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AI, जोखिम और रणनीति, 2024 में कॉरपोरेट इंडिया ने दिखाया लचीलापन का नया चेहरा : रिपोर्ट

ICICI लोम्बार्ड की CIRI 2024 रिपोर्ट यह संकेत देती है कि कॉरपोरेट इंडिया अब केवल संकटों से निपटने में विश्वास नहीं रखता, बल्कि उन्हें अवसर में बदलने की रणनीति पर काम कर रहा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

भारतीय कॉरपोरेट जगत अब सिर्फ जोखिमों से जूझ नहीं रहा, बल्कि वह अब उनमें अवसर देख रहा है और रणनीतिक रूप से तैयार हो रहा है. ICICI लोम्बार्ड और फ्रोस्ट एंड सुलिवन द्वारा तैयार की गई कॉरपोरेट इंडिया रिस्क इंडेक्स (CIRI) 2024 की पांचवीं संस्करण रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 2024 में भारत का CIRI स्कोर 65 पर पहुंच गया, जो 2023 के 64 से एक अंक अधिक है. यह दर्शाता है कि विभिन्न सेक्टर्स में जोखिम प्रबंधन की दिशा में लगातार प्रगति हो रही है.

यह सुधार दर्शाता है कि कैसे भारतीय कंपनियां भू-राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक मंदी, एआई के विघटन और घरेलू अनिश्चितताओं जैसे राष्ट्रीय चुनावों का जवाब ज्यादा परिपक्वता और तैयारी के साथ दे रही हैं. ICICI लोम्बार्ड के चीफ कॉरपोरेट सॉल्यूशंस - इंटरनेशनल एंड बैंकएश्योरेंस संदीप गोराडिया ने कहा, “इस वर्ष की रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि भारतीय कंपनियाँ अब केवल प्रतिक्रिया नहीं दे रहीं, वे सक्रिय रूप से जोखिमों का बेहतर प्रबंधन कर रही हैं. AI, स्थिरता और डिजिटल लचीलापन अब कॉरपोरेट रणनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं.”

नौ सेक्टर्स ने पाया 'सुपीरियर रिस्क इंडेक्स'

2024 में, फार्मास्युटिकल्स, हेल्थकेयर, BFSI, और मैन्युफैक्चरिंग सहित नौ प्रमुख उद्योगों ने ‘सुपीरियर रिस्क इंडेक्स’ स्थिति प्राप्त की. कंपनियों ने अपने बिज़नेस मॉडल में लचीलापन एकीकृत कर अस्थिरता को रूपांतरण के अवसर में बदला. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा और स्थिरता प्रमुख विषयों के रूप में उभरे, जो जोखिम प्राथमिकताओं को निर्देशित कर रहे हैं.

CIRI 2024 प्रमुख संकेतक:

संकेतक                                      2024               2023 
कॉरपोरेट इंडिया रिस्क इंडेक्स         65                   64   
रिस्क मैनेजमेंट इंडेक्स                    68                   67   
रिस्क एक्सपोजर इंडेक्स                  65                   64   

एआई: अवसर भी, खतरा भी

2024 में एआई सबसे निर्णायक प्रवृत्ति के रूप में उभरी. BFSI और मैन्युफैक्चरिंग में प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स से लेकर हेल्थकेयर में AI-आधारित डायग्नोस्टिक्स और ऑटोमोटिव सेक्टर में ऑटोनॉमस सिस्टम तक, AI ने दक्षता और दूरदृष्टि को बढ़ाया. हालांकि, इसके साथ ही डेटा गोपनीयता, साइबर सुरक्षा और नैतिक शासन के नए जोखिम भी सामने आए. जवाब में, कई क्षेत्रों ने AI-विशिष्ट जोखिम प्रबंधन पर निवेश किया और अपने अनुपालन ढांचे को मज़बूत किया.

फ्रोस्ट एंड सुलिवन के ग्लोबल प्रेसिडेंट अरूप ज़ुत्शी ने कहा, “भारत की जोखिम संस्कृति में बदलाव सिर्फ दिखाई नहीं दे रहा यह परिवर्तनकारी है. हम देख रहे हैं कि जोखिम प्रबंधन अब बोर्डरूम की प्राथमिकता बन चुका है. जोखिम को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ में बदलना अब भारत Inc. की नई सोच बन गई है.”

रणनीतिक रूप से लचीलापन की ओर

CIRI 2024 यह संकेत देता है कि भारतीय कंपनियाँ अब सिर्फ संकट का सामना नहीं कर रहीं, बल्कि उसे पहले से भांपकर रणनीति बना रही हैं. रिस्क मैनेजमेंट इंडेक्स में वृद्धि यह दर्शाता है कि बोर्ड स्तर पर जोखिम पर अधिक चर्चा हो रही है, गवर्नेंस ढांचे को मजबूती मिल रही है, और परिदृश्य आधारित योजना को महत्व दिया जा रहा है.

ICICI लोम्बार्ड की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि जोखिम प्रबंधन अब सिर्फ एक आवश्यक प्रक्रिया नहीं, बल्कि दीर्घकालिक वृद्धि और प्रतिस्पर्धात्मकता का मुख्य आधार बन चुका है. भारतीय कॉरपोरेट जगत आज पहले से कहीं अधिक सतर्क, तैयार और दूरदर्शी है, चाहे वह एआई हो, पर्यावरणीय अस्थिरता हो या चुनावी अनिश्चितता हो.

 


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