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'Bad Bank' क्या होता है, ये कैसे काम करता है, समझिए बिल्कुल आसान भाषा में
बैंकों का मुख्य काम होता है, लोगों से पैसे लेकर जमा करना और उस पर ब्याज देना, और उसी पैसे को लोन पर देकर ब्याज कमाना. यानी बैंक और कुछ नहीं बीच का बिचौलिया होता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
अगर आपसे कोई ये कहे कि Bad का क्या मतलब हुआ, तो आप कहेंगे कि किसी भी बुरी चीज को Bad कहेंगे. जैसे फिल्मों में Badman तो विलेन, इकोनॉमी के Bad Days तो मंदी और बिना छाता घूमने निकले और Bad Weather तो आफत. लेकिन हर बार Bad बुरा नहीं होता, कुछ Bad अच्छे भी होते हैं, जैसे एक विज्ञापन में दाग अच्छे होते हैं. हम बात कर रहे हैं Bad Bank की, जो वाकई में अच्छा है, जिसके नाम में तो Bad है, लेकिन काम सारे Good हैं.
क्या होता है Bad Bank
निजी बैंक, सरकारी बैंक, सहकारी बैंक और ब्लड बैंक तक तो सुना था लेकिन Bad Bank क्या है. दरअसल Bad Bank और कुछ नहीं बैंकों का सिरदर्द खत्म करने का तरीका है. बैंकों का सबसे बड़ा सिरदर्द होता है NPA, यानी नॉन परफॉर्मिंग असेट्स. ज्यादा आसान भाषा में समझें तो वो लोन जो बैंक रिकवर नहीं कर पाए. जब सरकार ने देखा कि बैंकों के NPA बढ़ रहे हैं, जिससे उनके खाते खराब हो रहे हैं, तो उसका एक उपाय निकाला, जिसे Bad Bank कहते हैं. इसे समझने के लिए पहले आपको बैंकों के कामकाज को समझना होगा
बैंक कैसे काम करते हैं
बैंकों का मुख्य काम होता है, लोगों से पैसे लेकर जमा करना और उस पर ब्याज देना, और इसी पैसे को उठाकर दूसरे लोगों को लोन देना और उस पर ब्याज कमाना, यानी बैंक और कुछ नहीं बीच का बिचौलिया होता है, जो एक हाथ से लोगों से पैसा लेता है और उसके एवज में उन्हें थोड़ा सा ब्याज देता है, लेकिन ये ब्याज देने के लिए बैंकों को पैसा कहां से मिलेगा. इसके लिए बैंक लोगों, बड़ी बड़ी कंपनियों को लोन देता है, जैसे होम लोन, कार लोन, बिजनेस लोन, एजुकेशन लोन. इस लोन पर बैंक ब्याज वसूलता है जो कि उस ब्याज से ज्यादा होता है जो वो बैंक में जमा रकम पर देता है.
जब बैंक लोगों या बिजनेसेज को लोन देता है तो उसके बदले में गारंटी भी रखवाता है, जैसे कोई घर, ऑफिस, जमीन वगैरह. कई बार जब कोई व्यक्ति या कंपनी लोन चुकाने में नाकाम हो जाती है तो वो बैंक उसे NPA घोषित कर देते हैं. ऐसे ही कई लोन जब NPA हो जाते हैं तो बैंकों का बहीखाता खराब हो जाता है. बैंक चाहें तो गिरवी या गारंटी में रखी चीजों को बेचकर अपना पैसा वसूल सकता है. लेकिन बैंकों को इसमें कोई महारथ हासिल नहीं है और न ही बैंकों का ये मूल काम है. तब सरकार ने एक संस्था बनाई जिसका नाम है National Asset Reconstruction Company Ltd यानी NARCL.
Bad Bank कैसे काम करता है
NARCL का काम है बैंकों से उसके NPA को खरीदना, ताकि बैंकों को उनके NPA से आजादी मिल सके. अब बैंकों से NPA या बैड लोन खरीदने के बाद इसे मार्केट में बेचा जाता है और जो पैसा मिलता है उसे बैंकों को दे दिया जाता है. NPA को बेचने के लिए एक और दूसरी कंपनी होती है जिसका नाम है, India Debt Resolution Company Ltd यानी IDRCL. मतलब NARCL बैंकों से उनके NPA खरीदती है और IDRCL उस NPA को मार्केट में बेचती है और जो पैसा मिलता है वो बैंकों को दे देती है. NARCL और IDRCL को मिलाकर ही हम Bad Bank बोलते हैं. Bad Bank को बनाने की योजना फरवरी 2021 के बजट में पेश की गई थी, लेकिन इसे अमली जामा पहनाने में देरी हो गई.
Bad Bank के फायदे
Bad Bank बहुत कमाल की व्यवस्था है, NPA का बोझ सिर से उतरने के बाद बैंक अपने दूसरे मोर्चों पर काम करते हैं, अपने ग्राहक बढ़ाते हैं, कमाई के नए तरीके खोजते हैं. उनकी क्रेडिट ग्रोथ बेहतर होती है. लोगों का बैंक पर भरोसा बढ़ता है जिससे बैंक में डिपॉजिट बढ़ता है और लोन ग्रोथ होती है.
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