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वित्त मंत्रालय का बड़ा कदम: तंबाकू-सिगरेट पर 1 फरवरी से बढ़ेगा उत्पाद शुल्क
वित्त मंत्रालय की यह नई अधिसूचना तंबाकू और सिगरेट उद्योग में पारदर्शिता बढ़ाने और राजस्व संग्रह को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago
वित्त मंत्रालय ने तंबाकू और सिगरेट जैसे उत्पादों पर नए उत्पाद शुल्क नियमों की घोषणा की है. 1 फरवरी 2026 से ये नियम लागू होंगे. नई अधिसूचनाओं के तहत चबाने वाले तंबाकू, जर्दा और गुटखा के लिए क्षमता-आधारित शुल्क व्यवस्था लागू होगी, जबकि सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर शुल्क दरों में भी संशोधन किया गया है. मंत्रालय का कहना है कि यह कदम उत्पादन की सही रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने और सरकारी खजाने के लिए राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से लिया गया है.
नई क्षमता-आधारित शुल्क व्यवस्था
चबाने वाले तंबाकू, जर्दा सुगंधित तंबाकू और गुटखा पैकिंग मशीन (क्षमता निर्धारण और शुल्क संग्रह) नियम, 2026’ के तहत अब उत्पादित वस्तुओं की वास्तविक मात्रा के बजाय कारखाने में स्थापित पैकिंग मशीनों की क्षमता के आधार पर शुल्क लगाया जाएगा. शुल्क की गणना एक सूत्र के आधार पर की जाएगी, जिसमें अधिकतम रेटेड गति (पाउच प्रति मिनट) और उत्पाद की खुदरा बिक्री मूल्य को ध्यान में रखा जाएगा. यह कदम उत्पादन की कम रिपोर्टिंग को रोकने और राजस्व संग्रह को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है.
सिगरेट पर बढ़ी शुल्क दरें
सरकार ने एक अलग अधिसूचना के जरिए सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों के लिए उत्पाद शुल्क में संशोधन किया है. 65 मिलीमीटर तक लंबी बिना फिल्टर वाली सिगरेट पर अब 2,050 रुपये प्रति हजार नग शुल्क लगेगा, जबकि 65-70 मिलीमीटर लंबी सिगरेट पर यह 3,600 रुपये प्रति हजार होगी. फिल्टर युक्त सिगरेट के लिए लंबाई के अनुसार शुल्क 2,100 रुपये से लेकर 8,500 रुपये प्रति हजार तक तय किए गए हैं.
कठोर अनुपालन और निगरानी
चबाने वाले तंबाकू और गुटखा निर्माताओं को 7 फरवरी 2026 तक या उत्पादन शुरू करने के सात दिनों के भीतर आधिकारिक पोर्टल पर सभी पैकिंग मशीनों का विस्तृत घोषणापत्र दाखिल करना होगा. उत्पाद शुल्क अधिकारी इस घोषणापत्र का सत्यापन करेंगे, जिसमें कारखाने का निरीक्षण भी शामिल होगा.
सभी पैकिंग क्षेत्रों में कार्यात्मक सीसीटीवी निगरानी प्रणाली अनिवार्य होगी और फुटेज 48 महीनों तक सुरक्षित रखना होगा. मशीनरी में किसी भी संशोधन की पूर्व सूचना देना जरूरी होगा, जिससे शुल्क दायित्व का पुनर्मूल्यांकन हो सकता है.
इनपुट टैक्स क्रेडिट में बदलाव
नई व्यवस्था के तहत निर्माताओं को केवल उन अधिसूचित वस्तुओं के थोक पैक पर चुकाए गए शुल्क पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने की अनुमति होगी, जबकि अन्य कच्चे माल या पूंजीगत वस्तुओं के लिए कोई क्रेडिट उपलब्ध नहीं होगा.
वित्त मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि इन परिवर्तनों को जीएसटी राजस्व निकासी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. संवैधानिक ढांचे के तहत तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क लगाने का अधिकार केंद्र की विधायी क्षमता के भीतर आता है. सिगरेट और तंबाकू उन कुछ उत्पादों में से हैं जिस पर जीएसटी और उत्पाद शुल्क दोनों ही लगाया जा सकता है, और सर्वोच्च न्यायालय ने भी यह व्यवस्था बरकरार रखी है.
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