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जुलाई में ऑटो सेक्टर की रिकॉर्ड बिक्री, पेट्रोल को टक्कर दे रहे CNG, हाइब्रिड और EV

जुलाई में सबसे ज्यादा मांग दोपहिया वाहनों की रही. इनकी बिक्री पिछले साल के 14.18 लाख से बढ़कर 18.18 लाख यूनिट हो गई, यानी सालाना आधार पर 28.25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago

जुलाई 2026 भारतीय ऑटोमोबाइल बाजार के लिए शानदार महीना रहा. देश में इस दौरान कुल 25.91 लाख वाहनों की खुदरा बिक्री हुई, जो जुलाई 2025 के 20.58 लाख के मुकाबले 25.89% अधिक है. फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (FADA) के आंकड़ों के मुताबिक, यह जुलाई महीने में अब तक की सबसे ज्यादा वाहन बिक्री है. खास बात यह रही कि CNG, हाइब्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों की संयुक्त हिस्सेदारी पेट्रोल वाहनों के लगभग बराबर पहुंच गई.

सभी प्रमुख कैटेगरी में जुलाई का रिकॉर्ड

जुलाई में पहली बार ऑटो इंडस्ट्री की सभी प्रमुख कैटेगरी ने अपने-अपने स्तर पर जुलाई की अब तक की सबसे ज्यादा खुदरा बिक्री दर्ज की. इसमें दोपहिया, तिपहिया, कमर्शियल व्हीकल, पैसेंजर व्हीकल, ट्रैक्टर और व्हील्ड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट शामिल हैं. FADA के मुताबिक, जुलाई आमतौर पर मानसून के कारण मौसमी रूप से कमजोर महीना माना जाता है. इसके बावजूद जुलाई 2026 जनवरी 2014 से अब तक के 151 महीनों में रिटेल बिक्री के लिहाज से 12वां सबसे मजबूत महीना रहा. इससे ऑटो बाजार में मांग की व्यापकता का संकेत मिलता है.

दोपहिया वाहनों ने संभाली बिक्री की कमान

जुलाई में सबसे ज्यादा मांग दोपहिया वाहनों की रही. इनकी बिक्री पिछले साल के 14.18 लाख से बढ़कर 18.18 लाख यूनिट हो गई, यानी सालाना आधार पर 28.25% की बढ़ोतरी दर्ज की गई. यात्री वाहनों की बिक्री भी 19.13% बढ़ी. जुलाई 2025 में 3.50 लाख कारें बिकी थीं, जबकि इस साल यह आंकड़ा बढ़कर 4.17 लाख यूनिट हो गया. वहीं, तिपहिया वाहनों की बिक्री 16.16% बढ़कर 1.34 लाख यूनिट और कमर्शियल वाहनों की बिक्री 24.04% बढ़कर करीब 1 लाख यूनिट हो गई.

पेट्रोल की पकड़ कमजोर, वैकल्पिक ईंधन की हिस्सेदारी बढ़ी

जुलाई के आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव वाहन ईंधन की पसंद में देखने को मिला. CNG वाहनों की हिस्सेदारी 24.67%, हाइब्रिड की 8.02% और इलेक्ट्रिक वाहनों की 7.90% रही. तीनों को मिलाकर इनकी हिस्सेदारी 40.59% हो गई, जबकि पेट्रोल वाहनों की हिस्सेदारी 41.68% रही.

यानी पेट्रोल और इन वैकल्पिक पावरट्रेन के बीच का अंतर महज 1.09 प्रतिशत अंक रह गया है. पिछले साल यह अंतर 13.21 प्रतिशत अंक था. यह बदलाव बताता है कि भारतीय ग्राहक अब सिर्फ पेट्रोल और डीजल वाहनों पर निर्भर नहीं हैं और कम रनिंग कॉस्ट तथा नई तकनीक वाले विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.

EV की बिक्री ने बनाया नया रिकॉर्ड

इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई. जुलाई में कुल 3,27,901 इलेक्ट्रिक वाहन बिके. इससे कुल ऑटो बाजार में EV की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 12.7% हो गई, जो पिछले साल 9.6% थी. इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी भी 7.65% से बढ़कर 11.24% हो गई. इससे साफ है कि खासकर दोपहिया सेगमेंट में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से मुख्यधारा का हिस्सा बन रही है.

पैसेंजर व्हीकल बिक्री भी 4 लाख के पार

पैसेंजर व्हीकल की रिटेल बिक्री भी पहली बार जुलाई में 4 लाख यूनिट के पार पहुंच गई. हालांकि, जून की तुलना में इसमें 1.68% की मामूली गिरावट रही. FADA के अनुसार, GST 2.0 से बेहतर हुई अफोर्डेबिलिटी और नए मॉडल्स की लॉन्चिंग ने इस सेगमेंट को सपोर्ट दिया. डीलरों ने जुलाई में बुकिंग बढ़ाने के लिए कई स्कीम्स भी पेश कीं. वहीं, E20 ट्रांजिशन को लेकर उपभोक्ताओं की झिझक ने कुछ खरीदारों को CNG, हाइब्रिड और EV की तरफ जाने के लिए प्रेरित किया.

कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की बिक्री में 46% उछाल

ऑटो रिटेल की इस तेजी में व्हील्ड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट का प्रदर्शन भी खास रहा. जुलाई 2026 में इस कैटेगरी की रिटेल बिक्री साल-दर-साल 46% बढ़ी. यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब सरकार इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और कैपिटल एक्सपेंडिचर पर लगातार जोर दे रही है. इस पर एक्शन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (ACE) के CEO मनीष माथुर ने कहा कि जुलाई में कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की रिटेल बिक्री में 46% की सालाना बढ़ोतरी उत्साहजनक है. यह व्यापक आर्थिक माहौल से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद सेक्टर की मजबूती को दर्शाती है.

उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट, मैन्युफैक्चरिंग और पूंजीगत खर्च पर सरकार का लगातार फोकस इंडस्ट्री की मध्यम से लंबी अवधि की ग्रोथ संभावनाओं को लेकर भरोसा बढ़ाता है. माथुर के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में ACE ने मार्जिन में सुधार के साथ साल-दर-साल 19.5% की इनकम ग्रोथ दर्ज की. कंपनी का मानना है कि ACE-KATO जॉइंट वेंचर और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में बनी मजबूत संभावनाएं भविष्य में ग्रोथ के नए अवसर पैदा कर सकती हैं.

GST 2.0 और आसान फाइनेंस से मिला सपोर्ट

ऑटो डीलर्स के मुताबिक, बिक्री में इस तेज उछाल के पीछे कई वजहें हैं. GST 2.0 के बाद कुछ वाहनों की खरीद पहले की तुलना में अधिक किफायती हुई है. इसके अलावा बैंकों और फाइनेंस कंपनियों से आसान लोन की उपलब्धता और आगामी त्योहारी सीजन ने भी ग्राहकों की खरीदारी को बढ़ावा दिया है.

कुल मिलाकर जुलाई के आंकड़े भारतीय ऑटो बाजार में मजबूत मांग और बदलती ग्राहक पसंद की तस्वीर पेश करते हैं. एक ओर कुल वाहन बिक्री रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची है, वहीं दूसरी ओर CNG, हाइब्रिड और EV जैसे विकल्प पेट्रोल वाहनों के करीब पहुंच रहे हैं. अगर यह ट्रेंड आगे भी जारी रहता है, तो आने वाले त्योहारी सीजन में ऑटो बाजार नए रिकॉर्ड बना सकता है.


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