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क्या होता है DVR स्टॉक, जिस पर Tata Motors ने लिया ये फैसला?
टाटा मोटर्स ने ऐलान किया है कि उसके DVR शेयरों को साधारण शेयरों में तब्दील किया जाएगा. इस प्रक्रिया में 12 से 15 महीने का समय लग सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
टाटा मोटर्स (Tata Motors) ने अपने डिफरेंशियल वेटिंग राइट्स (DVRs) शेयरों को रद्द करने का ऐलान किया है. कंपनी का कहना है कि टाटा मोटर्स DVR शेयरों को साधारण शेयरों में तब्दील करेगी. इसके तहत शेयरधारकों को हर 10 DVR शेयरों के बदले टाटा मोटर्स के 7 ऑ शेयर मिलेंगे. इस ऐलान के बाद से टाटा मोटर्स के शेयर तेजी से भाग रहे हैं. आज यानी बुधवार को यह बढ़त के साथ 641.30 रुपए पर कारोबार कर रहा था. वहीं, टाटा मोटर्स DVR के शेयरों में भी 18 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई.
वोटिंग राइट का चक्कर
टाटा मोटर्स की बोर्ड की बैठक में DVRs को सामान्य शेयरों में बदलने के प्रस्ताव पर मुहर लगी है. ऐसे में यह सवाल लाजमी हो जाता है कि आखिर डीवीआर शेयर होते क्या हैं? DVR का मतलब होता है Differential Voting Rights है. इसके तहत कंपनियां अपने निवेशकों को साधारण शेयरों की तुलना में कम वोटिंग अधिकार के साथ शेयर जारी करती हैं. DVR शेयर पर वोट कितने होंगे, ये कंपनी पर निर्भर करता है. DVRs के वोटिंग राइट्स भले ही कम होते हैं, लेकिन इन्हें 5 प्रतिशत ज्यादा डिविडेंड पाने का अधिकार होता है.
2008 में की थी शुरुआत
कंपनियां इसे अपने वोटिंग अधिकार को कम बांटने के लिए DVRs का प्रयोग करती हैं. टाटा मोटर्स ने पहली बार ये शेयर 2008 में जारी किए थे. इसके बाद कंपनी ने 2010 में QIP और फिर 2015 में राइट्स इश्यू के जरिये भी DVRs जारी किए थे. माना जा रहा है कि DVRs को सामान्य शेयरों में बदलने की प्रक्रिया में करीब 12-15 महीनों का समय लग सकता है. अब जब राइट्स इश्यू का जिक्र हो गया है, तो यह भी जान लेते हैं कि आखिर ये क्या होते हैं और इससे क्या फायदा होता है.
क्या होता है राइट्स इश्यू?
राइट्स इश्यू एक प्रक्रिया है जिसे शेयर बाजार में पहले से लिस्टेड कंपनियां धन संबंधी जरूरतों को पूरा करने के लिए अमल में लाती हैं. इसके तहत कंपनियां केवल अपने मौजूदा शेयरधारकों को ही अतिरिक्त शेयर खरीदने का मौका देती हैं. शेयरधारक कंपनी की ओर से निर्धारित अवधि में डिस्काउंट पर राइट्स इश्यू के तहत शेयर खरीद सकते हैं. इस प्रक्रिया से प्राप्त धन का इस्तेमाल कंपनियां अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए करती हैं.
किसे मिलता है फायदा?
राइट्स इश्यू के तहत एक निश्चित अनुपात में ही शेयर खरीदे जा सकते हैं और यह अनुपात कंपनी तय करती है. उदाहरण के तौर पर एक कंपनी ने राइट्स इश्यू के लिए 1:3 का अनुपात तय किया है. इसका मतलब है कि शेयरधारक अपने पास पहले से मौजूद 3 शेयर पर एक अतिरिक्त शेयर खरीद सकता है. राइट्स इश्यू कंपनी और शेयरधारक दोनों के लिए फायदे का सौदा होते हैं. कंपनी को जहां अतिरिक्त पैसा मिलता है. उसका इक्विटी बेस बढ़ता है और स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी के शेयरों की लिक्विडिटी बढ़ जाती है. वहीं, शेयरधारकों को वर्तमान कीमत से कम में कंपनी के शेयर मिल जाते हैं.
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