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SEBI का बड़ा फैसला: PMS के जरिए म्युचुअल फंड में निवेश का रास्ता खुला, कई नियम बदले
SEBI ने REIT और InvIT की यूनिट्स पर डिपॉजिटरी रिसीट जारी करने की भी मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य इन निवेश साधनों में विदेशी पूंजी की भागीदारी बढ़ाने से जुड़ा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) से जुड़े नियमों में कई अहम बदलावों को मंजूरी दी है. इसके तहत PMS कंपनियां अब पोर्टफोलियो मैनेजर रूट फॉर इन्वेस्टमेंट इन म्यूचुअल फंड्स (PRIM) के जरिए ग्राहकों का पैसा म्युचुअल फंड की डायरेक्ट योजनाओं और स्पेशलाइज्ड इनवेस्टमेंट फंड (SIF) में लगा सकेंगी. इसके अलावा नियामकीय मामलों के सेटलमेंट, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI), PMS के निवेश विकल्पों और विज्ञापन नियमों में भी बदलाव किए गए हैं.
PMS के जरिए म्युचुअल फंड में निवेश का विकल्प
SEBI ने म्युचुअल फंड यूनिट्स में निवेश के लिए पोर्टफोलियो मैनेजर रूट यानी PRIM शुरू करने की मंजूरी दी है. इसके तहत मौजूदा PMS कंपनियां इसे अलग निवेश रणनीति के रूप में पेश कर सकेंगी और ग्राहकों की ओर से म्युचुअल फंड की डायरेक्ट योजनाओं तथा SIF में निवेश कर सकेंगी.
PRIM के तहत न्यूनतम निवेश सीमा 25 लाख रुपये तय की गई है. इससे बड़ी रकम निवेश करने वाले निवेशकों के लिए PMS के जरिए म्युचुअल फंड योजनाओं में निवेश का एक नया विकल्प उपलब्ध होगा.
स्वतंत्र फंड मैनेजर की नई कैटेगरी
SEBI ने इंडिपेंडेंट फंड मैनेजर यानी स्वतंत्र फंड मैनेजर की नई श्रेणी को भी मंजूरी दी है. ये फंड मैनेजर किसी रजिस्टर्ड पोर्टफोलियो मैनेजर के साथ मिलकर ग्राहकों के पोर्टफोलियो का प्रबंधन कर सकेंगे. इसके लिए निवेशकों के हितों की सुरक्षा से जुड़ी निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा.
इसके अलावा डिस्क्रिशनरी PMS को ग्राहक की सहमति से उसके कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) का अधिकतम 10 फीसदी हिस्सा बेहतर क्रेडिट रेटिंग वाली अनलिस्टेड डेट सिक्योरिटीज में निवेश करने की अनुमति होगी.
PMS कंपनियां IPO, प्राइमरी मार्केट में जारी होने वाले डेट इंस्ट्रूमेंट्स और एक्सचेंज पर कारोबार करने वाले डेरिवेटिव्स में भी निवेश कर सकेंगी. SEBI ने PMS से जुड़े नियमों की भाषा को सरल बनाने और अप्रासंगिक प्रावधानों को हटाने का भी फैसला किया है.
SEBI मामलों के सेटलमेंट की प्रक्रिया बदली
SEBI ने नियामकीय मामलों को सेटलमेंट यानी समझौते के जरिए निपटाने से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया है. नए नियमों के तहत कारण बताओ नोटिस जारी करने से पहले संबंधित कंपनी या व्यक्ति को सेटलमेंट नोटिस दिया जाएगा. इसके बाद सेटलमेंट के लिए आवेदन करने को 60 दिन का समय मिलेगा. हालांकि, ऐसे मामले जिनमें अंतरिम आदेश जारी होने की संभावना हो, इस सुविधा के दायरे में नहीं आएंगे.
वित्तीय विवरण में गलत जानकारी देने या कंपनी के फंड को दूसरी जगह भेजने से जुड़े मामलों को भी सेटलमेंट के दायरे में शामिल किया गया है. सेटलमेंट राशि तय करने के लिए नया फॉर्मूला बनाया जाएगा, जबकि गलत तरीके से हुई कमाई को अलग आधार पर देखा जाएगा. डिस्क्लोजर से जुड़े छोटे मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक सेटलमेंट की सुविधा भी शुरू की जाएगी. यह उन मामलों में उपलब्ध होगी, जिनमें समझौता राशि 10 लाख रुपये तक होगी.
FPI को कमोडिटी डेरिवेटिव्स में निवेश की अनुमति
SEBI ने विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) को गैर-कृषि कमोडिटी इंडेक्स डेरिवेटिव्स में निवेश की अनुमति देने का फैसला किया है. वे ऐसे गैर-कृषि कमोडिटी सौदों में भी हिस्सा ले सकेंगे, जिनका निपटारा नकदी के बजाय अन्य तरीके से होता है. हालांकि, वास्तविक डिलिवरी की जिम्मेदारी आने से पहले उन्हें अपनी पोजीशन बंद करनी होगी.
इसके अलावा SEBI ने REIT और InvIT की यूनिट्स पर डिपॉजिटरी रिसीट जारी करने की भी मंजूरी दी है. इसका उद्देश्य इन निवेश साधनों में विदेशी पूंजी की भागीदारी बढ़ाने से जुड़ा है.
विज्ञापन नियमों में भी बदलाव
SEBI ने कुछ पंजीकृत संस्थाओं के लिए एक समान विज्ञापन संहिता को मंजूरी दी है. इसके तहत ब्रांड या संस्था के प्रचार के लिए मशहूर हस्तियों का इस्तेमाल किया जा सकेगा. कई तरह के विज्ञापनों के लिए पहले से मंजूरी लेने की अनिवार्यता भी हटाई जाएगी. हालांकि, मशहूर हस्तियों वाले विज्ञापनों के लिए पूर्व मंजूरी की शर्त जारी रहेगी.
इसके अलावा SEBI ने रिसर्च एनालिस्ट और रिसर्च संस्थाओं को संस्थागत ग्राहकों के साथ हुई बातचीत की कॉल रिकॉर्डिंग रखने की अनिवार्यता से राहत दी है. वॉल्ट मैनेजर, REIT, InvIT और पहली बार सूचीबद्ध बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों से जुड़े कुछ नियमों में भी बदलाव किए गए हैं.
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