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PFC-REC विलय को बोर्ड की मंजूरी, बनेगी देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी; शेयरों में दिखी हलचल
11 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की संयुक्त लोन बुक के साथ उभरेगा नया वित्तीय दिग्गज, शेयरधारकों को मिलेगा शेयर-स्वैप का लाभ
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
सरकारी क्षेत्र की दो प्रमुख पावर फाइनेंस कंपनियां पावर फाइनेंस कॉर्पोरेशन (PFC) और रूरल इलेक्ट्रिफिकेशन कॉरपोरेशन (REC) के प्रस्तावित विलय की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. दोनों कंपनियों के बोर्ड ने मर्जर योजना को मंजूरी दे दी है. इस विलय के बाद 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संयुक्त लोन बुक वाली देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी अस्तित्व में आएगी. सरकार के पुनर्गठन कार्यक्रम के तहत हो रहा यह विलय न केवल पावर सेक्टर के लिए अहम माना जा रहा है, बल्कि निवेशकों के लिए भी कई महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आएगा.
शेयर-स्वैप रेश्यो तय
मर्जर योजना के तहत REC का PFC में विलय किया जाएगा. इसके लिए शेयर-स्वैप रेश्यो भी तय कर दिया गया है. योजना के अनुसार REC के प्रत्येक 100 शेयरों के बदले निवेशकों को PFC के 88 शेयर दिए जाएंगे. यदि किसी निवेशक के पास रिकॉर्ड डेट पर REC के 100 शेयर होंगे, तो विलय के बाद उसे PFC के 88 शेयर मिलेंगे और REC के उसके मौजूदा शेयर समाप्त हो जाएंगे.
सरकार और PFC की हिस्सेदारी
वर्तमान में PFC के पास REC में 52.63 प्रतिशत हिस्सेदारी है. वहीं केंद्र सरकार की PFC में 55.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है. हालांकि REC में सरकार की कोई प्रत्यक्ष हिस्सेदारी नहीं है. सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 के दौरान दोनों कंपनियों के पुनर्गठन का संकेत दिया था. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फरवरी में इस दिशा में कदम उठाने की घोषणा की थी.
अभी कई मंजूरियां मिलना बाकी
हालांकि बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद भी यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है. मर्जर योजना को लागू करने के लिए शेयरधारकों, स्टॉक एक्सचेंजों, सेबी, एनसीएलटी और अन्य नियामकीय संस्थाओं की मंजूरी आवश्यक होगी. इसके अलावा रिकॉर्ड डेट का भी अभी ऐलान नहीं किया गया है. इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही विलय प्रभावी होगा.
शेयर बाजार की प्रतिक्रिया
मर्जर की खबर के बाद शेयर बाजार में दोनों कंपनियों के शेयरों में अलग-अलग प्रतिक्रिया देखने को मिली. आज खबर लिखे जाने तक PFC के शेयरों में 1.69 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि REC के शेयरों में 0.27 प्रतिशत की मामूली बढ़त देखने को मिली. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशक फिलहाल मर्जर की शर्तों और भविष्य के प्रभावों का आकलन कर रहे हैं.
विशेषज्ञों के अनुसार, PFC अपेक्षाकृत सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में दिखाई देता है. वहीं REC फिलहाल मर्जर-आर्बिट्रेज की स्थिति में है, जहां इवेंट आधारित जोखिम अधिक बना हुआ है. उनका कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र की वित्तीय कंपनियों में केवल कमाई ही नहीं, बल्कि कंपनी की संरचना और दीर्घकालिक रणनीति भी निवेश निर्णयों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है.
पावर सेक्टर को मिल सकती है नई ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों कंपनियों के विलय से पूंजी की लागत कम करने, परिचालन क्षमता बढ़ाने और वित्तीय संसाधनों के बेहतर उपयोग में मदद मिलेगी. इससे बिजली क्षेत्र की परियोजनाओं को वित्तपोषण देने की क्षमता भी मजबूत होगी. देश की सबसे बड़ी पावर फाइनेंस कंपनी बनने के बाद नई इकाई पावर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में अपनी भूमिका और प्रभाव को और मजबूत कर सकती है.
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