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BW Class: UPI, NEFT है, तो 'डिजिटल रुपये' की क्या जरूरत? ये बाकियों से कैसे अलग है?

भी आप जब पैसों का डिजटिल तरीके से ट्रांसफर करते हैं तो इसके कुछ चार्जेस होते हैं, डिजिटिल रुपये में लेन-देन से ये चार्ज काफी कम हो जाएंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: रिजर्व बैंक (RBI) ने थोक के लिए कल से डिजिटल करेंसी का पहला पायलट थोक सेगमेंट (e₹-W) के लिए लॉन्च कर दिया है, रिटेल इस्तेमाल के लिए अभी थोड़ा इंतजार करना होगा. जबसे डिजिटल रुपये को लाने का ऐलान किया गया है, तब से कुछ सवाल हैं जो बार बार पूछे जा रहे हैं. आखिर डिजिटल रुपया अभी UPI या बाकी डिजिटल लेनदेन से कैसे अलग है और क्या ये क्रिप्टोकरेंसी की तरह है या इससे अलग है. हम आपको इन्हीं सवालों के जवाब बिल्कुल आसान भाषा में देने वाले हैं. 

UPI, कार्ड, NEFT से कैसे अलग

अभी हम पैसों का डिजिटल लेन देन UPI के जरिये करते हैं, इसके लिए तमाम तरह के ऐप मौजूद हैं- जैसे Paytm, Googlepay, Phonepe वगैरह, इसके अलावा RTGS, NEFT से भी हम पैसों का लेन-देन करते हैं. मान लीजिये अगर आपने किसी दुकानदार से 100 रुपये का सामान लिया और UPI के जरिये उसको पेमेंट कर दिया, यही काम आप डिजिटल रुपये से भी कर सकते हैं. आप दुकानदार को 100 रुपये कैश में दे सकते हैं, UPI के जरिये पेमेंट कर सकते हैं या फिर 100 रुपये डिजिटल करेंसी दे सकते हैं. अब सवाल उठता है कि जब सबकुछ UPI से हो रहा है तो फिर डिजिटल रुपया लाने का क्या जरूरत है. ?

इसका जवाब समझने के लिए पहले आपको ये समझना होगा कि UPI, डेबिट कार्ड या ऑनलाइन समेत कोई भी डिजिटल लेन-देन काम कैसे करता है. मान लीजिये जब आप 100 रुपये का कोई सामान लेते हैं और उसका भुगतान UPI के जरिए दुकानदार को करते हैं, तो इसमें कमर्शियल बैंक शामिल होते हैं, एक आपका बैंक और दूसरा दुकानदार का बैंक. यानी इस लेन-देन के केंद्र में कमर्शियल बैंक है, बिना बैंक के ये लेन-देन संभव नहीं है. जब आप पेमेंट करते हैं तो पैसा आपके अकाउंट से कट जाता है और दुकानदार के अकाउंट में चला जाता है लेकिन ये पैसा उसे अगले दिन अपने अकाउंट में दिखता है. 

बिना बैंक काम करेगा डिजिटल रुपया

लेकिन डिजिटल रुपये या सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) के केस में आपको किसी कमर्शियल बैंक की कोई जरूरत नहीं होती है. डिजिटल रुपये का स्वरूप बिल्कुल अलग है, इसके केंद्र में कमर्शियल बैंक के बजाय रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) होता है. यानी डिजिटल रुपये के लेन-देन में कमर्शियल बैंकों की मध्यस्थता खत्म हो जाती है. रिजर्व बैंक ने बताया है कि CBDC रिजर्व बैंक की लायबिलिटी है न कि कमर्शियल बैंकों की, यानी जितने भी ट्रांजैक्शन होंगे वो सभी RBI के माध्यम से ही होंगे. 

इसलिये आपको डिजिटल रुपये से पेमेंट करने के लिए किसी बैंक की जरूरत नहीं होती, कोई KYC की जरूरत नहीं होती, किसी तरह के रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं होती, क्योंकि ये फिजिकल करेंसी का डिजिटल रूप होता है, जैसे आप फिजिकल करेंसी रखते हैं तो जरूरी नहीं कि आपके पास बैंक खाता हो तभी आप फिजिकल रुपये को खर्च कर सकते हैं. UPI या डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड से लेन-देन और डिजिटल करेंसी से लेन देन में एक बुनियादी फर्क ये होता है कि UPI या डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड को फिएट करेंसी का समर्थन हासिल होता है, फिएट करेंसी का मतलब होता है सरकार द्वारा जारी मुद्राएं, जैसे सिक्के और नोट, लेकिन डिजिटल करेंसी को इसकी जरूरत नहीं होती क्योंकि ये एक स्वतंत्र मुद्रा होगी, क्योंकि RBI की ओर से इसको लीगल टेंडर माना गया है.  

डिजिटल रुपया का इस्तेमाल कैसे होगा
तो अब सवाल उठता है कि फिर इसको रखते कैसे हैं और इसका इस्तेमाल कैसे होगा? इसके लिए भी एक वॉलेट होगा, जैसे कि आमतौर पर मनी वॉलेट होते हैं. लेकिन ये किसी बैंक से लिंक हो ये जरूरी नहीं, ये भी जरूरी नहीं है कि आपके पास बैंक अकाउंट हो. आप बिना बैंक अकाउंट के भी इस डिजिटल रुपये को खर्च कर सकते हैं. जैसे- मान लीजिये आपकी कंपनी दिवाली बोनस पर पहले 5000 रुपये कैश देती थी, इसके बाद जमाना बदला तो उसने आपको 5000 का वाउचर देना शुरू कर दिया जिसे आप शॉपिंग कर सकते थे. इसी तरह अब कंपनी आपको 5000 के डिजिटल रुपये देगी जो आपके वॉलेट में डाल दिये जाएंगे, हालांकि ये एक तरह का टोकन होगा. आप उसे खर्च कर सकते हैं. ये तो रही एक बात- इसका दूसरा फायदा ये भी है कि जिन लोगों के पास बैंक खाता नहीं है, लेकिन उन्हें डिजिटल तरीके से पैसे का भुगतान करना है, उनके लिये आसानी होगी. 

फायदों की बात चली है तो कुछ फायदे और भी हैं. अभी आप जब पैसों का डिजटिल तरीके से ट्रांसफर करते हैं तो इसके कुछ चार्जेस होते हैं, डिजिटिल रुपये में लेन-देन से ये चार्ज काफी कम हो जाएंगे. इसका फायदा आम आदमी के साथ साथ इकोनॉमी को भी होगा, क्योंकि रिजर्व बैंक फिजिकल नोट छापने की बजाय, डिजिटल रुपये जारी करेगा, जिससे नोटों की छपाई पर खर्च होना वाला धन बचेगा. एक और सबसे बड़ा फायदा ये होगा कि नकली नोटों का खतरा खत्म हो जाएगा. एक सवाल ये भी उठता है कि क्या डिजिटल रुपया फिजिकल रुपये को रिप्लेस कर देगा, तो इसका जवाब है नहीं, ये उसको कॉम्पिमेंट करेगा, यानी दोनों साथ साथ चलेंगे. यानी आपके पास पेमेंट करने का एक और विकल्प होगा, चाहे आप कैश में 100 रुपये का नोट दो या 100 रुपये की डिजिटल करेंसी दे दो. दोनों ही बातें बराबर है. 

क्रिप्टोकरेंसी से कैसे अलग है डिजिटल रुपया 
डिजिटल रुपया क्रिप्टोकरेंसी से कैसे अलग है. इस सवाल का जवाब समझने के लिए आपको ये समझना होगा कि क्रिप्टोकरेंसी की प्रकृति क्या है और ये कैसे काम करता है. क्रिप्टो ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी पर काम करता है. ये एक बेहद सुरक्षित टेक्नोलॉजी है, लेकिन ये डी-सेंट्रलाइज्ड है, यानी इसको कोई रेगुलेट नहीं करता है, इस पर किसी का कोई नियंत्रण नहीं है. यानी अगर आपने क्रिप्टो लिया हुआ है और आपको कोई नुकसान हो जाता है तो उसकी भरपाई कोई नहीं करेगा. लेकिन डिजिटल रुपया पूरी तरह से सेंट्रलाइज्ड करेंसी है, इसे रिजर्व बैंक रेगुलेट करता है. क्रिप्टोकरेंसी में ट्रेडिंग होती है, उसकी वैल्यू घटती और बढ़ती रहती है, लेकिन डिजिटल रुपये में ट्रेडिंग नहीं होती है, इसकी वैल्यू तय होती है. इसकी वैल्यू को RBI ही नियंत्रित कर सकता है.  क्रिप्टो को कोई ट्रैक नहीं कर सकता है, यानी किसने-किसको कहां पैसा भेजा, इसका पता लगाना मुश्किल है, इसलिए इसके गलत इस्तेमाल होने के ज्यादा खतरे हैं. आतंकी गतिविधियों, मनी लॉन्ड्रिंग में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. लेकिन डिजिटल रुपये के मामले में ऐसा नहीं है, डिजिटल रुपये को ट्रैक किया जा सकता है. 

RBI ने थोक के लिए कल से डिजिटल करेंसी का पहला पायलट थोक सेगमेंट (e₹-W) के लिए लॉन्च कर दिया है, रिटेल के लिए अभी महीने भर का इंतजार करना होगा, हालांकि इसे भी कुछ चुनिंदा जगहों पर कुछ चुनिंदा लोगों के लिए पायलट के तौर पर लाया जाएगा, बाद में इस पूरी तैयारी के साथ लॉन्च किया जाएगा. 

 


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