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BW Class: Share Buyback क्या होता है, इससे आपको क्या फायदा? समझिए आसान भाषा में
कई बार कंपनियां अपने EPS (प्रति शेयर से कमाई) और PE रेश्यो को अच्छा करने के लिए भी शेयर बायबैक करती हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
आमतौर पर शेयर बाजार में हमें जब कोई कंपनी पसंद आती है तो हम उसके शेयर खरीद लेते हैं, तो उसे SHARE BUY करना कहते हैं. लेकिन जब यही प्रक्रिया रिवर्स हो जाए, यानी जब कोई कंपनी अपने ही शेयर वापस खरीदना शुरू कर दे तो इसे SHARE BUYBACK कहते हैं. इस एक लाइन में SHARE BUYBACK को लेकर तस्वीर काफी कुछ साफ हो जाती है. मगर सवाल अब भी कई हैं, जैसे, कंपनियां शेयर बायबैक करती क्यों हैं, इससे हमारे जैसे आम निवेशकों का क्या फायदा है. तो चलिए समझते हैं
कंपनियां शेयर बायबैक क्यों करती हैं, समझिए
कोरोना महामारी के दौरान अगर आपने ध्यान दिया हो, तो कई कंपनियों ने शेयर बायबैक का ऐलान किया था, Motilal Oswal, Sun Pharma, Thomas Cook वगैरह. लेकिन उन्होंने ऐसा क्यों किया. कंपनियां आमतौर पर दो ही वजहों से शेयरों का बायबैक करती हैं.
वजह नंबर 1 - शेयर थोड़े महंगे हो गए
जब किसी कंपनी के शेयर काफी अच्छी कीमत पर होते हैं या थोड़े महंगे हो जाते हैं, तो मोटे मुनाफे पर बैठी कंपनियां अपने मुनाफे में से थोड़ा हिस्सा डिविडेंड के तौर पर अपने शेयरधारकों में बांट देती हैं. इसका दूसरा तरीका भी होता है कि वो शेयरधारकों से शेयरों को मार्केट प्राइस से ज्यादा भाव पर खरीद लें. कई निवेशक जब शेयरों पर अच्छा भाव का ऑफर देखते हैं तो वो अपने शेयर कंपनी को बेच देते हैं.
वजह नंबर 2- शेयरों की कीमत काफी कम हो गई
दूसरी परिस्थिति तब होती है जब किसी कंपनी के शेयर की वैल्यू कम हो जाती है, हालांकि कंपनी के फंडामेंटल्स काफी अच्छे होते हैं, इसी भरोसे को निवेशकों तक पहुंचाने के लिए कंपनी शेयरों का बायबैक करती है, ताकि ये संदेश दिया जा सके कि कंपनी के फंडामेंटल्स काफी मजबूत हैं और शेयर की वैल्यू बढ़ने की उम्मीद है. जैसा की कोविड महामारी के दौरान हुआ था.
वजह नंबर 3 - EPS को बेहतर करना
कई बार कंपनियां अपने EPS (प्रति शेयर से कमाई) और PE रेश्यो को अच्छा करने के लिए भी शेयर बायबैक करती हैं. जब कोई कंपनी अपने ही शेयरों को खरीदती है तो उसके आउटस्टैंडिंग शेयर कम हो जाते हैं जिससे उसका EPS बढ़ जाता है.
मान लीजिए किसी कंपनी के पास 20 शेयर हैं और कंपनी का मुनाफा 1000 रुपया है. तो
EPS = मुनाफा / शेयरों की संख्या
EPS = 100 / 20
EPS = 5 रुपये
अब मान लीजिए कंपनी ने बायबैक के जरिए 5 शेयरों को खरीद लिया, तो शेयर बाजार में मौजूद शेयरों की संख्या होगी 20-5 = 15
EPS = मुनाफा / शेयरों की संख्या
EPS = 100 / 15
EPS = 6.6 रुपये
यानी कंपनी का EPS बायबैक करने के बाद बढ़ गया, इससे निवेशकों में एक अच्छा संदेश भी जाता है.
बायबैक दो प्रकार के होते हैं, आइए एक एक करके दोनों को समझते हैं
1. टेंडर ऑफर बायबैक
इसमें कंपनी जब ये तय करती है कि वो शेयरों का बायबैक करेगी, तो एक रिकॉर्ड डेट का ऐलान किया जाता है. इस तारीख तक जिन निवेशकों के डीमैट खाते में कंपनी के शेयर मौजूद रहते हैं वो ही निवेशक कंपनी के टेंडर ऑफर बायबैक में हिस्सा ले सकते हैं. कंपनियां आमतौर पर निवेशकों को बायबैक का ऑफर मार्केट प्राइस से ज्यादा पर करती हैं, ताकि निवेशक अपना फायदा देखकर इस ऑफर में हिस्सा लें. कंपनियों की ओर से टेंडर ऑफर बायबैक के लिए 10 दिनों का समय दिया जाता है. इस दौरान शेयरहोल्डर्स को अपने शेयर कंपनी को ऑफर करने होते हैं. 10 दिनों के बाद शेयरहोल्डर्स के पास ई-मेल के जरिए ये जानकारी मिलती है कि उनके कितने शेयर बायबैक हुए हैं. क्योंकि कंपनियां कभी भी पूरे शेयरों का बायबैक नहीं करती है. इसकी वजह है कि ये पहले से तय हो जाता है कि वो कितने शेयरों का बायबैक करने वाली है. अक्सर उससे कहीं ज्यादा ही शेयरों का ऑफर बायबैक के लिए आ जाता है. मान लीजिए आपने 100 शेयर ऑफर किए थे, लेकिन कंपनी ने सिर्फ 50 ही शेयर बायबैक किए हैं तो 50 शेयरों का पैसा ही आपको मिलेगा.
2. ओपन ऑफर बायबैक
जब कंपनी अपने शेयरों को एक्सचेंज से खरीदती है तो उसे ओपन ऑफर बायबैक कहते हैं, जैसा कि एक आम निवेशक करता है. हालांकि कंपनी पहले से ये तय कर लेती है कि उसे कितने शेयर खरीदने हैं और किस भाव पर खरीदने हैं. कंपनी ये शेयर बायबैक की प्रक्रिया 6 महीने के दौरान पूरा करती है. इस ऑफर में आम शेयरहोल्डर्स का कोई लेना देना नहीं होता है, क्योंकि कंपनी ओपन मार्केट से शेयर खरीद रही है, ठीक वैसे ही जैसे हम और आप खरीदते हैं.
शेयर बायबैक से निवेशकों का क्या फायदा
जब कोई कंपनी शेयर बायबैक लेकर आती है, तो अक्सर उसका मकसद अपने शेयरों की कीमतों को बढ़ाने का होता है. ऐसे में जो निवेशक इस शेयर बायबैक ऑफर में हिस्सा नहीं लेते हैं उन्हें फायदा मिलता है, क्योंकि आमतौर पर शेयरों का प्राइस आगे चलकर बढ़ जाता है. दूसरी तरफ जो निवेशक शेयर बायबैक में हिस्सा लेते हैं उन्हें शेयर की बढ़ी हुई कीमत उसी समय मिल जाती है.
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