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ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम: केंद्र सरकार ने दी नई 'शक्ति' योजना को मंजूरी
इस पहल से न केवल आयातित कोयले पर निर्भरता घटेगी और विदेशी मुद्रा की बचत होगी, बल्कि घरेलू ऊर्जा आत्मनिर्भरता को भी बल मिलेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बिजली क्षेत्र के लिए कोयला आवंटन की पारदर्शी प्रक्रिया को सुनिश्चित करने हेतु संशोधित ‘शक्ति’ योजना को मंजूरी दे दी. इस कदम से ताप विद्युत संयंत्रों को कोयला लिंकेज सुनिश्चित किया जाएगा और आयातित कोयले पर निर्भरता में कमी आएगी. आइए इसके बारे में विस्तार से जातने हैं.
ताप विद्युत संयंत्रों को मिलेगा कोयला लिंकेज
संशोधित योजना के तहत केंद्र सरकार, राज्य सरकारों और स्वतंत्र बिजली उत्पादकों (IPPs) के ताप विद्युत संयंत्रों को कोयले की लिंकेज प्रदान की जाएगी. इससे उन्हें उनकी ऊर्जा उत्पादन आवश्यकताओं के लिए आवश्यक कोयले की आपूर्ति में मदद मिलेगी. सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘अधिसूचित मूल्य पर कोयला’ श्रेणी के तहत संयुक्त उपक्रमों और उनकी अनुषंगी कंपनियों सहित केंद्रीय क्षेत्र की परियोजनाओं को कोयला लिंकेज की मौजूदा व्यवस्था यथावत जारी रहेगी.
दो नई लिंकेज खिड़कियों का प्रस्ताव
नई नीति के तहत दो नई लिंकेज खिड़कियों को शामिल किया गया है:
1.पहली खिड़की: इसमें केंद्र और राज्यों के संयुक्त उपक्रमों को नामांकन के आधार पर कोयला लिंकेज मिलेगा. राज्य अपने हिस्से का कोयला अपने विद्युत निगमों, टैरिफ आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) के माध्यम से चयनित IPPs या बिजली खरीद समझौते (PPA) रखने वाले उत्पादकों को दे सकेंगे.
2. दूसरी खिड़की: घरेलू कोयला आधारित विद्युत उत्पादक, जिनके पास PPA है या नहीं है, और आयातित कोयला आधारित संयंत्र, नीलामी के माध्यम से 12 महीने से लेकर 25 वर्ष तक के लिए कोयला प्राप्त कर सकेंगे. इससे उन्हें खुले बाजार में बिजली बेचने की भी सुविधा मिलेगी.
नीति में संरचनात्मक सरलीकरण
संशोधित ‘शक्ति’ योजना के तहत अब तक के आठ जटिल आवंटन प्रावधानों को केवल दो खिड़कियों में विभाजित किया गया है, जिससे नीति अधिक सरल और लागू करने योग्य बन गई है. इससे कोयला आवंटन की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी बनेगी.
आयात में कमी, प्रतिस्थापन को मिलेगा बढ़ावा
नई नीति से देश में कोयले के आयात में कमी आने की संभावना है, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी. साथ ही यह घरेलू कोयला उपयोग को प्राथमिकता देते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देगी.
पुराने संयंत्रों का विस्तार और नए संयंत्रों को बढ़ावा
संशोधित योजना से पुराने ताप विद्युत संयंत्रों के विस्तार को बल मिलेगा. इसके साथ ही कोयला स्रोतों के निकट नए संयंत्रों की स्थापना को भी प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिससे ट्रांसपोर्ट लागत में कमी आएगी और बिजली उत्पादन अधिक किफायती होगा. कैबिनेट के अनुसार, यह योजना न केवल बिजली एक्सचेंजों पर बिजली की उपलब्धता को बढ़ाएगी, बल्कि उत्पादन केंद्रों के न्यूनतम उपयोग की गारंटी भी देगी. इससे भारत के ऊर्जा क्षेत्र में स्थिरता और विश्वसनीयता सुनिश्चित होगी.
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