होम / BW क्लास / BW Class: कमजोर रुपये और कच्चे तेल की गिरावट के कई फायदे हैं, जानिए आसान भाषा में

BW Class: कमजोर रुपये और कच्चे तेल की गिरावट के कई फायदे हैं, जानिए आसान भाषा में

चीन एक ऐसा देश है जिसने अपनी करेंसी को सालों तक जानबूझकर डी-वैल्यू यानी कमजोर करके रखा, लेकिन चीन ने ऐसा किया क्यों.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

नई दिल्ली: कच्चा तेल 90 डॉलर के नीचे है, रुपया भी डॉलर के मुकाबले थोड़ा पतला हो गया है, कई बार रुपया 80 के पार भी जा चुका है. लेकिन अब सवाल उठता है कि इसका मेरी, आपकी और देश की सेहत पर क्या फर्क पड़ेता है, तो जान लीजिए कि फर्क पड़ता है. चलिए समझते हैं.

रुपये की गिरावट से क्या फायदा 
जब रुपया गिरता है तो इसके फायदे और नुकसान दोनों ही होते हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि कुछ अर्थव्यवस्थाएं जानबूझकर अपनी करेंसीज को कमजोर रखती हैं, ताकि इकोनॉमी में ग्रोथ लाई जा सके, जैसे की चीन काफी लंबे समय तक अपनी करेंसी को कमजोर करता रहा है. 

अब समझते हैं कि रुपये की कमजोरी का क्या मतलब होता है. देखिए फिलहाल रुपया 79.60 के आस-पास है, यानी अभी आपको 1 डॉलर के लिए 79.60 रुपये देने होंगे, अगर यही रुपया गिरकर 85 पर आ जाए, तो अब आपको 1 डॉलर के लिए 85 रुपये देने होंगे. इससे तो यही लगता है कि किसी करेंसी के कमजोर होने पर किसी भी देश को नुकसान होता है. लेकिन ये आधा सच है. चलिए इसको जरा एक वास्तविक उदाहरण से समझते हैं.

चीन के उदाहरण से समझिए 
चीन एक ऐसा देश है जिसने अपनी करेंसी को सालों तक जानबूझकर डी-वैल्यू यानी कमजोर करके रखा, लेकिन चीन ने ऐसा किया क्यों. चीन की करेंसी युआन साल 2005 से लेकर 2015 तक डॉलर के मुकाबले काफी तेजी से बढ़ी. इन 10 सालों के दौरान युआन डॉलर के मुकाबले 33 परसेंट के करीब मजबूत हुआ. लेकिन इसके बाद अचानक ही चीन के केंद्रीय बैंक ने लगातार तीन बार युआन को डी-वैल्यू किया और युआन डॉलर के मुकाबले 4 परसेंट तक कमजोर हो गया. चीन के इस कदम से निवेशकों के बीच हड़कंप मच गया, चीन के साथ साथ अमेरिका और यूरोप के बाजारों पर भी इसका असर दिखा. तो आखिर चीन ने ऐसा किया क्यों, चलिए इसको समझते हैं. 

चीन दुनिया का मैन्यूफैक्चरिंग हब है, पूरी दुनिया की मैन्यूफैक्चरिंग का करीब 25 परसेंट चीन में होता है और यहीं से दुनिया भर को माल एक्सपोर्ट किया जाता है. लेकिन बावजूद इसके चीन की GDP ग्रोथ में लगातार गिरावट आ रही थी. इसलिए चीन ने अपने एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने के लिए अपनी करेंसी को डी-वैल्यू करने का फैसला किया. अब सवाल उठता है कि युआन को डी-वैल्यू करने से GDP ग्रोथ कैसे बढ़ेगी और एक्सपोर्ट कैसे बढ़ेगा. 

देखिए साल 2015 में 1 डॉलर की वैल्यू थी 6 युआन थी. अब मान लीजिए कि अमेरिका की कोई कंपनी XYZ चीन से 100 मिलियन युआन का कच्चा माल खरीदती है. तो डॉलर टर्म में कंपनी XYZ चीन को 16.6 मिलियन डॉलर देगी. अब चीन ने अगर युआन को डी-वैल्यू करके 6.25 कर दिया. तो डॉलर टर्म में XYZ को 16 मिलियन डॉलर देने होंगे. यानी XYZ को चीन में एक कंपटीटिव प्राइस मिलेगा, जिससे चीन का एक्सपोर्ट बढ़ेगा और GDP ग्रोथ में तेजी देखने को मिलती है. 

लेकिन दूसरी तरफ करेंसी को डीवैल्यू करने से इंपोर्ट पर असर पड़ता है, तो चलिए समझते हैं कि डॉलर के बदले अगर भारत की करेंसी की वैल्यू गिरेगी तो इंपोर्ट पर क्या असर पड़ेगा. देखिए जब कोई इंपोर्टर किसी बाहरी देश से कोई सामान मंगवाता है और उसकी घरेलू करेंसी मजबूत रहती है तो उसे उस सामान की कम कीमत चुकानी होती है. मान लीजिए कि आपने कोई मोबाइल फोन इंपोर्ट किया जिसकी कीमत 700 डॉलर है तो आपको इसके लिए रुपये का भाव अगर 79.60 लें तो 55720 रुपये चुकाने होंगे. अब यहीं पर अगर मान लीजिए कि रुपये की वैल्यूएशन गिर गई और ये 80 पर आ गया तो आपको 56,000 रुपये देने होंगे. यही ऑर्डर अगर बल्क में है तो सोचिए आपको कितनी ज्यादा रकम मोबाइल के इंपोर्ट पर खर्च करनी होगी. ऐसे में एक तस्वीर उभरती है कि सरकार की ओर से घरेलू प्रोडक्शन को बढ़ावा दिया जाएगा, घरेलू कंपनियां देश में ही मोबाइल बनाएंगी और बेचेंगी जिससे घरेलू मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा. हालांकि ये इस बात पर निर्भर करता है कि घरेलू कंपनियां डिमांड को पूरा कर पाती हैं या नहीं, वरना रुपये की कमजोरी से इंपोर्ट बिल बढ़ता है. 

एक्सपोर्ट और आईटी इंडस्ट्री को फायदा
रुपये में गिरावट का फायदा एक्सपोर्ट इंडस्ट्री और आईटी इंडस्ट्री को सबसे ज्यादा होता है. आईटी इंडस्ट्री की कमाई का एक बड़ा हिस्सा अमेरिका से आता है और ये डॉलर में होता है, मान लीजिए कि आईटी इंडस्ट्री हर महीने 100 डॉलर कमाती है, अगर रुपये 70 के लेवल पर है तो उसे रुपये के टर्म में 7000 रुपये मिलेंगे, अगर रुपया कमजोर होकर 80 के स्तर पर आ गया तो कंपनी को 8000 रुपये मिलेंगे. इसी तरह एक्सपोर्ट इंडस्ट्री को भी रुपये की कमजोरी का फायदा मिला है, क्योंकि इनको पेमेंट डॉलर में होती है, जब वो इसे रुपये में कनवर्ट करते हैं तो रकम ज्यादा मिलती है. 

कच्चे तेल में गिरावट से क्या फायदा
अब बात करते हैं कि कच्चा तेल अगर गिरता है तो कैसे मार्केट और इकोनॉमी को फायदा पहुंचता है. देखिए सबसे पहले फायदा तो यही है कि भारत अपनी जरूरत का 80 परसेंट क्रूड ऑयल इंपोर्ट करता है, यानी अगर कच्चा तेल सस्ता होगा तो उसका इंपोर्ट बिल कम हो जाएगा इससे वित्तीय घाटे में भी कमी आती है. आपको बता दें कि भारत के इंपोर्ट बिल में 20 परसेंट हिस्सा सिर्फ कच्चे तेल के इंपोर्ट का है. इसलिए अगर बिल में कमी आएगी तो इकोनॉमी की सेहत सुधरेगी. 

वित्तीय घाटा कम होता है 
रूस यूक्रेन की जंग जब शुरू हुई तो कच्चा तेल मार्च में 125 डॉलर प्रति बैरल तक चला गया था, लेकिन अब ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के करीब आ चुका है. एक अनुमान के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में अगर 10 डॉलर प्रति बैलर की कमी आती है तो भारत करेंट अकाउंट डेफिसिट यानी वित्तीय घाटा 15 बिलियन डॉलर कम होता है. अगर कच्चा तेल 10 डॉलर भी कम होता है तो GDP पर 0.5%-0.6% का असर पड़ता है. कच्चा तेल अगर गिरता है तो इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को भी होता है, जैसे 3 महीने से तेल मार्केटिंग कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं. 

रुपये को मजबूती मिलती है 
चूंकि कच्चा तेल पूरी तरह से डॉलर में ट्रेड होता है, अगर कच्चा तेल सस्ता होता है तो इसका असर डॉलर पर भी आता है, डॉलर कमजोर होता है और रुपये को सपोर्ट मिलता है. इस वक्त डॉलर इंडेक्स काफी बढ़ा हुआ है, इसलिए रुपया हल्का कमजोर है, अगर डॉलर इंडेक्स 100 के आस-पास रहता तो रुपया आज काफी मजबूत स्थिति में होता. फिर भी दुनिया भर की करेंसीज के मुकाबले रुपया बेहतर स्थिति में है. 

शेयर बाजार पर भी असर होता है 
कच्चा तेल कमजोर होने का फायदा शेयर बाजार पर भी पड़ता है, कच्चे तेल पर निर्भर कंपनियों को इससे फायदा पहुंचता है. जैसे पेंट बनाने वाली कंपनियां, एविएशन कंपनियां, सिरेमिक कंपनियां, प्लास्टिक कंपनियां और पैकेजिंग कंपनियां कच्चे तेल का प्रोडक्शन में इस्तेमाल करती हैं. हालांकि कच्चे तेल की गिरावट से ऑयल एंड गैस क्षेत्र की कंपनियों को नुकसान पहुंचता है. क्योंकि उनकी कमाई घट जाती है. 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

क्या है Digital Arrest जिसको लेकर PM Modi ने जताई चिंता, कैसे इससे बचा जा सकता है?

ऑनलाइन फ्रॉड के खतरे के बीच आजकल डिजिटल अरेस्ट के मामले लगातार तेजी से बढ़ रहे हैं जिसमें लोग मिनटों में अपनी जीवन की जमा-पूंजी गंवा दे रहे हैं.

28-October-2024

क्या है BRICS करेंसी जिसको बताया जा रहा डॉलर का विकल्प, ऐसा हुआ तो क्या होगा बदलाव?

दुनिया की इन 3 महाशक्तियों के अलावा ब्रिक्‍स समूह में शामिल 7 अन्‍य देशों ने आपसी व्‍यापार में स्‍थानीय मुद्रा के इस्‍तेमाल पर सहमति जताई.

25-October-2024

BW Class: क्या होता है फ्रंट रनिंग, जिसके फेर में फंस गईं फिर कुछ कंपनियां?

फ्रंट रनिंग घोटाले में तीन कंपनियों के शामिल होने का दावा किया जा रहा है. इन कंपनियों के नाम आदित्य बिड़ला सन लाइफ AMC, फर्स्टक्राई और PNB हाउसिंग फाइनेंस हैं.

09-September-2024

BW Class: आखिर क्या होता है FPO और IPO? दोनों में क्या है अंतर? यहां जानें सब कुछ

क्या आप जानते हैं कि FPO और IPO क्या होता है और कोई कंपनी इसे क्यों लेकर आती है? साथ ही, FPO और इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) में फर्क क्या है? आइए आज इसी को समझते हैं.

13-April-2024

BW Class: UPI जानते हैं, PPI के बारे में पता है कुछ. इसका कैसे होता है इस्‍तेमाल?

RBI द्वारा थर्ड-पार्टी यूपीआई ऐप्स को पीपीआई से लिंक करने का प्रस्ताव दिया गया है. यूपीआई ट्रांजैक्शन के बारे में तो सब जानते लेकिन PPI के बारे में काफी कम लोगों को जानकारी होती है.

06-April-2024


बड़ी खबरें

बंगाल-असम में लहराया BJP का परचम, केरल में UDF की सरकार और तमिलनाडु में TVK की लहर

इन शुरुआती रुझानों ने साफ कर दिया है कि 2026 का चुनाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि देश के कई राज्यों में राजनीतिक संतुलन के बड़े बदलाव का संकेत है.

15 hours ago

AABL का केरल में बड़ा विस्तार, SDF इंडस्ट्रीज का ₹30.85 करोड़ में अधिग्रहण

कंपनी के कई लोकप्रिय ब्रांड जैसे Lemount White Brandy, Lemount Black Rum, Jamaican Magic Rum और Mood Maker Brandy, जो अभी थर्ड-पार्टी के जरिए बॉटल होते हैं, अब इन-हाउस शिफ्ट किए जाएंगे.

16 hours ago

अहंकार का अंत: कमल मुस्कुरा रहा है

पश्चिम बंगाल का औद्योगिक केंद्र से आर्थिक ठहराव तक का सफर दशकों की नीतियों और राजनीतिक बदलावों के जरिए समझा जा सकता है, साथ ही इसके पुनरुत्थान की संभावनाओं पर भी बहस जारी है.

15 hours ago

दिल्ली मेट्रो का मेगा विस्तार: ₹48 हजार करोड़ में 7 नए रूट, 65 स्टेशन बनेंगे

यह मेगा प्रोजेक्ट दिल्ली मेट्रो के फेज V-B का हिस्सा है, जिसका मकसद राजधानी की कनेक्टिविटी को और मजबूत करना है. सरकार ने इस योजना को कैबिनेट स्तर पर मंजूरी दे दी है.

16 hours ago

दमदार नतीजों से BHEL में उछाल: Q4 में 156% मुनाफा बढ़ा, शेयर 13% तक चढ़ा

कंपनी के बोर्ड ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 1.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने की घोषणा की है. हालांकि, इसके लिए शेयरहोल्डर्स की मंजूरी जरूरी होगी.

17 hours ago