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BC Jindal की रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को मिला 300 मेगावाट सोलर स्टोरज प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट
आने वाले वर्षों में JIRE द्वारा किया जाने वाला $2.5 बिलियन का निवेश और उत्पादन क्षमता का विस्तार भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
भारत के प्रमुख औद्योगिक समूहों में से एक, बीसी जिंदल ग्रुप की नवीकरणीय ऊर्जा शाखा जिंदल इंडिया रिन्यूएबल एनर्जी (JIRE) को सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी SJVN से 300 मेगावाट की सौर प्लस बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) परियोजना का ठेका मिला है. यह परियोजना SJVN की 1200 मेगावाट इंटर-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) से जुड़ी सौर ऊर्जा परियोजना का हिस्सा है, जिसमें 600 मेगावाट/2400 मेगावाट BESS शामिल है.
JIRE ने इस परियोजना के लिए ₹3.32 प्रति यूनिट की दर से 300 मेगावाट सौर क्षमता का सफलतापूर्वक निविदा हासिल की है. यह परियोजना बिल्ड-ओन-ऑपरेट मॉडल के तहत विकसित की जाएगी और पावर परचेज एग्रीमेंट (PPA) साइन होने के 24 महीनों के भीतर इसे पूरा करना अनिवार्य होगा.
JIRE के प्रवक्ता ने इस उपलब्धि पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "इस परियोजना का मिलना हमारी स्वच्छ और बड़े पैमाने पर ऊर्जा समाधान प्रदान करने की क्षमता का प्रमाण है. यह भारत की ऊर्जा परिवर्तन यात्रा में हमारी भूमिका को मजबूत करता है और हमें 5 गीगावाट क्षमता तक विस्तार की दिशा में प्रेरित करता है."
इस परियोजना के तहत SJVN और JIRE के बीच 25 वर्षों का समझौता किया जाएगा. SJVN, जो एक नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी है, JIRE से सौर ऊर्जा खरीदकर राज्य की यूटिलिटीज और अन्य ग्राहकों को बेचेगी. अनुबंध की शर्तों के अनुसार, JIRE को प्रति 1 मेगावाट अनुबंधित क्षमता के लिए कम से कम 0.5 मेगावाट/2 मेगावाट-घंटा क्षमता वाला बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाना होगा.
हाल ही में, JIRE को सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी NHPC से भी एक 300 मेगावाट की सौर प्लस स्टोरेज परियोजना के लिए स्वीकृति पत्र (LoA) प्राप्त हुआ है. यह परियोजना NHPC की 1200 मेगावाट ISTS से जुड़ी सौर पहल का हिस्सा है, जिसमें 600 मेगावाट/1200 मेगावाट की ऊर्जा भंडारण प्रणाली भी शामिल है.
JIRE ने अगले पांच वर्षों में \$2.5 बिलियन के निवेश की योजना बनाई है, जिसका उद्देश्य भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग को पूरा करना और बैटरी भंडारण प्रणालियों के माध्यम से ग्रिड की स्थिरता को मजबूत करना है. इसके साथ ही, JIRE महाराष्ट्र में 2 गीगावाट की वार्षिक क्षमता वाला सोलर सेल और मॉड्यूल निर्माण संयंत्र भी स्थापित कर रही है, जो सितंबर 2026 तक चालू हो जाएगा.
भारत में नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है और ग्रिड स्थिरता तथा बिजली प्रबंधन के लिए बैटरी स्टोरेज तकनीक अब एक आवश्यक आवश्यकता बनती जा रही है. अनुमान है कि भारत का बैटरी ऊर्जा भंडारण सिस्टम (BESS) बाजार 2032 तक 11.41% की वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से आगे बढ़ेगा.
गौरतलब है कि 1952 में स्थापित बीसी जिंदल ग्रुप ने स्टील पाइप निर्माता के रूप में शुरुआत की थी और आज यह ऊर्जा क्षेत्र में भी एक प्रमुख खिलाड़ी बन चुका है. समूह की ओडिशा के अंगुल में 1200 मेगावाट की तापीय विद्युत परियोजना पहले से संचालित है, और अब JIRE के माध्यम से यह समूह नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में सक्रिय रूप से विस्तार कर रहा है.
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