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आखिर कैसे भारत के ग्रामीण इलाकों में बढ़ रहे हैं सुपर रिच? 

सर्वे रिपोर्ट बता रही है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ सालों में शहरों के मुकाबले सुपर रिच लोगों की संख्‍या में ज्‍यादा इजाफा हुआ है. इसके कई कारण रहे हैं. 

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

देश की इकोनॉमी के सकारात्‍मक आंकड़ों को लेकर आए दिन कोई न कोई बात आपके हमारे सामने आती रहती है. इकोनॉमी का सकारात्‍मक चेहरा ये है कि एक ओर जहां देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है वहीं इसका असर ग्रामीण अर्थव्‍यवस्‍था में भी देखने को मिल रहा है. नतीजा ये है कि हाल ही में देश के की एक संस्‍था के द्वारा किये गए सर्वे में ये बात सामने आई है कि ग्रामीण इलाकों में सुपर रिचों की संख्‍या शहरी सुपर रिचों के मुकाबले ज्‍यादा बढ़ रही है. देश में सुपर रिचों की संख्‍या में पिछले पांच सालों में बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है. 

क्‍या कहते हैं संस्‍था के आंकड़े 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक संस्‍था  PRICE के अनुसार हमारे देश में सुपर रिच के आंकड़ों पर नजर डालें तो 1994-95 में जहां ये 98000 रुपये सालाना हुआ करता था वही 2020-21 में ये 2 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है. यही नहीं आंकड़े ये भी बता रहे हैं 2030-31 तक, भारत में अति अमीर परिवारों की संख्या पांच गुना बढ़कर 9.1 मिलियन घरों तक पहुंचने की उम्मीद है, और 2046-47 तक यह 32.7 मिलियन घरों तक जाने की उम्मीद है.  
30 लाख रुपये सालाना आय कमाने वाले परिवारों की संख्‍या पर नजर डालें तो इससे और ज्‍यादा समझ में आता है. 2020-21 में इनकी संख्‍या 56 मिलियन से बढ़कर 2046-47 तक 437 मिलियन हो जाएगी. सर्वे ये भी कहता है कि वो भारतीय परिवार जो सालाना 30 लाख रुपये कमाता है वो रिच की श्रेणी में आता है उनकी संख्‍या पर अगर गौर करें तो 2020-21 में ये जहां 56 मिलियन है वही 2046-47 में 437 मिलियन तक जा पहुंचेगी. 

ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़े हैं सुपररिच 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सर्वे की रिपोर्ट बताती है कि 2015-16 से लेकर 2020-21 के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का अनुपात उतना ही रहा है. उसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है. जबकि ग्रामीण इलाकों में रहने वाले उच्‍च आय वाले लोगों की संख्‍या में शहरो में रहने वाले परिवारों के मुकाबले तेजी से इजाफा हुआ है. गौरतलब है कि इस दौरान शहरी गरीब और गरीब हो गये हैं. ये सर्वे की रिपोर्ट बताती है. कुछ आंकड़ों को देखें तो ये बात और ज्‍यादा साफ होती है. शहरी इलाकों में जहां सुपर रिच 18 प्रतिशत हैं वहीं दूसरी ओर ग्रामीण इलाकों में ये 82 प्रतिशत हैं. जबकि कुल आंकड़ों पर नजर डालें तो इसमें शहरी इलाकों में 64 प्रतिशत हैं जबकि ग्रामीण इलाकों में ये 36 प्रतिशत हैं. 

कितने लोगों की इस सर्वे में ली गई है राय 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार PRICE का ये सर्वे कहता है कि 25 शहरों में इस सर्वे को किया गया है और इसमें 40 हजार परिवारों ने भाग लिया है. सर्वे के अनुसार पिछले पांच सालों में बड़ी संख्‍या में लोग रिच कैटेगिरी से निकलकर सुपररिच कैटेगिरी में गए हैं. इनकी संख्‍या 2 करोड़ से ज्‍यादा है. ये 2015-16 में जहां इनकी संख्‍या जहां 1.06 मिलियन हाउसहोल्‍ड  हुआ करती थी वहीं 2021 में ये संख्‍या 1.81 मिलियन हाउसहोल्‍ड तक जा पहुंची है. इसमें 11.3 प्रतिशत की सालाना ग्रोथ हुई है. वहीं सर्वे ये भी कहता है कि वर्ष 2030-31 तक ये संख्‍या 9.1 मिलियन हाउसहोल्‍ड तक जा पहुंचेगा और 2046-47 तक ये संख्‍या 32.7 मिलियन तक जा पहुंचेगी. सर्वे ये भी कहता है कि दिल्‍ली और मुंबई जैसे शहरों में इनकी संख्‍या काफी ज्‍यादा है. जबकि सूरत, अहमदाबाद, और पूणे जैसे शहरों में इनकी संख्‍या तेजी से बढ़ रही है. जबकि सूरत और नागपुर जैसे शहर में ये तेजी से इजाफा हो चुका है. जबकि महाराष्‍ट्र में सबसे ज्‍यादा सुपररिच लोगों की संख्‍या है.
 


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