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जिस देश में अटका है Adani का बड़ा प्रोजेक्ट, वहीं एक और डील कर ली फाइनल
अरबपति कारोबारी गौतम अडानी लगातार अपना कारोबार फैलाने में जुटे हुए हैं. उनकी विदेशों में भी कुछ बड़ी [परियोजनाएं चल रही हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अडानी समूह ने केन्या में एक बड़ी डील फाइनल की है. गौतम अडानी के नेतृत्व वाले अडानी समूह के लिए यह डील इसलिए भी अहम है, क्योंकि केन्या में समूह के एयरपोर्ट प्रोजेक्ट को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड ने केन्या में 30 वर्षों के लिए प्रमुख बिजली ट्रांसमिशन लाइनों के निर्माण और संचालन के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं.
ये है डील का उद्देश्य
अडानी समूह ने यह डील केन्या इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (केट्राको) के साथ की है. दरअसल, केन्या में लगातार बिजली कटौती की समस्या बनी हुई है और अडानी समूह के साथ यह डील इसलिए फाइनल की गई है, ताकि बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके. केन्या के ऊर्जा विभाग के मंत्रिमंडलीय सचिव ओपियो वैन्डायी ने बताया कि इस डील का उद्देश्य बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए देश के ट्रांसमिशन इन्फ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना है.
एयरपोर्ट प्रोजेक्ट में पेंच
केन्या में अडानी समूह एयरपोर्ट से जुड़े एक प्रोजेक्ट को लेकर भी सक्रिय है. हालांकि, इस प्रोजेक्ट में कई पेंच फंस गए हैं. कुछ वक्त पहले खबर आई थी कि अडानी ने केन्या के एक एयरपोर्ट में निवेश के लिए स्थानीय सरकार के साथ 1.85 अरब डॉलर की डील की थी, जिस पर कोर्ट ने रोक लगा दी है. इस डील के अमल में आने पर अडानी समूह की अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड को केन्या की राजधानी नैरोबी के जोमो केन्याटा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (JKIA)को 30 साल तक ऑपरेट करने का अधिकार मिल जाएगा. केन्या के इस सबसे बड़े एयरपोर्ट का संचालन हाथ में आने का मतलब है ग्लोबल लेवल पर कंपनी की इमेज मजबूत होना.
विरोधियों का तर्क
इस एयरपोर्ट को अडानी समूह को लीज पर देने के सरकारी फैसले को अदालत में चुनौती दी गई है. केन्या ह्यूमन राइट्स कमीशन और कुछ वकीलों ने इस फैसले को असंवैधानिक बताया है. इस संबंध में दायर याचिका में कहा गया है कि सरकार का यह कदम पूरी तरह गलत है. प्रॉफिट कमा रहे एयरपोर्ट को किसी प्राइवेट कंपनी को लीज पर देने कोई औचित्य नज़र नहीं आता.
सरकार ने बताया ज़रूरी
वहीं, केन्या की सरकार ने डील का बचाव किया है. उसका कहना है कि JKIA की मौजूदा कैपेसिटी से संबंधी समस्याओं में तत्काल सुधार की जरूरत है और उसी के मद्देनजर एयरपोर्ट लीज पर देने का फैसला लिया गया है. बता दें कि अडानी समूह भारत के कई हवाईअड्डों का संचालन कर रहा है, लेकिन विदेश में अभी उसका खाता नहीं खुला है. यदि डील अमल में आती है, तो केन्या का JKIA ऐसा पहला इंटरनेशनल एयरपोर्ट होगा, जिसकी कमान अडानी समूह के हाथों में होगी. इस एक डील से समूह के लिए दूसरे देशों में विस्तार के संभावनाएं भी खुलेंगी.
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