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2030: 7 ट्रिलियन की अर्थव्‍यवस्‍था के लिए क्‍या होना चाहिए रोडमैप?

वर्ष 2024 के अंत में भारत की अनुमानित जीडीपी 350 लाख करोड़ रुपये होगी. अगर एक डॉलर की कीमत उस वक्‍त 83.50 रुपये होती है तो भारत की जीडीपी 4.14 ट्रिलियन डॉलर होगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

चीन की जीडीपी ने पहली बार कब 7 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार किया था, यह वर्ष 2011 था, 2007 में, चीन की जीडीपी $ 3.55 ट्रिलियन डॉलर थी. भारत की जीडीपी की स्थिति 2022-23 में यहीं खड़ी है. चीन की अर्थव्यवस्था दो कारणों से चार लगातार वर्षों में दोगुनी हो गई. एक, बड़े पैमाने पर निर्यात आधारित वृद्धि और दूसरा स्थिर युआन. वास्तव में चीनी मुद्रा की प्रशंसा करनी होगी कि 2007 में USD के औसत 7.61 युआन से बढ़कर 2011 में 6.46 हो गई.  16 प्रतिशत की ग्रोथ ने चीन की जीडीपी को USD के मुकाबले टर्बोचार्ज करने में मदद की. लेकिन एक दशक से अधिक समय के बाद, युआन के मूल्‍य में अमरीकी डालर के मुकाबले 2011 के 6.46 के उच्च स्तर से मामूली गिरावट हुई है और यह 7.14 हो गया है. 

चीन की सफलता का आखिर क्‍या हीै राज?

वस्तुतः यह हर अन्य वैश्विक मुद्रा के विपरीत था. उदाहरण के लिए, 2007 में, INR, USD के मुकाबले 41.35 पर कारोबार कर रहा था. तब से इसमें 100 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आ चुकी है और ये 83.50 पर आ चुका है. निस्संदेह इसका कारण चीन का बड़ा सकारात्मक व्यापार संतुलन है  और भारत का दीर्घकालिक व्‍यापार घाटा. ऐसा केवल अब इसलिए हुआ है क्‍योंकि भारत के सेवा निर्यात में तेजी आई है और जिसके कारण भारत का CAD जीडीपी के एक प्रतिशत से नीचे आ गया है.

आखिर क्‍या होना चाहिए 7 ट्रिलियन के लिए रास्‍ता?  

2030 तक 7 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी हासिल करने के लिए आवश्यक मैक्रो और माइक्रो सामग्री क्या हैं? सबसे पहले, भारत को गिरते सीएडी के क्रम को बनाए रखना होगा. साथ  ही $105 बिलियन से अधिक का शुद्ध प्रेषण(Net Remittances) और एफडीआई को बनाए रखना होगा , हालांकि वर्तमान में ये  $50 बिलियन पर स्थिर है. भारत के भुगतान का संतुलन (बीओपी) वर्ष 2025 में $80 बिलियन डॉलर के आसपास होगा. इससे रुपये पर दबाव कम होगा.

अगर 2007 से 2024 तक भारतीय मुद्रा आधी न हो गयी होती तो अभी भारत का सकल घरेलू उत्पाद पहले से ही $7 ट्रिलियन से अधिक होता. जो वास्तव में क्रय शक्ति समता के संदर्भ में है क्योंकि डॉलर-रुपये का मूल्य सापेक्ष मजदूरी-लागत सूचकांक के आधार पर पीपीपी समायोजित करता है. 2030 तक भारत की अर्थव्यवस्था 7 ट्रिलियन डॉलर बनाने के लिए इस दिशा में दूसरा जरूरी कदम ये उठाना जरूरी है कि प्राइवेट सेक्‍टर में अधिक से अधिक मैन्‍युफैक्‍चरिंग और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया जाए. 

नौकरियों को पैदा करने में ये अहम भूमिका निभा सकता है. 
तीसरा उपाय ये है कि कीमतों पर अंकुश रखें. महंगाई मजदूरी को खा जाती है और इसका एक उदाहरण हाल ही में लोकसभा चुनाव में भी देखा जा सकता है जहां बीजेपी को प्रमुख राज्‍यों में नुकसान उठाना पड़ा.  कम कीमतें खपत को बढ़ाती हैं. 

$7 ट्रिलियन तक का रास्ता
वर्ष 2024 के अंत में भारत की अनुमानित जीडीपी 350 लाख करोड़ रुपये होगी. अगर एक डॉलर की कीमत उस वक्‍त 83.50 रुपये होती है तो भारत की जीडीपी 4.14 ट्रिलियन डॉलर होगी.  अगर इसे आधार माना जाए तो 2030 तक भारत की 7 ट्रिलियन जीडीपी पाने के लिए सालाना ग्रोथ क्‍या होनी चाहिए. सोचिए भारत की प्रति साल ग्रोथ रेट 8 प्रतिशत रहती है. इसमें चार प्रतिशत की महंगाई का अवस्फीतिकारक जोड़ दें. 2023-24 में यह WPI आधारित कमोडिटी की कम कीमतों के कारण डिफ्लेटर दो प्रतिशत से कम था और  
सीपीआई चार प्रतिशत से अधिक थी.  

हालाँकि, मुद्रास्फीति अपस्फीतिकारक WPI पर आधारित है जो वित्त वर्ष 2025 में बढ़कर चार हो जाने की संभावना है. नॉमिनल जीडीपी वृद्धि वास्तविक है और ये वृद्धि (आठ प्रतिशत) प्लस रह सकती है. वहीं इसी तरह औसत जीडीपी ग्रोथ रेट के 12 फीसदी का अनुमान है. दिसंबर 2024 से लेकर दिसंबर 2030 के बीच छह वर्षों में, 12 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) पर , भारत की नॉमिनल जीडीपी 350 लाख करोड़ रुपये से दोगुनी होकर 700 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी. इसका अहम कारण INR-USD एक्‍सचेंज रेट है. 

हर साल तीन प्रतिशत से होता है अवमूल्‍यन 
ऐतिहासिक रूप से, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का अवमूल्यन प्रति वर्ष तीन प्रतिशत की दर से हुआ है. यह मोटे तौर पर अमेरिका में मुद्रास्फीति दर (दो प्रतिशत) और भारत में मुद्रास्‍फीति दर (5 प्रतिशत ) के बीच का अंतर था. कोविड महामारी के बाद से यह अंतर कम हो गया है. बहरहाल, फेडरल द्वारा निर्धारित दीर्घकालिक अमेरिकी रिजर्व मुद्रास्फीति लक्ष्य दो फीसदी है. भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) मुद्रास्फीति बैंड 2-6 प्रतिशत है, जिसमें चार प्रतिशत औसत लक्ष्‍य है. भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए, परिपक्व अमेरिकी अर्थव्यवस्था की तुलना में ऊंचा मुद्रास्फीति लक्ष्य स्वीकार किए जा सकते हैं. 
इसलिए यह मानते हुए कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये का सालाना औसतन दो फीसदी अवमूल्यन होगा, तो रुपये में गिरावट आ सकती है. अगले छह वर्षों में चक्रवृद्धि आधार पर 13-14 प्रतिशत बढ़कर 95 रुपये हो जाएगा. 2030 में जीडीपी 700 लाख करोड़ रुपये हो जाएगी. जो $7.35 ट्रिलियन के सकल घरेलू उत्पाद, लक्ष्य से थोड़ा ऊपर है. 

इस गणना में क्या धारणाएँ हैं और क्या गलत हो सकता है?
पहली धारणा औसत वार्षिक जीडीपी की वृद्धि आठ प्रतिशत है. ऐसा प्रतीत होता है कि भारत के मौजूदा  आर्थिक विकास पथ को देखते हुए ये उचित अनुमान दिखाई पड़ता है. 
दूसरी धारणा चार प्रतिशत की स्थिर मुद्रास्फीति दर है. वह भी, बाहरी झटकों को छोड़कर, एक उचित अनुमान लगता है. तीसरी धारणा विनिमय दर है. 2024-30 में 13-14 प्रतिशत का मूल्यह्रास फिर से समर्थित प्रतीत होता है.

उपलब्ध साक्ष्य.
याद रखें कि चीन ने हाल ही में 2011 में 7 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी को पार कर लिया था. ट्रेड सरप्‍लय के बकाए ने युआन को स्थिर रखने और यहां तक कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मूल्य बढ़ाने में मदद की. यदि अन्य एशियाई मुद्राओं की तरह युआन का भी अवमूल्यन हुआ होता, तो चीन की जीडीपी 18 ट्रिलियन डॉलर के बजाय $10 ट्रिलियन के करीब होती.

 भारत के CAD में कमी के साथ
भारत में निकट भविष्य में भुगतान संतुलन बढ़कर 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष से अधिक होने की संभावना है. मजबूत विकास के शिखर पर है. याद रखें कि चीन ने हाल ही में 2011 में 7 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी को पार कर लिया था.व्यापार अधिशेष ने युआन को स्थिर रखने और यहां तक कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मूल्य बढ़ाने में मदद की. यदि अन्य एशियाई मुद्राओं की तरह युआन का भी अवमूल्यन हुआ होता, तो आज चीन की जीडीपी में गिरावट होती.

कितनी हो जाएगी भारत की प्रति वव्‍यक्ति आय? 

18 ट्रिलियन डॉलर के बजाय $10 ट्रिलियन के करीब हो. भारत के CAD में कमी के साथ भारत में निकट भविष्य में भुगतान संतुलन बढ़कर 100 अरब डॉलर प्रति वर्ष से अधिक होने की संभावना है. मजबूत विकास के शिखर पर है. क्या भारत अमीर बनने से पहले बूढ़ा हो जाएगा? क्या भारत का जनसांख्यिकीय लाभांश ऐसा होगा? उच्च विकास को धीमा कर देता है? यह एक ऐसा भय है जो साक्ष्यों द्वारा समर्थित नहीं है। क्या साक्ष्य यह सुझाव देते हैं कि भारत की वर्तमान प्रति व्यक्ति आय $2,800 हो जाएगी. ये 2030 तक बढ़कर $5,500 हो गयी.  पीपीपी द्वारा, प्रति व्यक्ति आय मापने का सही तरीका (लेकिन नहीं जीडीपी), 2030 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय लगभग 12,000 डॉलर होगी. यह वैश्विक मानकों से अभी भी कम है. लेकिन 2030 में शुरुआत करने के लिए यह एक अच्छा आधार है, सभी के लिए आर्थिक विकास की नई लहर और अधिक समृद्धि लाए. 

लेखक: मिन्हाज़ मर्चेंट(Minhaz Merchant) 
राजीव गांधी, आदित्य बिड़ला और न्‍यू क्‍लैस ऑफ सि‍विलाइजेशन (New Clash Of Civilization) के लेखक हैं. मिन्‍हाज मर्चेंट स्टर्लिंग समाचार पत्र प्राइवेट लिमिटेड के संस्‍थापक हैं जिसका इंडियन एक्‍सप्रेस ग्रुप के द्वारा अधिग्रहण किया गया था. 


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