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होम लोन की EMI न चुकाने पर इस एक्ट के तहत होगी कार्रवाई, क्या है SARFAESI एक्ट?

SARFAESI की फुल फॉर्म सिक्योरिटाइजेशन & रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स & एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एक्ट है.

पवन कुमार मिश्रा 3 years ago

होम लोन की EMI का भुगतान नहीं किए जाने पर बैंक के पास अधिकार होता है कि वह आपकी प्रॉपर्टी को जब्त कर सके. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि बैंक को यह अधिकार मिलते कहां से हैं और अगर बैंक के पास आपकी प्रॉपर्टी जब्त करने का अधिकार है तो आपके अधिकार क्या हैं? आज हम इसी बारे में  बात करेंगे और SARFAESI एक्ट (SARFAESI Act) के बारे में जानेंगे. 

कैसे बना SARFAESI एक्ट 2002?
SARFAESI एक्ट का विस्तृत रूप सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एक्ट होता है. बिना कोर्ट के हस्तक्षेप के NPAs (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स) की रिकवरी के लिए बैंकों को ताकत चाहिए थी और इसी मकसद से SARFAESI एक्ट को तैयार किया गया था. NPAs की रिकवरी में SARFAESI एक्ट काफी महत्त्वपूर्ण साबित हुआ. बैंकिंग सेक्टर में आवश्यक बदलावों को जांचने और बैंकों के लिए मौजूदा कानून व्यवस्था में बदलावों को सुझाने के लिए ही केंद्र सरकार द्वारा नरसिम्हन कमिटी और अन्ध्यारुजना कमिटी का गठन किया गया था. वित्तीय संस्थानों को मजबूती प्रदान करने के लिए इन कमेटियों ने नए नियम व कानून बनाने का सुझाव दिया और फिर साल 2002 में SARFAESI एक्ट सामने आया? 

अगर नहीं भरी EMI तो होगा ये नतीजा
SARFAESI के तहत ही CERSAI (सेंट्रल रजिस्ट्री ऑफ सिक्योरिटाइजेशन एसेट रिकंस्ट्रक्शन एवं सिक्योरिटी इंटरेस्ट) का गठन भी किया गया था. CERSAI एक पूरी तरह से ऑनलाइन रजिस्ट्री और इसे फ्रॉड की जांच करने के लिए बनाया गया था, CERSAI द्वारा जांचा जाता है कि कहीं एक ही संपत्ति का इस्तेमाल करके विभिन्न बैंकों से बहुत सारे लोन तो नहीं लिए गए? SARFAESI एक्ट के तहत बिना किसी अदालती दखल के लोन देने वाली कंपनी या फिर बैंक द्वारा लोन लेने वाले व्यक्ति की संपत्ति पर कब्जा किया जा सकता है. इतना ही नहीं, लोन देने वाली संस्था चाहे तो अधिग्रहण की गई प्रॉपर्टी को बेचकर या फिर लीज यानी किराए पर देकर अपनी बकाया पड़ी राशि की रिकवरी भी कर सकती है.

कब लागू होता है SARFAESI एक्ट? 
मान लीजिए अगर 30 दिनों तक किसी ग्राहक द्वारा EMI का भुगतान नहीं किया गया है तो सबसे पहले उसके खाते को ‘स्पेशल मेंशन अकाउंट 1’ नामक स्टेटस प्रदान किया जाता है. वहीँ जब 60 दिनों तक EMI का भुगतान नहीं किया जाता तो ग्राहक के अकाउंट को ‘स्पेशल मेंशन अकाउंट 2’ का स्टेटस प्रदान किया जाता है और अंतत: जब 90 दिनों तक EMI का भुगतान नहीं किया जाता है तो अकाउंट को NPA घोषित कर दिया जाता है. अकाउंट को NPA घोषित करने के बाद ग्राहक को नोटिस भेजा जाता है और उसके बाद बैंक आगे की कार्यवाही ग्राहक के जवाब मिलने या न मिलने के अनुसार तय करते हैं. 

क्या है ग्राहकों के अधिकार?
SARFAESI एक्ट 2002 के तहत बैंक को बगैर अदालती दखल के संपत्ति का अधिग्रहण करने का अधिकार है और बैंक अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल न करे इसलिए ग्राहकों को भी कुछ अधिकार प्रदान किए गए हैं, जो इस प्रकार से हैं: 

1.    जानने का अधिकार: 60 दिनों का नोटिस मिलने के बाद लोन लेने वाले ग्राहक को अधिकार होता है कि वह उधारदाता के सामने कोई प्रतिनिधि या फिर आपत्ति पेश कर सकता है. उधारदाता को ग्राहक की आपत्ति को जांचकर ग्राहक की आपत्ति को मंजूर न करने का कारण भी बताना होता है. 

2.    अपील का अधिकार: SARFAESI एक्ट के सेक्शन 13(4) के तहत एक ग्राहक, उधारदाता द्वारा 45 दिनों के भीतर किसी प्रकार की कार्यवाही करने से पहले DRT (Debt Recovery Tribunal) के समक्ष अपील दायर कर सकता है. 

3.    संपत्ति की सही कीमत का अधिकार: बैंक या फिर उधारदाता द्वारा ग्राहक की संपत्ति की सही कीमत की जानकारी के साथ-साथ रिजर्व प्राइस, तारिख एवं नीलामी का समय बताते हुए ग्राहक को जानकारी देने के लिए नोटिस भी भेजना होता है. आपको बता दें कि यह कीमत बैंक के अधिकारीयों द्वारा तय की जाती हैं. 

4.    शेष राशि प्राप्त करने का अधिकार: उधारदाताओं को नीलामी के बाद शेष बची राशि को ग्राहकों को लौटाना होता है. ग्राहकों को सुनिश्चित करना चाहिए कि वह शेष बची राशि प्राप्त करें क्योंकि यह पैसा उनका अपना ही होता है. 

5.    मुआवजे का अधिकार: अगर उधारदाता द्वारा ग्राहक की संपत्ति पर कब्जा करने की कार्यवाही SARFAESI नियमों के अनुरूप नहीं है तो ग्राहक को DRT द्वारा तय किए गए नियमों के अनुसार मुआवजा मिलना चाहिए. 
 

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