो समझ पाएं हैं उससे यही दिखाई देता है कि वो लोग केवल ऑफिस स्‍पेस की ही तलाश नहीं कर रहे हैं बल्कि वो लोग अपने ऑफिस में अलग-अलग तरह के स्‍पेस को क्रिएट कर रहे हैं. इसमें पेट स्‍पेस, जिमनेजियम, जैसी जगहें शामिल हैं. इन जगहों को वो इसलिए ऑक्‍यूपाई कर रहे हैं जिससे अपने कर्मचारियों को वापस ऑफिस ला सकें.  

Qdesq के फाउंडर एंड CEO, पारस अरोरा ने सेशन के दौरान कहा कि फ्लेक्‍स स्‍पेस में टेक का बड़ा रोल है. इसे हम एक छोटे से उदाहरण से समझ सकते हैं कि अगर मीटिंग स्‍पेस की बुकिंग करनी हो तो आप आसानी से कर सकते हैं. इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि आप कोविड से पहले हर किसी को अपने मोबाइल पर ऐप चाहिए होता था. लेकिन लोग पहले ऐप डाउनलोड नहीं करते थे. लेकिन आज क्‍यू आर कोड बेस, कैलेंडर बेस, फीडबैक, कंप्‍लेन मैनेजमेंट सिस्‍टम, लेकिन उसका टाइम काफी बढ़ गया है. टेक हमेशा ही या तो आपके बिजनेस के बैकएंड पर काम करती है या कहीं ना कहीं होती है. 

UrbanWrk के COO & Co-Founder, हर्ष मेहता ने अपनी बात रखते हुए कहा कि हमारी कंपनी की शुरुआत कोविड के समय में हुई थी. उसके बाद जून में हमने अपने पहले क्‍लाइंट के साथ डील साइन की. यही नहीं हमने सबसे पहले एक सेंटर को वैक्‍सीनेशन सेंटर में बदला जहां एक दिन में 1400 लोगों को वैक्‍सीन लगनी थी. ऐसे में हमारे सामने अपने कर्मचारियों के स्‍वास्‍थ्‍य की देखभाल करना बड़ी चुनौती थी. यही नहीं उस दौरान हमने कई इंस्‍टीटयूट के साथ समझौता भी किया. उस दौरान ऐसे काम करने के चलते हम बहुत कुछ सीखने में कामयाब रहे. इसी वजह से आज हम बहुत से शहरों में मौजूदगी बना पाए हैं. 

AltF Coworking के डॉयरेक्‍टर Yogesh Arora ने कहा कि अगर लोकेशन के हिसाब से देखें तो प्राइसिंग एक महत्‍वपूर्ण पार्ट है. आज हमारे बीच में माइक्रो मार्केट है जिनकी अपनी अलग-अलग प्राइसिंग है. सबसे दिलचस्‍प बात ये है कि प्राइसिंग को कई चीजें प्रभावित करती हैं. इनमें को वर्किंग स्‍पेस की डिजाइनिंग सबसे महत्‍वपूर्ण भाग है. हम एक ऐसे दौर में रह रहे हैं जहां लोग 200 स्‍कवॉयर फीट, 150 स्क्‍वॉयर फीट, 80 स्‍कवॉयर फीट के स्‍पेस में रहते हैं. ऐसे में ऑप्‍टीमाइजेशन सबसे अहम है. मुझे लगता है यही प्राइसिंग को तय करने में अपनी अहम भूमिका निभाते हैं. इनमें भी सबसे अहम ये है कि प्रोजेक्‍ट की लोकेशन कैसी है, आपके लैंड लॉर्ड से संबंध कैसे हैं.
 


नोएडा-गुरुग्राम बने रियल एस्टेट निवेश के सबसे बड़े हॉटस्पॉट, 7 साल में घरों की कीमतें 125% तक बढ़ीं: रिपोर्ट

ANAROCK रिसर्च एंड एडवाइजरी के विश्लेषण के अनुसार, देश के 11 प्रमुख आवासीय बाजारों में 2019 से Q2 2026 के बीच पूंजीगत मूल्य और रेंटल यील्ड, दोनों में लगभग समान गति से वृद्धि हुई है.

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Tuesday, 04 August, 2026
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भारत का आवासीय रियल एस्टेट बाजार अब निवेशकों के लिए सिर्फ संपत्ति की कीमतों में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रह गया है. ANAROCK की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्रमुख हाउसिंग बाजारों में 2019 से 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) के बीच घरों की कीमतों के साथ-साथ किराये से होने वाली आय (Rental Yield) में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस दौरान नोएडा और गुरुग्राम ने पूंजीगत मूल्य वृद्धि (Capital Appreciation) में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि बेंगलुरु और हैदराबाद में रेंटल यील्ड सबसे तेजी से बढ़ी.

नोएडा और गुरुग्राम में सबसे तेज बढ़ीं घरों की कीमतें

ANAROCK रिसर्च एंड एडवाइजरी के विश्लेषण के अनुसार, देश के 11 प्रमुख आवासीय बाजारों में 2019 से Q2 2026 के बीच पूंजीगत मूल्य और रेंटल यील्ड, दोनों में लगभग समान गति से वृद्धि हुई है. इसका मतलब है कि अब प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने के बावजूद किराये से मिलने वाला रिटर्न भी मजबूत बना हुआ है.

रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा में औसत आवासीय कीमत 2019 में 4,795 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर Q2 2026 में 10,780 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई. यानी करीब 125 फीसदी की बढ़ोतरी. इसी अवधि में रेंटल यील्ड 3.2 फीसदी से बढ़कर 3.9 फीसदी हो गई, जो 70 बेसिस प्वाइंट (BPS) की वृद्धि है.

वहीं, गुरुग्राम में घरों की औसत कीमत 6,150 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 13,350 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गई, जो 117 फीसदी की वृद्धि है. यहां रेंटल यील्ड 3.5 फीसदी से बढ़कर 4.3 फीसदी हो गई, यानी 80 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हुआ.

बेंगलुरु और हैदराबाद में किराये से कमाई सबसे ज्यादा बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु और हैदराबाद ने रेंटल यील्ड में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया. दोनों शहरों में 2019 से Q2 2026 के बीच रेंटल यील्ड में 100 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बेंगलुरु में आवासीय कीमतें 4,975 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 9,450 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, जो 90 फीसदी की वृद्धि है. वहीं, रेंटल यील्ड 3.6 फीसदी से बढ़कर 4.6 फीसदी पहुंच गई.

हैदराबाद में इसी अवधि के दौरान घरों की कीमतें 4,195 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 8,090 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, यानी 93 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. रेंटल यील्ड भी 2.6 फीसदी से बढ़कर 3.6 फीसदी हो गई.

मुंबई और दिल्ली में भी बेहतर हुआ रेंटल रिटर्न

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई और दिल्ली जैसे परिपक्व (Mature) रियल एस्टेट बाजारों में भी किराये से होने वाली आय में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला. मुंबई में 2019 से Q2 2026 के बीच घरों की कीमतों में 64 फीसदी की वृद्धि हुई. औसत कीमत 17,845 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 29,270 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गई. वहीं रेंटल यील्ड 3.5 फीसदी से बढ़कर 4.3 फीसदी हो गई.

दिल्ली में आवासीय कीमतें 18,200 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 26,700 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंचीं, जो 47 फीसदी की वृद्धि है. यहां रेंटल यील्ड 2.2 फीसदी से बढ़कर 3.2 फीसदी हो गई.

अन्य शहरों का प्रदर्शन

नवी मुंबई में घरों की कीमतों में 71 फीसदी और ठाणे में 63 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. दोनों शहरों में रेंटल यील्ड 80 बेसिस प्वाइंट बढ़ी. पुणे में आवासीय कीमतों में 51 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि रेंटल यील्ड में 65 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हुआ.

चेन्नई और कोलकाता में अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि दर्ज की गई. चेन्नई में घरों की कीमतें 47 फीसदी बढ़ीं और रेंटल यील्ड 55 बेसिस प्वाइंट बढ़ी, जबकि कोलकाता में कीमतों में 45 फीसदी और रेंटल यील्ड में 60 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि हुई.

रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर से मिली रफ्तार

ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि आमतौर पर प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने पर रेंटल यील्ड घट जाती है, लेकिन भारत के प्रमुख आवासीय बाजार इस ट्रेंड से अलग दिखाई दे रहे हैं. उनका कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार केंद्रों का विस्तार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की बढ़ती मौजूदगी और महानगरों की ओर लगातार हो रहा पलायन, आवासीय बाजार में पूंजीगत मूल्य और किराये, दोनों को मजबूती दे रहा है.

उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास रोजगार पैदा करता है, रोजगार पलायन को बढ़ाता है, पलायन से किराये की मांग बढ़ती है और मजबूत आवासीय मांग से संपत्तियों की कीमतों में तेजी आती है. यही वजह है कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार अब निवेशकों को पूंजीगत लाभ और नियमित किराये की आय, दोनों का बेहतर अवसर उपलब्ध करा रहा है.
 


NCR में प्रीमियम ऑफिस स्पेस पर M3M का बड़ा दांव, 600 करोड़ रुपये से बनेगा प्रीमियम बिजनेस हब

कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और बड़े कॉरपोरेट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.

Last Modified:
Friday, 31 July, 2026
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दिल्ली-एनसीआर में प्रीमियम कमर्शियल रियल एस्टेट और ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग के बीच M3M इंडिया ने गुरुग्राम के सेक्टर-113 में 600 करोड़ रुपये के निवेश से 'M3M कैपिटल फाइनेंशियल सेंटर' लॉन्च किया है. कंपनी का अनुमान है कि इस परियोजना से करीब 1,500 करोड़ रुपये की आय होगी. यह प्रोजेक्ट ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बहुराष्ट्रीय कंपनियों और वित्तीय संस्थानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है.

1.42 एकड़ में फैला यह ग्रेड-ए कमर्शियल प्रोजेक्ट M3M IFC के बाद कंपनी की नई कमर्शियल पेशकश है. इसमें चार बेसमेंट और 22 मंजिला टावर विकसित किया जाएगा, जिसमें 165 यूनिट्स होंगी. इनमें 152 ऑफिस स्पेस, छह मल्टीप्लेक्स यूनिट और सात रिटेल स्पेस शामिल हैं.

GCC और कॉरपोरेट्स पर फोकस

कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और बड़े कॉरपोरेट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. प्रोजेक्ट में करीब 22,500 वर्ग फुट के पिलर-लेस फ्लोर होंगे, जिससे कंपनियों को अपनी जरूरत के अनुसार ऑफिस स्पेस तैयार करने की सुविधा मिलेगी. M3M इंडिया अपना कॉरपोरेट मुख्यालय भी इसी प्रोजेक्ट में स्थापित करेगी. वहीं, एक वैश्विक एविएशन कंपनी ने यहां करीब 75,000 वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लेने का निर्णय लिया है.

कनेक्टिविटी बनेगी बड़ी ताकत

यह प्रोजेक्ट द्वारका एक्सप्रेसवे, NH-48, UER-II और वसंत कुंज एक्सटेंशन कॉरिडोर से जुड़ा है. इसके अलावा यह एरोसिटी और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब 15-20 मिनट की दूरी पर स्थित है, जिससे यह कॉरपोरेट कंपनियों के लिए आकर्षक लोकेशन बन सकता है.

2029 तक पूरा होने का लक्ष्य

परियोजना में प्रीमियम ऑफिस स्पेस के साथ रिटेल, मल्टीप्लेक्स, बिजनेस क्लब और अन्य सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. कंपनी का लक्ष्य इसे 2029 के अंत तक पूरा करने का है.

हाल के वर्षों में दिल्ली-एनसीआर, खासकर द्वारका एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस और GCCs की मांग तेजी से बढ़ी है. ऐसे में M3M का यह निवेश केवल एक नया प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं, बल्कि कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार में बढ़ती मांग पर कंपनी की रणनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है.
 


घर खरीदने की बजाय किराए को क्यों चुन रहे हैं युवा? EMI से ज्यादा निवेश और वित्तीय आजादी को दे रहे तरजीह

महंगी प्रॉपर्टी, ऊंची होम लोन EMI और बदलते करियर ट्रेंड के चलते मिलेनियल्स और जेन-जी का रुख बदला. NoBroker की रिपोर्ट में 46% किराएदारों ने लंबे समय तक किराए पर रहने को बताया बेहतर विकल्प

रितु राणा by
Published - Monday, 27 July, 2026
Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
BWHindia

भारत में अपना घर होना लंबे समय से आर्थिक स्थिरता और सफलता की पहचान माना जाता रहा है, लेकिन नई पीढ़ी का नजरिया तेजी से बदल रहा है. मिलेनियल्स और जेन-जी अब घर खरीदने को केवल भावनात्मक फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा वित्तीय निर्णय मान रहे हैं. महंगी होती प्रॉपर्टी कीमतें, ऊंची होम लोन EMI और करियर में लचीलापन बनाए रखने की जरूरत ने कई युवाओं को घर खरीदने की बजाय किराए पर रहने के विकल्प की ओर मोड़ा है.

प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker की हाल में आई रिपोर्ट के मुताबिक, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए के मकान में रहना बेहतर विकल्प मानते हैं. इनमें 25-34 वर्ष आयु वर्ग के 53 फीसदी और 35-44 वर्ष के 48 फीसदी लोग शामिल हैं. उनका मानना है कि लंबे समय तक EMI में पैसा फंसाने के बजाय निवेश और वित्तीय स्वतंत्रता पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद है.

EMI के मुकाबले किराया पड़ रहा ज्यादा किफायती

युवाओं के इस बदलते रुझान की सबसे बड़ी वजह महानगरों में तेजी से बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और महंगी होम लोन दरें हैं. कई बड़े शहरों में घर की मासिक EMI अब उसी प्रॉपर्टी के किराए से दोगुने से भी अधिक हो चुकी है.

पिछले पांच वर्षों में गुरुग्राम का EMI-टू-रेंट रेशियो 1.86 से बढ़कर 2.68 हो गया है. वहीं बेंगलुरु में यह 2.38, हैदराबाद में 2.47 और मुंबई में 2.19 तक पहुंच चुका है. यानी जिस घर का मासिक किराया 50 हजार रुपये है, उसे खरीदने पर EMI एक लाख रुपये या उससे अधिक हो सकती है.

घर खरीदने से पीछे नहीं हटे युवा, बदल रहा है फैसला लेने का तरीका

रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि युवा घर खरीदने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे इसे अधिक सोच-समझकर लेने वाला फैसला बना रहे हैं.

रिषभ पेरिवाल, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, पायनियर इंफ्रास्ट्रक्चर कहते हैं, "युवा भारतीयों के बीच अपना घर खरीदने की आकांक्षा आज भी उतनी ही मजबूत है; बदला है तो केवल घर खरीदने का उनका दृष्टिकोण. आज के खरीदार पहले की तुलना में अधिक जागरूक और वित्तीय रूप से अनुशासित हैं. वे घर खरीदने का निर्णय लेने से पहले वहनीयता, दीर्घकालिक वित्तीय प्रतिबद्धताओं और करियर से जुड़ी लचीलापन की जरूरत का सावधानीपूर्वक आकलन करते हैं."

उन्होंने कहा कि बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें, महंगी ब्याज दरें और नौकरी के लिए बार-बार शहर बदलने की प्रवृत्ति ने कई लोगों को घर खरीदने का फैसला टालने के लिए प्रेरित किया है, न कि उसे पूरी तरह छोड़ने के लिए. उनके अनुसार, जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, वित्तीय स्थिरता आएगी और खरीदारों को सही लोकेशन, बेहतर गुणवत्ता तथा दीर्घकालिक मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स मिलेंगे, यह वर्ग आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र की अगली विकास यात्रा का प्रमुख आधार बनेगा.

निवेश और वित्तीय आजादी को दे रहे प्राथमिकता

आज की युवा पीढ़ी डाउन पेमेंट और लंबी अवधि की EMI में बड़ी रकम लॉक करने के बजाय उस पैसे को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, ETF, REITs और अन्य निवेश विकल्पों में लगाने को प्राथमिकता दे रही है.

वोमेकी ग्रुप के फाउंडर एंड चेयरमैन गौरव के सिंह कहते हैं, "आज के युवाओं के लिए घर खरीदना अब सिर्फ भावनाओं का सौदा नहीं, बल्कि पूरी तरह से वित्तीय गणित का खेल बन चुका है. आसमान छूती कीमतें, ऊंची ब्याज दरें और सालों-साल चलने वाली EMI उन्हें हर कदम फूंक-फूंक कर रखने पर मजबूर कर रही हैं."

उन्होंने कहा कि करियर में तरक्की के लिए बार-बार शहर बदलने की जरूरत ने किराए के घर को एक अधिक व्यावहारिक और आसान विकल्प बना दिया है. आज की पीढ़ी जल्दबाजी में कर्ज के जाल में फंसने के बजाय अपनी सेविंग्स और वित्तीय आजादी को ज्यादा महत्व दे रही है. हालांकि, अपने आशियाने का सपना खत्म नहीं हुआ है. जैसे ही आमदनी बढ़ेगी और बजट के अनुकूल सही प्रोजेक्ट मिलेंगे, यह वर्ग पूरी तैयारी के साथ घर खरीदने के लिए बाजार में वापस आएगा.

"युवा घर खरीदने के खिलाफ नहीं, सही समय का इंतजार कर रहे हैं"

गौरव भगत के अनुसार, "आज की युवा पीढ़ी घर खरीदने से पीछे नहीं हट रही, बल्कि घर खरीदने के समय और तरीके को लेकर पहले से कहीं अधिक रणनीतिक हो गई है. पहले घर खरीदना सामाजिक उपलब्धि माना जाता था, आज यह एक वित्तीय निर्णय है. यही सबसे बड़ा बदलाव है."

उन्होंने कहा कि 25 से 35 वर्ष की उम्र का युवा अब केवल यह नहीं पूछता कि "मैं घर कब खरीदूं?", बल्कि यह सोचता है कि "क्या अभी घर खरीदना मेरी नेटवर्थ बढ़ाएगा या मेरी वित्तीय स्वतंत्रता को सीमित कर देगा?"

गौरव भगत के मुताबिक, महानगरों में प्रॉपर्टी कीमतों में तेज वृद्धि और करीब 8 फीसदी के आसपास बनी होम लोन ब्याज दरों के कारण 25-30 साल की EMI व्यक्ति की मासिक आय का बड़ा हिस्सा एक ही एसेट में लॉक कर देती है. वहीं, किराए पर रहकर बची हुई राशि को इक्विटी, म्यूचुअल फंड, व्यवसाय या स्किल डेवलपमेंट में निवेश करने से लंबे समय में ज्यादा लचीलापन और बेहतर रिटर्न की संभावना बनती है.

उन्होंने कहा, "एक निवेशक के तौर पर मैं हमेशा एक बात कहता हूं, घर एक भावनात्मक संपत्ति (Emotional Asset) हो सकता है, लेकिन हर घर शुरुआत में एक अच्छा निवेश (Financial Investment) नहीं होता. यदि किसी व्यक्ति की डाउन पेमेंट के बाद भी उसके पास 12-18 महीनों का इमरजेंसी फंड, पर्याप्त निवेश और नियमित कैश फ्लो नहीं बचता, तो केवल घर खरीदने के लिए खुद को वित्तीय दबाव में डालना समझदारी नहीं है."

करियर में बदलाव और हाइब्रिड वर्क कल्चर भी बड़ा कारण

विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती नौकरी संस्कृति भी युवाओं के फैसले को प्रभावित कर रही है. हाइब्रिड वर्क मॉडल, स्टार्टअप कल्चर और बेहतर अवसरों के लिए शहर बदलने की प्रवृत्ति ने किराए के मकान को ज्यादा सुविधाजनक बना दिया है.

बिजनेस कंसल्टेंट व निवेशक गौरव भगत कहते हैं, "आज का प्रोफेशनल अपने करियर के शुरुआती 10-12 वर्षों में कई बार कंपनी, भूमिका या शहर बदलने के लिए तैयार रहता है. ऐसे में 20-30 साल के होम लोन की बजाय किराए पर रहना उन्हें अधिक लचीलापन देता है."

उन्होंने कहा कि GCCs, स्टार्टअप्स और मल्टीनेशनल कंपनियों के विस्तार से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, गुरुग्राम और चेन्नई जैसे शहरों में जॉब मोबिलिटी बढ़ी है. ऐसे में युवा अपनी पूंजी को स्किल डेवलपमेंट, इक्विटी, म्यूचुअल फंड या व्यवसाय जैसे बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्पों में लगाना चाहते हैं.

रेंटल मार्केट में भी दिख रहा बदलाव

बदलते ट्रेंड का असर रेंटल मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है. NoBroker के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में किराए में सालाना 11 फीसदी की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है. इसके बाद चेन्नई में 8 फीसदी, बेंगलुरु में 7 फीसदी और हैदराबाद व दिल्ली-NCR में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

युवा अब केवल कम किराए वाले घर नहीं, बल्कि बेहतर लोकेशन, गेटेड सोसाइटी, फर्निश्ड अपार्टमेंट और आधुनिक सुविधाओं वाले घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं. बेंगलुरु में 3-BHK फ्लैट्स की मांग उनकी उपलब्धता से अधिक है, जबकि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में 40 हजार रुपये से अधिक मासिक किराए वाले घरों की मांग भी मजबूत बनी हुई है.

"Rent First, Buy Later" का ट्रेंड होगा मजबूत

गौरव भगत के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में "Rent First, Buy Later" की सोच और मजबूत होगी. उन्होंने कहा, "युवा घर के खिलाफ नहीं हैं; वे केवल चाहते हैं कि उनका पहला घर उनकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती नहीं, बल्कि सबसे समझदारी भरा निवेश साबित हो."

विशेषज्ञों का मानना है कि नई पीढ़ी के लिए घर खरीदना अब केवल सामाजिक जरूरत नहीं, बल्कि वित्तीय योजना का हिस्सा बन गया है. मजबूत आय, बेहतर वित्तीय तैयारी और सही समय आने पर यही युवा वर्ग रियल एस्टेट बाजार की अगली बड़ी मांग को आगे बढ़ाएगा.
 


PNB-IGBC साझेदारी: ग्रीन होम खरीदने वालों को मिलेगा सस्ता लोन, ब्याज में भी छूट

IGBC सर्टिफाइड प्रोजेक्ट्स के खरीदारों को PNB की हरित आवास योजना का लाभ मिलेगा. इसके साथ ही ब्याज दर में छूट समेत कई अन्य सुविधाएं भी प्राप्त होंगी.

Last Modified:
Monday, 27 July, 2026
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भारतीय हरित भवन परिषद (IGBC) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भारत में ग्रीन होम ओनरशिप को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक समझौता (MoU) किया है. इस साझेदारी का उद्देश्य IGBC से प्रमाणित आवासीय परियोजनाओं के खरीदारों को प्राथमिकता वाली ग्रीन फाइनेंसिंग उपलब्ध कराना और टिकाऊ आवास को अधिक किफायती बनाना है.

इस समझौते के तहत IGBC और पंजाब नेशनल बैंक के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाएगा. इसके जरिए IGBC से प्रमाणित आवासीय परियोजनाओं को पंजाब नेशनल बैंक की ‘हरित निवास योजना’ के तहत शामिल किया जा सकेगा. इससे टिकाऊ घरों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिस को अपनाने को प्रोत्साहन मिलेगा.

4,298 ग्रीन होम प्रोजेक्ट्स को मिल चुका है IGBC सर्टिफिकेशन

भारत में ग्रीन बिल्डिंग आंदोलन में आवासीय क्षेत्र की भूमिका लगातार तेजी से बढ़ रही है. IGBC ग्रीन होम्स रेटिंग सिस्टम के जरिए देशभर में टिकाऊ आवास को बढ़ावा दिया जा रहा है. अब तक इस प्रणाली के तहत 4,298 ग्रीन होम प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हो चुके हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 4.68 अरब वर्ग फुट से अधिक है. यह आंकड़ा दिखाता है कि डेवलपर्स और होमबायर्स ऊर्जा की बचत करने वाले, स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल घरों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. IGBC और पंजाब नेशनल बैंक की यह साझेदारी इस दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे प्रमाणित ग्रीन होम आम खरीदारों के लिए अधिक सुलभ हो सकेंगे.

खरीदारों को मिलेगा ब्याज दर में लाभ

पंजाब नेशनल बैंक की हरित निवास योजना के तहत IGBC प्रमाणित ग्रीन प्रोजेक्ट्स में घर खरीदने वाले ग्राहकों को कई वित्तीय लाभ मिलेंगे. इनमें मौजूदा होम लोन ब्याज दर पर 0.10 फीसदी की छूट, प्रोसेसिंग फीस में छूट, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज नहीं लगना और 5 फीसदी तक अधिक रिपेमेंट एलिजिबिलिटी जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इन प्रोत्साहनों के जरिए खरीदारों पर लोन का बोझ कम होगा और वे पर्यावरण के अनुकूल घर खरीदने के लिए अधिक प्रेरित होंगे.

पंजाब नेशनल बैंक और IGBC का साझा लक्ष्य

पंजाब नेशनल बैंक के MSME और रिटेल डिवीजन के चीफ जनरल मैनेजर फिरोज हसनैन ने कहा, "IGBC के साथ यह साझेदारी टिकाऊ और जिम्मेदार विकास के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करती है. पंजाब नेशनल बैंक हरित निवास योजना के जरिए हमारा लक्ष्य ग्रीन हाउसिंग को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है." उन्होंने कहा कि यह पहल ग्राहकों को बेहतर वित्तीय लाभ देने के साथ-साथ देश में हरित समुदायों के विकास को गति देगी.

डेवलपर्स और खरीदारों दोनों को होगा फायदा

इस साझेदारी के तहत IGBC उन आवासीय परियोजनाओं की पहचान में सहयोग करेगा, जो हरित निवास योजना के लिए IGBC प्री-सर्टिफिकेशन और सर्टिफिकेशन के योग्य होंगी. वहीं पंजाब नेशनल बैंक इन परियोजनाओं में डेवलपर्स और होमबायर्स को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा. दोनों संस्थान किफायती ग्रीन हाउसिंग के लिए नए वित्तीय मॉडल तलाशेंगे, जिसमें IGBC ग्रीन अफोर्डेबल हाउसिंग और IGBC ग्रीन होम्स जैसी योजनाएं शामिल हैं.

ग्रीन होम से पर्यावरण और आर्थिक दोनों फायदे

IGBC ग्रीन बैंक्स एंड फाइनेंस के चेयरमैन अनुज कुमार अग्रवाल ने कहा, "IGBC और पंजाब नेशनल बैंक की साझेदारी भारत में ग्रीन होम्स को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन को प्राथमिकता वाली फाइनेंसिंग से जोड़कर हम खरीदारों, डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों और पर्यावरण सभी के लिए लाभकारी व्यवस्था तैयार कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि ग्रीन होम्स न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि लंबे समय में ऊर्जा और पानी की खपत कम करके लागत में भी कमी लाते हैं.

भारत के सतत विकास लक्ष्यों को मिलेगा समर्थन

पंजाब नेशनल बैंक और IGBC की यह साझेदारी ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन को संस्थागत वित्त से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे होमबायर्स, डेवलपर्स और वित्तीय संस्थानों के लिए एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार होगा, जो जलवायु अनुकूल, संसाधन कुशल और भविष्य के लिए तैयार आवासीय समुदायों के निर्माण में मदद करेगा. पंजाब नेशनल बैंक भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है और होम लोन, कंस्ट्रक्शन फाइनेंस, MSME फाइनेंसिंग समेत कई वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराता है. वहीं, CII-इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) की स्थापना 2001 में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने भारत में ग्रीन बिल्डिंग आंदोलन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी. IGBC के अनुसार, देश में अब तक 16.20 अरब वर्ग फुट से अधिक ग्रीन बिल्डिंग क्षेत्र और 19,710 से अधिक परियोजनाएं उसके 33 ग्रीन और नेट जीरो रेटिंग सिस्टम को अपना चुकी हैं.


महंगाई के बीच भी रियल एस्टेट सेक्टर चमका, 75 शहरों में हाउसिंग सेल्स वैल्यू ₹9.33 लाख करोड़ पहुंची

टॉप महानगरों में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया. देश की कुल वार्षिक हाउसिंग सेल्स में इसकी हिस्सेदारी 23.7 प्रतिशत रही और यहां सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

रितु राणा by
Published - Tuesday, 26 May, 2026
Last Modified:
Tuesday, 26 May, 2026
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भारत का रियल एस्टेट सेक्टर एक बार फिर मजबूत रफ्तार पकड़ता नजर आ रहा है. आर्थिक चुनौतियों और महंगाई के दबाव के बावजूद देश के 75 प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री मूल्य के हिसाब से 16 प्रतिशत बढ़कर 9.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. हालांकि बेचे गए घरों की संख्या में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन प्रॉपर्टी कीमतों में तेजी, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की बढ़ती मांग और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ने हाउसिंग मार्केट को मजबूती दी है.

बिक्री मूल्य में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

रिसर्च फर्म Liases Foras की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश के 75 प्रमुख शहरों में कुल हाउसिंग सेल्स वैल्यू बढ़कर 9,32,965 करोड़ रुपये हो गई. यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 16 प्रतिशत अधिक है. हालांकि इस दौरान कुल घरों की बिक्री में हल्की गिरावट देखने को मिली. वित्त वर्ष 2025-26 में 7,09,793 यूनिट्स की बिक्री हुई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 7,19,029 यूनिट था.

नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग तेज

बढ़ती मांग को देखते हुए डेवलपर्स ने नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग भी तेज कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में नए घरों की सप्लाई 10 प्रतिशत बढ़कर 6,20,842 यूनिट तक पहुंच गई. सप्लाई बढ़ने की वजह से बिना बिके मकानों का स्टॉक भी 13 प्रतिशत बढ़कर करीब 12 लाख यूनिट तक पहुंच गया है.

टॉप शहरों में कैसा रहा प्रदर्शन?

देश के टॉप 8 महानगरों में कुल हाउसिंग सेल्स मामूली घटकर 5,07,850 यूनिट रह गई. पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 5,09,211 यूनिट था. मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) सबसे बड़ा हाउसिंग मार्केट बनकर उभरा, जिसकी कुल बिक्री में 23.7 प्रतिशत हिस्सेदारी रही. वहीं बेंगलुरु दूसरे स्थान पर रहा, जिसकी हिस्सेदारी 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई. दूसरी ओर पूना में पर्याप्त सप्लाई होने के बावजूद हाउसिंग सेल्स में 25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली.

प्रॉपर्टी कीमतों में लगातार तेजी

रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान हाउसिंग प्राइस इंडेक्स में सालाना 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बढ़ती कीमतों के बावजूद खरीदारों की रुचि बनी हुई है, जो बाजार में मजबूत मांग का संकेत देती है.

एनसीआर बना प्रीमियम हाउसिंग का बड़ा केंद्र

वोमेकी ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन गौरव के सिंह ने कहा कि गुरुग्राम अब एनसीआर के सबसे मजबूत रियल एस्टेट बाजारों में शामिल हो चुका है. उनके मुताबिक, “देशभर में बिक्री की संख्या में हल्की गिरावट के बावजूद बाजार का मूल्य 16 प्रतिशत बढ़कर 9.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना दिखाता है कि खरीदार अब क्वालिटी और बेहतर लोकेशन को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं.” उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग की मांग, कॉरपोरेट मूवमेंट और बेहतर कनेक्टिविटी ने इसे निवेश के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन बना दिया है.

कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग ने कहा कि गाजियाबाद तेजी से एनसीआर के उभरते रियल एस्टेट हॉटस्पॉट के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. उन्होंने कहा कि RRTS और बेहतर कनेक्टिविटी जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और शहर अब केवल अफोर्डेबल हाउसिंग का विकल्प नहीं, बल्कि ग्रोथ-ड्रिवन इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन रहा है.

उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा

एनके रियलटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी केवल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का संकेत है. उन्होंने कहा, “आज खरीदार बेहतर लोकेशन, लाइफस्टाइल सुविधाओं और लॉन्ग-टर्म वैल्यू पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. रियल एस्टेट अब स्थिर और दीर्घकालिक रिटर्न देने वाला एसेट क्लास बन चुका है.”

खरीदार अब गुणवत्ता को दे रहे प्राथमिकता

सांघवी रियल्टी के निदेशक पक्षाल सांघवी ने कहा कि आवास बिक्री मूल्य में मजबूत बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि भारतीय हाउसिंग मार्केट अब पहले से अधिक परिपक्व और स्थिर हो चुका है. उनके मुताबिक, “आज खरीदार बेहतर प्लानिंग, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, समय पर डिलीवरी और लंबी अवधि की वैल्यू वाले प्रोजेक्ट्स के लिए प्रीमियम कीमत चुकाने को तैयार हैं.” उन्होंने कहा कि घर अब केवल खरीदारी नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन का माध्यम बनता जा रहा है.

 

ब्रह्मा ग्रुप के एवीपी ऑपरेशंस आशीष शर्मा ने कहा कि बाजार अब केवल मांग के आधार पर नहीं, बल्कि भरोसे और बेहतर मूल्य के आधार पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, “लोग अब अच्छी लोकेशन, आधुनिक सुविधाओं और भरोसेमंद डेवलपर्स को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. डेवलपर्स के लिए यह समय गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी पर ज्यादा फोकस करने का है.”

जे एस्टेट्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल गोदारा ने कहा कि यह रिपोर्ट भारतीय रेजिडेंशियल मार्केट में मजबूत उपभोक्ता मांग और बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है. उन्होंने कहा, “आज खरीदार अपने निवेश से बेहतर वैल्यू चाहते हैं और यही वजह है कि डेवलपर्स भी अधिक योजनाबद्ध और बेहतर प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं.”

मजबूत निवेश संकेत

एम3एम इंडिया के हेड कॉर्पोरेट फाइनेंस प्रतीक तिबरेवाला ने कहा कि 9.33 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है. उन्होंने कहा, “आज का खरीदार भविष्य की वैल्यू और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर निवेश कर रहा है. प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें और नए लॉन्च की मजबूत मांग यह दर्शाती हैं कि रियल एस्टेट अब भी सबसे सुरक्षित और हाई-रिटर्न एसेट क्लास बना हुआ है.”

टियर-2 शहरों में भी तेजी

अराइज ग्रुप के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अमन शर्मा ने कहा कि रियल एस्टेट ग्रोथ अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही. उनके मुताबिक, “करनाल, सोनीपत, मोहाली और पंचकूला जैसे उभरते शहरों में भी बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से मांग तेजी से बढ़ रही है.”

 


NCR रियल एस्टेट में बड़ा दांव, NH-24 पर कार्यन ग्रुप का ₹900 करोड़ का ईको-फ्रेंडली लक्जरी प्रोजेक्ट

इस प्रोजेक्ट में स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और सोलर एनर्जी से संचालित कॉमन एरिया जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं पर भी फोकस किया गया है. कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है.

Last Modified:
Tuesday, 19 May, 2026
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एनसीआर के तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट बाजार में कार्यन ग्रुप ने अपनी मौजूदगी मजबूत करते हुए गाजियाबाद के एनएच-24 पर नया लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘त्रेवाना रेजिडेंस’ लॉन्च किया है. वेव सिटी के सामने विकसित होने वाले इस प्रोजेक्ट में कंपनी करीब ₹900 करोड़ का निवेश करेगी, जबकि इससे लगभग ₹1,500 करोड़ के राजस्व की उम्मीद जताई जा रही है. कंपनी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट प्रीमियम और आधुनिक लाइफस्टाइल की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. 

नएच-24 पर प्रीमियम हाउसिंग की बड़ी तैयारी

कार्यन ग्रुप का यह नया प्रोजेक्ट गाजियाबाद के एनएच-24 कॉरिडोर पर विकसित किया जाएगा, जिसे एनसीआर का तेजी से उभरता रिहायशी हब माना जा रहा है. दिल्ली, नोएडा और मेरठ से बेहतर कनेक्टिविटी के चलते यह इलाका लगातार निवेशकों और होमबायर्स को आकर्षित कर रहा है. आगामी मेट्रो नेटवर्क, एक्सप्रेसवे और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार ने भी इस क्षेत्र की रियल एस्टेट वैल्यू को मजबूत किया है.

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा प्रोजेक्ट

‘त्रेवाना रेजिडेंस’ में लग्जरी और आधुनिक जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए कई प्रीमियम सुविधाएं दी जाएंगी. प्रोजेक्ट में करीब 45,000 वर्ग फुट का क्लब हाउस, लैंडस्केप ग्रीन एरिया, बॉलिंग एली, पिकलबॉल कोर्ट, क्रिकेट पिच, पैडल कोर्ट, इंडोर और आउटडोर स्विमिंग पूल, फिटनेस सेंटर, जॉगिंग ट्रैक और रूफटॉप लेजर जोन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.

इसके अलावा स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और सोलर एनर्जी से संचालित कॉमन एरिया जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं पर भी फोकस किया गया है. कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है.

इतनी होगी कीमत
ये प्रोजेक्ट 5.45 एकड़ की जमीन पर तैयार होगा, जिसमें 608 रेजिडेंसिस और 16 पेंट हाउस तैयार किए जाएंगे. इसमें दो टॉवर बनाए जाएंगे और एक टॉवर में 16 फ्लोर तैयार होंगे, हर फ्लोर पर दो अपार्टमेंट बनाए जाएंगे, जिसमें होमबायर्स को 3 और 4 बीएचके वाले प्रीमियम अपार्टमेंट्स ऑफर किए जाएंगे, जिनकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपये से शुरू होगी. वहीं, पेंट हाउस की कीमत करीब 6 करोड़ रुपये होगी. 

क्यों बढ़ रही है एनएच-24 की मांग?

हालिया रियल एस्टेट रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजियाबाद का एनएच-24 और वेव सिटी इलाका एनसीआर के सबसे तेजी से विकसित हो रहे रिहायशी बाजारों में शामिल हो चुका है. बेहतर सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी, बड़े आकार के घरों की मांग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण यहां प्रॉपर्टी बाजार में लगातार तेजी देखी जा रही है. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में प्रॉपर्टी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है.

लग्जरी हाउसिंग पर बढ़ा डेवलपर्स का फोकस

एनसीआर में लग्जरी और अपर मिड-सेगमेंट हाउसिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि डेवलपर्स अब इंटीग्रेटेड लाइफस्टाइल कम्युनिटीज़ विकसित करने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. ऐसे प्रोजेक्ट्स में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, हरित वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और लंबे समय में बेहतर प्रॉपर्टी वैल्यू जैसी चीजों को प्राथमिकता दी जा रही है.

“प्रीमियम लाइफस्टाइल को नई पहचान देगा प्रोजेक्ट”

कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग ने कहा कि ‘त्रेवाना रेजिडेंस’ के जरिए कंपनी का उद्देश्य एनएच-24 कॉरिडोर पर प्रीमियम जीवनशैली को नई पहचान देना है. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट आधुनिक होमबायर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां विशाल घर, बेहतर लाइफस्टाइल सुविधाएं, प्रदूषण-मुक्त वातावरण और एनसीआर के प्रमुख इलाकों तक आसान पहुंच उपलब्ध होगी.

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ा रहा विस्तार

कार्यन ग्रुप पिछले 15 वर्षों से रियल एस्टेट, वेयरहाउसिंग और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में काम कर रहा है. कंपनी का फोकस गुणवत्ता, समय पर डिलीवरी और ग्राहक-केंद्रित विकास मॉडल पर रहा है. ग्रुप का कहना है कि वह आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट बाजार में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में काम करता रहेगा.
 


अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में 35 करोड़ रुपये में 2.67 एकड़ भूमि खरीदी

यह जमीन सरयू नदी के किनारे स्थित HoABL की 75 एकड़ की लग्जरी परियोजना “द सरयू” के निकट है. यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट परिदृश्य को दर्शाता है.

Last Modified:
Monday, 23 March, 2026
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भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में 2.67 एकड़ का एक बड़ा भूमि पार्सल 35 करोड़ रुपये में खरीदा है. यह भूमि हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा (HoABL) से अधिग्रहित की गई है. HoABL रियल एस्टेट क्षेत्र में अपनी पारदर्शी भूमि स्वामित्व प्रणाली के लिए जाना जाता है.

यह सौदा एबी कॉर्प लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजेश यादव द्वारा संपन्न किया गया. यह जमीन सरयू नदी के किनारे स्थित HoABL की 75 एकड़ की लग्ज़री परियोजना “द सरयू” के निकट है. यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट परिदृश्य को दर्शाता है.

अमिताभ बच्चन और HoABL का जुड़ाव

गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन जनवरी 2024 में “द सरयू” परियोजना के पहले निवेशक बने थे. अयोध्या में यह उनका HoABL के साथ तीसरा निवेश है. यह कदम शहर के बढ़ते महत्व और कंपनी के मॉडल में उनके विश्वास को दर्शाता है.

अयोध्या में विकास और पर्यटन

पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या ने बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ते पर्यटन के कारण तेज़ी से प्रगति की है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले जहां 5.75 करोड़ श्रद्धालु आते थे, वहीं जनवरी से जून 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 23 करोड़ हो गई है. साल के अंत तक यह आंकड़ा 50 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.

HoABL के चेयरमैन अभिनंदन लोढ़ा ने इस निवेश पर कहा कि भूमि को दीर्घकालिक संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए, जो पीढ़ियों तक मूल्य बनाए रखती है. उन्होंने अयोध्या को एक ऐसी “विरासत” बताया, जहां आस्था और निवेश दोनों का संगम होता है.

बॉलीवुड सितारों का निवेश

अमिताभ बच्चन ने HoABL की अलीबाग स्थित “सोल डी अलीबाग” परियोजना में भी निवेश किया है. इस परियोजना में कृति सेनन और कार्तिक आर्यन जैसे बॉलीवुड सितारे भी शामिल हैं. कंपनी के अनुसार, उनके 65% से अधिक ग्राहक सीईओ, सीएक्सओ और बैंकिंग, फार्मा व मनोरंजन जगत से जुड़े प्रतिष्ठित लोग हैं.

अयोध्या का तेजी से होता विकास इसे भारत के प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और रियल एस्टेट केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है. इससे निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है.


शहरों में बढ़ता प्रदूषण, ग्रीन अर्बन लिविंग मॉडल बन रही नई शहरी जरूरत

शुभ आरंभ के साथ गोदरेज साउथ एस्टेट में शुरू हुआ यह नया अध्याय दिखाता है कि अगर पर्यावरण को केंद्र में रखा जाए, तो शहरी जीवन न सिर्फ बेहतर बल्कि ज्यादा स्वस्थ और संतुलित भी बन सकता है.

रितु राणा by
Published - Friday, 30 January, 2026
Last Modified:
Friday, 30 January, 2026
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तेजी से प्रदूषित होते शहरी माहौल और बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच, रियल एस्टेट में अब पर्यावरण और वेलनेस को केंद्र में रखने वाली सोच आकार ले रही है. इसी दिशा में गोदरेज प्रॉपर्टीज ने अपने सिग्नेचर होम-हैंडओवर कार्यक्रम ‘शुभ आरंभ’ के ज़रिये दिल्ली में ग्रीन और हेल्दी अर्बन लिविंग की नई मिसाल पेश की है.

गोदरेज प्रॉपर्टीज की नॉर्थ ज़ोन की सीईओ गीतिका त्रेहान के मुताबिक, “शुभ आरंभ केवल घरों की चाबी सौंपने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारे गृहस्वामियों के लिए एक सुविचारित जीवन अनुभव की शुरुआत है. आज लक्ज़री की परिभाषा बदल रही है, जहां वेलनेस, सोच-समझकर किया गया डिज़ाइन और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता सबसे अहम हो गए हैं.”

शुभ आरंभ के साथ सस्टेनेबल जीवन की शुरुआत

ओखला स्थित गोदरेज साउथ एस्टेट में आयोजित इस विशेष गृह-प्रवेश समारोह के दौरान परिवारों को न सिर्फ अपने नए घरों की चाबियां सौंपी गईं, बल्कि उन्हें एक ऐसे समुदाय का हिस्सा बनाया गया, जो स्वच्छ हवा, खुले हरित स्थानों और संतुलित जीवनशैली पर आधारित है. ‘शुभ आरंभ’ को एक भावनात्मक और अर्थपूर्ण अनुभव के रूप में डिजाइन किया गया, ताकि घर की हैंडओवर प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता न रहकर नई शुरुआत का प्रतीक बने.

वेलनेस-आधारित डिजाइन में पर्यावरण की अहम भूमिका

दक्षिण दिल्ली के इस रिहायशी प्रोजेक्ट को खास तौर पर पर्यावरणीय संतुलन और निवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. यहां ग्रीन बफर्स, ओपन स्पेस, बेहतर वेंटिलेशन और स्मार्ट प्लानिंग को प्राथमिकता दी गई है, ताकि शहरी जीवन के बीच भी प्रकृति से जुड़ाव बना रहे.

गीतिका त्रेहान ने कहा कि गोदरेज साउथ एस्टेट में वायु गुणवत्ता, खुले स्थान और सूझबूझ भरी योजना को घरों की बुनियाद में शामिल किया गया है. उनका कहना है कि बदलती जीवनशैली के साथ होमबायर्स अब ऐसे घर चाहते हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल हों और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन का आधार बन सकें.

क्लीन एयर टेक्नोलॉजी से बेहतर शहरी जीवन

पर्यावरणीय दृष्टि से इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यहां अपनाई गई उन्नत क्लीन-एयर तकनीक है. गोदरेज प्रॉपर्टीज ने इनडोर स्पेस के लिए सेंट्रलाइज़्ड ट्रीटेड फ्रेश एयर (CTFA) और आउटडोर क्षेत्रों के लिए मैकेनिकल फिल्टर-लेस फ्रेश एयर (MFFA) सिस्टम को एकीकृत किया है. इन तकनीकों की मदद से इनडोर और आउटडोर दोनों जगहों पर वायु गुणवत्ता में मापने योग्य सुधार दर्ज किया गया है.

यह पहल दिखाती है कि अगर रिहायशी परियोजनाओं को सही सोच और तकनीक के साथ डिज़ाइन किया जाए, तो वे प्रदूषण जैसी शहरी समस्याओं से निपटने में भी योगदान दे सकती हैं.

सेलिब्रिटी मौजूदगी ने बढ़ाया संदेश का असर

इस मौके पर डिजाइनर और अभिनेत्री रिद्धिमा कपूर साहनी की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में स्वस्थ और स्वच्छ जीवन पर दिया गया यह ध्यान अब लग्ज़री नहीं, बल्कि समय की जरूरत बन चुका है. उनके अनुसार, गोदरेज साउथ एस्टेट जैसे प्रोजेक्ट्स यह दिखाते हैं कि आधुनिक शहरी जीवन में भी स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जा सकती है.

पर्यावरण-संवेदनशील रियल एस्टेट की ओर बढ़ता कदम

गोदरेज प्रॉपर्टीज का यह प्रयास इस बात का संकेत है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर अब केवल कंस्ट्रक्शन और सुविधाओं तक सीमित नहीं रह गया है. ग्रीन डिजाइन, स्वच्छ हवा, वेलनेस और सस्टेनेबिलिटी अब घर खरीदने के फैसले में अहम भूमिका निभा रहे हैं.

 


इन्फ्रा पुश + हाउसिंग बूम: बजट 2026 से रियल एस्टेट को क्या उम्मीदें?

बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को इंफ्रास्ट्रक्चर पुश, हाउसिंग इंसेंटिव और नीतिगत स्पष्टता की बड़ी उम्मीद है.

रितु राणा by
Published - Friday, 23 January, 2026
Last Modified:
Friday, 23 January, 2026
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यूनियन बजट 2026 से पहले भारत का रियल एस्टेट सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर में प्रवेश कर चुका है. बीते कुछ वर्षों में सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए भारी निवेश ने हाउसिंग डिमांड, प्राइस ट्रेंड और निवेश के पैटर्न को साफ तौर पर प्रभावित किया है. मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे, स्मार्ट सिटी, एयरपोर्ट, इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और अर्बन मोबिलिटी जैसे प्रोजेक्ट्स अब केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे भारत के रियल एस्टेट मैप को दोबारा गढ़ने का काम कर रहे हैं. ऐसे में बजट 2026 को इंफ्रास्ट्रक्चर पुश और हाउसिंग बूम के बीच निर्णायक कड़ी के रूप में देखा जा रहा है.

इंफ्रास्ट्रक्चर से बदलेगा रियल एस्टेट का स्वरूप

एसीई–एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट लिमिटेड के सीएफओ राजन लूथरा कहते हैं, “बजट 2026 के पास भारत के शहरी और बुनियादी ढांचे के विकास को नई रफ्तार देने का बड़ा मौका है. मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक कॉरिडोर और शहरों में अंतिम छोर तक बुनियादी सुविधाओं पर लगातार जोर देने से न सिर्फ निर्माण गतिविधियां तेज होंगी, बल्कि देश के रियल एस्टेट का स्वरूप भी बदलेगा. बेहतर कनेक्टिविटी के चलते अब मांग सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि टियर-2 और टियर-3 शहर भी तेजी से नए आवासीय और व्यावसायिक विकास केंद्र के रूप में उभर रहे हैं.”

वे आगे कहते हैं कि निर्माण उपकरण उद्योग के लिए परियोजनाओं का तेजी से आवंटन और समय पर पूरा होना बेहद अहम है. निजी निवेश को बढ़ाने के लिए जीएसटी को सरल बनाना, ऋण की आसान उपलब्धता और कम ब्याज दरें जरूरी होंगी. यदि बजट जमीनी स्तर पर अमल पर केंद्रित रहा, तो इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और एक संतुलित व टिकाऊ रियल एस्टेट विकास चक्र तैयार होगा.

ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर बनेगा ग्रोथ का आधार

जे इन्फ्राटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित जांदू का मानना है, “बड़े स्तर का ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर भारत के ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण का अहम हिस्सा है और बजट 2026 इस रफ्तार को बनाए रखने में मदद कर सकता है. राजमार्गों, एक्सप्रेसवे और कंट्रोल्ड कॉरिडोर पर निरंतर ध्यान देना जरूरी है ताकि माल ढुलाई की दक्षता बढ़े, लॉजिस्टिक्स लागत कम हो और क्षेत्रीय जुड़ाव मजबूत हो.”

उनके अनुसार, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से छोटे शहरों और प्रमुख कॉरिडोर के आसपास हाउसिंग, लॉजिस्टिक्स पार्क और कमर्शियल हब की मांग बढ़ेगी. डिजिटल प्लानिंग, अनुमोदन और एसेट मैनेजमेंट की दिशा में मजबूत कदम परियोजनाओं के निष्पादन को तेज करेंगे और विकास को अधिक संतुलित बनाएंगे.

अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग पर बजट से सबसे बड़ी उम्मीदें

क्रेडाई वेस्ट यूपी के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता ने कहा कि आगामी केंद्रीय बजट से रियल एस्टेट सेक्टर को सबसे बड़ी उम्मीद अफोर्डेबल और मिड-इनकम हाउसिंग को लेकर है. उन्होंने कहा कि होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने, आयकर की धारा 80सी और 24(बी) में राहत देने तथा स्टॉल्ड प्रोजेक्ट्स के लिए आसान और सस्ती फंडिंग व्यवस्था बनाए जाने की जरूरत है. इसके साथ ही सेक्टर को एक संगठित उद्योग के रूप में मान्यता देने की दिशा में ठोस पहल और इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस को लेकर स्पष्ट नीति बनने से निवेश का माहौल बेहतर होगा. विकास प्राधिकरणों के लंबित बकाया के समाधान से भी रियल एस्टेट सेक्टर को नई रफ्तार मिल सकती है.

टैक्स और ईएमआई इंसेंटिव से रियल एस्टेट को मिलेगा मजबूती का आधार

शैलेन्द्र शर्मा, चेयरमैन, रेनॉक्स ग्रुप के अनुसार यूनियन बजट में प्रमोटरों और घर खरीदारों के लिए क्रमशः टैक्स और ईएमआई इंसेंटिव को प्राथमिकता देनी चाहिए, जो रियल एस्टेट सेक्टर की मज़बूत रीढ़ हैं. टैक्स को आसान बनाना, रेगुलेटरी क्लैरिटी, रियल एस्टेट को इंडस्ट्री स्टेटस, परियोजना से जुड़े अप्रूवल का सिंगल-विंडो क्लीयरेंस और निर्माण सामग्री पर इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे लंबे समय से रुके हुए सुधार सभी कैटेगरी में प्रोजेक्ट डेवलपमेंट को काफी बढ़ावा दे सकते हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर और रियल एस्टेट एक-दूसरे से गहरा जुड़ाव रखते हैं, इसलिए योजनाबद्ध निवेश और उसके साथ सामाजिक तथा शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास किसी भी लोकेशन पर हाउसिंग और कमर्शियल ग्रोथ को तेज़ करने के लिए जरूरी है.

उद्योग का दर्जा और होम लोन ब्याज में बड़ी राहत की अपेक्षा

सुरेश गर्ग, चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर, निराला वर्ल्ड के अनुसार हर साल की तरह, इस साल भी हमें बजट से कुछ अपेक्षाएँ हैं. हम आशा करते हैं कि सरकार रियल एस्टेट सेक्टर को उद्योग का दर्जा प्रदान करे. इसके अलावा, हम उम्मीद करते हैं कि सरकार होम लोन ब्याज कटौती की सीमा को वर्तमान 2 लाख रुपये से बढ़ाकर कम से कम 5 लाख रुपये कर दे. 100% कटौती होना तो और भी बेहतर होगा. इनके अलावा, हमें बजट से कोई अन्य अपेक्षा नहीं है.

टियर-2 शहरों में बिक्री का मजबूत संकेत

युगेन इंफ्रा के एमडी शीशराम यादव कहते हैं कि यूनियन बजट 2026 से पहले रियल एस्टेट सेक्टर नीति निरंतरता और बेहतर इम्प्लीमेंटेशन को लेकर आशावादी है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास खासतौर पर मेट्रो रेल, हाईवे और स्मार्ट सिटी ने 2025 से ही रेजिडेंशियल डिमांड को नया आकार देना शुरू कर दिया है.

वे बताते हैं कि Q1 2025 में भारत के टॉप 15 टियर-2 शहरों में घरों की बिक्री का कुल मूल्य सालाना आधार पर 6 प्रतिशत बढ़कर ₹40,443 करोड़ पहुंच गया. लखनऊ में यूनिट सेल्स 25 प्रतिशत और वैल्यू 48 प्रतिशत बढ़ी, जबकि कोयंबटूर में 50 प्रतिशत से अधिक की वैल्यू ग्रोथ दर्ज की गई. गांधीनगर, मोहाली, गोवा, अहमदाबाद, भुवनेश्वर और कोच्चि जैसे शहरों में भी सकारात्मक ग्रोथ देखने को मिली.

उनके अनुसार, यह ट्रेंड होम बायर्स की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाता है. बजट 2026 से ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, अफोर्डेबल हाउसिंग इंसेंटिव, आसान हाउसिंग फाइनेंस और टैक्सेशन में स्पष्टता की उम्मीद है. साथ ही वे लक्ज़री हाउसिंग पर जीएसटी घटाने की भी मांग करते हैं.

लाइफस्टाइल और सेकेंड-होम हाउसिंग को मिलेगा बढ़ावा

ALYF के फाउंडर और सीईओ सौरभ वोहरा कहते हैं, “बजट 2026 से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक मजबूत उत्प्रेरक बनने की उम्मीद है. इंफ्रास्ट्रक्चर विकास हाउसिंग डिमांड को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभा रहा है. मेट्रो, एक्सप्रेसवे और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स टियर-2 और टियर-3 शहरों को रेजिडेंशियल रियल एस्टेट के अगले ग्रोथ इंजन में बदल रहे हैं.”

उनके अनुसार, बेहतर कनेक्टिविटी और सामाजिक इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते खरीदार अब बड़े शहरों से बाहर बेहतर जीवन गुणवत्ता और दीर्घकालिक मूल्य वाले घरों की तलाश कर रहे हैं. दो सेल्फ-ऑक्यूपाइड घरों पर नोटियोनल रेंटल इनकम की छूट ने सेकेंड-होम ओनरशिप को और व्यवहार्य बना दिया है.

नोएडा और एनसीआर में हाई-ग्रोथ कॉरिडोर

हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर कहते हैं, “जैसे-जैसे हम यूनियन बजट 2026 के करीब आ रहे हैं, नोएडा का रियल एस्टेट मार्केट एक अहम मोड़ पर है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, एक्सप्रेसवे और मेट्रो विस्तार ने इस इलाके को हाई-ग्रोथ रेजिडेंशियल और कमर्शियल कॉरिडोर बना दिया है.”

वे मानते हैं कि सेक्शन 24(b) के तहत होम लोन इंटरेस्ट डिडक्शन को ₹5 लाख तक बढ़ाने से डिमांड को मजबूती मिलेगी. मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट, रेंटल हाउसिंग और लास्ट-माइल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने वाली नीतियां नोएडा को एक आत्मनिर्भर अर्बन इकॉनमी बना सकती हैं.

स्टार्टअप्स, एमएसएमई और टेक्नोलॉजी पर फोकस

वोमेकी ग्रुप के चेयरमैन गौरव सिंह कहते हैं कि बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर, खासकर स्टार्टअप्स और एमएसएमई डेवलपर्स को मजबूती मिलने की उम्मीद है. नियमों और मंजूरियों को आसान करने, होम और बिजनेस लोन को सुलभ बनाने और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने से प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होंगे और लागत घटेगी. उनके अनुसार, ग्रीन बिल्डिंग, कंस्ट्रक्शन टेक्नोलॉजी और आर एंड डी के लिए प्रोत्साहन से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और सेक्टर की दीर्घकालिक प्लानिंग आसान होगी.

रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों पर नजर

एलांते ग्रुप की एडिशनल वाइस प्रेसिडेंट हेनाम खनेजा कहती हैं, “यूनियन बजट 2026 से रियल एस्टेट सेक्टर को ऐसे उपायों की उम्मीद है जो रेजिडेंशियल और कमर्शियल दोनों तरह की डिमांड को मज़बूत करें. होम लोन इंटरेस्ट पर ज्यादा टैक्स छूट मौजूदा ऊंची ब्याज दरों के बीच खरीदारों को राहत देगी.” वे ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस, डेटा सेंटर, लॉजिस्टिक्स पार्क और मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट के लिए इंसेंटिव की जरूरत पर भी जोर देती हैं.

टियर-II और टियर-III शहरों में प्रीमियम डिमांड

रामा ग्रुप के डायरेक्टर प्रखर अग्रवाल कहते हैं कि बेहतर कनेक्टिविटी और बदलती जीवनशैली के कारण टियर-II और टियर-III शहरों में प्रीमियम खरीदारों की रुचि तेजी से बढ़ रही है. इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, सरल मंजूरी प्रक्रियाएं और मजबूत शहरी नीतियां इन शहरों में मांग और कीमतों दोनों को टिकाऊ रूप से बढ़ा सकती हैं.

स्थिर मांग और चुनिंदा प्राइस ग्रोथ

उमिया बिल्डकॉन लिमिटेड के चेयरमैन एवं एमडी अनिरुद्ध मेहता कहते हैं, “मेट्रो रेल, एक्सप्रेसवे और शहरी पुनर्विकास में हो रहा निवेश कनेक्टिविटी के साथ-साथ दीर्घकालिक संपत्ति मूल्यों को भी आकार दे रहा है.” उनके अनुसार, अच्छी कनेक्टिविटी वाले माइक्रो-मार्केट्स में चुनिंदा मूल्य वृद्धि की संभावना बनी हुई है, खासकर प्रीमियम और हाई-एंड सेगमेंट में.

बजट 2026 को “निर्णायक क्षण”

टीडीआई इंफ्रास्ट्रक्चर के सीईओ अक्षय तनेजा कहते हैं, “भारत का रियल एस्टेट सेक्टर अब एक इंफ्रास्ट्रक्चर-ड्रिवन हाउसिंग बूम में प्रवेश कर रहा है, जिससे बजट 2026 एक निर्णायक क्षण बन गया है क्योंकि यह नया कर व्यवस्था लागू होने से पहले अंतिम नीतिगत संकेत देगा (1 अप्रैल से लागू). दिल्ली मेट्रो का सोनीपत विस्तार, द्वारका एक्सप्रेसवे, कुंडली–मानेसर–पलवल (केएमपी) एक्सप्रेसवे, यूईआर-2 और अन्य बुनियादी ढांचे के बड़े पैमाने पर प्रोजेक्ट्स एनसीआर के बाहरी इलाकों और टियर-2 शहरों को आत्मनिर्भर रिहायशी और लक्जरी हाउसिंग हब में बदल रहे हैं, और भारत के स्मार्ट सिटी विजन को आगे बढ़ा रहे हैं.”

वे आगे कहते हैं सेक्टर को नीति स्थिरता और संरचनात्मक सुधारों की आवश्यकता है, जिनमें सस्ती हाउसिंग की कैप को ₹45 लाख से बढ़ाकर ₹70–75 लाख करना, उद्योग का दर्जा देना और हाउसिंग को राष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर के रूप में मान्यता देना शामिल है.

अक्षय तनेजा का कहना है कि इससे संस्थागत और वैश्विक पूंजी आकर्षित होगी, रोजगार बढ़ेगा और रियल एस्टेट का जीडीपी में 7–8% योगदान और मजबूत होगा. वे यह भी कहते हैं कि सरल कर संरचना, अनुक्रमणिका सहित पूंजीगत लाभ का पुनर्गठन, जीएसटी और स्टांप ड्यूटी की समानता, बेहतर होम लोन लाभ, सिंगल-विंडो क्लियरेंस और मजबूत पीएमएवाई अर्बन 2.0 से अफोर्डेबिलिटी बढ़ेगी, प्रोजेक्ट डिलीवरी तेज होगी और अगले दशक के लिए भारत की रियल एस्टेट तस्वीर बदल जाएगी.

संरचनात्मक बदलाव और उभरते शहरों का नया रोल

प्रॉपर्टी पिस्टल के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष नारायण अग्रवाल का मानना है कि, “टियर-2 और टियर-3 शहरों में बूम भारत के रियल एस्टेट सेक्टर में एक बड़े संरचनात्मक बदलाव का संकेत है, जहां विकास अब केवल मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आत्मनिर्भर शहरी अर्थव्यवस्थाओं की ओर बढ़ रहा है. इंदौर, सूरत, जयपुर, लखनऊ, कोयंबटूर, त्रिची और मोहाली जैसे शहर तेजी से उभर रहे हैं, जहां अफोर्डेबिलिटी, बेहतर जीवनशैली और मजबूत निवेश संभावनाएं एक साथ देखने को मिल रही हैं.”

वे आगे कहते हैं कि एक्सप्रेसवे, मेट्रो विस्तार, एयरपोर्ट, वंदे भारत ट्रेन और आईटी पार्क, जीसीसी तथा इंडस्ट्रियल क्लस्टर के जरिए रोजगार का विकेंद्रीकरण इन शहरों में हाउसिंग डिमांड को मजबूती दे रहा है. आंकड़ों का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि सस्ती हाउसिंग का हिस्सा 2021 में 37 प्रतिशत था, जो 2025 में घटकर 18 प्रतिशत रह गया है, जबकि ₹1.5 करोड़ से ऊपर के लक्ज़री होम्स का शेयर बढ़कर 29 प्रतिशत हो गया है. यह ट्रेंड कीमतों में तेज़ बढ़ोतरी और प्रीमियम डिमांड को दर्शाता है. बजट 2026 से सेक्टर को कर संरचना में सुधार, जीएसटी में कमी, स्टांप ड्यूटी में समानता और पहली बार खरीदारों के लिए बेहतर लाभ की उम्मीद है.

ग्रीन और टेक्नोलॉजी-सक्षम डेवलपमेंट पर जोर

ब्राह्मा ग्रुप के एवीपी ऑपरेशंस आशीष शर्मा कहते हैं, “बजट 2026 रियल एस्टेट सेक्टर में बनी हुई गति को बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण अवसर है. हमें उम्मीद है कि बजट ऐसे कदम उठाएगा जो बुनियादी ढांचे के विकास को तेज करें, दीर्घकालिक वित्तपोषण तक पहुंच आसान बनाएं और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल करके परियोजनाओं के समय पर पूरा होने में मदद करें.”

उनके अनुसार, शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर और मोबिलिटी में लगातार पूंजी निवेश मेट्रो शहरों के साथ-साथ उभरते शहरों में भी आवास और ऑफिस स्पेस की मांग को बढ़ाता रहेगा. इसके अलावा, ग्रीन और टेक्नोलॉजी-सक्षम निर्माण के लिए कर नियमों और प्रोत्साहनों में स्पष्टता से न केवल लागत दक्षता बढ़ेगी, बल्कि संपत्तियों की गुणवत्ता और दीर्घकालिक वैल्यू भी मजबूत होगी. इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और भविष्य के लिए तैयार शहरी वातावरण विकसित होगा.

फाइनेंसिंग और मांग आधारित ग्रोथ की उम्मीद

अल्फा कॉर्प डेवलपमेंट लिमिटेड के सीएफओ और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर संतोष अग्रवाल का कहना है कि, “बजट 2026 से पहले हमें ऐसे कदमों की उम्मीद है जो उपभोक्ता-आधारित विकास को मजबूत करें, निवेशकों का भरोसा बढ़ाएं और आवासीय तथा कमर्शियल रियल एस्टेट में वित्तपोषण तक पहुंच को आसान बनाएं.”

वे बताते हैं कि सेक्टर को ऐसी पहलों की जरूरत है जो इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को तेज करें, अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाएं और खासकर उभरते शहरी बाजारों में परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद करें. उनके अनुसार, मांग पक्ष पर ध्यान और शहरी बुनियादी ढांचे में निरंतर निवेश बाजार की गति बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है. बजट 2026 यदि कुशल वित्तपोषण, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और सरल प्रक्रियाओं को एक साथ आगे बढ़ाता है, तो यह पूरे देश में आधुनिक और टिकाऊ शहरी विकास को बढ़ावा दे सकता है.

नीतिगत संतुलन और निवेश योग्य इकोसिस्टम

लैंडमार्क ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन संदीप छिल्लर कहते हैं, “बजट 2026 से पहले हमारी उम्मीद है कि सरकार रियल एस्टेट सेक्टर के लिए एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण अपनाएगी. व्यक्तियों के लिए टैक्स इंसेंटिव बढ़ाने से हाउसिंग डिमांड को मजबूती मिल सकती है, जबकि तर्कसंगत टैक्सेशन और नीतिगत स्पष्टता से ऑफिस और रिटेल डेवलपमेंट की व्यवहार्यता बढ़ेगी.”

वे आगे कहते हैं कि सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम के जरिए तेज़ मंजूरी प्रक्रिया लागत बढ़ने और प्रोजेक्ट में देरी जैसी समस्याओं को कम कर सकती है. उनके अनुसार, ऐसा बजट जो खरीदारों की सामर्थ्य, प्रोजेक्ट निष्पादन की दक्षता और लॉन्ग-टर्म कैपिटल डिप्लॉयमेंट के बीच संतुलन बनाए, वह न केवल डेवलपर्स के लिए प्रोजेक्ट को व्यवहार्य बनाएगा, बल्कि घरेलू और संस्थागत निवेश को भी आकर्षित करेगा.

इंफ्रास्ट्रक्चर बना आर्थिक विकास की रीढ़

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर योगेश मुद्रास का कहना है, “इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर भारत की आर्थिक ग्रोथ की रीढ़ बना हुआ है और देश को मल्टी-ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी बनाने की दीर्घकालिक महत्वाकांक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण इनेबलर है. बजट 2026 से पूरी उम्मीद है कि सरकार नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर पाइपलाइन और प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव जैसी प्रमुख पहलों को और गति देगी.”

वे बताते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर आवंटन न केवल बनाए रखना, बल्कि उसे बढ़ाना भी जरूरी है, क्योंकि इसका रोजगार, औद्योगिक विकास और शहरी विकास पर मल्टीप्लायर प्रभाव साबित हो चुका है. ट्रांसपोर्टेशन, एनर्जी, पानी और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ा हुआ निवेश, स्मार्ट सिटी, अफोर्डेबल हाउसिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा फोकस के साथ, भारत की ग्रोथ की रफ्तार को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगा. साथ ही, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए नीति में स्पष्टता और सहयोग को वे बेहद जरूरी मानते हैं.

अगला विकास चरण: नियोजित शहरीकरण और मिक्स्ड-यूज टाउनशिप

M3M नोएडा के डायरेक्टर यश गर्ग ने कहा  केंद्रीय बजट से पहले, हमें उम्मीद है कि नोएडा जैसे क्षेत्रों पर मजबूत नीतिगत फोकस देखने को मिलेगा, जो जेवर एयरपोर्ट कॉरिडोर और तेजी से हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार के चलते परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं. पिछले कुछ वर्षों में बेहतर कनेक्टिविटी ने नोएडा के रियल एस्टेट परिदृश्य को काफी हद तक नया आकार दिया है, और विकास के अगले चरण को नियोजित शहरीकरण, एकीकृत टाउनशिप और सुव्यवस्थित मिक्स्ड-यूज़ डेवलपमेंट्स के जरिये आगे बढ़ाया जाना चाहिए. हम उम्मीद करते हैं कि बजट में उभरते कॉरिडोर्स में घर खरीदारों के लिए बेहतर टैक्स लाभ पेश किए जाएंगे और रियल एस्टेट को इंफ्रास्ट्रक्चर का दर्जा दिया जाएगा, जिससे दीर्घकालिक फाइनेंसिंग तक पहुंच संभव हो सकेगी और समग्र निवेशक भरोसा मजबूत होगा. मेट्रो कनेक्टिविटी, एक्सप्रेसवे और सतत शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर निवेश से नोएडा एक आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी शहरी गंतव्य के रूप में विकसित हो सकेगा.

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बजट जमीनी स्तर पर अमल पर केंद्रित रहा और नीति में स्थिरता बनी रही, तो यह रियल एस्टेट को एक संतुलित, टिकाऊ और निवेश-आकर्षक इकोसिस्टम में बदलने का काम करेगा. इस तरह बजट 2026 भारत के रियल एस्टेट मैप को नए शहरों, नए कॉरिडोर और नए निवेश मॉडल के साथ फिर से लिख सकता है.


रियल एस्टेट में नया बिजनेस मॉडल: ₹6,300 करोड़ के नेट-जीरो प्रोजेक्ट्स के साथ बूट्स की एंट्री

बूट्स की दीर्घकालिक परिकल्पना ‘आत्मनिर्भर आवास’ की है, जहां घर बाहरी बिजली, पानी और सीवर प्रणालियों पर न्यूनतम निर्भरता के साथ काम कर सकें.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 17 January, 2026
Last Modified:
Saturday, 17 January, 2026
BWHindia

नेट-जीरो इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बना चुकी कंपनी बूट्स ने अब औपचारिक रूप से रियल एस्टेट सेक्टर में कदम रख दिया है. कंपनी ने ₹6,300 करोड़ से अधिक की इन्वेंट्री के साथ अपने रियल्टी वर्टिकल की शुरुआत की घोषणा की है. यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब देश के प्रमुख शहर वायु प्रदूषण, जल संकट और बढ़ती ऊर्जा लागत जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं.

पारंपरिक रियल एस्टेट से अलग होगा बूट्स का मॉडल

अब तक सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में हाई-परफॉर्मेंस और नेट-ज़ीरो इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं पर काम कर चुकी बूट्स, अपने इंजीनियरिंग अनुभव को सीधे आवासीय विकास में लागू कर रही है. कंपनी का कहना है कि उसका रियल एस्टेट मॉडल केवल निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि मापने योग्य जीवन गुणवत्ता सुधार पर आधारित है.

स्वच्छ हवा, सुरक्षित पानी और कम ऊर्जा खपत पर जोर

बूट्स के प्रबंध निदेशक दीपक राय के अनुसार, कंपनी शहरी जीवन की बुनियादी समस्याओं को ध्यान में रखकर आवासीय परियोजनाएं विकसित कर रही है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सबसे बड़ी चुनौती है. इसी को देखते हुए घरों को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि इनडोर एयर क्वालिटी इंडेक्स 50 से नीचे रहे और कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर नियंत्रित बना रहे.

जल सुरक्षा के लिए परियोजनाओं में लाइव मॉनिटरिंग सिस्टम लगाए जा रहे हैं, जो पानी की शुद्धता, प्रवाह और उपयोग की दक्षता पर लगातार नजर रखेंगे. वहीं ऊर्जा के मोर्चे पर, केंद्रीकृत और ऊर्जा-कुशल प्रणालियों के जरिए बिजली की खपत में उल्लेखनीय कमी लाने का दावा किया गया है.

नोएडा, अलवर और वृंदावन से शुरुआत

रियल एस्टेट क्षेत्र में बूट्स ने अपनी शुरुआत नोएडा, अलवर और वृंदावन से की है. पहले चरण में कंपनी 60 लाख वर्ग फुट से अधिक का सेलएबल एरिया विकसित कर रही है. नोएडा के ग्रेटर नोएडा वेस्ट और सेक्टर 76 में प्रीमियम हाई-राइज़ आवासीय परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनमें 4 बीएचके फ्लैट और डुप्लेक्स पेंटहाउस शामिल होंगे. इन परियोजनाओं को इंजीनियरिंग-आधारित डिजाइन और स्वास्थ्य-संवेदनशील दृष्टिकोण के साथ तैयार किया जा रहा है.

अलवर में शहर की सबसे ऊंची आवासीय इमारत

अलवर में बूट्स ने एक ऐसी परियोजना शुरू की है, जिसे शहर की सबसे ऊंची आवासीय इमारत के रूप में चिन्हित किया जा रहा है. इसमें 2 और 3 बीएचके आवास उपलब्ध होंगे. इस प्रोजेक्ट में सुरक्षा, स्वच्छ इनडोर वातावरण और ऊर्जा दक्षता को प्रमुख आधार बनाया गया है.

देश के कई शहरों में विस्तार की तैयारी

आगामी वर्षों में बूट्स मुंबई, लखनऊ, अयोध्या, देहरादून, कुरुक्षेत्र, झांसी, चित्रकूट और प्रयागराज जैसे शहरों में विस्तार की योजना बना रही है. कंपनी का फोकस मुख्य रूप से एंड-यूजर डिमांड पर रहेगा, न कि केवल निवेश आधारित विकास पर. इसके साथ ही विभिन्न शहरों में दोहराए जा सकने वाले आवासीय मॉडल विकसित करने पर भी काम किया जा रहा है.

पहले भी कर चुकी है नेट-ज़ीरो परियोजनाएं पूरी

इंजीनियरिंग और सस्टेनेबिलिटी आधारित संगठन के रूप में बूट्स इससे पहले झांसी की दुनिया की पहली नेट-जीरो लाइब्रेरी और कुरुक्षेत्र के नेट-जीरो म्यूजियम जैसी परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा कर चुकी है. कंपनी का मानना है कि भारतीय आवास क्षेत्र का भविष्य केवल दिखावटी लग्जरी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे स्वास्थ्य, दक्षता, सुरक्षा और दीर्घकालिक टिकाऊपन जैसे ठोस मानकों पर आधारित होना चाहिए.