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GDP क्या होता है, इसके घटने या बढ़ने के क्या मायने हैं, समझिए बिल्कुल आसान भाषा में

गर किसी देश की GDP बढ़ रही है तो ये उस देश के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसका मतलब हुआ कि देश में सामानों का उत्पादन हो रहा है, लोग सामान खरीद रहे हैं

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: आपने अक्सर टीवी डिबेट्स या फिर अखबारों में GDP के बारे में सुना होगा. तो आखिर ये होती क्या है, और इसका क्या महत्व है. किसी देश की GDP ज्यादा या कम होने के क्या मायने होते हैं. चलिए इसको समझते हैं 

GDP क्या होता है?
GDP यानी Gross Domestic Product, इसका मतबल होता है कि किसी एक साल में किसी देश ने अपनी राजनीतिक सीमाओं के अंदर कितने उत्पाद बनाए, प्रोडक्ट का मतलब सामानों और सेवाओं से है. इसको जरा विस्तार से समझते हैं. देश में तमाम तरह की फैक्ट्रियां, प्लांट, मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट्स हैं, इसमें कोई कार बनाता है, कोई ट्रक, कोई सुई बनाता है तो कोई चिप्स, एक साल के दौरान इन सभी सामानों की अंतिम कीमत यानी जिस कीमत पर इसको बेचा जाता है उसकी कुल वैल्यू कितनी होती है, उसको जोड़कर एक किनारे रख लिया जाता है. इसी तरह सर्विसेज में, डॉक्टर, वकील, फैशन डिजाइनर, हवाई जहाज, बसें, ट्रेनें, टेलीकॉम आईटी सेक्टर अपनी सेवाएं देता हैं और उसके बदले फीस चार्ज करता हैं. एक साल के दौरान इन सभी सेवाओं की कुल वैल्यू को जोड़कर अलग रख दीजिए. अब सभी सामानों और सभी सेवाओं की वैल्यू को जोड़कर जो भी रकम आएगी वो उस देश की GDP होगी. 

आपने ध्यान दिया होगा कि इसमें राजनीतिक सीमाओं के अंदर का जिक्र किया गया है. इसका मतलब है कि अगर कोई विदेशी कंपनी भारत में रहकर कोई प्रोडक्ट बना रही है या सेवाएं दे रही है, तो वो भारत की GDP में गिना जाएगा, न कि अमेरिका की जीडीपी में. जैसे अगर अमेरिकी फोन कंपनी Apple भारत में रहकर फोन बनाती है और बेचती है तो वो भारत की GDP में शामिल होगा, न कि अमेरिका की GDP में. मगर राजनीतिक सीमा और भौगोलिक सीमा में अंतर होता है. जो आपको नक्शे में दिखता है वो भौगोलिक सीमा होती है, लेकिन राजनीतिक सीमाएं इससे कहीं ज्यादा होती हैं. जैसे- अगर भारत में कोई हवाई जहाज से किसी दूसरे देश जाता है तो वो भौगोलिक सीमा के बाहर चला गया, लेकिन उसने टिकट खरीदने में जो रकम खर्च की वो भारत की GDP में गिनी जाएगी ऐसे ही कोई कंपनी अगर समुद्र से जाकर कच्चा तेल निकाल रही है, तो वो भी राजनीतिक सीमा के अंदर आएगा और भारत की GDP में गिना जाएगा. 

GDP के बढ़ने -घटने के मायने
अगर किसी देश की GDP बढ़ रही है तो ये उस देश के लिए अच्छा माना जाता है, क्योंकि इसका मतलब हुआ कि देश में सामानों का उत्पादन हो रहा है, लोग सामान खरीद रहे हैं और सर्विसेज भी बिक रही हैं. कुल मिलाकर ये माना जाता है कि देश की इकोनॉमी अच्छी है. लोगों की जेब में पैसा है और लोग खर्च कर रहे, ये इकोनॉमी के लिए स्वस्थ संकेत हैं. इसके उलट अगर किसी देश की GDP घट रही है, मतलब ये कि उस देश में सामानों और सर्विसेज का उत्पादन कम हो रहा है, जब उत्पादन कम होता है तो बिक्री भी कम होती है. यानी कारोबार को नुकसान होगा, क्योंकि कंपनियां पैसे नहीं कमाएंगी. जब कंपनियां बिजनेस ठीक से नहीं करेंगी तो उनके कर्मचारियों की ग्रोथ भी रुकेगी, जिससे उनके हाथ में खर्च करने के लिए पैसे कम होंगे. खर्च में कमी आने से इकोनॉमी में धीमापन आता है और GDP गिरने लगती है. 

REAL GDP और NOMINAL GDP 
जब हम कहते हैं कि भारत की GDP बढ़ गई है तो हमें ये ध्यान देना चाहिए कि हम किस GDP की बात कर रहे हैं, क्योंकि GDP दो तरह से निकाली जाती है. REAL GDP और NOMINAL GDP. चलिए इसको समझते हैं. 

इस समय महंगाई की वजह से हर चीज के दाम आसमान पर हैं, आप हर चीज की और हर सर्विस की ज्यादा कीमत चुका रहे हैं, तो जाहिर है उत्पादन नहीं बढ़ने के बावजूद GDP बढ़कर आएगी. इसे कहते हैं NOMINAL GDP, इसमें सामानों को उनके मौजूदा मार्केट प्राइस पर गिना जाता है, इसलिए NOMINAL GDP हमेशा ज्यादा आता है. बढ़ती कीमतों से भले ही देश की GDP बढ़ती हुई दिखती है लेकिन इससे उत्पादित की गई गुड्स की संख्या और उसकी क्वालिटी का पता नहीं चलता है. इसलिए सिर्फ NOMINAL GDP को देख किसी देश की आर्थिक सेहत का सही आंकलन नहीं किया जा सकता है. क्योंकि सिर्फ NOMINAL GDP देखकर आप ये नहीं बता सकते हैं कि उत्पादन में वाकई बढ़ोतरी हुई है या फिर ये सिर्फ कीमतों में उछाल की वजह से हुआ है. इसको GDP AT CURRENT PRICES कहते हैं. 

इसलिए देश की सही आर्थिक तस्वीर उकेरने के लिए अर्थशास्त्री REAL GDP का इस्तेमाल करते हैं. इसमें मान लीजिए कि एक साल के दौरान उत्पादन काफी बढ़ा है, और कीमतें भी बढ़ी हैं, लेकिन GDP निकालते समय महंगाई को एडजस्ट कर लिया जाता है.  REAL GDP निकालने के लिए एक बेस ईयर का इस्तेमाल किया जाता है, इसमें बढ़ती हुई महंगाई की जगह एक स्थिर महंगाई दर का इस्तेमाल किया जाता है. जैसे भारत के लिए GDP निकालने के लिए 2011-12 को बेस ईयर के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. इसको GDP AT CONSTANT PRICE भी कहते हैं. 

जब किसी उत्पाद को किसी फैक्ट्री में बनाया जाता है तो उसकी कीमत में टैक्स शामिल नहीं होता है, तब उसे Factor Price कहते हैं, जब उसे बेचने के लिए मार्केट में उतारा जाता है और टैक्स जोड़ा जाता है तो उसे Market Price कहते हैं. ये इसलिए बताना जरूरी है क्योंकि साल 2015 के पहले GDP को Factor Price से कैलकुलेट किया जाता था, लेकिन उसके बाद कैलकुलेशन Market Price पर होने लगी. 

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