होम / BW क्लास / BW Class: EPS और PE रेश्यो का क्या मतलब होता है? समझिए आसान भाषा में

BW Class: EPS और PE रेश्यो का क्या मतलब होता है? समझिए आसान भाषा में

निवेशक PE रेश्यो देखकर ये तय करते हैं ये शेयर महंगा है या सस्ता, फिर उसके बाद खरीदते हैं या उससे दूर रहते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

शेयर बजार में EPS (Earning Per Share) और PE रेश्यो (Price to Earning) काफी इस्तेमाल किया जाने वाला टर्म है. जब ये देखना होता है कि कोई शेयर महंगा है या सस्ता, तो EPS और PE का सहारा लिया जाता है. हालांकि सुनने में ये काफी टेक्निकल लगता है लेकिन समझना बहुत आसान है. ठीक वैसे ही जब आप बाजार में सब्जी लेने जाते हैं तो आप मोलभाव करते हैं ताकि आप कहीं महंगी सब्जी न खरीद लाएं. लेकिन आप किसी सब्जी की ज्यादा कीमत भी देने को राजी हो जाते हैं, अगर उसकी क्वालिटी बढ़िया है और सब्जी ताजी है. बस इसी को बाजार की भाषा में EPS और PE कहा जाता है. 

EPS क्या होता है?
मान लीजिए कोई कंपनी है XYZ
शेयरों की संख्या   =       100
सालाना कमाई    =        ₹500
EPS        =  कमाई / कुल शेयर = 500 / 100 = ₹5     

यानी  XYZ अपने एक शेयर से सालाना 5 रुपये कमाती है इसको ही EPS कहते हैं. जब किसी कंपनी का EPS ज्यादा होता है तो निवेशक शेयर के ज्यादा पैसे देने को भी राजी होता है. लेकिन जब EPS कम होता है तो निवेशक शेयर के लिए ज्यादा पैसे खर्च करना नहीं चाहेगा. 

PE रेश्यो क्या होता है  
PE रेश्यो भी EPS से ही निकलता है. PE से ये पता चलता है कि कंपनी का शेयर महंगा है या सस्ता, बाजार की भाषा में कहें कि कंपनी का शेयर ओवर वैल्यूड है या अंडर वैल्यूड ये इसी PE रेश्यो से ही पता चलता है. मान लीजिए XYZ कंपनी का शेयर प्राइस है 100 रुपये और कंपनी का EPS है 5 रुपये

शेयर प्राइस        =  ₹100
EPS       = ₹5
PE        = शेयर प्राइस / EPS = 100 / ₹5 = 20 

इसका मतलब ये हुआ कि XYZ कंपनी का शेयर प्राइस तो 100 रुपये है और साल में एक शेयर से कमाई 5 रुपये है, लेकिन आप इसके लिए 20 गुना ज्यादा कीमत चुका रहे हैं. ज्यादा आसानी से ये समझें कि आप साल में 5 रुपये कमाने के लिए 20 गुना यानी 100 रुपये दे रहे हैं या 1 रुपये कमाने के लिए 20 रुपये दे रहे हैं. 

वैल्यूड और ओवर वैल्यूड शेयर 
निवेशक PE रेश्यो देखकर ये तय करते हैं ये शेयर महंगा है या सस्ता, फिर उसके बाद खरीदते हैं या उससे दूर रहते हैं. आमतौर पर ऊंची PE रेश्यो वाली कंपनियां हाई ग्रोथ कंपनियां होती है, लेकिन जब किसी वजह से हाई ग्रोथ वाली कंपनियों का PE रेश्यो कम हो जाता है तो ऐसी कंपनियों को वैल्यू शेयर कहा जाता है. आमतौर पर ऐसी कंपनियों के शेयरों में निवेश की सलाह दी जाती है

दूसरी तरफ, कम PE रेश्यो वाली कंपनियों को कम ग्रोथ वाली कंपनियां कहा जाता है. लेकिन जब किसी वजह से ऐसी औसत और कम ग्रोथ वाली कंपनियों का PE रेश्यो ऊंचा हो जाता है तो ऐसी कंपनियों को ओवर वैल्यूड स्टॉक कहा जाता है. आमतौर पर ऐसी कंपनियों से दूर रहने की सलाह दी जाती है. 

PE रेश्यो को समझने का एक और तरीका होता है कि उसके ऐतिहासिक PE रेश्यो से उसकी तुलना की जाए. मान लीजिए XYZ कंपनी का 10 साल का PE रेश्यो का औसत 25 रुपये है, लेकिन मौजूदा PE रेश्यो 15 रुपये है तो इसका मतलब ये हुआ कि अगर कंपनी आज भी अच्छा परफॉर्म कर रही है, वित्तीय सेहत अच्छी है और शेयर सस्ता है तो ये निवेश के लिए अच्छा विकल्प हो सकता है. मान लीजिए मौजूदा PE रेश्यो 30 रुपये है, यानी ये 10 साल के औसत से कहीं ज्यादा है, यानी शेयर काफी महंगा है तो ऐसे निवेश से बचा जा सकता है. 

VIDEO: गौतम अडानी बने दुनिया के तीसरे सबसे अमीर व्यक्ति


टैग्स
सम्बंधित खबरें

क्या है Digital Arrest जिसको लेकर PM Modi ने जताई चिंता, कैसे इससे बचा जा सकता है?

ऑनलाइन फ्रॉड के खतरे के बीच आजकल डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं जिसमें लोग मिनटों में अपनी जीवन की जमा-पूंजी गंवा दे रहे हैं.

28-October-2024

क्या है BRICS करेंसी जिसको बताया जा रहा डॉलर का विकल्प, ऐसा हुआ तो क्या होगा बदलाव?

दुनिया की इन 3 महाशक्तियों के अलावा ब्रिक्‍स समूह में शामिल 7 अन्‍य देशों ने आपसी व्‍यापार में स्‍थानीय मुद्रा के इस्‍तेमाल पर सहमति जताई.

25-October-2024

BW Class: क्या होता है फ्रंट रनिंग, जिसके फेर में फंस गईं फिर कुछ कंपनियां?

फ्रंट रनिंग घोटाले में तीन कंपनियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. इन कंपनियों के नाम आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC, फर्स्टक्राई और PNB हाउसिंग फाइनेंस हैं.

09-September-2024

BW Class: आखिर क्या होता है FPO और IPO? दोनों में क्या है अंतर? यहां जानें सब कुछ

क्या आप जानते हैं कि FPO और IPO क्या होता है और कोई कंपनी इसे क्यों लेकर आती है? साथ ही, FPO और इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में फर्क क्या है? आइए आज इसी को समझते हैं.

13-April-2024

BW Class: UPI जानते हैं, PPI के बारे में पता है कुछ. इसका कैसे होता है इस्‍तेमाल?

RBI द्वारा थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप्स को पीपीआई से लिंक करने का प्रस्ताव दिया गया है. यूपीआई ट्रांजैक्शन के बारे में तो सब जानते लेकिन PPI के बारे में काफी कम लोगों को जानकारी होती है.

06-April-2024


बड़ी खबरें

बंगाल-असम में लहराया BJP का परचम, केरल में UDF की सरकार और तमिलनाडु में TVK की लहर

इन शुरुआती रुझानों ने साफ कर दिया है कि 2026 का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में राजनीतिक संतुलन के बड़े बदलाव का संकेत है.

15 hours ago

AABL का केरल में बड़ा विस्तार, SDF इंडस्ट्रीज का ₹30.85 करोड़ में अधिग्रहण

कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Lemount White Brandy, Lemount Black Rum, Jamaican Magic Rum और Mood Maker Brandy, जो अभी थर्ड-पार्टी के जरिए बॉटल होते हैं, अब इन-हाउस शिफ्ट किए जाएंगे.

16 hours ago

अहंकार का अंत: कमल मुस्कुरा रहा है

पश्चिम बंगाल का औद्योगिक केंद्र से आर्थिक ठहराव तक का सफर दशकों की नीतियों और राजनीतिक बदलावों के जरिए समझा जा सकता है, साथ ही इसके पुनरुत्थान की संभावनाओं पर भी बहस जारी है.

15 hours ago

दिल्ली मेट्रो का मेगा विस्तार: ₹48 हजार करोड़ में 7 नए रूट, 65 स्टेशन बनेंगे

यह मेगा प्रोजेक्ट दिल्ली मेट्रो के फेज V-B का हिस्सा है, जिसका मकसद राजधानी की कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है. सरकार ने इस योजना को कैबिनेट स्तर पर मंजूरी दे दी है.

16 hours ago

दमदार नतीजों से BHEL में उछाल: Q4 में 156% मुनाफा बढ़ा, शेयर 13% तक चढ़ा

कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की घोषणा की है. हालांकि, इसके लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी.

17 hours ago