एनारॉक की रिपोर्ट के मुताबिक, द्वारका एक्सप्रेसवे अब गुरुग्राम के स्थापित लग्जरी इलाकों को दे रहा चुनौती, बेहतर कनेक्टिविटी और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स से बढ़ी मांग
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रितु राणा
गुरुग्राम के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में द्वारका एक्सप्रेसवे तेजी से अपनी जगह बना रहा है. लंबे समय तक गोल्फ कोर्स रोड और डीएलएफ फेज-5 जैसे इलाके प्रीमियम हाउसिंग के प्रमुख केंद्र रहे, लेकिन अब नए कॉरिडोर ने बाजार की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है. एनारॉक की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास आवासीय संपत्तियों की कीमतों में 135% की बढ़ोतरी हुई है. वहीं, 2025 में इस कॉरिडोर पर करीब 14,000 आवासीय यूनिट्स लॉन्च हुईं, जो यहां घरों की बढ़ती मांग और डेवलपर्स के भरोसे को दर्शाता है.
27 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे बना नया रियल एस्टेट कॉरिडोर
दिल्ली के महिपालपुर को गुरुग्राम के खेड़की दौला से जोड़ने वाला 8-लेन और करीब 27 किलोमीटर लंबा द्वारका एक्सप्रेसवे लंबे समय तक निर्माणाधीन रहा. इसके अलग-अलग हिस्सों के खुलने और पूरी तरह चालू होने के बाद पूरे कॉरिडोर का रियल एस्टेट महत्व तेजी से बढ़ा है.
एक्सप्रेसवे दिल्ली और गुरुग्राम के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर करता है और पुराने एनएच-8 पर ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद करता है. आईजीआई एयरपोर्ट, एरोसिटी और गुरुग्राम के प्रमुख कमर्शियल हब्स तक पहुंच के अलावा यशोभूमि, डिप्लोमैटिक एन्क्लेव-II और प्रस्तावित मेट्रो विस्तार से इसकी कनेक्टिविटी इसे रियल एस्टेट के लिहाज से महत्वपूर्ण बना रही है.
डेवलपर्स के मुताबिक लंबी अवधि में मजबूत रह सकती है मांग
हीरो रियल्टी के सीईओ रोहित किशोर के अनुसार, "द्वारका एक्सप्रेसवे ने बहुत तेजी से खुद को एनसीआर के सबसे गतिशील और संभावनाओं वाले माइक्रो-मार्केट्स में स्थापित किया है. दिल्ली और गुरुग्राम के बीच रणनीतिक स्थिति, आईजीआई एयरपोर्ट, एरोसिटी और यशोभूमि जैसी प्रमुख परियोजनाओं से निकटता इसे सिर्फ एक निवेश का जरिया नहीं, बल्कि एक पसंदीदा लाइफस्टाइल डेस्टिनेशन बनाती है. यहां आधुनिक और लग्जरी प्रोजेक्ट्स के विकास की संभावनाएं निवेश को बेहद आकर्षक बनाती हैं."
व्हाइटलैंड कॉरपोरेशन के डायरेक्टर-स्ट्रैटेजी सुदीप भट्ट ने कहा, "यह कॉरिडोर केवल इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर नहीं, बल्कि एक संपूर्ण शहरी इकोसिस्टम के विकास के कारण उभरा है. आज का लग्जरी खरीदार सिर्फ अच्छी लोकेशन नहीं, बल्कि बड़े स्पेस, वेलनेस-केंद्रित सुविधाएं और बेहतर जीवनशैली चाहता है. यही वजह है कि डेवलपर्स भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर प्रोजेक्ट्स डिजाइन कर रहे हैं, जो इस मार्केट को लंबी अवधि तक मजबूती देंगे."
रूट्स डेवलपर्स के डायरेक्टर जितेंद्र यादव ने कहा, "हालिया रिपोर्ट भारतीय रियल एस्टेट के लिए एक सकारात्मक तस्वीर पेश करती है. घरेलू आय में वृद्धि और कीमतों में स्थिरता से घर खरीदारों का भरोसा बढ़ा है. द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे उभरते माइक्रो-मार्केट में बेहतर कनेक्टिविटी के कारण मांग में यह तेजी साफ देखी जा सकती है, जो इसे एनसीआर के सबसे मजबूत कॉरिडोर्स में से एक बनाती है."
बीपीटीपी (BPTP) के सीईओ और प्रेसिडेंट मानिक मलिक ने कहा, "दिल्ली, एयरपोर्ट और कमर्शियल हब्स तक आसान पहुंच ने सुविधा और गुणवत्तापूर्ण जीवनशैली को प्राथमिकता देने वाले खरीदारों के बीच इसकी मांग बढ़ाई है. कंपनी को इस कॉरिडोर की दीर्घकालिक संभावनाओं पर पूरा भरोसा है, जो उनके 'एमस्टोरिया वर्टी ग्रीन्स' और 'गाया रेजिडेंसेस' जैसे प्रोजेक्ट्स के डिजाइन और वेलनेस-फोकस्ड एप्रोच में दिखाई देता है. जैसे-जैसे यह कॉरिडोर और परिपक्व होगा, लिवेबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर यहां मांग लगातार मजबूत बनी रहेगी."
बड़े प्रोजेक्ट्स और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर से बढ़ी मांग
द्वारका एक्सप्रेसवे के आसपास सुनियोजित विकास और बड़े भूखंडों की उपलब्धता ने डेवलपर्स को बड़े प्रीमियम प्रोजेक्ट्स लॉन्च करने का मौका दिया है. नए प्रोजेक्ट्स में बड़े घरों के साथ आधुनिक सुविधाओं, बेहतर ओपन स्पेस और वेलनेस-केंद्रित सुविधाओं पर जोर दिया जा रहा है. वहीं, गोल्फ कोर्स रोड और डीएलएफ फेज-5 जैसे स्थापित इलाकों में जमीन की सीमित उपलब्धता के कारण नई परियोजनाओं के लिए विकल्प कम हैं. ऐसे में द्वारका एक्सप्रेसवे नए प्रीमियम हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के लिए एक अहम बाजार बनकर उभरा है.
काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी के मुताबिक, "आज खरीदार किसी प्रोजेक्ट को केवल एक पहलू से नहीं देखते, बल्कि प्रोजेक्ट की गुणवत्ता, कनेक्टिविटी, आसपास का इंफ्रास्ट्रक्चर और विकसित हो रहे इलाके को भी ध्यान में रखते हैं. द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे कॉरिडोर में लगातार बढ़ती कीमतें बताती हैं कि खरीदारों की सोच में कितना बदलाव आया है. यह कॉरिडोर एक उभरते हुए क्षेत्र से आगे बढ़कर अब लग्जरी रेजिडेंशियल डेस्टिनेशन के तौर पर लोगों की पहली पसंद में शामिल हो गया है."
उन्होंने कहा, "एक्सप्रेसवे के शुरू होने से दिल्ली और आईजीआई एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी बेहतर हुई है, जिससे लोगों का इस क्षेत्र में घर खरीदने को लेकर भरोसा भी बढ़ा है. अब इन इलाकों को इस आधार पर देखा जा रहा है कि वे आज क्या सुविधाएं और अवसर दे रहे हैं, न कि केवल इस आधार पर कि आने वाले समय में यहां क्या विकास हो सकता है. विकल्पों का लगातार बढ़ना ही इस बात का संकेत है कि शहर के रेजिडेंशियल क्षेत्र का स्वरूप कितना बदल चुका है."
इंफ्रास्ट्रक्चर ने बदली खरीदारों की सोच
लैंडमार्क ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन संदीप छिल्लर ने कहा, "एनसीआर में द्वारका एक्सप्रेसवे इस बात का एक मजबूत उदाहरण है कि इंफ्रास्ट्रक्चर किस तरह रेजिडेंशियल डिमांड और निवेश को लेकर लोगों की सोच को पूरी तरह बदल सकता है. कभी उभरते हुए कॉरिडोर के रूप में देखा जाने वाला यह क्षेत्र अब कनेक्टिविटी, कमर्शियल गतिविधियों और बड़े स्तर पर हो रहे शहरी विकास के कारण एनसीआर के सबसे पसंदीदा रेजिडेंशियल डेस्टिनेशन में शामिल हो गया है."
उन्होंने कहा, "आज खरीदार भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेते हैं. वे किसी प्रोजेक्ट के साथ-साथ उसके आसपास विकसित हो रहे पूरे माहौल और सुविधाओं को भी उतनी ही अहमियत देते हैं. लग्जरी हाउसिंग में सस्टेनेबिलिटी भी अब चर्चा का एक अहम हिस्सा बन रही है, खासकर युवा प्रोफेशनल्स और ग्लोबल इंडियंस के बीच. हमारा मानना है कि जिन डेवलपर्स ने इस क्षेत्र में लंबे समय को ध्यान में रखकर योजना बनाई थी, वे अब विकास के अगले चरण में आगे रहने की स्थिति में हैं."
135% बढ़ी कीमतें, 2025 में लॉन्च हुईं 14,000 यूनिट्स
M3M इंडिया के प्रेसिडेंट रॉबिन मंगला ने कहा, "द्वारका एक्सप्रेसवे ने गुरुग्राम के प्रमुख रेजिडेंशियल ग्रोथ कॉरिडोर में अपनी मजबूत जगह बना ली है. पिछले पांच वर्षों में यहां प्रॉपर्टी की कीमतों में 135% की बढ़ोतरी हुई है. इस कॉरिडोर में बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए पर्याप्त जगह होने से डेवलपर्स को बड़े घरों और प्रीमियम सुविधाओं के साथ बेहतर तरीके से विकसित की गई कम्युनिटी तैयार करने में मदद मिल रही है."
उन्होंने कहा, "वर्ष 2025 में करीब 14,000 यूनिट्स लॉन्च होना भी बाजार में मजबूत भरोसे और खरीदारों की लगातार बनी रुचि को दिखाता है. जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर क्वालिटी वाले प्रोजेक्ट्स और दूसरी जरूरी सुविधाएं मजबूत हो रही हैं, द्वारका एक्सप्रेसवे घर खरीदने वालों को आकर्षित करने के लिए एक बेहतर विकल्प बनता जा रहा है. इससे प्रीमियम रेजिडेंशियल प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा मिलने के साथ गुरुग्राम के प्रमुख लग्जरी इलाकों में इसकी पहचान और मजबूत होने की उम्मीद है."
गुरुग्राम के लग्जरी बाजार में बदल रहा समीकरण
गुरुग्राम का लग्जरी हाउसिंग बाजार अब सिर्फ पारंपरिक प्रीमियम इलाकों तक सीमित नहीं है. सीमित जमीन और ऊंची कीमतों वाले स्थापित बाजारों के बीच द्वारका एक्सप्रेसवे बड़े प्रोजेक्ट्स, बेहतर कनेक्टिविटी और नए इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ एक प्रमुख प्रीमियम कॉरिडोर के रूप में उभरा है.
पिछले पांच वर्षों में 135% की कीमत वृद्धि और 2025 में करीब 14,000 यूनिट्स की लॉन्चिंग इस बदलाव के अहम संकेत हैं. इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी में लगातार सुधार के साथ द्वारका एक्सप्रेसवे की गुरुग्राम के लग्जरी रियल एस्टेट बाजार में भूमिका आने वाले वर्षों में और मजबूत होने की संभावना है.
रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-NCR, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बाजारों ने कीमतों की इस तेजी में अहम भूमिका निभाई.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के रेजिडेंशियल रियल एस्टेट बाजार में घरों की कीमतों में बढ़ोतरी जारी है, हालांकि बिक्री और नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग की रफ्तार अपेक्षाकृत धीमी रही. कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में प्रमुख बाजारों में औसत प्रॉपर्टी रियलाइजेशन सालाना आधार पर 6% बढ़कर 9,629 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गया. दिल्ली-NCR, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बाजारों ने कीमतों की इस तेजी में अहम भूमिका निभाई.
रिपोर्ट के मुताबिक, बीते कुछ वर्षों में रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ में कीमतों में बढ़ोतरी की भूमिका ज्यादा रही है. ऐसे में आगे बाजार की वास्तविक मजबूती का आकलन बिक्री वॉल्यूम में लगातार सुधार से होगा.
कीमत बढ़ी, लेकिन बिक्री की रफ्तार सीमित
FY27 की पहली तिमाही में देशभर में 247 मिलियन वर्ग फुट आवासीय बिक्री दर्ज की गई, जो सालाना आधार पर 3% अधिक रही. हालांकि, तिमाही आधार पर इसमें 3% की गिरावट आई. वहीं, नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग घटकर 242 मिलियन वर्ग फुट रह गई, जो सालाना आधार पर 14% और तिमाही आधार पर 16% कम है. कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कुल बिक्री मूल्य में सालाना आधार पर 9% की वृद्धि दर्ज की गई. यानी बिक्री वॉल्यूम की सुस्ती के बावजूद बढ़ते प्रॉपर्टी रेट्स ने बाजार की वैल्यू को सहारा दिया.
NCR में कीमतों की तेजी, बिक्री में बड़ी गिरावट
दिल्ली-NCR में प्रॉपर्टी की कीमतों में मजबूती बनी रही, लेकिन बिक्री वॉल्यूम में बड़ी गिरावट दर्ज की गई. क्षेत्र में आवासीय बिक्री सालाना आधार पर 27% और तिमाही आधार पर 8% घटकर 23.5 मिलियन वर्ग फुट रह गई. इस दौरान नई लॉन्चिंग 21.2 मिलियन वर्ग फुट रही. इसके मुकाबले मुंबई महानगर क्षेत्र (MMR) में 41.5 मिलियन वर्ग फुट की बिक्री दर्ज की गई. बेंगलुरु में 30.7 मिलियन वर्ग फुट और हैदराबाद में 34.3 मिलियन वर्ग फुट की बिक्री हुई.
गुरुग्राम और नोएडा में मजबूत बने रेट्स
डेवलपर्स का मानना है कि गुरुग्राम और नोएडा जैसे बाजारों में कीमतों में तेजी के पीछे केवल निवेशकों की दिलचस्पी नहीं, बल्कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की बढ़ती मांग भी अहम कारण हैं.
JMS ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर पुष्पेंद्र सिंह ने कहा कि गुरुग्राम में 2019 के बाद से प्रॉपर्टी की कीमतों में 117% तक की बढ़ोतरी देखी गई है. खासकर सेक्टर 95 और द्वारका एक्सप्रेसवे जैसे इलाकों में इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का सीधा असर रियल एस्टेट की कीमतों पर पड़ा है. उनके मुताबिक, रेंटल यील्ड में सुधार भी बाजार की मजबूती का संकेत है.
BPTP लिमिटेड के प्रेसिडेंट और CEO मानिक मलिक ने कहा कि घर खरीदार अब बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और अच्छे सोशल इकोसिस्टम वाले इलाकों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे गुरुग्राम, नोएडा और फरीदाबाद जैसे बाजारों को फायदा मिल रहा है.
अनसोल्ड इन्वेंट्री में मामूली बढ़ोतरी
बेंगलुरु, हैदराबाद और NCR में अनसोल्ड इन्वेंट्री में तिमाही आधार पर मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई. जून 2026 तक देशभर में अनसोल्ड रेजिडेंशियल स्टॉक करीब 0.8 बिलियन वर्ग फुट रहा, जो पिछले 12 महीनों की बिक्री के आधार पर लगभग 1.9 साल की इन्वेंट्री के बराबर है.
पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट ऋषभ पेरिवाल ने कहा कि गुरुग्राम का बाजार अब सिर्फ कीमतों में तेजी तक सीमित नहीं है. प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग के साथ ग्रेड-A ऑफिस स्पेस और प्रीमियम रिटेल की मांग भी बाजार को मजबूती दे रही है.
मांग वाले बाजारों पर रहेगा डेवलपर्स का फोकस
रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले समय में डेवलपर्स नए प्रोजेक्ट्स की सप्लाई को लेकर अधिक सतर्क रह सकते हैं. उनका फोकस उन माइक्रो-मार्केट्स और प्रोजेक्ट्स पर बढ़ सकता है, जहां खरीदारों की मांग स्पष्ट और मजबूत है.
कुल मिलाकर, रेजिडेंशियल रियल एस्टेट बाजार में कीमतों की तेजी जारी है, लेकिन बिक्री वॉल्यूम की सुस्ती यह संकेत देती है कि बाजार की अगली ग्रोथ के लिए केवल महंगे घर नहीं, बल्कि वास्तविक मांग में भी तेजी जरूरी होगी.
वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती आबादी और आधुनिक, सुरक्षित व हेल्थकेयर सुविधाओं से लैस घरों की मांग बढ़ा रही बाजार का आकार, करीब ₹13,000 करोड़ के निवेश की भी तैयारी
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत में सीनियर लिविंग सेगमेंट तेजी से रियल एस्टेट के नए ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है. वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती आबादी, बदलती पारिवारिक संरचना और सुरक्षित व स्वतंत्र जीवनशैली की बढ़ती चाहत के चलते इस बाजार में मांग लगातार बढ़ रही है. कोलियर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का सीनियर लिविंग मार्केट 2030 तक ₹1 लाख करोड़ के पार पहुंच सकता है. यह मौजूदा स्तर के मुकाबले करीब चार गुना वृद्धि होगी.
बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए रियल एस्टेट डेवलपर्स, हेल्थकेयर कंपनियां और निवेशक भी इस सेगमेंट में तेजी से रुचि दिखा रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इस क्षेत्र में करीब ₹13,000 करोड़ के निवेश की योजनाएं सामने आ चुकी हैं.
₹30,000 करोड़ का बाजार, 2030 तक तेज विस्तार की उम्मीद
फिलहाल भारत में सीनियर लिविंग मार्केट का आकार करीब ₹30,000 करोड़ है, जो 2024 में लगभग ₹18,000 करोड़ था. यानी कुछ ही समय में इस सेगमेंट में करीब 70 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. अनुमान है कि 2028 तक यह बाजार करीब ₹70,000 करोड़ तक पहुंच सकता है, जबकि 2030 तक इसका आकार ₹1 लाख करोड़ से अधिक हो सकता है. इस तेजी के पीछे देश में बढ़ती वरिष्ठ नागरिक आबादी एक प्रमुख कारण है. वर्तमान में भारत की करीब 11 फीसदी आबादी 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की है और 2050 तक यह हिस्सा बढ़कर लगभग 21 फीसदी होने का अनुमान है.
रिटायरमेंट होम से आगे बढ़ा सीनियर लिविंग कॉन्सेप्ट
बदलती जीवनशैली और पारिवारिक संरचना के साथ वरिष्ठ नागरिकों की जरूरतें भी बदल रही हैं. अब मांग केवल ऐसे घरों तक सीमित नहीं है, जहां बुजुर्ग आराम से रह सकें. सीनियर सिटीजंस अब सुरक्षित वातावरण के साथ बेहतर हेल्थकेयर, वेलनेस, मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव जैसी सुविधाओं को भी प्राथमिकता दे रहे हैं. यही बदलाव पारंपरिक रिटायरमेंट होम के कॉन्सेप्ट को आधुनिक और संगठित सीनियर लिविंग कम्युनिटीज में बदल रहा है.
मांग और सप्लाई के बीच बड़ा अंतर
इस सेगमेंट में सबसे बड़ा अवसर मांग और संगठित सप्लाई के बीच मौजूद बड़े अंतर में छिपा है. भारत में सीनियर लिविंग की मौजूदा मांग करीब 20 से 22 लाख यूनिट की है, जबकि संगठित क्षेत्र में उपलब्ध इन्वेंट्री अभी करीब 25,000 यूनिट ही है. अनुमान है कि 2030 तक संगठित सीनियर लिविंग यूनिट्स की संख्या बढ़कर करीब 1 लाख तक पहुंच सकती है. इसके बावजूद मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बने रहने की संभावना है.
यही गैप डेवलपर्स और निवेशकों के लिए नए अवसर पैदा कर रहा है. आने वाले वर्षों में संगठित सीनियर लिविंग की बाजार हिस्सेदारी भी बढ़कर करीब 4 फीसदी तक पहुंचने का अनुमान है.
अगले तीन से चार वर्षों में चार गुना बढ़ सकती है इन्वेंट्री
कोलियर्स इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बादल याग्निक के अनुसार, संगठित सीनियर लिविंग इन्वेंट्री अगले तीन से चार वर्षों में करीब चार गुना बढ़ सकती है. उनका मानना है कि 2030 तक यह सेगमेंट एक ट्रिलियन रुपये यानी ₹1 लाख करोड़ से अधिक का बाजार बन सकता है. सीनियर लिविंग को अब केवल एक विशेष रियल एस्टेट कैटेगरी के बजाय दीर्घकालिक निवेश और विकास के बड़े अवसर के रूप में देखा जा रहा है.
गुरुग्राम और देहरादून में बढ़ती संभावनाएं
उत्तर भारत में गुरुग्राम और देहरादून जैसे शहर सीनियर लिविंग के लिए उभरते बाजारों के रूप में देखे जा रहे हैं. पायनियर अर्बन लैंड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट रिषभ पेरिवाल के मुताबिक, संगठित सीनियर लिविंग का फोकस अब इन शहरों की ओर बढ़ रहा है.
गुरुग्राम की मजबूत कॉर्पोरेट मौजूदगी, हाई नेटवर्थ रिटायर्ड लोगों और एनआरआई परिवारों की बड़ी संख्या इस बाजार को समर्थन दे रही है. शहर की करीब 8 फीसदी आबादी 60 वर्ष से अधिक उम्र की है, जबकि लगभग 37 फीसदी लोगों की सालाना आय ₹10 लाख से ज्यादा है.
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, आरआरटीएस जैसी प्रमुख ट्रांसपोर्ट परियोजनाएं और आईजीआई एयरपोर्ट की बेहतर कनेक्टिविटी भी गुरुग्राम की संभावनाओं को मजबूत कर रही हैं. इसके अलावा फोर्टिस और मेदांता जैसे प्रमुख अस्पतालों की मौजूदगी इसे उन वरिष्ठ नागरिकों के लिए आकर्षक बनाती है, जो स्वतंत्र जीवनशैली के साथ बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं चाहते हैं.
सिर्फ देखभाल नहीं, बेहतर और सम्मानजनक जीवन पर जोर
एलिगेंस एंटरप्राइजेज के संस्थापक रवि कांत का कहना है कि भारत में सीनियर लिविंग बाजार एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. बढ़ती जीवन प्रत्याशा, बदलते पारिवारिक ढांचे और स्वतंत्र जीवन जीने की चाहत इस सेगमेंट को नया रूप दे रही है.
उनके अनुसार, भविष्य में ऐसे आधुनिक समुदायों की मांग बढ़ेगी, जहां हेल्थकेयर के साथ वेलनेस, मनोरंजन और सामाजिक जुड़ाव की सुविधाएं भी उपलब्ध हों. सीनियर लिविंग अब केवल देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि बेहतर, सुरक्षित और सम्मानजनक जीवनशैली का माध्यम बन रहा है.
रियल एस्टेट के लिए बन सकता है नया ग्रोथ इंजन
सीनियर लिविंग सेगमेंट आने वाले वर्षों में भारतीय रियल एस्टेट उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन बन सकता है. वरिष्ठ नागरिकों की बढ़ती संख्या, बेहतर आय स्तर, बदलती पारिवारिक संरचना और हेल्थकेयर व वेलनेस पर बढ़ता फोकस इस बाजार को लगातार मजबूत कर रहा है.
आने वाले समय में ऐसे प्रोजेक्ट्स की मांग बढ़ने की उम्मीद है, जहां आवास के साथ हेल्थकेयर, वेलनेस, मनोरंजन और कम्युनिटी लाइफ की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हों. 2030 तक ₹1 लाख करोड़ से अधिक का बाजार बनने की संभावनाओं के साथ सीनियर लिविंग सेगमेंट डेवलपर्स, हेल्थकेयर कंपनियों और लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए नए अवसरों का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है.
ANAROCK रिसर्च एंड एडवाइजरी के विश्लेषण के अनुसार, देश के 11 प्रमुख आवासीय बाजारों में 2019 से Q2 2026 के बीच पूंजीगत मूल्य और रेंटल यील्ड, दोनों में लगभग समान गति से वृद्धि हुई है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का आवासीय रियल एस्टेट बाजार अब निवेशकों के लिए सिर्फ संपत्ति की कीमतों में बढ़ोतरी तक सीमित नहीं रह गया है. ANAROCK की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देश के प्रमुख हाउसिंग बाजारों में 2019 से 2026 की दूसरी तिमाही (Q2 2026) के बीच घरों की कीमतों के साथ-साथ किराये से होने वाली आय (Rental Yield) में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस दौरान नोएडा और गुरुग्राम ने पूंजीगत मूल्य वृद्धि (Capital Appreciation) में सबसे बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि बेंगलुरु और हैदराबाद में रेंटल यील्ड सबसे तेजी से बढ़ी.
नोएडा और गुरुग्राम में सबसे तेज बढ़ीं घरों की कीमतें
ANAROCK रिसर्च एंड एडवाइजरी के विश्लेषण के अनुसार, देश के 11 प्रमुख आवासीय बाजारों में 2019 से Q2 2026 के बीच पूंजीगत मूल्य और रेंटल यील्ड, दोनों में लगभग समान गति से वृद्धि हुई है. इसका मतलब है कि अब प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने के बावजूद किराये से मिलने वाला रिटर्न भी मजबूत बना हुआ है.
रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा में औसत आवासीय कीमत 2019 में 4,795 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर Q2 2026 में 10,780 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गई. यानी करीब 125 फीसदी की बढ़ोतरी. इसी अवधि में रेंटल यील्ड 3.2 फीसदी से बढ़कर 3.9 फीसदी हो गई, जो 70 बेसिस प्वाइंट (BPS) की वृद्धि है.
वहीं, गुरुग्राम में घरों की औसत कीमत 6,150 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 13,350 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गई, जो 117 फीसदी की वृद्धि है. यहां रेंटल यील्ड 3.5 फीसदी से बढ़कर 4.3 फीसदी हो गई, यानी 80 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हुआ.
बेंगलुरु और हैदराबाद में किराये से कमाई सबसे ज्यादा बढ़ी
रिपोर्ट के अनुसार, बेंगलुरु और हैदराबाद ने रेंटल यील्ड में सबसे मजबूत प्रदर्शन किया. दोनों शहरों में 2019 से Q2 2026 के बीच रेंटल यील्ड में 100 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बेंगलुरु में आवासीय कीमतें 4,975 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 9,450 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, जो 90 फीसदी की वृद्धि है. वहीं, रेंटल यील्ड 3.6 फीसदी से बढ़कर 4.6 फीसदी पहुंच गई.
हैदराबाद में इसी अवधि के दौरान घरों की कीमतें 4,195 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 8,090 रुपये प्रति वर्ग फुट हो गईं, यानी 93 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. रेंटल यील्ड भी 2.6 फीसदी से बढ़कर 3.6 फीसदी हो गई.
मुंबई और दिल्ली में भी बेहतर हुआ रेंटल रिटर्न
रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई और दिल्ली जैसे परिपक्व (Mature) रियल एस्टेट बाजारों में भी किराये से होने वाली आय में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला. मुंबई में 2019 से Q2 2026 के बीच घरों की कीमतों में 64 फीसदी की वृद्धि हुई. औसत कीमत 17,845 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 29,270 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंच गई. वहीं रेंटल यील्ड 3.5 फीसदी से बढ़कर 4.3 फीसदी हो गई.
दिल्ली में आवासीय कीमतें 18,200 रुपये प्रति वर्ग फुट से बढ़कर 26,700 रुपये प्रति वर्ग फुट पहुंचीं, जो 47 फीसदी की वृद्धि है. यहां रेंटल यील्ड 2.2 फीसदी से बढ़कर 3.2 फीसदी हो गई.
अन्य शहरों का प्रदर्शन
नवी मुंबई में घरों की कीमतों में 71 फीसदी और ठाणे में 63 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई. दोनों शहरों में रेंटल यील्ड 80 बेसिस प्वाइंट बढ़ी. पुणे में आवासीय कीमतों में 51 फीसदी की वृद्धि हुई, जबकि रेंटल यील्ड में 65 बेसिस प्वाइंट का इजाफा हुआ.
चेन्नई और कोलकाता में अन्य प्रमुख शहरों की तुलना में अपेक्षाकृत धीमी वृद्धि दर्ज की गई. चेन्नई में घरों की कीमतें 47 फीसदी बढ़ीं और रेंटल यील्ड 55 बेसिस प्वाइंट बढ़ी, जबकि कोलकाता में कीमतों में 45 फीसदी और रेंटल यील्ड में 60 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि हुई.
रोजगार और इंफ्रास्ट्रक्चर से मिली रफ्तार
ANAROCK ग्रुप के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा कि आमतौर पर प्रॉपर्टी की कीमतें बढ़ने पर रेंटल यील्ड घट जाती है, लेकिन भारत के प्रमुख आवासीय बाजार इस ट्रेंड से अलग दिखाई दे रहे हैं. उनका कहना है कि इंफ्रास्ट्रक्चर विकास, रोजगार केंद्रों का विस्तार, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (GCC) की बढ़ती मौजूदगी और महानगरों की ओर लगातार हो रहा पलायन, आवासीय बाजार में पूंजीगत मूल्य और किराये, दोनों को मजबूती दे रहा है.
उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास रोजगार पैदा करता है, रोजगार पलायन को बढ़ाता है, पलायन से किराये की मांग बढ़ती है और मजबूत आवासीय मांग से संपत्तियों की कीमतों में तेजी आती है. यही वजह है कि भारतीय रियल एस्टेट बाजार अब निवेशकों को पूंजीगत लाभ और नियमित किराये की आय, दोनों का बेहतर अवसर उपलब्ध करा रहा है.
कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और बड़े कॉरपोरेट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
दिल्ली-एनसीआर में प्रीमियम कमर्शियल रियल एस्टेट और ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस की बढ़ती मांग के बीच M3M इंडिया ने गुरुग्राम के सेक्टर-113 में 600 करोड़ रुपये के निवेश से 'M3M कैपिटल फाइनेंशियल सेंटर' लॉन्च किया है. कंपनी का अनुमान है कि इस परियोजना से करीब 1,500 करोड़ रुपये की आय होगी. यह प्रोजेक्ट ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बहुराष्ट्रीय कंपनियों और वित्तीय संस्थानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है.
1.42 एकड़ में फैला यह ग्रेड-ए कमर्शियल प्रोजेक्ट M3M IFC के बाद कंपनी की नई कमर्शियल पेशकश है. इसमें चार बेसमेंट और 22 मंजिला टावर विकसित किया जाएगा, जिसमें 165 यूनिट्स होंगी. इनमें 152 ऑफिस स्पेस, छह मल्टीप्लेक्स यूनिट और सात रिटेल स्पेस शामिल हैं.
GCC और कॉरपोरेट्स पर फोकस
कंपनी के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs), बहुराष्ट्रीय कंपनियों, वित्तीय संस्थानों और बड़े कॉरपोरेट्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है. प्रोजेक्ट में करीब 22,500 वर्ग फुट के पिलर-लेस फ्लोर होंगे, जिससे कंपनियों को अपनी जरूरत के अनुसार ऑफिस स्पेस तैयार करने की सुविधा मिलेगी. M3M इंडिया अपना कॉरपोरेट मुख्यालय भी इसी प्रोजेक्ट में स्थापित करेगी. वहीं, एक वैश्विक एविएशन कंपनी ने यहां करीब 75,000 वर्ग फुट ऑफिस स्पेस लेने का निर्णय लिया है.
कनेक्टिविटी बनेगी बड़ी ताकत
यह प्रोजेक्ट द्वारका एक्सप्रेसवे, NH-48, UER-II और वसंत कुंज एक्सटेंशन कॉरिडोर से जुड़ा है. इसके अलावा यह एरोसिटी और इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से करीब 15-20 मिनट की दूरी पर स्थित है, जिससे यह कॉरपोरेट कंपनियों के लिए आकर्षक लोकेशन बन सकता है.
2029 तक पूरा होने का लक्ष्य
परियोजना में प्रीमियम ऑफिस स्पेस के साथ रिटेल, मल्टीप्लेक्स, बिजनेस क्लब और अन्य सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. कंपनी का लक्ष्य इसे 2029 के अंत तक पूरा करने का है.
हाल के वर्षों में दिल्ली-एनसीआर, खासकर द्वारका एक्सप्रेसवे और एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों में ग्रेड-ए ऑफिस स्पेस और GCCs की मांग तेजी से बढ़ी है. ऐसे में M3M का यह निवेश केवल एक नया प्रोजेक्ट लॉन्च नहीं, बल्कि कमर्शियल रियल एस्टेट बाजार में बढ़ती मांग पर कंपनी की रणनीतिक दांव के रूप में देखा जा रहा है.
महंगी प्रॉपर्टी, ऊंची होम लोन EMI और बदलते करियर ट्रेंड के चलते मिलेनियल्स और जेन-जी का रुख बदला. NoBroker की रिपोर्ट में 46% किराएदारों ने लंबे समय तक किराए पर रहने को बताया बेहतर विकल्प
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रितु राणा
भारत में अपना घर होना लंबे समय से आर्थिक स्थिरता और सफलता की पहचान माना जाता रहा है, लेकिन नई पीढ़ी का नजरिया तेजी से बदल रहा है. मिलेनियल्स और जेन-जी अब घर खरीदने को केवल भावनात्मक फैसला नहीं, बल्कि एक बड़ा वित्तीय निर्णय मान रहे हैं. महंगी होती प्रॉपर्टी कीमतें, ऊंची होम लोन EMI और करियर में लचीलापन बनाए रखने की जरूरत ने कई युवाओं को घर खरीदने की बजाय किराए पर रहने के विकल्प की ओर मोड़ा है.
प्रॉपर्टी प्लेटफॉर्म NoBroker की हाल में आई रिपोर्ट के मुताबिक, 46 फीसदी किराएदार लंबे समय तक किराए के मकान में रहना बेहतर विकल्प मानते हैं. इनमें 25-34 वर्ष आयु वर्ग के 53 फीसदी और 35-44 वर्ष के 48 फीसदी लोग शामिल हैं. उनका मानना है कि लंबे समय तक EMI में पैसा फंसाने के बजाय निवेश और वित्तीय स्वतंत्रता पर ध्यान देना ज्यादा फायदेमंद है.
EMI के मुकाबले किराया पड़ रहा ज्यादा किफायती
युवाओं के इस बदलते रुझान की सबसे बड़ी वजह महानगरों में तेजी से बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें और महंगी होम लोन दरें हैं. कई बड़े शहरों में घर की मासिक EMI अब उसी प्रॉपर्टी के किराए से दोगुने से भी अधिक हो चुकी है.
पिछले पांच वर्षों में गुरुग्राम का EMI-टू-रेंट रेशियो 1.86 से बढ़कर 2.68 हो गया है. वहीं बेंगलुरु में यह 2.38, हैदराबाद में 2.47 और मुंबई में 2.19 तक पहुंच चुका है. यानी जिस घर का मासिक किराया 50 हजार रुपये है, उसे खरीदने पर EMI एक लाख रुपये या उससे अधिक हो सकती है.
घर खरीदने से पीछे नहीं हटे युवा, बदल रहा है फैसला लेने का तरीका
रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों का कहना है कि युवा घर खरीदने के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि वे इसे अधिक सोच-समझकर लेने वाला फैसला बना रहे हैं.
रिषभ पेरिवाल, सीनियर वाइस प्रेसिडेंट, पायनियर इंफ्रास्ट्रक्चर कहते हैं, "युवा भारतीयों के बीच अपना घर खरीदने की आकांक्षा आज भी उतनी ही मजबूत है; बदला है तो केवल घर खरीदने का उनका दृष्टिकोण. आज के खरीदार पहले की तुलना में अधिक जागरूक और वित्तीय रूप से अनुशासित हैं. वे घर खरीदने का निर्णय लेने से पहले वहनीयता, दीर्घकालिक वित्तीय प्रतिबद्धताओं और करियर से जुड़ी लचीलापन की जरूरत का सावधानीपूर्वक आकलन करते हैं."
उन्होंने कहा कि बढ़ती प्रॉपर्टी कीमतें, महंगी ब्याज दरें और नौकरी के लिए बार-बार शहर बदलने की प्रवृत्ति ने कई लोगों को घर खरीदने का फैसला टालने के लिए प्रेरित किया है, न कि उसे पूरी तरह छोड़ने के लिए. उनके अनुसार, जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, वित्तीय स्थिरता आएगी और खरीदारों को सही लोकेशन, बेहतर गुणवत्ता तथा दीर्घकालिक मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स मिलेंगे, यह वर्ग आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र की अगली विकास यात्रा का प्रमुख आधार बनेगा.
निवेश और वित्तीय आजादी को दे रहे प्राथमिकता
आज की युवा पीढ़ी डाउन पेमेंट और लंबी अवधि की EMI में बड़ी रकम लॉक करने के बजाय उस पैसे को म्यूचुअल फंड, शेयर बाजार, ETF, REITs और अन्य निवेश विकल्पों में लगाने को प्राथमिकता दे रही है.
वोमेकी ग्रुप के फाउंडर एंड चेयरमैन गौरव के सिंह कहते हैं, "आज के युवाओं के लिए घर खरीदना अब सिर्फ भावनाओं का सौदा नहीं, बल्कि पूरी तरह से वित्तीय गणित का खेल बन चुका है. आसमान छूती कीमतें, ऊंची ब्याज दरें और सालों-साल चलने वाली EMI उन्हें हर कदम फूंक-फूंक कर रखने पर मजबूर कर रही हैं."
उन्होंने कहा कि करियर में तरक्की के लिए बार-बार शहर बदलने की जरूरत ने किराए के घर को एक अधिक व्यावहारिक और आसान विकल्प बना दिया है. आज की पीढ़ी जल्दबाजी में कर्ज के जाल में फंसने के बजाय अपनी सेविंग्स और वित्तीय आजादी को ज्यादा महत्व दे रही है. हालांकि, अपने आशियाने का सपना खत्म नहीं हुआ है. जैसे ही आमदनी बढ़ेगी और बजट के अनुकूल सही प्रोजेक्ट मिलेंगे, यह वर्ग पूरी तैयारी के साथ घर खरीदने के लिए बाजार में वापस आएगा.
"युवा घर खरीदने के खिलाफ नहीं, सही समय का इंतजार कर रहे हैं"
गौरव भगत के अनुसार, "आज की युवा पीढ़ी घर खरीदने से पीछे नहीं हट रही, बल्कि घर खरीदने के समय और तरीके को लेकर पहले से कहीं अधिक रणनीतिक हो गई है. पहले घर खरीदना सामाजिक उपलब्धि माना जाता था, आज यह एक वित्तीय निर्णय है. यही सबसे बड़ा बदलाव है."
उन्होंने कहा कि 25 से 35 वर्ष की उम्र का युवा अब केवल यह नहीं पूछता कि "मैं घर कब खरीदूं?", बल्कि यह सोचता है कि "क्या अभी घर खरीदना मेरी नेटवर्थ बढ़ाएगा या मेरी वित्तीय स्वतंत्रता को सीमित कर देगा?"
गौरव भगत के मुताबिक, महानगरों में प्रॉपर्टी कीमतों में तेज वृद्धि और करीब 8 फीसदी के आसपास बनी होम लोन ब्याज दरों के कारण 25-30 साल की EMI व्यक्ति की मासिक आय का बड़ा हिस्सा एक ही एसेट में लॉक कर देती है. वहीं, किराए पर रहकर बची हुई राशि को इक्विटी, म्यूचुअल फंड, व्यवसाय या स्किल डेवलपमेंट में निवेश करने से लंबे समय में ज्यादा लचीलापन और बेहतर रिटर्न की संभावना बनती है.
उन्होंने कहा, "एक निवेशक के तौर पर मैं हमेशा एक बात कहता हूं, घर एक भावनात्मक संपत्ति (Emotional Asset) हो सकता है, लेकिन हर घर शुरुआत में एक अच्छा निवेश (Financial Investment) नहीं होता. यदि किसी व्यक्ति की डाउन पेमेंट के बाद भी उसके पास 12-18 महीनों का इमरजेंसी फंड, पर्याप्त निवेश और नियमित कैश फ्लो नहीं बचता, तो केवल घर खरीदने के लिए खुद को वित्तीय दबाव में डालना समझदारी नहीं है."
करियर में बदलाव और हाइब्रिड वर्क कल्चर भी बड़ा कारण
विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती नौकरी संस्कृति भी युवाओं के फैसले को प्रभावित कर रही है. हाइब्रिड वर्क मॉडल, स्टार्टअप कल्चर और बेहतर अवसरों के लिए शहर बदलने की प्रवृत्ति ने किराए के मकान को ज्यादा सुविधाजनक बना दिया है.
बिजनेस कंसल्टेंट व निवेशक गौरव भगत कहते हैं, "आज का प्रोफेशनल अपने करियर के शुरुआती 10-12 वर्षों में कई बार कंपनी, भूमिका या शहर बदलने के लिए तैयार रहता है. ऐसे में 20-30 साल के होम लोन की बजाय किराए पर रहना उन्हें अधिक लचीलापन देता है."
उन्होंने कहा कि GCCs, स्टार्टअप्स और मल्टीनेशनल कंपनियों के विस्तार से बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे, गुरुग्राम और चेन्नई जैसे शहरों में जॉब मोबिलिटी बढ़ी है. ऐसे में युवा अपनी पूंजी को स्किल डेवलपमेंट, इक्विटी, म्यूचुअल फंड या व्यवसाय जैसे बेहतर रिटर्न देने वाले विकल्पों में लगाना चाहते हैं.
रेंटल मार्केट में भी दिख रहा बदलाव
बदलते ट्रेंड का असर रेंटल मार्केट पर भी दिखाई दे रहा है. NoBroker के अनुसार, मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) में किराए में सालाना 11 फीसदी की सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई है. इसके बाद चेन्नई में 8 फीसदी, बेंगलुरु में 7 फीसदी और हैदराबाद व दिल्ली-NCR में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.
युवा अब केवल कम किराए वाले घर नहीं, बल्कि बेहतर लोकेशन, गेटेड सोसाइटी, फर्निश्ड अपार्टमेंट और आधुनिक सुविधाओं वाले घरों को प्राथमिकता दे रहे हैं. बेंगलुरु में 3-BHK फ्लैट्स की मांग उनकी उपलब्धता से अधिक है, जबकि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में 40 हजार रुपये से अधिक मासिक किराए वाले घरों की मांग भी मजबूत बनी हुई है.
"Rent First, Buy Later" का ट्रेंड होगा मजबूत
गौरव भगत के अनुसार, आने वाले वर्षों में भारत में "Rent First, Buy Later" की सोच और मजबूत होगी. उन्होंने कहा, "युवा घर के खिलाफ नहीं हैं; वे केवल चाहते हैं कि उनका पहला घर उनकी सबसे बड़ी वित्तीय गलती नहीं, बल्कि सबसे समझदारी भरा निवेश साबित हो."
विशेषज्ञों का मानना है कि नई पीढ़ी के लिए घर खरीदना अब केवल सामाजिक जरूरत नहीं, बल्कि वित्तीय योजना का हिस्सा बन गया है. मजबूत आय, बेहतर वित्तीय तैयारी और सही समय आने पर यही युवा वर्ग रियल एस्टेट बाजार की अगली बड़ी मांग को आगे बढ़ाएगा.
IGBC सर्टिफाइड प्रोजेक्ट्स के खरीदारों को PNB की हरित आवास योजना का लाभ मिलेगा. इसके साथ ही ब्याज दर में छूट समेत कई अन्य सुविधाएं भी प्राप्त होंगी.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय हरित भवन परिषद (IGBC) और पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने भारत में ग्रीन होम ओनरशिप को बढ़ावा देने के लिए एक रणनीतिक समझौता (MoU) किया है. इस साझेदारी का उद्देश्य IGBC से प्रमाणित आवासीय परियोजनाओं के खरीदारों को प्राथमिकता वाली ग्रीन फाइनेंसिंग उपलब्ध कराना और टिकाऊ आवास को अधिक किफायती बनाना है.
इस समझौते के तहत IGBC और पंजाब नेशनल बैंक के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया जाएगा. इसके जरिए IGBC से प्रमाणित आवासीय परियोजनाओं को पंजाब नेशनल बैंक की ‘हरित निवास योजना’ के तहत शामिल किया जा सकेगा. इससे टिकाऊ घरों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और रियल एस्टेट सेक्टर में ग्रीन बिल्डिंग प्रैक्टिस को अपनाने को प्रोत्साहन मिलेगा.
4,298 ग्रीन होम प्रोजेक्ट्स को मिल चुका है IGBC सर्टिफिकेशन
भारत में ग्रीन बिल्डिंग आंदोलन में आवासीय क्षेत्र की भूमिका लगातार तेजी से बढ़ रही है. IGBC ग्रीन होम्स रेटिंग सिस्टम के जरिए देशभर में टिकाऊ आवास को बढ़ावा दिया जा रहा है. अब तक इस प्रणाली के तहत 4,298 ग्रीन होम प्रोजेक्ट्स रजिस्टर्ड हो चुके हैं, जिनका कुल क्षेत्रफल 4.68 अरब वर्ग फुट से अधिक है. यह आंकड़ा दिखाता है कि डेवलपर्स और होमबायर्स ऊर्जा की बचत करने वाले, स्वस्थ और पर्यावरण के अनुकूल घरों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. IGBC और पंजाब नेशनल बैंक की यह साझेदारी इस दिशा में एक और बड़ा कदम मानी जा रही है, जिससे प्रमाणित ग्रीन होम आम खरीदारों के लिए अधिक सुलभ हो सकेंगे.
खरीदारों को मिलेगा ब्याज दर में लाभ
पंजाब नेशनल बैंक की हरित निवास योजना के तहत IGBC प्रमाणित ग्रीन प्रोजेक्ट्स में घर खरीदने वाले ग्राहकों को कई वित्तीय लाभ मिलेंगे. इनमें मौजूदा होम लोन ब्याज दर पर 0.10 फीसदी की छूट, प्रोसेसिंग फीस में छूट, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज नहीं लगना और 5 फीसदी तक अधिक रिपेमेंट एलिजिबिलिटी जैसी सुविधाएं शामिल हैं. इन प्रोत्साहनों के जरिए खरीदारों पर लोन का बोझ कम होगा और वे पर्यावरण के अनुकूल घर खरीदने के लिए अधिक प्रेरित होंगे.
पंजाब नेशनल बैंक और IGBC का साझा लक्ष्य
पंजाब नेशनल बैंक के MSME और रिटेल डिवीजन के चीफ जनरल मैनेजर फिरोज हसनैन ने कहा, "IGBC के साथ यह साझेदारी टिकाऊ और जिम्मेदार विकास के प्रति हमारी साझा प्रतिबद्धता को मजबूत करती है. पंजाब नेशनल बैंक हरित निवास योजना के जरिए हमारा लक्ष्य ग्रीन हाउसिंग को अधिक सुलभ और किफायती बनाना है." उन्होंने कहा कि यह पहल ग्राहकों को बेहतर वित्तीय लाभ देने के साथ-साथ देश में हरित समुदायों के विकास को गति देगी.
डेवलपर्स और खरीदारों दोनों को होगा फायदा
इस साझेदारी के तहत IGBC उन आवासीय परियोजनाओं की पहचान में सहयोग करेगा, जो हरित निवास योजना के लिए IGBC प्री-सर्टिफिकेशन और सर्टिफिकेशन के योग्य होंगी. वहीं पंजाब नेशनल बैंक इन परियोजनाओं में डेवलपर्स और होमबायर्स को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगा. दोनों संस्थान किफायती ग्रीन हाउसिंग के लिए नए वित्तीय मॉडल तलाशेंगे, जिसमें IGBC ग्रीन अफोर्डेबल हाउसिंग और IGBC ग्रीन होम्स जैसी योजनाएं शामिल हैं.
ग्रीन होम से पर्यावरण और आर्थिक दोनों फायदे
IGBC ग्रीन बैंक्स एंड फाइनेंस के चेयरमैन अनुज कुमार अग्रवाल ने कहा, "IGBC और पंजाब नेशनल बैंक की साझेदारी भारत में ग्रीन होम्स को मुख्यधारा में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है. ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन को प्राथमिकता वाली फाइनेंसिंग से जोड़कर हम खरीदारों, डेवलपर्स, वित्तीय संस्थानों और पर्यावरण सभी के लिए लाभकारी व्यवस्था तैयार कर रहे हैं." उन्होंने कहा कि ग्रीन होम्स न केवल पर्यावरण संरक्षण में मदद करते हैं, बल्कि लंबे समय में ऊर्जा और पानी की खपत कम करके लागत में भी कमी लाते हैं.
भारत के सतत विकास लक्ष्यों को मिलेगा समर्थन
पंजाब नेशनल बैंक और IGBC की यह साझेदारी ग्रीन बिल्डिंग सर्टिफिकेशन को संस्थागत वित्त से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे होमबायर्स, डेवलपर्स और वित्तीय संस्थानों के लिए एक ऐसा इकोसिस्टम तैयार होगा, जो जलवायु अनुकूल, संसाधन कुशल और भविष्य के लिए तैयार आवासीय समुदायों के निर्माण में मदद करेगा. पंजाब नेशनल बैंक भारत के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में से एक है और होम लोन, कंस्ट्रक्शन फाइनेंस, MSME फाइनेंसिंग समेत कई वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराता है. वहीं, CII-इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (IGBC) की स्थापना 2001 में भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) ने भारत में ग्रीन बिल्डिंग आंदोलन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की थी. IGBC के अनुसार, देश में अब तक 16.20 अरब वर्ग फुट से अधिक ग्रीन बिल्डिंग क्षेत्र और 19,710 से अधिक परियोजनाएं उसके 33 ग्रीन और नेट जीरो रेटिंग सिस्टम को अपना चुकी हैं.
टॉप महानगरों में मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) ने सबसे मजबूत प्रदर्शन किया. देश की कुल वार्षिक हाउसिंग सेल्स में इसकी हिस्सेदारी 23.7 प्रतिशत रही और यहां सालाना आधार पर 4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई.
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रितु राणा
भारत का रियल एस्टेट सेक्टर एक बार फिर मजबूत रफ्तार पकड़ता नजर आ रहा है. आर्थिक चुनौतियों और महंगाई के दबाव के बावजूद देश के 75 प्रमुख शहरों में घरों की बिक्री मूल्य के हिसाब से 16 प्रतिशत बढ़कर 9.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई है. हालांकि बेचे गए घरों की संख्या में मामूली गिरावट दर्ज की गई, लेकिन प्रॉपर्टी कीमतों में तेजी, प्रीमियम प्रोजेक्ट्स की बढ़ती मांग और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर ने हाउसिंग मार्केट को मजबूती दी है.
बिक्री मूल्य में रिकॉर्ड बढ़ोतरी
रिसर्च फर्म Liases Foras की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में देश के 75 प्रमुख शहरों में कुल हाउसिंग सेल्स वैल्यू बढ़कर 9,32,965 करोड़ रुपये हो गई. यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 16 प्रतिशत अधिक है. हालांकि इस दौरान कुल घरों की बिक्री में हल्की गिरावट देखने को मिली. वित्त वर्ष 2025-26 में 7,09,793 यूनिट्स की बिक्री हुई, जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 7,19,029 यूनिट था.
नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग तेज
बढ़ती मांग को देखते हुए डेवलपर्स ने नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग भी तेज कर दी है. रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में नए घरों की सप्लाई 10 प्रतिशत बढ़कर 6,20,842 यूनिट तक पहुंच गई. सप्लाई बढ़ने की वजह से बिना बिके मकानों का स्टॉक भी 13 प्रतिशत बढ़कर करीब 12 लाख यूनिट तक पहुंच गया है.
टॉप शहरों में कैसा रहा प्रदर्शन?
देश के टॉप 8 महानगरों में कुल हाउसिंग सेल्स मामूली घटकर 5,07,850 यूनिट रह गई. पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 5,09,211 यूनिट था. मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (MMR) सबसे बड़ा हाउसिंग मार्केट बनकर उभरा, जिसकी कुल बिक्री में 23.7 प्रतिशत हिस्सेदारी रही. वहीं बेंगलुरु दूसरे स्थान पर रहा, जिसकी हिस्सेदारी 9.9 प्रतिशत दर्ज की गई. दूसरी ओर पूना में पर्याप्त सप्लाई होने के बावजूद हाउसिंग सेल्स में 25 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखने को मिली.
प्रॉपर्टी कीमतों में लगातार तेजी
रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान हाउसिंग प्राइस इंडेक्स में सालाना 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई. बढ़ती कीमतों के बावजूद खरीदारों की रुचि बनी हुई है, जो बाजार में मजबूत मांग का संकेत देती है.
एनसीआर बना प्रीमियम हाउसिंग का बड़ा केंद्र
वोमेकी ग्रुप के फाउंडर और चेयरमैन गौरव के सिंह ने कहा कि गुरुग्राम अब एनसीआर के सबसे मजबूत रियल एस्टेट बाजारों में शामिल हो चुका है. उनके मुताबिक, “देशभर में बिक्री की संख्या में हल्की गिरावट के बावजूद बाजार का मूल्य 16 प्रतिशत बढ़कर 9.33 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचना दिखाता है कि खरीदार अब क्वालिटी और बेहतर लोकेशन को ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं.” उन्होंने कहा कि गुरुग्राम में प्रीमियम और लग्जरी हाउसिंग की मांग, कॉरपोरेट मूवमेंट और बेहतर कनेक्टिविटी ने इसे निवेश के लिए आकर्षक डेस्टिनेशन बना दिया है.
कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग ने कहा कि गाजियाबाद तेजी से एनसीआर के उभरते रियल एस्टेट हॉटस्पॉट के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर रहा है. उन्होंने कहा कि RRTS और बेहतर कनेक्टिविटी जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है और शहर अब केवल अफोर्डेबल हाउसिंग का विकल्प नहीं, बल्कि ग्रोथ-ड्रिवन इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन रहा है.
उपभोक्ताओं का भरोसा बढ़ा
एनके रियलटर्स के मैनेजिंग डायरेक्टर पवन अग्रवाल ने कहा कि रियल एस्टेट सेक्टर की तेजी केवल कीमतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर का संकेत है. उन्होंने कहा, “आज खरीदार बेहतर लोकेशन, लाइफस्टाइल सुविधाओं और लॉन्ग-टर्म वैल्यू पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं. रियल एस्टेट अब स्थिर और दीर्घकालिक रिटर्न देने वाला एसेट क्लास बन चुका है.”
खरीदार अब गुणवत्ता को दे रहे प्राथमिकता
सांघवी रियल्टी के निदेशक पक्षाल सांघवी ने कहा कि आवास बिक्री मूल्य में मजबूत बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि भारतीय हाउसिंग मार्केट अब पहले से अधिक परिपक्व और स्थिर हो चुका है. उनके मुताबिक, “आज खरीदार बेहतर प्लानिंग, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, समय पर डिलीवरी और लंबी अवधि की वैल्यू वाले प्रोजेक्ट्स के लिए प्रीमियम कीमत चुकाने को तैयार हैं.” उन्होंने कहा कि घर अब केवल खरीदारी नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म वेल्थ क्रिएशन का माध्यम बनता जा रहा है.
ब्रह्मा ग्रुप के एवीपी ऑपरेशंस आशीष शर्मा ने कहा कि बाजार अब केवल मांग के आधार पर नहीं, बल्कि भरोसे और बेहतर मूल्य के आधार पर आगे बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, “लोग अब अच्छी लोकेशन, आधुनिक सुविधाओं और भरोसेमंद डेवलपर्स को ज्यादा महत्व दे रहे हैं. डेवलपर्स के लिए यह समय गुणवत्ता और समय पर डिलीवरी पर ज्यादा फोकस करने का है.”
जे एस्टेट्स के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अनिल गोदारा ने कहा कि यह रिपोर्ट भारतीय रेजिडेंशियल मार्केट में मजबूत उपभोक्ता मांग और बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है. उन्होंने कहा, “आज खरीदार अपने निवेश से बेहतर वैल्यू चाहते हैं और यही वजह है कि डेवलपर्स भी अधिक योजनाबद्ध और बेहतर प्रोजेक्ट्स पर ध्यान दे रहे हैं.”
मजबूत निवेश संकेत
एम3एम इंडिया के हेड कॉर्पोरेट फाइनेंस प्रतीक तिबरेवाला ने कहा कि 9.33 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था और रियल एस्टेट सेक्टर के लिए बेहद सकारात्मक संकेत है. उन्होंने कहा, “आज का खरीदार भविष्य की वैल्यू और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर को ध्यान में रखकर निवेश कर रहा है. प्रॉपर्टी की बढ़ती कीमतें और नए लॉन्च की मजबूत मांग यह दर्शाती हैं कि रियल एस्टेट अब भी सबसे सुरक्षित और हाई-रिटर्न एसेट क्लास बना हुआ है.”
टियर-2 शहरों में भी तेजी
अराइज ग्रुप के फाउंडर और मैनेजिंग डायरेक्टर अमन शर्मा ने कहा कि रियल एस्टेट ग्रोथ अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रही. उनके मुताबिक, “करनाल, सोनीपत, मोहाली और पंचकूला जैसे उभरते शहरों में भी बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वजह से मांग तेजी से बढ़ रही है.”
इस प्रोजेक्ट में स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और सोलर एनर्जी से संचालित कॉमन एरिया जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं पर भी फोकस किया गया है. कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एनसीआर के तेजी से बढ़ते रियल एस्टेट बाजार में कार्यन ग्रुप ने अपनी मौजूदगी मजबूत करते हुए गाजियाबाद के एनएच-24 पर नया लग्जरी हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘त्रेवाना रेजिडेंस’ लॉन्च किया है. वेव सिटी के सामने विकसित होने वाले इस प्रोजेक्ट में कंपनी करीब ₹900 करोड़ का निवेश करेगी, जबकि इससे लगभग ₹1,500 करोड़ के राजस्व की उम्मीद जताई जा रही है. कंपनी का कहना है कि यह प्रोजेक्ट प्रीमियम और आधुनिक लाइफस्टाइल की बढ़ती मांग को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है.
नएच-24 पर प्रीमियम हाउसिंग की बड़ी तैयारी
कार्यन ग्रुप का यह नया प्रोजेक्ट गाजियाबाद के एनएच-24 कॉरिडोर पर विकसित किया जाएगा, जिसे एनसीआर का तेजी से उभरता रिहायशी हब माना जा रहा है. दिल्ली, नोएडा और मेरठ से बेहतर कनेक्टिविटी के चलते यह इलाका लगातार निवेशकों और होमबायर्स को आकर्षित कर रहा है. आगामी मेट्रो नेटवर्क, एक्सप्रेसवे और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार ने भी इस क्षेत्र की रियल एस्टेट वैल्यू को मजबूत किया है.
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा प्रोजेक्ट
‘त्रेवाना रेजिडेंस’ में लग्जरी और आधुनिक जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए कई प्रीमियम सुविधाएं दी जाएंगी. प्रोजेक्ट में करीब 45,000 वर्ग फुट का क्लब हाउस, लैंडस्केप ग्रीन एरिया, बॉलिंग एली, पिकलबॉल कोर्ट, क्रिकेट पिच, पैडल कोर्ट, इंडोर और आउटडोर स्विमिंग पूल, फिटनेस सेंटर, जॉगिंग ट्रैक और रूफटॉप लेजर जोन जैसी सुविधाएं शामिल होंगी.
इसके अलावा स्मार्ट सिक्योरिटी सिस्टम, रेनवॉटर हार्वेस्टिंग और सोलर एनर्जी से संचालित कॉमन एरिया जैसी पर्यावरण-अनुकूल सुविधाओं पर भी फोकस किया गया है. कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है.
इतनी होगी कीमत
ये प्रोजेक्ट 5.45 एकड़ की जमीन पर तैयार होगा, जिसमें 608 रेजिडेंसिस और 16 पेंट हाउस तैयार किए जाएंगे. इसमें दो टॉवर बनाए जाएंगे और एक टॉवर में 16 फ्लोर तैयार होंगे, हर फ्लोर पर दो अपार्टमेंट बनाए जाएंगे, जिसमें होमबायर्स को 3 और 4 बीएचके वाले प्रीमियम अपार्टमेंट्स ऑफर किए जाएंगे, जिनकी कीमत करीब 2 करोड़ रुपये से शुरू होगी. वहीं, पेंट हाउस की कीमत करीब 6 करोड़ रुपये होगी.
क्यों बढ़ रही है एनएच-24 की मांग?
हालिया रियल एस्टेट रिपोर्ट्स के मुताबिक गाजियाबाद का एनएच-24 और वेव सिटी इलाका एनसीआर के सबसे तेजी से विकसित हो रहे रिहायशी बाजारों में शामिल हो चुका है. बेहतर सड़क और मेट्रो कनेक्टिविटी, बड़े आकार के घरों की मांग और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण यहां प्रॉपर्टी बाजार में लगातार तेजी देखी जा रही है. उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में प्रॉपर्टी की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है.
लग्जरी हाउसिंग पर बढ़ा डेवलपर्स का फोकस
एनसीआर में लग्जरी और अपर मिड-सेगमेंट हाउसिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है. यही वजह है कि डेवलपर्स अब इंटीग्रेटेड लाइफस्टाइल कम्युनिटीज़ विकसित करने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं. ऐसे प्रोजेक्ट्स में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, हरित वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और लंबे समय में बेहतर प्रॉपर्टी वैल्यू जैसी चीजों को प्राथमिकता दी जा रही है.
“प्रीमियम लाइफस्टाइल को नई पहचान देगा प्रोजेक्ट”
कार्यन ग्रुप के डायरेक्टर वरुण गर्ग ने कहा कि ‘त्रेवाना रेजिडेंस’ के जरिए कंपनी का उद्देश्य एनएच-24 कॉरिडोर पर प्रीमियम जीवनशैली को नई पहचान देना है. उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट आधुनिक होमबायर्स की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां विशाल घर, बेहतर लाइफस्टाइल सुविधाएं, प्रदूषण-मुक्त वातावरण और एनसीआर के प्रमुख इलाकों तक आसान पहुंच उपलब्ध होगी.
दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ा रहा विस्तार
कार्यन ग्रुप पिछले 15 वर्षों से रियल एस्टेट, वेयरहाउसिंग और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में काम कर रहा है. कंपनी का फोकस गुणवत्ता, समय पर डिलीवरी और ग्राहक-केंद्रित विकास मॉडल पर रहा है. ग्रुप का कहना है कि वह आने वाले समय में दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट बाजार में अपनी मौजूदगी को और मजबूत करने की दिशा में काम करता रहेगा.
यह जमीन सरयू नदी के किनारे स्थित HoABL की 75 एकड़ की लग्जरी परियोजना “द सरयू” के निकट है. यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट परिदृश्य को दर्शाता है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय सिनेमा के महानायक अमिताभ बच्चन ने अयोध्या में 2.67 एकड़ का एक बड़ा भूमि पार्सल 35 करोड़ रुपये में खरीदा है. यह भूमि हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा (HoABL) से अधिग्रहित की गई है. HoABL रियल एस्टेट क्षेत्र में अपनी पारदर्शी भूमि स्वामित्व प्रणाली के लिए जाना जाता है.
यह सौदा एबी कॉर्प लिमिटेड के प्रबंध निदेशक राजेश यादव द्वारा संपन्न किया गया. यह जमीन सरयू नदी के किनारे स्थित HoABL की 75 एकड़ की लग्ज़री परियोजना “द सरयू” के निकट है. यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहे रियल एस्टेट परिदृश्य को दर्शाता है.
अमिताभ बच्चन और HoABL का जुड़ाव
गौरतलब है कि अमिताभ बच्चन जनवरी 2024 में “द सरयू” परियोजना के पहले निवेशक बने थे. अयोध्या में यह उनका HoABL के साथ तीसरा निवेश है. यह कदम शहर के बढ़ते महत्व और कंपनी के मॉडल में उनके विश्वास को दर्शाता है.
अयोध्या में विकास और पर्यटन
पिछले कुछ वर्षों में अयोध्या ने बुनियादी ढांचे के विकास, बेहतर कनेक्टिविटी और बढ़ते पर्यटन के कारण तेज़ी से प्रगति की है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मंदिर निर्माण से पहले जहां 5.75 करोड़ श्रद्धालु आते थे, वहीं जनवरी से जून 2025 के बीच यह संख्या बढ़कर 23 करोड़ हो गई है. साल के अंत तक यह आंकड़ा 50 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.
HoABL के चेयरमैन अभिनंदन लोढ़ा ने इस निवेश पर कहा कि भूमि को दीर्घकालिक संपत्ति के रूप में देखा जाना चाहिए, जो पीढ़ियों तक मूल्य बनाए रखती है. उन्होंने अयोध्या को एक ऐसी “विरासत” बताया, जहां आस्था और निवेश दोनों का संगम होता है.
बॉलीवुड सितारों का निवेश
अमिताभ बच्चन ने HoABL की अलीबाग स्थित “सोल डी अलीबाग” परियोजना में भी निवेश किया है. इस परियोजना में कृति सेनन और कार्तिक आर्यन जैसे बॉलीवुड सितारे भी शामिल हैं. कंपनी के अनुसार, उनके 65% से अधिक ग्राहक सीईओ, सीएक्सओ और बैंकिंग, फार्मा व मनोरंजन जगत से जुड़े प्रतिष्ठित लोग हैं.
अयोध्या का तेजी से होता विकास इसे भारत के प्रमुख आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और रियल एस्टेट केंद्र के रूप में स्थापित कर रहा है. इससे निवेशकों की रुचि लगातार बढ़ रही है.
शुभ आरंभ के साथ गोदरेज साउथ एस्टेट में शुरू हुआ यह नया अध्याय दिखाता है कि अगर पर्यावरण को केंद्र में रखा जाए, तो शहरी जीवन न सिर्फ बेहतर बल्कि ज्यादा स्वस्थ और संतुलित भी बन सकता है.
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रितु राणा
तेजी से प्रदूषित होते शहरी माहौल और बिगड़ती वायु गुणवत्ता के बीच, रियल एस्टेट में अब पर्यावरण और वेलनेस को केंद्र में रखने वाली सोच आकार ले रही है. इसी दिशा में गोदरेज प्रॉपर्टीज ने अपने सिग्नेचर होम-हैंडओवर कार्यक्रम ‘शुभ आरंभ’ के ज़रिये दिल्ली में ग्रीन और हेल्दी अर्बन लिविंग की नई मिसाल पेश की है.
गोदरेज प्रॉपर्टीज की नॉर्थ ज़ोन की सीईओ गीतिका त्रेहान के मुताबिक, “शुभ आरंभ केवल घरों की चाबी सौंपने का अवसर नहीं है, बल्कि यह हमारे गृहस्वामियों के लिए एक सुविचारित जीवन अनुभव की शुरुआत है. आज लक्ज़री की परिभाषा बदल रही है, जहां वेलनेस, सोच-समझकर किया गया डिज़ाइन और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता सबसे अहम हो गए हैं.”
शुभ आरंभ के साथ सस्टेनेबल जीवन की शुरुआत
ओखला स्थित गोदरेज साउथ एस्टेट में आयोजित इस विशेष गृह-प्रवेश समारोह के दौरान परिवारों को न सिर्फ अपने नए घरों की चाबियां सौंपी गईं, बल्कि उन्हें एक ऐसे समुदाय का हिस्सा बनाया गया, जो स्वच्छ हवा, खुले हरित स्थानों और संतुलित जीवनशैली पर आधारित है. ‘शुभ आरंभ’ को एक भावनात्मक और अर्थपूर्ण अनुभव के रूप में डिजाइन किया गया, ताकि घर की हैंडओवर प्रक्रिया केवल एक औपचारिकता न रहकर नई शुरुआत का प्रतीक बने.
वेलनेस-आधारित डिजाइन में पर्यावरण की अहम भूमिका
दक्षिण दिल्ली के इस रिहायशी प्रोजेक्ट को खास तौर पर पर्यावरणीय संतुलन और निवासियों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. यहां ग्रीन बफर्स, ओपन स्पेस, बेहतर वेंटिलेशन और स्मार्ट प्लानिंग को प्राथमिकता दी गई है, ताकि शहरी जीवन के बीच भी प्रकृति से जुड़ाव बना रहे.
गीतिका त्रेहान ने कहा कि गोदरेज साउथ एस्टेट में वायु गुणवत्ता, खुले स्थान और सूझबूझ भरी योजना को घरों की बुनियाद में शामिल किया गया है. उनका कहना है कि बदलती जीवनशैली के साथ होमबायर्स अब ऐसे घर चाहते हैं, जो पर्यावरण के अनुकूल हों और लंबे समय तक स्वस्थ जीवन का आधार बन सकें.
क्लीन एयर टेक्नोलॉजी से बेहतर शहरी जीवन
पर्यावरणीय दृष्टि से इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत यहां अपनाई गई उन्नत क्लीन-एयर तकनीक है. गोदरेज प्रॉपर्टीज ने इनडोर स्पेस के लिए सेंट्रलाइज़्ड ट्रीटेड फ्रेश एयर (CTFA) और आउटडोर क्षेत्रों के लिए मैकेनिकल फिल्टर-लेस फ्रेश एयर (MFFA) सिस्टम को एकीकृत किया है. इन तकनीकों की मदद से इनडोर और आउटडोर दोनों जगहों पर वायु गुणवत्ता में मापने योग्य सुधार दर्ज किया गया है.
यह पहल दिखाती है कि अगर रिहायशी परियोजनाओं को सही सोच और तकनीक के साथ डिज़ाइन किया जाए, तो वे प्रदूषण जैसी शहरी समस्याओं से निपटने में भी योगदान दे सकती हैं.
सेलिब्रिटी मौजूदगी ने बढ़ाया संदेश का असर
इस मौके पर डिजाइनर और अभिनेत्री रिद्धिमा कपूर साहनी की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और खास बना दिया. उन्होंने कहा कि दिल्ली जैसे शहर में स्वस्थ और स्वच्छ जीवन पर दिया गया यह ध्यान अब लग्ज़री नहीं, बल्कि समय की जरूरत बन चुका है. उनके अनुसार, गोदरेज साउथ एस्टेट जैसे प्रोजेक्ट्स यह दिखाते हैं कि आधुनिक शहरी जीवन में भी स्वास्थ्य, पर्यावरण और जीवन की गुणवत्ता को प्राथमिकता दी जा सकती है.
पर्यावरण-संवेदनशील रियल एस्टेट की ओर बढ़ता कदम
गोदरेज प्रॉपर्टीज का यह प्रयास इस बात का संकेत है कि भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर अब केवल कंस्ट्रक्शन और सुविधाओं तक सीमित नहीं रह गया है. ग्रीन डिजाइन, स्वच्छ हवा, वेलनेस और सस्टेनेबिलिटी अब घर खरीदने के फैसले में अहम भूमिका निभा रहे हैं.