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BW Class: रेपो रेट, रिवर्स रेपो रेट क्या होता है, इनमें क्या अंतर है, जानिए आसान भाषा में

RBI की मॉनिटरी पॉलिसी को समझने के लिए उसकी टर्मलॉजी को समझना बहुत जरूरी है, जिसमें पॉलिसी की आत्मा बसती है, तो चलिए शुरुआत करते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

जब भी भारतीय रिजर्व बैंक यानी RBI अपनी क्रेडिट पॉलिसी का ऐलान करता है तो उसमें कई तरह के टर्म या शब्द ऐसे होते हैं जो आम बोलचाल की भाषा में नहीं होते, इसलिए आम लोग उसे समझ भी नहीं पाते. हम अपनी BW Class की सीरीज में क्रेडिट पॉलिसी के दौरान इस्तेमाल होने वाले इन्हीं शब्दों को समझेंगे और वो भी बड़ी आसान भाषा में.

तो सबसे पहले उन दो शब्दों की बात करते हैं जो बहुत प्रचलित हैं, रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट. आप में से कई लोगों को इसके बारे में जानकारी होगी. इसको थोड़ा और गहराई से समझते हैं. इसे समझने से पहले सबसे पहले आपको ये समझना होगा कि बैंक काम कैसे करता है. बैंक जो पैसा आपको लोन पर देता है वो कहां से आता है. 

पहले समझिए बैंक कैसे काम करता है

जब आप बैंक में अपना पैसा जमा करते हैं तो बैंक आपको उस पर कुछ ब्याज देता है. बैंकों में पैसा कई तरह से जमा होता है. बचत खाते के तौर पर, फिक्स्ड डिपॉजिट के तौर पर. लेकिन ये बैंक का पैसा नहीं होता है, ये तो उसको लौटाना ही होता है, इसलिए ये बैंक की लायबिलिटी होती है. अब अगर बैंक को आपके जमा पैसे पर ब्याज देना है तो उसके लिए बैंक को अतिरिक्त राशि की जरूरत होगी, ये राशि बैंक कहां से लाएगा. इसके लिए बैंक आपके जमा किए हुए पैसों को ही लोगों को कर्ज के रूप में देता है, और उनसे ब्याज लेता है. जिस दर पर बैंक लोगों को कर्ज देता है वो उस दर से ज्यादा होती है जो बैंक लोगों को जमा पर देता है. 
यानी मान लीजिए बैंक ने आपको आपकी जमा राशि पर 3 परसेंट का ब्याज दिया, लेकिन जब आपका ही पैसा किसी दूसरे व्यक्ति को लोन के तौर पर दिया तो उससे 8 परसेंट का ब्याज लिया, यानी बैंक ने बीच में 5 परसेंट की कमाई की. मतलब ये कि बैंक का अपना कुछ नहीं वो सिर्फ एक बिचौलिया है जो आपके ही पैसों को इधऱ से उधर करता रहता है. 

Repo Rate क्या है?
एक सवाल उठता है कि जब बैंकों के पास हमारे जैसे लोग अपना पैसा जमा करते हैं तो क्या बैंक उन सारे पैसों को लोन पर देता है? इसका जवाब है नहीं. मान लीजिए 10 लागों ने 10-10 रुपये किसी बैंक में जमा किए, कुल हुए 100 रुपये. इसमें से बैंक को CRR और SLR के रूप में कुछ पैसों अलग रखना पड़ता है. CRR का पैसा रिजर्व बैंक के पास रहता है SLR को बैंक को मेनटेन करना होता है. जैसे CRR अभी 4.5% है और  SLR 18% है. मतलब 4.5+18= 22.5% पैसा तो इसको अलग रखना होगा. यानी 100-22.5 = 77.5 रुपये को ही बैंक लोन के तौर पर दे सकता है. 

कई बार ऐसा होता है कि बैंकों के पास कर्ज देने के लिए पर्याप्त पैसा नहीं होता या फिर बैंक को इमरजेंसी में पैसों की जरूरत पड़ जाती है, कई बार बैंकों को SLR, CRR मेनेटेन करन के लिए भी पैसों की जरूरत होती है. तब बैंक क्या करेंगे, पैसों का इंतजाम कैसे होगा. इसके लिए रिजर्व बैंक ने बैंकों को एक सुविधा दी है कि वो जरूरत पड़ने पर रिजर्व बैंक से पैसा उधार ले सकते हैं. जिस दर पर बैंक RBI से पैसा उधार लेते हैं उसे रेपो रेट कहते हैं. लेकिन Repo Rate सामान्य लोन की तरह नहीं होता है, ये थोड़ा अलग तरीके से काम करता है, बल्कि एक फॉर्वर्ड कॉन्ट्रैक्ट की तरह काम करता है. चलिए अब इसको समझते हैं. 

कैसे काम करता है Repo Rate
जब बैंक RBI से कर्ज लेता है तो बैंक को रिजर्व बैंक के पास कुछ कोलैटरल रखना होता है, बैंक अन-सिक्योर्ड लोन नहीं ले सकता, इसलिए बैंक अपनी G-Sec यानी गवर्नमेंट सिक्योरिटी ( बॉन्ड्स या ट्रेजरी बिल्स ) को गिरवी रख देता है और उस पर बैंक को लोन मिलता है. अब समझते हैं कि Repo Rate काम कैसे करता है, Repo Rate की फुल फॉर्म होती है Repurchase Option. ये एक तरह से बैंक और रिजर्व बैंक के बीच फॉर्वर्ड एग्रीमेंट होता है. जिसमें बैंक ये वादा करता है कि वो RBI के पास रखे अपनी गवर्नमेंट सिक्योरिटी को भविष्य में रेपो अवधि खत्म होने के बाद Repurchase यानी वापस खरीद लेगा. 

मान लीजिए कि किसी बैंक ने RBI से 100 रुपये का ओवरनाइट लोन लिया यानी 1 दिन का लोन. इसके लिए उसने गवर्नमेंट सिक्योरिटीज जिसकी वैल्यू भी 100 रुपये है, उसने RBI के पास गिरवी रखी. अब चूंकि ये एग्रीमेंट Repurchase Option है तो बैंक अगले ही दिन इस गवर्नमेंट सिक्योरिटी को खरीदेगा और RBI को 1 दिन के ब्याज का ब्याज चुकाकर गवर्नमेंट सिक्योरिटी को वापस ले लेगा. रेपो रेट अभी 5.40% चल रहा है, यानी बैंक RBI को 100 + 1 दिन का ब्याज यानी कुल 100 + 5.40 = 105.40 रुपये लौटाएगा. अगर बैंक किसी भी सूरत में डिफॉल्ट करता है तो RBI उसकी गिरवी रखी गवर्नमेंट सिक्योरिटीज को बेचकर पैसा वसूल कर लेगा.

Reverse Repo Rate क्या है?
अब समझते हैं कि रिवर्स रेपो रेट क्या होता है. अभी हमने बात की कि जब बैंकों को पैसों की जरूरत होती है तो वो RBI से पैसे उधार लेते हैं, अब इसके ठीक उलट जब बैंक RBI के पास अपना पैसा जमा करवाते हैं और उस पर जो ब्याज रिजर्व बैंक बैंकों को देता है उसे रिवर्स रेपो रेट कहते हैं. रिवर्स रेपो रेट हमेशा रेपो रेट से कम होता है. जैसे कि अभी रिवर्स रेपो रेट 3.35% है और रेपो रेट 5.4% है. बैंक ऐसा तब करते हैं जब उनके पास कुछ एक्स्ट्रा पैसा आ जाता है, इसलिए वो रिजर्व बैंक के पास जमा कर देते हैं जिससे उन्हें कुछ ब्याज कमाने को मिल जाता है. 

ये भी ठीक रेपो रेट की तरह ही काम करता है, चूंकि इसमें रिजर्व बैंक पैसा लेता है तो वो अपने कोलेटैरल बैंकों के पास रखता है. बैंक इस बात का वादा करता है कि जब RBI पैसा वापस कर देगा तो उसे वो गवर्नमेंट सिक्योरिटी वापस करे देगा, इसे Reverse Repurchase Option कहते हैं. 

मॉनिटरी पॉलिसी में और भी बहुत से शब्द होते हैं जैसे- CRR, MSF, SLR वगैरह, इनके बारे में भी हम आपको बताएंगे. 


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