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फेस्टिव सीजन से पहले खाद्य तेल पर राहत, क्रूड सोयाबीन-पाम ऑयल पर ड्यूटी 10% से घटकर 5%
क्रूड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है, जबकि क्रूड सूरजमुखी तेल पर इसे 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
त्योहारी सीजन से पहले खाद्य तेल की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने क्रूड और रिफाइंड खाद्य तेलों के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी में कटौती की है. क्रूड सोयाबीन और पाम ऑयल पर ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है, जबकि क्रूड सूरजमुखी तेल पर इसे 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दिया गया है. सरकार के इस फैसले से आयातित खाद्य तेल की लागत कम होने और घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव घटने की उम्मीद है.
कुछ क्रूड तेलों पर ड्यूटी आधी
केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से जारी गजट नोटिफिकेशन के मुताबिक, क्रूड सोयाबीन और क्रूड पाम ऑयल के आयात पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी कर दी गई है. इसका मतलब है कि बिना रिफाइन किए गए इन तेलों का आयात पहले के मुकाबले सस्ता होगा. वहीं, क्रूड सूरजमुखी तेल के मामले में सरकार ने इससे भी बड़ी कटौती की है. इस पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 10 फीसदी से घटाकर शून्य कर दी गई है. इससे सूरजमुखी तेल के आयातकों की लागत में कमी आने की संभावना है.
रिफाइंड तेल पर भी शुल्क घटा
सरकार ने केवल क्रूड तेलों पर ही राहत नहीं दी है, बल्कि रिफाइंड खाद्य तेलों पर भी कस्टम ड्यूटी कम की है. रिफाइंड सोयाबीन और रिफाइंड पाम ऑयल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 32.5 फीसदी से घटाकर 27.5 फीसदी कर दी गई है. यानी इन दोनों तेलों के आयात पर ड्यूटी में 5 प्रतिशत अंक की कमी हुई है.
इसी तरह रिफाइंड सूरजमुखी तेल पर बेसिक कस्टम ड्यूटी 32.5 फीसदी से घटाकर 22.5 फीसदी कर दी गई है. यानी यहां भी ड्यूटी में 10 प्रतिशत अंक की कटौती हुई है.
खाद्य तेल पहले बेसिक कस्टम ड्यूटी अब बेसिक कस्टम ड्यूटी
क्रूड सोयाबीन ऑयल 10% 5%
क्रूड पाम ऑयल 10% 5%
क्रूड सूरजमुखी ऑयल 10% 0%
रिफाइंड सोयाबीन ऑयल 32.5% 27.5%
रिफाइंड पाम ऑयल 32.5% 27.5%
रिफाइंड सूरजमुखी ऑयल 32.5% 22.5%
24 सितंबर से लागू होगी नई दर
गजट नोटिफिकेशन के अनुसार, कस्टम ड्यूटी में की गई यह कटौती 24 सितंबर 2026 से प्रभावी होगी. भारत खाद्य तेलों की घरेलू मांग को पूरा करने के लिए बड़ी मात्रा में आयात पर निर्भर है. ऐसे में आयात शुल्क कम होने से खाद्य तेल की लैंडेड लागत में कमी आ सकती है.
इसका असर घरेलू बाजार में खाद्य तेलों की कीमतों पर पड़ सकता है. हालांकि, उपभोक्ताओं को मिलने वाली वास्तविक राहत इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आयात लागत में कमी का कितना हिस्सा कंपनियां और कारोबारी आगे कीमतों में पास करते हैं. इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे खाद्य तेल की कीमतें, रुपये की विनिमय दर और वैश्विक आपूर्ति भी घरेलू कीमतों को प्रभावित करती हैं.
त्योहारों से पहले आया फैसला
सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहार नजदीक हैं. इन त्योहारों के दौरान खाद्य तेल की मांग आमतौर पर बढ़ जाती है. ऐसे में आयात लागत कम होने से बाजार में कीमतों पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.
इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (IVPA) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि कुछ खाद्य तेलों के आयात पर सीमा शुल्क में कटौती महत्वपूर्ण समय पर की गई है. उनके मुताबिक, दशहरा और दिवाली जैसे बड़े त्योहार आने वाले हैं और इस कदम से क्रूड ऑयल के आयातकों को राहत मिलेगी.
महंगाई पर भी पड़ सकता है असर
खाद्य तेल घरेलू खाद्य महंगाई की अहम कड़ी है. आयात शुल्क में कमी से आयातित तेल की लागत कम होने पर घरेलू बाजार में कीमतों को राहत मिल सकती है. इसका असर खाद्य मुद्रास्फीति पर भी पड़ने की संभावना है.
हालांकि, कस्टम ड्यूटी में कटौती का पूरा फायदा उपभोक्ताओं तक कितनी जल्दी पहुंचेगा, यह अंतरराष्ट्रीय कीमतों और घरेलू बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा. फिलहाल सरकार के इस कदम से त्योहारी सीजन में खाद्य तेल की उपलब्धता और कीमतों को लेकर कुछ राहत की उम्मीद बढ़ी है.
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