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पाकिस्तान के एयरस्पेस बंद करने से एयर इंडिया को हो रहा भारी नुकसान, सरकार से मांगी मदद
एयर इंडिया को आशंका है कि यदि पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र से उड़ान भरने पर प्रतिबंध एक वर्ष तक जारी रहता है तो उसे लगभग 600 मिलियन डॉलर की अतिरिक्त लागत का सामना करना पड़ेगा.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव है. इस घटना के बाद भारत ने पाक के खिलाफ कई बड़े एक्शन लिए हैं. इस बीच पाकिस्तान ने अपने एयरस्पेस को 23 मई तक बंद रखने का ऐलान किया है. पाकिस्तान के इस फैसले का असर भारतीय विमानों पर भी देखने को मिल सकता है. इस बीच एयर इंडिया ने केंद्र सरकार को एक चिट्ठी लिखी है और कहा कि पाकिस्तान के एयरस्पेस के बंद होने से एयरलाइन कंपनी को 12 महीनों में करीब 600 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है. दरअसल, भारतीय एयरलाइन्स को ईंधन की बढ़ी हुई लागत और लंबी यात्रा अवधि का सामना करना पड़ रहा है.
केंद्र सरकार को लिखी चिट्ठी
समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने विमानन मंत्रालय को लिखे पत्र का हवाला देते हुए बताया कि विमान कंपनियों को होने वाले नुकसान को देखते हुए, एयर इंडिया ने सरकार से आनुपातिक सब्सिडी की मांग की है. पत्र में कहा गया कि प्रभावित अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए सब्सिडी एक अच्छा, सत्यापन योग्य और उचित विकल्प है, स्थिति में सुधार होने पर सब्सिडी हटाई जा सकती है. एयर इंडिया ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया. भारत के नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने टिप्पणी के अनुरोध का तुरंत जवाब नहीं दिया.
एयर इंडिया को नुकसान क्यों हो रहा है?
टाटा ग्रुप के मालिकाना हक वाली एयर इंडिया ने 27 अप्रैल को नागरिक उड्डयन मंत्रालय को भेजे पत्र में स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी एयरस्पेस के बंद होने से फ्लाइट ऑपरेट करने की लागत तेजी से बढ़ रही है. यूरोप, अमेरिका और कनाडा जाने वाली उड़ानों को अब वैकल्पिक रास्तों से भेजना पड़ रहा है. इससे ईंधन खर्च बढ़ने के साथ-साथ फ्लाइट ड्यूरेशन भी काफी लंबा हो गया है. कंपनी का अनुमान है कि अगर यह स्थिति सालभर बनी रही तो उसे ₹5,000 करोड़ से अधिक का सीधा वित्तीय नुकसान होगा.
एयर इंडिया क्यों सबसे ज्यादा प्रभावित?
हालांकि इंडिगो का घरेलू बाजार बड़ा है, लेकिन लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में एयर इंडिया की निर्भरता कहीं अधिक है. ऐसे में पाकिस्तान का एयरस्पेस बेन न सिर्फ उसकी लागत बढ़ा रहा है, बल्कि टर्नअराउंड प्लान को भी पटरी से उतार सकता है. एयर इंडिया भारत के अंतरराष्ट्रीय उड़ान बाजार में 26.5% हिस्सेदारी रखती है. अमेरिका, यूरोप और कनाडा के लिए उसकी अधिकतर लंबी दूरी की उड़ानें पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र से होकर गुजरती थीं. एयर इंडिया, उसकी बजट यूनिट एयर इंडिया एक्सप्रेस और प्रतिद्वंद्वी इंडिगो-इन तीनों की मिलाकर दिल्ली से अप्रैल में लगभग 1,200 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें निर्धारित थीं. इनमें से अधिकांश पश्चिम की ओर थीं, जिन पर इस प्रतिबंध का सीधा असर पड़ा है.
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