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भारत में तुर्किये के सामान का बहिष्कार तेज, ट्रैवल बुकिंग में 60% की गिरावट दर्ज

तुर्किये द्वारा पाकिस्तान का समर्थन किए जाने के बाद भारत में इसके खिलाफ जनभावनाएं तेज़ हो गई हैं, जिसका असर स्पष्ट रूप से व्यापार, पर्यटन और निवेश पर दिखाई दे रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारत में तुर्किये के खिलाफ जनभावनाएं उस समय भड़क उठीं जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद "ऑपरेशन सिंदूर" के दौरान तुर्किये ने पाकिस्तान का खुला समर्थन किया. इसके विरोध में भारतीयों ने तुर्किये के उत्पादों के बहिष्कार के साथ-साथ वहां पर्यटन और व्यापारिक गतिविधियों से दूरी बनानी शुरू कर दी है.

बुकिंग प्लेटफॉर्म्स ने तुर्किये की यात्रा अस्थायी रूप से रोकी
जनभावनाओं के साथ कदम से कदम मिलाते हुए भारत की कुछ प्रमुख ट्रैवल और बुकिंग कंपनियों ने तुर्किये के लिए अपनी सेवाएं अस्थायी रूप से निलंबित कर दी हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मेकमाईट्रिप वेबसाइट पर पिछले सप्ताह के भीतर तुर्किये और अजरबैजान की यात्राओं की बुकिंग में 60% की गिरावट आई है, जबकि टिकट रद्द कराने के मामलों में 250% की अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है.

पर्यटन में ऐतिहासिक गिरावट
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब तुर्किये जाने वाले भारतीय पर्यटकों की संख्या अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर थी. वर्ष 2009 में जहां लगभग 55,000 भारतीय तुर्किये गए थे, वहीं 2019 में यह आंकड़ा 2,30,131 तक पहुंच गया. महामारी के बाद 2024 में यह संख्या बढ़कर 3,30,985 हो गई थी. लेकिन अब मौजूदा हालातों के चलते इस रुझान पर विराम लगता दिखाई दे रहा है.

व्यापार और निवेश संबंधों पर भी असर की आशंका
भारत और तुर्किये के बीच व्यापारिक संबंधों में भारत अब भी अधिशेष बनाए हुए है, लेकिन पिछले दो वर्षों से यह अधिशेष घट रहा है. तुर्किये से भारत में आने वाला प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) 2018 से लगातार गिर रहा है, जबकि भारत का तुर्किये में किया गया निवेश बढ़ रहा है. मौजूदा बहिष्कार के माहौल से इन प्रवाहों पर भी असर पड़ सकता है.

भारतीय एयरपोर्ट्स पर तुर्की कंपनियों के भविष्य पर सवाल
तुर्किये की कंपनियां जैसे सेलेबी एयरपोर्ट सर्विसेज और टर्किश टेकनिक, जो भारत के कई एयरपोर्ट्स पर कार्यरत हैं, अब इस तनाव का आर्थिक असर झेल सकती हैं. सेलेबी फिलहाल भारत के नौ प्रमुख हवाई अड्डों पर परिचालन करती है, जो उसके कुल कारोबार का 25% है. यह सालाना 58,000 से अधिक उड़ानों और 5,40,000 टन कार्गो का प्रबंधन करती है, और इसमें लगभग 7,800 कर्मचारी कार्यरत हैं. भारत-पाक संघर्ष में तुर्किये के पक्ष में आने से इन कंपनियों का संचालन खतरे में पड़ सकता है.


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