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3 दिन, 3 एयरपोर्ट हादसे और सबसे बड़ा सवाल, करोड़ों के खर्च को कैसे बहा ले गई बारिश? 

देश के तीन हवाईअड्डों पर हुए हादसों के लिए बारिश को कुसूरवार ठहराया जा रहा है, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर जिम्मेदार खामोश हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

जबलपुर, दिल्ली और अब राजकोट. इन तीन शहरों के हवाईअड्डों पर लगभग एक जैसे हादसे हुए हैं. इन हादसों के लिए कभी बारिश को कुसूरवार ठहराया जा रहा है, तो कभी नेता एक-दूसरे को दोषी साबित करने में लगे हैं. दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर हुए हादसे में एक शख्स की जान चली गई है. गनीमत इतनी है कि जबलपुर और राजकोट में कोई जनहानि नहीं हुई. कांग्रेस दिल्ली एयरपोर्ट दुर्घटना के लिए मोदी सरकार पर उंगली उठा रही है. जबकि भाजपा का कहना है कि हवाईअड्डे का जो हिस्सा गिरा वो कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार के वक्त बना था. यदि इस दावे में सच्चाई है भी तो क्या मानसून से पहले एयरपोर्ट का सेफ्टी ऑडिट सुनिश्चित करवाना सरकार की जिम्मेदारी नहीं थी?

450 करोड़ रुपए हुए थे खर्च
मध्य प्रदेश के जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट पर 27 जून को ड्रॉप एंड गो जोन के ऊपर लगा शेड गिर गया था. हादसे में नीचे खड़ी सरकारी गाड़ी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई. गनीमत रही कि हादसे के समय कार में कोई नहीं था. इस घटना के बाद एयरपोर्ट में हुए करोड़ों के निर्माण पर सवाल उठ रहे हैं. एक रिपोर्ट बताती है कि जबलपुर एयरपोर्ट को नया रूप देने पर करीब 450 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे. इस हादसे के लिए एयरपोर्ट अथॉरिटी बारिश को जिम्मेदार बता रही है. मध्य प्रदेश के इस हवाईअड्डे की कमान अभी सरकार के हाथों में है. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AII) डुमना एयरपोर्ट का संचालन करती है. प्रधानमंत्री मोदी ने 10 मार्च को वर्चुअली जबलपुर डुमना एयरपोर्ट का शिलान्यास और उद्घाटन किया था. 

यात्रियों की सुरक्षा भगवान भरोसे? 
जबलपुर के बाद देश की राजधानी दिल्ली में भी ऐसी ही दुर्घटना हुई. 28 जून को सुबह 5 बजे इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) के टर्मिनल-1 पर पार्किंग की छत गिर गई. हादसे में कार में बैठे कैब ड्राइवर की मौत हो गई, जबकि 8 अन्य घायल. दरअसल, टर्मिनल-1 पर डोमेस्टिक फ्लाइट के लिए पार्किंग एरिया में सुबह गाड़ियों की लाइन थी. इसी दौरान पार्किंग की छत अचानक गिर गई. छत का भारी-भरकम हिस्सा और लोहे के तीन सपोर्ट बीम भी सीधे गाड़ियों पर आ गिरे, जिससे एक कैब ड्राइवर की मौत हो गई. दिल्ली एयरपोर्ट से हर दिन 1300 से ज्यादा फ्लाइट उड़ान भरती हैं. यात्रियों से सफर करने के चार्ज के अलावा एयरपोर्ट डेवलपमेंट फीस और यूजर डेवलपमेंट फीस वसूली जाती है. उसके बावजूद यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा के मुद्दे पर गंभीरता से काम नहीं किया जाता. 

कौन चलाता है दिल्ली एयरपोर्ट?
दिल्ली एयरपोर्ट को दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) के ज्वाइंट वेंचर के तहत संचालित किया जाता है. GMR ग्रुप की अगुवाई वाले इस कंसोर्टियम में GMR एयरपोर्ट्स लिमिटेड की 64% हिस्सेदारी है. जबकि एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) के पास 26% और Fraport AG Frankfurt Airport Services Worldwide के पास 10% हिस्सेदारी है. दिल्ली एयरपोर्ट देश का एकमात्र ऐसा एयरपोर्ट है, जहां 4 रनवे हैं. बताया जा रहा है कि जिस टर्मिनल पर हादसा हुआ है, उसे जीएमआर ने ही विकसित किया था. GMR ग्रुप दिल्ली के अलावा हैदराबाद, गोवा और कर्णाटक के बीदर एयरपोर्ट को भी ऑपरेट करता है. 

ब्लेम गेम, कंपनी ने नकारा दावा
नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू का कहना है कि टर्मिनल-1 का हिस्सा UPA सरकार में बनाया गया था. PM मोदी ने 10 मार्च को टर्मिनल-1 में जिस बिल्डिंग का उद्घाटन किया वह दूसरी तरफ है. राज्यसभा सांसद और पूर्व नागरिक उड्डयन मंत्री प्रफुल्ल पटेल का भी यही दावा है कि टर्मिनल-1 UPA के समय बना था. उन्होंने यह भी कहा कि टर्मिनल 1 की एक इमारत 15 साल पहले बनाई गई थी. लार्सन एंड टुब्रो कंपनी ने इसे बनाया था. हालांकि, L&T ने पटेल के दावे को नकार दिया है. कंपनी का कहना है कि उसने हादसे वाली बिल्डिंग का निर्माण नहीं किया था और न ही उसके रखरखाव के लिए जिम्मेदार है. बता दें कि प्रफुल्ल पटेल UPA सरकार में 2004 से 2011 तक सिविल एविएशन मिनिस्टर थे.

यहां 1400 करोड़ से ज्यादा खर्च 
अब गुजरात के राजकोट एयरपोर्ट से भी ऐसे ही हादसे की खबर सामने आई है. 29 जून यानी आज भारी बारिश के चलते राजकोट अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट के टर्मिनल के बाहर पिकअप और ड्रॉप क्षेत्र में एक साइड की छत गिर गई. गनीमत रही कि जिस समय हादसा हुआ, वहां कोई नहीं था वरना जनहानि हो सकती थी. इस टर्मिनल के निर्माण पर भी पानी की तरह पैसा बहाया गया है. पिछले साल जुलाई में ही राजकोट एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का लोकार्पण पीएम मोदी ने किया था. 1400 करोड़ से ज्यादा की लागत से इस एयरपोर्ट का विस्तार हुआ था. ऐसे में बारिश के चलते छत के गिर जाने पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. इस हवाईअड्डे का संचालन भी जबलपुर एयरपोर्ट की तरह AAI के पास है. पिछले तीन दिनों में हुए इन तीन एयरपोर्ट हादसों के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि करोड़ों की लागत से तैयार इन हवाईअड्डों का निर्माण क्या इतना घटिया है कि कुछ घंटों की बारिश उसे बहा ले गई?


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