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Bengaluru Tech Summit का हुआ आयोजन, कर्नाटक स्पेस टेक पॉलिसी का ड्राफ्ट किया गया लॉन्च
कर्नाटक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नीति, 2024-29 का मसौदा 20 नवंबर को बेंगलुरु टेक समिट में जारी किया गया.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
बेंगलुरु टेक समिट 2024 के 27वें संस्करण का दूसरा दिन अंतरिक्ष तकनीकों पर एक सत्र के साथ शुरू हुआ. इस सत्र में भारत सरकार के अंतरिक्ष विभाग के सचिव और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष डॉ. सोमनाथ मुख्य वक्ता के तौर पर मौजूद रहे. साथ ही रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के महानिदेशक डॉ. बी. के. दास और अमेरिका की डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर, मिस ऐन न्युबर्गर ने भी इसमें भाग लिया.
सत्र में कर्नाटक सरकार के मंत्री प्रियंक खड़गे और इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी, बायोटेक्नोलॉजी और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की सचिव डॉ. एकरूप कौर (IAS) भी शामिल हुईं. सत्र की शुरुआत क्रिस गोपालकृष्णन के स्वागत भाषण से हुई, जो सत्र के संचालक भी थे. उन्होंने भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को अंतरिक्ष क्षेत्र में नवाचार और विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया.
डॉ. सोमनाथ ने कर्नाटक सरकार को सफल बेंगलुरु टेक समिट के लिए बधाई दी और भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत और ISRO की अब तक की प्रमुख उपलब्धियों के बारे में बताया. उन्होंने 2047 के लिए ISRO की योजना और मिशनों के बारे में समझाया जो भारत को आगे ले जाएंगे. उन्होंने बताया कि भारतीय अंतरिक्ष नीति 2023 की वजह से कई स्टार्ट-अप तेजी से इनोवेशन कर रहे हैं. अब भारतीय स्टार्ट-अप लॉन्च व्हीकल और सैटेलाइट बनाने और ऑपरेट करने की क्षमता दिखा चुके हैं. उन्होंने यह भी बताया कि ISRO भारत के निजी क्षेत्र को तकनीक सौंपने की पहल कर रहा है और बेंगलुरु नई अंतरिक्ष कंपनियों और स्टार्ट-अप्स का प्रमुख केंद्र बन रहा है.
एनी न्यूबरगर ने भारत-अमेरिका साझेदारी के संदर्भ में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों और अंतरिक्ष क्षेत्र के महत्व पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों का निजी क्षेत्र मिलकर इस क्षेत्र में विकास और इनोवेशन को बढ़ावा देगा. उन्होंने यह भी बताया कि पृथ्वी निगरानी, साइबर सुरक्षा और निजी क्षेत्र में निवेश साझेदारी और सहयोग के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं.
डॉ. बी के दास ने कहा कि भारत रक्षा प्रौद्योगिकियों में एक वैश्विक महाशक्ति बन रहा है, और अगले कुछ वर्षों में यह 138 बिलियन अमेरिकी डॉलर का अवसर बन जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय रक्षा निर्यात बढ़ रहे हैं और अगले 5 वर्षों में इसका लक्ष्य 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर है। उन्होंने यह भी बताया कि प्रमुख रक्षा प्रणालियों के लिए उद्योग का आधार अब पूरे देश में फैल चुका है। अकादमिक संस्थानों, उद्योग और DRDO के साथ मिलकर भारत भविष्य की रक्षा प्रौद्योगिकियों को पूरा करने में सक्षम होगा, जिसके लिए नवोन्मेषी सोच, रणनीति और जानकारी महत्वपूर्ण हैं।
सत्र के दौरान, कर्नाटक सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी और विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग और DRDO के बीच रक्षा उद्योग पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने और सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए. सत्र में कर्नाटक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी नीति 2024-2029 का मसौदा भी जारी किया गया. इस मसौदे में कहा गया है कि कर्नाटक अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बन चुका है, जो ISRO केंद्रों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU), शैक्षिक संस्थानों और निजी क्षेत्र की एयरोस्पेस और अंतरिक्ष कंपनियों और MSME के पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा समर्थित है.
मसौदा नीति में कर्नाटक सरकार का अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए समग्र दृष्टिकोण रखा गया है, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय बाजार हिस्सेदारी का 50% हिस्सा हासिल करना और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के लिए वैश्विक गंतव्य बनना है. यह कर्नाटक सरकार के प्रमुख रणनीतिक ध्यान क्षेत्रों को पहचानता है, जैसे कि कौशल विकास के लिए पहल और प्रयास, जो छात्रों और युवा पेशेवरों को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कंपनियों के लिए रोजगार-योग्य बनाएंगे; इस क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित करने के लिए निवेश प्रोत्साहन; अंतरिक्ष कंपनियों के लिए समर्पित निर्माण पार्क और परीक्षण केंद्रों की स्थापना; अनुसंधान और विकास, आईपी निर्माण, विपणन प्रयासों आदि शामिल हैं.
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