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BW Class: Stock Split क्या होता है, इससे आपके निवेश पर क्या असर पड़ता है, समझिए

कोई कंपनी किसी अनुपात में एक शेयर को कई टुकड़ों में बांट देती है तो उसे स्टॉक स्प्लिट कहते हैं. स्टॉक स्प्लिट से कुछ भी नहीं बदलता, तो फिर कंपनियां ऐसा करती क्यों हैं. समझिए

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

स्टॉक स्प्लिट क्या होता है
आपने पिज्जा तो जरूर खाया होगा, पिज्जा को अगर खाने वाले 4 होते हैं तो आप उसके 4 टुकड़े कर देते हैं, लेकिन अगर 6 लोग खाने वाले हों तो आप उसके 6 टुकड़े भी कर सकते हैं, लेकिन क्या इससे पिज्जा का साइज बढ़ गया या घट गया. ऐसा तो कुछ भी नहीं हुआ. किसी शेयर का स्टॉक स्प्लिट भी ऐसे ही काम करता है. किसी कंपनी के शेयर को कई टुकड़ों में तोड़ दिया जाए तो उस कंपनी के मार्केट कैप पर कोई असर नहीं पड़ता, बस शेयरों की संख्या बढ़ जाती है. 

स्टॉक स्प्लिट से क्या होगा 
कोई कंपनी किसी अनुपात में एक शेयर को कई टुकड़ों में बांट देती है तो उसे स्टॉक स्प्लिट कहते हैं. स्टॉक स्प्लिट से कुछ भी नहीं बदलता, सिर्फ निवेशकों को उस शेयर को खरीदने में आसानी हो जाती है. आइए समझते हैं ये स्टॉक स्प्लिट होता कैसे है. मान लीजिए आपके पास किसी कंपनी XYZ Ltd के 40 शेयर हैं, एक शेयर की कीमत 1000 रुपये है, फेस वैल्यू 10 रुपये है, यानी आपका कुल निवेश (40x1000) 40,000 रुपये है. मान लीजिए कंपनी XYZ Ltd 2:1 का स्प्ल्टि का ऐलान करती है, यानी 1 शेयर को दो हिस्सों में बांटा जाएगा. ऐसे में आपके शेयरों की संख्या बढ़कर दोगुनी हो जाएगी यानी 80 शेयर. लेकिन शेयर प्राइस और फेस वैल्यू आधी हो जाएगी. यानी शेयर प्राइस होगा 500 रुपये और फेस वैल्यू हो जाएगी 5 रुपये. लेकिन इससे और कुछ नहीं बदलेगा, क्योंकि आपका निवेश (80x500) ही रहेगा. 

कंपनियां क्यों करती हैं स्टॉक स्प्लिट?
शेयर बाजार में कई कंपनियों के शेयरों की कीमतें इतनी ज्यादा होती हैं कि वो निवेशकों के पहुंच के बाहर होती है. कोई निवेशक अगर चाहे भी तो उसे नहीं खरीद पाता, इसी का इलाज है स्टॉक स्प्लिट, कंपनियों को जब लगता है कि उसके शेयरों की कीमत बहुत ज्यादा हो गई है तो वो स्टॉक स्प्ल्टि करते हैं, ताकि शेयर कई बराबर टुकड़ों में बंट जाए और शेयर प्राइस भी कम हो जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उस कंपनी के शेयर खरीद सकें. जैसे पिज्जा वाले उदाहरण से ही समझ लीजिए, अगर पिज्जा बहुत ज्यादा बड़ा है, और खाने वाले कम हैं तो उनके हिस्से में बहुत बड़े हिस्से आएंगे, जो शायद वो खा भी न पाएं, इसलिए बेहतर होगा कि पिज्जा के कई और टुकड़े कर दिए जाएं और उन छोटे टुकड़ों को कई और लोगों में बांट दिया जाए. यानी एक पिज्जा से कई लोगों का पेट भर जाएगा. 

कंपनियों और निवेशकों को क्या फायदा
जब कोई कंपनी स्टॉक स्प्लिट करती है तो निवेशकों के बीच ये संदेश जाता है कि कंपनी काफी अच्छा परफॉर्म कर रही है, इस भरोसे में कि कंपनी के शेयरों में स्टॉक स्प्लिट के बाद भी तेजी जारी रहेगी, निवेशक इस कंपनी के शेयरों को खरीदना शुरू कर देते हैं. इसके अलावा शेयर स्प्लिट होने से कंपनी को शेयर प्राइस नीचे लाने में मदद मिलती है, उसके भाव उसकी प्रतिस्पर्धी कंपनियों के शेयर प्राइस की रेंज में आ जाते हैं, जिससे जो निवेशक अबतक महंगा शेयर होने की वजह से निवेश करने से बच रहे थे अब वो शेयर खरीदना शुरू कर देते हैं, जिससे कंपनी के शेयर की डिमांड बढ़ने लगती है और शेयर प्राइस में भी उछाल आने लगता है. ये तो रहा कंपनियों का फायदा. अब निवेशकों के लिए फायदा ये होता है कि उन्हें अच्छी कंपनियों के शेयर सस्ते भाव पर मिल जाते हैं, जिस कंपनी के शेयरों को वो अबतक खरीदने से कतरा रहे थे अब वो उनके पोर्टफोलियो का हिस्सा बन जाता है. दूसरी ओर जिन निवेशकों के पास पहले से ये शेयर मौजूद हैं, डिमांड बढ़ने के बाद जब शेयर प्राइस बढ़ता है तो उन्हें इसका फायदा मिलता है. 

रिवर्स स्टॉक स्प्लिट क्या होता है
कंपनियां कभी कभी रिवर्स स्टॉक स्प्लिट भी करती हैं. इसमें कंपनियां अपने शेयरों की संख्या घटाती हैं और शेयर प्राइस को बढ़ाती है. ऐसा कंपनियां तब करती हैं जब उन्हें ये लगता है कि मार्केट में उनके शेयर की वैल्यू बाकी प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले काफी कम हो गई है. इसमें भी निवेशकों के निवेश वैल्यू पर कोई असर नहीं पड़ता है. जैसे मान लीजिए किसी कंपनी ABC ने 1:5 का रिवर्स स्टॉक स्प्लिट का ऐलान किया, मतलब ये है कि हर 5 शेयर अब 1 शेयर माना जाएगा. एक उदाहरण से समझते हैं- मान लीजिए इस कंपनी के आपके पास 100 शेयर हैं. शेयर प्राइस 10 रुपये है और फेस वैल्यू 2 रुपये. आपके निवेश की वैल्यू (10X100) 1000 रुपये है. 1:5 के स्टॉक स्प्लिट होने पर शेयर की वैल्यू 5 गुना यानी 50 रुपये और फेस वैल्यू 5 गुना यानी 10 रुपये हो जाएगी और शेयरों की संख्या 1/5 यानी 20 शेयर हो जाएंगे. फिर भी आपके निवेश की वैल्यू (20X50) 1000 रुपये ही रहेगी. 

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