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कहीं बजट की उम्मीदों के टूटने का संकेत तो नहीं मोदी सरकार का ये फैसला?

मोदी सरकार ने बजट से पहले झटका देते हुए स्मॉल सेविंग स्कीम पर ब्याज दरों में इजाफे से इंकार कर दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

नई मोदी सरकार इसी महीने अपना पूर्ण बजट पेश कर सकती है. लोकसभा चुनाव से पहले पेश हुए अंतरिम बजट में कोई बड़ी घोषणा नहीं हुई थी. इस बार सरकार के लिए सत्ता समीकरण पूरी तरह से अलग हैं. उसे पूरे पांच साल तक टिके रहने के लिए सहयोगियों को खुश रखना होगा. साथ ही जनता के बारे में भी पहले से ज्यादा सोचना होगा. ऐसे में उम्मीद है कि इस बार का बजट लोकलुभावन हो सकता है. हालांकि, सरकार द्वारा स्मॉल सेविंग स्कीम यानी लघु बचत योजनाओं पर ब्याज दरों में इजाफे से इंकार करने से इस उम्मीद पर प्रश्नचिन्ह लगता दिखाई दे रहा है. सरकार ने बजट से पहले उन लोगों को जोरदार झटका दिया है, जो केंद्र की स्मॉल सेविंग स्कीम में पैसा लगाते हैं. 

केंद्र ने साफ की स्थिति
केंद्र सरकार की इन योजनाओं में निवेश करने वालों को उम्मीद थी कि मोदी 3.0 लघु बचत योजनाओं में जमा राशि पर मिलने वाली ब्याज की दरों में बढ़ोतरी करेगी. लेकिन ऐसा हुआ नहीं है. एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने साफ कर दिया है कि पहली जुलाई से 30 सितंबर तक की अवधि के लिए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. इसका मतलब है कि पीपीएफ पर 7.1 फीसदी ब्याज ही मिलेगा. इसी तरह, सुकन्या समृद्धि योजना के तहत जमा राशि पर पहले की तरह 8.2 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलेगा. इन योजनाओं में PPF, सुकन्या, नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट और किसान विकास पत्र जैसी योजनाएं शामिल हैं. सरकार ने स्पष्ट किया है कि पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF पर पहले की ही तरह 7.1% ब्याज मिलता रहेगा. सुकन्या समृद्धि योजना की ब्याज दरों में भी कोई बदलाव नहीं किया गया है.

किस पर, कितना ब्याज
पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम पर एक जुलाई से 30 सितंबर तक 4.0 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता रहेगा. हालांकि, अगर एक वर्ष के लिए राशि जमा की गई है, तो ब्याज दर 6.9% होगी. दो वर्ष के लिए 7.0 फीसदी, तीन वर्ष के लिए 7.1 फीसदी और पांच वर्ष के लिए जमा राशि पर ब्याज दर 7.5 प्रतिशत होगी. इसी तरह, वरिष्ठ नागरिक सेविंग स्कीम पर ब्याज दर 8.2% रखी गई है. जबकि मंथली इनकम अकाउंट स्कीम के लिए ब्याज दर 7.4 प्रतिशत रहेगी. नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट में जमा राशि पर 7.7 फीसदी की दर से ब्याज मिलेगा. वहीं, किसान विकास पत्र जैसी योजनाओं पर 7.5% की दर से ब्याज दिया जाएगा. इन योजनाओं में निवेश करने वालों को पूरी उम्मीद थी कि नई मोदी सरकार ब्याज दरों में कुछ बढ़ोत्तरी करेगी, मगर ऐसा हुआ नहीं. 

क्या पूरी होगी ये उम्मीद?
बजट की बात करें, तो उम्मीद है कि वित्तमंत्री खासतौर पर मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स को खुश कर सकती हैं. बजट में टैक्स स्लैब में बदलाव किया जा सकता है. हालांकि, इसका फायदा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा जो न्यू टैक्स रिजीम चुनते हैं. इस रिजीम के तहत इनकम टैक्स छूट की सीमा को 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख किया जा सकता है. न्यू टैक्स रिजीम में सालाना 15 लाख रुपए से अधिक की कमाई पर 30% टैक्स का प्रावधान है, जिसे बढ़ाकर 20 लाख रुपए किया जा सकता है. न्यू टैक्स रिजीम में कुल 6 स्लैब हैं - 3 लाख तक 0% टैक्स. 3-6 लाख तक 5% टैक्स. 6-9 लाख तक 10% टैक्स. 9-12 लाख तक 15%. 12-15 लाख तक 20% और 15 लाख से अधिक की कमाई पर 30% टैक्स. जबकि पुराने टैक्स रिजीम में स्लैब की संख्या कम है. इसमें 2.5 लाख तक की इनकम पर कोई टैक्स नहीं लगता. 2.5 से 5 लाख तक की आय पर 5% टैक्स देना होता है. 5 से 10 लाख पर 20%, 10 लाख से अधिक इनकम पर 30% टैक्स लगता है. सरकार चाहती है कि ज्यादा से ज्यादा लोग न्यू टैक्स रिजीम को अपनाएं, इसलिए उसे और आकर्षक बनाने के लिए इनकम टैक्स में छूट का दायरा बढ़ाया जा सकता है.  

80C की लिमिट में होगा बदलाव?
माना यह भी जा रहा है कि सरकार 80C की लिमिट में भी कोई बदलाव कर सकती है. महंगाई बढ़ने के बावजूद सरकार ने पिछले 10 साल में इसमें कोई बदलाव नहीं किया है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसमें बदलाव से न केवल टैक्सपेयर्स को महंगाई से निपटने में मदद मिलेगी, बल्कि ELSS, टैक्स सेवर FDs, PPF जैसे सेविंग स्कीम्स में निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा. मोदी सरकार ने अपने पहले बजट में 80C के तहत छूट को 1 लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख किया था. इसी तरह, होम लोन के ब्याज पर छूट डेढ़ लाख से बढ़ाकर 2 लाख कर दी गई थी. 2014-15 के बजट में टैक्स छूट की लिमिट 2 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख की गई थी. जबकि सीनियर सिटीजंस के लिए छूट का दायरा ढाई लाख से बढ़ाकर 3 लाख किया गया था.
 


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