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जिस कंपनी में नहीं लग रहा Adani का मन, वो बाजार में लगातार होती जा रही मजबूत! 

अडानी विल्मर के मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट से पता चलता है कि कंपनी और भी मजबूत हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

कुछ समय पहले तक गौतम अडानी (Gautam Adani) का जिस कंपनी में मन नहीं लग रहा था, वो लगातार मजबूत होती जा रही है. हम बात कर रहे हैं अडानी विल्मर (Adani Wilmar) की. अडानी समूह की इस कंपनी ने मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट जारी किए हैं, जिनसे पता चलता है कि लगातार मजबूती से आगे बढ़ रही है. कंपनी ने बताया है कि जून तिमाही में उसकी वॉल्यूम ग्रोथ सालाना आधार पर 13% रही है.

खूब बेचा चावल 
अडानी विल्मर के अनुसार, उसके अल्टरनेटिव चैनल्स ने भी पहली तिमाही में 19 प्रतिशत की ग्रोथ के साथ अपनी रफ्तार बनाए रखी है. इस चैनल में ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स शामिल हैं. कंपनी के ब्रांडेड एक्सपोर्ट की वैल्यू में सालाना आधार पर 36 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. कंपनी का कहना है कि उसने तिमाही की बिक्री के दौरान सरकार की ओर से नियुक्त एजेंसियों को गैर-बासमती चावल बेचा, जिसने उसके तिमाही प्रदर्शन को मजबूत बनाने में मदद की.  

सुस्त मांग में भी ग्रोथ
अडानी की इस कंपनी का कहना है कि उसके फूड एंड FMCG बिजनेस के वॉल्यूम में पिछले साल की तुलना में 23% का इजाफा हुआ है. कंपनी का एडिबल ऑयल यानी खाने के तेल का बिजनेस मजबूत सेल्स और डिस्ट्रीब्यूशन के चलते फलफूल रहा है. अडानी विल्मर के अनुसार, एडिबल ऑयल इंडस्ट्री को जून तिमाही में सुस्त मांग का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बावजूद उसने ग्रोथ दर्ज की है. गौरतलब है कि अडानी विल्मर ग्रोथ के लिए ब्रांडेंड फूड सेगमेंट पर ज्यादा फोकस कर रही है. खासतौर से स्टेपल, मसाले, चीनी, दालें, गेहूं का आटा जैसे सेगमेंट पर उसने काफी काम किया है.

बस सही मौके का इंतजार
पिछले साल खबर आई थी कि अडानी अपनी कंपनी अडानी विल्मर लिमिटेड में पूरी हिस्सेदारी बेचना चाहते हैं. हालांकि, इस साल की शुरुआत में खबर आई कि प्राइसिंज को लेकर बात नहीं बन पा रही है, इसलिए अडानी समूह सही डील मिलने तक इंतजार करेगा. इस लिहाज से देखें तो अडानी, विल्मर से बाहर निकलना चाहते हैं, बस सही मौके के इंतजार में हैं. अडानी समूह और सिंगापुर के विल्मर ग्रुप की पार्टनरशिप में अडानी विल्मर (Adani Wilmar) अस्तित्व में आई थी. कंपनी फॉर्च्यून ब्रैंड (Fortune Brand) नाम से खाद्य तेल और पैकेज्ड ग्रोसरी बेचती है. Adani Wilmar में हिस्सेदारी की बात करें, तो अडानी ग्रुप की 43.97% और विल्मर इंटरनेशनल की इसमें 43.97 प्रतिशत हिस्सेदारी है. जबकि कंपनी में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 12.06 प्रतिशत है.  

क्या-क्या बेचती है कंपनी?
अडानी विल्मर ने IPO के जरिए 3600 करोड़ रुपए जुटाए थे. मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि Adani Wilmar पर फोकस करने के बजाए अडानी अपने कोर बिजनेस पर ध्यान देना चाहते हैं, जहां ग्रोथ की संभावना काफी ज्यादा है. लिहाजा, इस जॉइंट वेंचर से अलग होने से अडानी एंटरप्राइजेज लिमिटेड को अपने कोर बिजनस के लिए पैसा मिल जाएगा. विल्मर सिंगापुर की कंपनी है, जिसकी स्थापना Martua Sitorus और Kuok Khoon Hong ने सन 1991 में की थी. जबकि अडानी एंटरप्राइजेज और विल्मर के बीच साझेदारी 1999 में हुई थी और इससे Adani Wilmar अस्तित्व में आई. Adani Wilmar खाने के तेल से लेकर आटा, चावल, दाल-चीनी तक बेचती है. भारत में इसका मुकाबला ITC और हिंदुस्तान यूनिलीवर से है.
 


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