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राष्ट्र निर्माण में बढ़ा चार्टर्ड अकाउंटेंट का दायरा, अर्थव्यवस्था को मिल रहा लाभ : एस रवि

देश फिलहाल जहां एक तरफ आजादी के 75 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव मनाने की तैयारियों में लगा है, वहीं दूसरी तरफ देश भर के चार्टेड अकाउंटेंट्स 74वां नेशनल सीए दिवस मना रहे हैं।

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 years ago

देश फिलहाल जहां एक तरफ आजादी के 75 साल पूरे होने पर अमृत महोत्सव मनाने की तैयारियों में लगा है, वहीं दूसरी तरफ देश भर के चार्टेड अकाउंटेंट्स 74वां नेशनल सीए दिवस मना रहे हैं। BW Businessworld के साथ खास बातचीत में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के पूर्व चेयरमैन, रवि राजन एंड कंपनी के मैनेजिंग पार्टनर और TFCI के चेयरमैन सेतुरतनम रवि ने बताया कैसे अब चार्टेड अकाउंटेंट्स का दायरा राष्ट्र के, कंपनी के, सेक्टर के और इकोनॉमी के निर्माण में बढ़ गया हैः

प्रश्नः इतने सालों में आप किसी भी सीए के रोल को कैसे बढ़ते हुए देखते हैं?

उत्तरः अगर आप पहले के शुरुआती सालों को देखें तो सीए का प्रोफेशन केवल वैधानिक ऑडिट और आंतरिक ऑडिट तक सीमित था, लेकिन बाद के वर्षों में यह कई सारी अलग फील्ड्स में भी बढ़ गया है जैसे कि फॉरेंसिक ऑडिट, मर्चेंट बैंकिंग, परिश्रम और अब के सालों में इन्सॉल्वेंसी आदि। प्रोफेशन का दायरा प्रैक्टिस और बड़े बदलावों में शामिल होने से काफी बढ़ गया है। अब हम कई सारे ऐसे लोगों को देखते हैं, जो पहले सीए थे लेकिन अब कंपनियों में CFO, CHRO, CTO बन गए हैं। कई सारे सीए बैंकिंग सेक्टर में भी काम  कर रहे हैं। अगर आप पिछले दो दश्कों की तुलना करें तो रोल काफी बदल गया है। इसका दायरा बढ़ा है साथ ही में इकोसिस्टम में रिफॉर्म्स आने से प्रैक्टिस और स्कोप पर भी असर पड़ा है।

प्रश्नः नेशनल सीए डे को ICAI के स्थापना दिवस के तौर पर भी मनाया जाता है। आप ICAI का क्या रोल राष्ट्र निर्माण के तौर पर समझते हैं?

उत्तरः ICAI का बहुत ही प्रमुख रोल है। हमको 1947 में आजादी मिली और ये संस्थान 1949 में बना। आप देखिए कि कैसे सिस्टम उस वक्त भी सीए का होना कितना महत्वपूर्ण मानता था और वो राष्ट्र का निर्माण करने में महत्वपूर्ण भूमिका में हैं, क्योंकि सीए कंपनियों का ऑडिट करते थे, जिससे हमेशा से उनकी भूमिका एक चौकीदार के तौर पर रही, जो कुछ भी गलत नहीं होने देते थे। जहां तक छोटे उद्योगों की इंडस्ट्री का सवाल है, जहां पर डोमेन की जानकारी बहुत कम होती थी, वहां सीए ऐसे सेक्टर्स को जानकारी और ज्ञान देने का काम करते थे। इसमें बजट से लेकर वैधानिक और इकोनॉमी में आ रहे बदलाव तक शामिल थे। सीए इस तरह से राष्ट्र के निर्माण में मदद करते रहे हैं।

ICAI एक बहुत ही बढ़िया स्ट्रक्चर के साथ ये काम कर रहा है। बहुत सारी जगह पर लोकल बॉडी, ICAI के लोकल चैप्टर से मदद ले रही हैं। एक छोटे से व्यापार में ज्यादा खर्चे नहीं चल सकते हैं। अगर इंडस्ट्री का कोई ग्रुप कुछ लोगों को अपने साथ हायर करता है तो फिर खर्चे कम हो जाते हैं, जिससे काम चल जाता है। एमएसएमई सेक्टर में खर्चों को संभालना काफी कम होता है। इसलिए एक स्ट्रक्चर होना चाहिए जहां खर्चें कम हो। इस बारे में सीए से जानकारी ली जा सकती है।    

प्रश्नः VUCA की दुनिया में सीए को आप किन चुनौतियों का सामना करते हुए देखते हैं?

सबसे बड़ी चुनौती जोखिम बनाम इनाम है। सीए का फीस स्ट्रक्चर और जवाबदेही बहुत बदल गई है। एक गलत धारणा है कि जब कोई व्यवसाय विफल हो जाता है, तो इसका दोष सीए पर लगाया जाता है। बैलेंस शीट पर हस्ताक्षर करते समय सीए चलन में आते हैं लेकिन मुझे लगता है कि सीए को व्यावसायिक विफलताओं से खुद को अलग करना सीखना होगा। बिजनेस मॉडल अभी भी प्रमोटर्स और व्यवसाय चलाने वाले पेशेवरों के अंतर्गत आता है।

प्रश्नः अगली पीढ़ी के अकाउंटेंसी प्रोफेशनल्स को तैयार करने के लिए और क्या किया जा सकता है?

यह फोकस का एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सीए परीक्षा पास करना अपने आप में कठिन है लेकिन ट्रेनिंग प्रोसेस को तेज किया जाना चाहिए ताकि वे माहौल में हो रहे बदलावों के लिए तैयार हो सकें। इसलिए, प्रैक्टिकल ओरिएंटेशन भी उतना ही महत्वपूर्ण है, हालांकि ICAI  ने वास्तविक जीवन की समस्याओं की तीव्रता को बढ़ाने के लिए योग्य होने के बाद भी व्यावहारिक ज्ञान प्रदान करने के लिए विभिन्न कदम उठाए हैं।

प्रश्नः अकाउंटेंट्स की 21वीं  वर्ल्ड कांग्रेस 2022 पहली बार भारत में आयोजित की जाएगी। यह क्या दर्शाता है? यह भारत में अकाउंटेंट्स  को इसमें भाग लेने में कैसे मदद कर सकता है?

सबसे पहले, संस्थान और सरकार सहित इसमें शामिल सभी लोगों को इस प्रक्रिया में मदद करने के लिए बधाई। यह अकाउंटिंग पेशे को प्रदर्शित करने का अवसर है, जिसे विश्व स्तर पर अच्छी तरह से मान्यता प्राप्त है। यह दिखाने का समय है कि भारतीय अकाउंटेंट्स क्या कर सकते हैं, उनकी गहराई और ज्ञान। साथ ही, यहां पर सभी प्रमुख देशों के अनुभव और उनकी अकाउंटिंग प्रैक्टिस का एक्सचेंज देखने को मिलेगा।
 


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