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भारत के EV मार्केट पर इस जापानी कंपनी की नजर, तैयार की रणनीति
जापानी कंपनी टोयोटा भारत में अपने बैटरी ऑपरेटेड व्हीलर्स लाइन-अप को बढ़ाने की तैयारी में है. कंपनी ने इसके लिए खास रणनीति बनाई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
इलेक्ट्रॉनिक व्हीकल्स यानी EV का चलन भारत में तेजी से बढ़ रहा है. हालांकि, कुल वाहनों की बिक्री में भले ही अभी इसका योगदान ज्यादा न हो, लेकिन रफ्तार पहले के मुकाबले तेज हुई है. यही वजह है कि वाहन बनाने वाली कंपनियां इस मार्केट को कैप्चर करने की रणनीति बनाने में जुटी हैं. जापानी कंपनी टोयोटा (Toyota) ने इसके लिए एक बड़ा प्लान तैयार किया है. कंपनी भारतीय बाजार में 10 नए इलेक्ट्रिक मॉडल उतारने जा रही है. यानी आने वाले समय में ग्राहकों के पास EV के ज्यादा विकल्प होंगे. बता दें कि अभी इस मार्केट में टाटा मोटर्स का दबदबा है.
इतना बढ़ सकता है बाजार
माना जा रहा है कि 2030 तक ईवी सेगमेंट में बिक्री निजी ऑटोमोबाइल के क्षेत्र में नए वाहनों के लिए 30% प्रतिशत, कमर्शियल व्हीकल के लिए 70% और टू- व्हीलर्स और थ्री-व्हीलर्स के लिए 80% होगी. जाहिर है, ऐसे में भारत में तेल आयात की मात्रा में कमी आएगी और इससे पर्यावरण को साफ करने में मदद भी मिल सकेगी. बीते कुछ समय से ईवी सेगमेंट की बिक्री में लगातार तेजी देखी गई है. 2020-21 में 48,179 इलेक्ट्रिक वाहन बिके थे. 2021-22 में यह आंकड़ा बढ़कर 2,37,811 यूनिट्स और 2022-23 के 9 दिसंबर, 2022 तक 4,42,901 यूनिट्स हो गया था. पिछले महीने यानी मार्च में 8,566 इलेक्ट्रिक कारें बेची गई हैं, जो पिछले साल मार्च (3,718 यूनिट्स) के मुकाबले कहीं ज्यादा है.
ये है टोयोटा की योजना
यही वजह है कि टोयोटा मोटर कॉर्प ने भारत को लेकर एक बड़ा प्लान तैयार किया है. कंपनी का लक्ष्य 10 नए बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन मॉडल पेश करना है. ये जापानी कंपनी लंबे समय से इलेक्ट्रिक सेगमेंट को कैप्चर करने की कोशिश में जुटी है. मीडिया रिपोर्ट्स में बताया को गया है कि टोयोटा 2026 तक 10 नए बैटरी ईवी मॉडल लॉन्च करेगी. हालांकि, कंपनी ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि वह 4-व्हीलर, टू या थ्री व्हीलर किस सेगमेंट में नए मॉडल्स लॉन्च करेगी. इसके अलावा, टोयोटा अगली पीढ़ी की बैटरी ईवीएस पर ध्यान केंद्रित करने के लिए नई, विशेष इकाई भी स्थापित करेगी.
बदल रही रणनीति
टोयोटा के बारे में माना जाता है कि वो बैटरी ऑपरेटेड व्हीलर्स लाइन-अप विकसित करने में पर्याप्त तेज नहीं है. इसलिए अब नई रणनीति के तहत कंपनी काम कर रही है. कंपनी बैटरी इलेक्ट्रिक्स वाहनों के प्रोडक्शन में तेजी लाएगी, लेकिन हाइब्रिड इसके व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बना रहेगा. कुछ वक्त पहले दिग्गज चीनी कंपनी BYD (Build Your Dreams) ने भारतीय बाजार में अपनी EV उतारी थी. कंपनी को इंडिया में EV का बहुत बड़ा बाजार नजर आ रहा है. BYD भारत के EV बाजार में एक बड़ी हिस्सेदारी चाहती है. उसकी देश के 30 शहरों में अपने सेंटर्स खोलने की तैयारी है. BYD की योजना है कि 2030 तक भारतीय वाहन मार्केट की 40 फीसदी हिस्सेदारी उसके पास आ जाए और कंपनी ने इस दिशा में तेजी से काम भी शुरू कर दिया है. कंपनी की चाहत इस साल के अंत तक 10 से 15000 वाहन बेचने की है.
चीनी कंपनी है BYD
BYD की इलेक्ट्रिक कारों में हैचबैक, सेडान और एसयूवी की लंबी रेंज है. Build Your Dreams पहले से ही भारत में कॉरपोरेट फ्लीट्स के लिए इलेक्ट्रिक बस और इलेक्ट्रिक वीकल्स बेच रही है. इसके अलावा, कंपनी दुनिया के कई देशों में इलेक्ट्रिक कार और प्लग इन इलेक्ट्रिक हाइब्रिड्स भी बेचती है. इनमें नॉर्वे, सिंगापुर, ब्राजील, न्यूजीलैंड, कोस्टारिका और कोलंबिया शामिल हैं. फिलहाल 300 से ज्यादा चीनी कंपनियां EV बना रही हैं. चीन की इलेक्ट्रिक व्हीकल कंपनी SAIC और BYD ग्लोबल मार्केट शेयर में केवल Elon Musk की टेस्ला से पीछे हैं. BYD इलेक्ट्रिक वाहनों में लगनी वाली बैटरी भी बनाती है. बैटरी मैन्युफैक्चरिंग में चीन की CATL और BYD सबसे बड़े प्लेयर्स माने जाते हैं.
चीन है सबसे बड़ा EV मार्केट
चीन दुनिया का सबसे बड़ा EV मार्केट है. उसकी कई कंपनियां इस सेक्टर में तेजी से ग्रोथ कर रही हैं. दुनिया के टॉप-10 सबसे ज्यादा बिकने वाले EV ब्रैंड में से आधे चीनी हैं. फिलहाल 300 से ज्यादा चीनी कंपनियां EV बना रही हैं. चीन की सरकार कंपनियों को ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें बनाने और लोगों को उन्हें खरीदने के लिए प्रमोट कर रही है. इसलिए सब्सिडी पर भी अच्छी-खासी रकम खर्च करती है. दरअसल, चीन ने काफी पहले ही सोच लिया था कि उसे इलेक्ट्रिक मार्केट में वर्ल्ड लीडर बनना है और उसी के अनुरूप उसने अपनी योजनाओं को परवान चढ़ाया. भारत जैसे देश में EV को चार्ज करना फिलहाल बड़ी समस्या है. सरकार इस दिशा में काम कर रही है, लेकिन स्पीड धीमी है. वहीं, चीन में लगभग 1.15 मिलियन पब्लिक चार्जिंग स्टेशन हैं और इनकी संख्या लगातार बढ़ रही है. इसके अलावा, EV की कॉस्ट कम करने के लिए उसने एंडवांस्ड टेक्नोलॉजी विकसित करने और सब्सिडी पर फोकस किया है. सेल्स की करीब 33% सब्सिडी ऑटोमेकर, सप्लायर और कंज्यूमर तीनों को दी गई है.
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