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ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन क्या FTA के लिए है शुभ, मुक्त व्यापार समझौते पर बनेगी बात?

ब्रिटेन के नए विदेश मंत्री डेविड लैमी भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते यानी FTA के पक्षधर हैं. वह इसे जल्द से जल्द अमल में लाना चाहते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारत-ब्रिटेन के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) जल्द अमल में आ सकता है. पिछले काफी समय से इस पर बातचीत चल रही है, लेकिन किसी न किसी वजह से पेंच फंस जाता है.  बोरिस जॉनसन और फिर ऋषि सुनक की सरकारों में भी इस पर कोई फैसला नहीं हो पाया था. हालांकि, लेबर पार्टी की सरकार ने FTA को जल्द अमल में आने की इच्छा दर्शाई है. ब्रिटेन के नए विदेश मंत्री डेविड लैमी (David Lammy) का कहना है कि वह भारत सरकार के मंत्रियों के साथ मिलकर इसे जल्द पूरा करने की दिशा में काम करेंगे. लैमी इसी महीने भारत यात्रा पर भी आ सकते हैं.

आगे बढ़ने को हैं तैयार
चुनावी नतीजों से पहले डेविड लैमी ने भारत के साथ FTA का खुलकर समर्थन किया था. उन्होंने कहा था कि लेबर पार्टी इस पर आगे बढ़ने के लिए तैयार है. साथ ही उन्होंने फ्री ट्रेड डील पर पूर्व PM बोरिस जॉनसन को घेरते हुए कहा था कि ट्रेड डील के बिना कई दिवाली आई और गईं, कई बिजनेस इसका इंतजार कर रहे हैं. लेकिन हम इस पर आगे बढ़ने के लिए तैयार हैं. गौरतलब है कि बोरिस जॉनसन सरकार ने इस डील को 2022 की दिवाली तक फाइनल करने का वादा किया था, मगर ऐसा हुआ नहीं. 

यहां अटकी रही बात 
FTA को लेकर अब तक दोनों देशों के बीच 14 दौर की वार्ता हो चुकी है. कई मुद्दों पर सहमति भी बनी है, लेकिन माल, सेवाएं और निवेश पर सहमति बनना अभी बाकी है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन चाहता है कि भारत, UK होने वाले निर्यात पर टैरिफ कम करे, जो कि अभी 150 प्रतिशत जितना ज्यादा है. जबकि भारत की मांग थी  कि ब्रिटेन में कार्यरत भारतीयों के मामले में नियम निष्पक्ष रहें और उन्हें नेशनल इंश्योरेंस के तहत कवर भी प्रदान किया जाए. इन मुद्दों को लेकर बात अटकती रही है. 

क्या है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दो या फिर इससे ज्यादा देशों के बीच उत्पादों और सेवाओं के आयात-निर्यात में आने वालीं रुकावटों को कम करने के लिए किया जाना वाले समझौता होता है. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में कोटा, टैरिफ, सब्सिडी या फिर ऐसे प्रतिबंधों को कम किया जाता है, जो सीमा पार वस्तुओं-सेवाओं को लाने- ले जाने को सीमित कर सकते हैं. जैसा कि इसका नाम है, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार की अनुमति देता है. इस एग्रीमेंट में सेवाएं, निवेश, सामान, बौद्धिक संपदा, प्रतिस्पर्धा, सरकारी खरीद और अन्य क्षेत्रों को शामिल किया जा सकता है. सीधे शब्दों में कहें तो ये एग्रीमेंट दोनों देशों के बीच व्यवसाय को बढ़ावा देने की राह में आने वालीं सभी बाधाओं को हटा देगा.

किस तरह मिलेगा फायदा?
फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारत के एक्सपोर्ट सेक्टर में तेजी आएगी. इसके अलावा, देश के लेबर इंसेंटिव सेक्टर जैसे प्रोसेस्ड एग्रो, लेदर, टेक्सटाइल और ज्वेलरी प्रोडक्ट्स को भी बढ़ावा मिलेगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे. भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार 2021-22 में 17.5 अरब डॉलर था. 2022-23 में यह बढ़कर 20.42 अरब डॉलर हो गया. भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार अधिकतम सर्विस सेक्टर पर निर्भर करता है, जो कि कुल ट्रेड का 70% हिस्सा है. भारत यूके का 12वां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है. जबकि UK भारत का 7वां सबसे बड़ा निर्यातक देश है. ऐसे में दोनों देश इस एग्रीमेंट के जरिए व्यापार में आने वालीं परेशानियों को दूर करके आर्थिक विकास में तेजी लाना चाहते हैं. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत और ब्रिटेन के लिए महत्वपूर्ण है. भारत ने भूटान, नेपाल, थाईलैंड, सिंगापुर, जापान और मलेशिया आदि देशों से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हुए हैं.

कैसा है दोनों देशों का कारोबार?
FTA अमल में आने से जहां भारत, ब्रिटेन के लिए बड़ा निर्यातक देश बन सकता है. वहीं, ब्रिटेन की अपनी प्रीमियम कारें, व्हिस्की और अन्य सेवाओं के लिए भारत जैसे बड़े बाजार में पहुंच आसान हो जाएगी. कन्फेडरेशन ऑफ ब्रिटिश इंडस्ट्री (CBI) के अनुसार, एफटीए से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी. इसके अमल में आने से 2035 तक भारत के साथ ब्रिटेन का व्यापार 28 बिलियन पाउंड प्रति वर्ष तक बढ़ा सकता है. ब्रिटेन, भारत से मुख्य तौर पर कपड़े, रत्न, आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम, पेट्रो रसायन उत्पाद के साथ-साथ परिवहन उपकरण, मसाले, मशीनरी, फार्मास्युटिकल्स और समुद्री उत्पाद खरीदता है. जबकि भारत ब्रिटेन से बहुमूल्य रत्न, धातु, अयस्क, इंजीनियरिंग आइटम्स, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद, रसायन आदि मंगवाता है.
 


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