होम / बिजनेस / निजी बैंकों की शानदार वापसी, सरकारी बैंकों को पछाड़कर 17% चढ़ा निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स
निजी बैंकों की शानदार वापसी, सरकारी बैंकों को पछाड़कर 17% चढ़ा निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स
आंकड़ों के अनुसार, निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स अब तक करीब 17 फीसदी चढ़ चुका है, जो निफ्टी 50, निफ्टी बैंक और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स तीनों से बेहतर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 hour ago
वित्त वर्ष 2027 में बैंकिंग सेक्टर की तस्वीर बदलती नजर आ रही है. निजी बैंकों के शेयरों ने सरकारी बैंकों के मुकाबले शानदार प्रदर्शन करते हुए निवेशकों को बेहतर रिटर्न दिया है. निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स अब तक करीब 17 फीसदी चढ़ चुका है, जो निफ्टी 50, निफ्टी बैंक और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स तीनों से बेहतर है. विशेषज्ञों का मानना है कि RBI के नीतिगत कदम, मजबूत फंडिंग, बेहतर एसेट क्वालिटी और नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) में सुधार की उम्मीद ने निजी बैंकिंग शेयरों में नई जान फूंक दी है.
निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स ने सभी प्रमुख इंडेक्स को पछाड़ा
ऐस इक्विटी के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 में अब तक निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में करीब 17 फीसदी की तेजी दर्ज की गई है. इसके मुकाबले निफ्टी 50 में 8.4 फीसदी, निफ्टी बैंक इंडेक्स में 15.6 फीसदी और निफ्टी PSU बैंक इंडेक्स में केवल 7.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली. इससे साफ है कि इस वित्त वर्ष में निजी बैंक निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरे हैं.
RBI के फैसलों से मिला बड़ा सहारा
विश्लेषकों के मुताबिक, RBI की ओर से FCNR(B) जमा और External Commercial Borrowing (ECB) से जुड़े राहत उपायों ने निजी बैंकों के लिए फंडिंग आसान बनाई है. इससे बैंकों पर जमा जुटाने का दबाव कम होगा और फंडिंग की लागत घटेगी. साथ ही बेहतर एसेट क्वालिटी और ट्रेजरी से होने वाली आय भी निजी बैंकों के प्रदर्शन को मजबूती दे रही है.
क्यों निजी बैंकों पर बुलिश हैं ब्रोकरेज?
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (KIE) का कहना है कि बड़े निजी बैंकों के लिए दो प्रमुख सकारात्मक कारक हैं. पहला, जमा जुटाने की प्रतिस्पर्धा कम होने से नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) पर दबाव घट सकता है. दूसरा, FCNR(B) जमा में बढ़ोतरी से पूरे बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी बढ़ेगी और फंडिंग लागत कम होगी. चूंकि निजी बैंकों की फंडिंग संरचना अधिक विविध है, इसलिए उन्हें इसका अपेक्षाकृत ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है.
सरकारी बैंकों पर बढ़ रही फंडिंग लागत
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी बैंक अब ऋण वृद्धि बनाए रखने के लिए अधिक ब्याज दर वाली सावधि जमा (Term Deposits) पर निर्भर हो रहे हैं. इससे उनकी फंडिंग लागत बढ़ सकती है और कम लागत वाली CASA जमा का फायदा धीरे-धीरे कम हो सकता है. यही वजह है कि फिलहाल निजी बैंक सरकारी बैंकों की तुलना में बेहतर स्थिति में दिखाई दे रहे हैं.
इन बैंकिंग शेयरों ने दिया सबसे ज्यादा रिटर्न
वित्त वर्ष 2027 में निजी क्षेत्र के बंधन बैंक, यस बैंक, IDFC First Bank, इंडसइंड बैंक और RBL बैंक के शेयरों में 50 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली है. वहीं सरकारी बैंकों में बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब एंड सिंध बैंक और यूको बैंक के शेयरों में अधिकतम 35 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई.
FCNR(B) में बढ़ी विदेशी पूंजी की आवक
RBI ने 5 जून की मौद्रिक नीति समीक्षा में FCNR(B) जमा और पात्र ECB पर रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा की घोषणा की थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसके बाद से बैंकिंग सिस्टम में करीब 8 अरब डॉलर की FCNR(B) जमा आ चुकी है. इनमें अकेले SBI ने 1.5 अरब डॉलर से अधिक जुटाए हैं, जबकि अधिकांश सरकारी बैंक इन जमाओं पर 6-6.5 फीसदी और छोटे निजी बैंक 7.5 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में बैंकिंग सेक्टर के मार्जिन पर कुछ दबाव दिख सकता है, लेकिन निजी बैंक यह संकेत देंगे कि नेट इंटरेस्ट मार्जिन का सबसे कमजोर दौर अब पीछे छूट चुका है. दूसरी तिमाही से फंडिंग लागत में सुधार और RBI की नीतियों का असर निजी बैंकों के प्रदर्शन को और मजबूत कर सकता है. वहीं, सरकारी बैंकों के लिए बेहतर नतीजे वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में देखने को मिल सकते हैं.
टैग्स