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श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन से टेंशन में गौतम अडानी, बांग्लादेश जैसे हाल का सता रहा डर!
अडानी समूह श्रीलंका में भी मौजूद है, लेकिन पड़ोसी मुल्क में सत्ता परिवर्तन से उसकी मौजूदगी खतरे में पड़ सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
गौतम अडानी (Gautam Adani) इस समय अपना कारोबार बढ़ाने पर फोकस कर रहे हैं. उनके नेतृत्व वाला अडानी समूह (Adani Group) अब तक कई कंपनियों का अधिग्रहण करके देश में अपना दायरा फैला चुका है, लेकिन विदेशों में उसे तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. बांग्लादेश में तख्तापलट के चलते अडानी समूह के प्रोजेक्ट पर आशंकाओं के बादल छाए हुए हैं और अब यही स्थिति उसके लिए श्रीलंका में होती दिखाई दे रही है.
चुनाव प्रचार के दौरान कही थी ये बात
श्रीलंका में सत्ता परिवर्तन हुआ है. राष्ट्रपति चुनावों में मार्क्सवादी लीडर अनूरा कुमारा दिसानायके ने जीत दर्ज की है. दिसानायके अडानी समूह की देश में मौजूदगी को लेकर अपनी नाखुशी चुनाव प्रचार के दौरान जाहिर कर चुके हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, अनूरा कुमारा दिसानायके ने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि अगर वह राष्ट्रपति बनते हैं तो देश में अडानी के प्रोजेक्ट्स को रद्द कर देंगे. यदि चीन समर्थक दिसानायके अपनी बातों पर अमल करते हैं, तो अडानी समूह को बड़ा झटका लगेगा.
अडानी के चल रहे ये प्रोजेक्ट
अडानी ग्रुप पिछले काफी समय से श्रीलंका में मौजूद है. 2021 में उसे कोलंबो में स्ट्रैटजिक पोर्ट टर्मिनल बनाने का ठेका मिला था, जिसकी लागत 70 करोड़ डॉलर थी. इसके बाद पिछले साल उसे 450 मेगावाट का विंड पावर प्रोजेक्ट तैयार करने की जिम्मेदारी मिली. यह प्रोजेक्ट पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण पहले ही मुश्किलों में है. चुनाव प्रचार के दौरान अनूरा कुमारा दिसानायके ने कहा था कि यह प्रोजेक्ट देश की ऊर्जा संप्रभुता के लिए खतरा है. साथ ही उन्होंने इसमें भ्रष्टाचार की आशंका भी व्यक्त की थी. ऐसे में दिसानायके की जीत से अडानी की टेंशन बढ़ना लाजमी है.
श्रीलंका में चीन समर्थक लॉबी सक्रिय
अडानी ग्रुप ने श्रीलंका में विंड एनर्जी प्रोजेक्ट में करीब एक अरब डॉलर निवेश की योजना बनाई है. इसे श्रीलंका का बड़ा पावर प्रोजेक्ट माना जा रहा है. इसी साल मई में श्रीलंका की सरकार ने अडानी समूह के विंड पावर स्टेशनों से बिजली खरीदने के लिए 20 साल का समझौता भी किया था. बताया जा रहा है कि श्रीलंका में चीनी के समर्थन वाली एक लॉबी सक्रिय है, जो अडानी समूह की मुश्किलों में इजाफा करने की साजिश रच रही है. श्रीलंका के मौजूदा राष्ट्रपति को चीन समर्थक माना जाता है. ऐसे में अडानी समूह के लिए आने वाले दिन काफी कठिन हो सकते हैं.
इधर, अटके हैं 800 करोड़ डॉलर
उधर, बांग्लादेश में अडानी समूह की मुश्किलें बरकरार हैं. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार अडानी ग्रुप का बकाया चुकाने के बजाए अडानी पावर के साथ बिजली समझौते की जांच की बात कह रही है. अडानी पावर बांग्लादेश को बिजली सप्लाई करती है, जिसका 800 करोड़ डॉलर से अधिक का भुगतान उसे अब तक नहीं हुआ है. हाल ही में खबर आई थी कि मोहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली अंतरिम सरकार अडानी पावर के साथ बिजली समझौते की जांच करेगी. सरकार समझौते की शर्त जानना चाहती है और यह भी पता लगाना चाहती है कि इसके लिए चुकाई जा रही कीमत वाजिब है या नहीं. पड़ोसी मुल्क की सरकार के इस रुख से यही लगता है कि उसका इरादा फिलहाल अडानी समूह का बकाया चुकाने का नहीं है.
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