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अक्टूबर 2025 में व्यापार घाटा रिकॉर्ड स्तर पर, Q3 में करंट अकाउंट डेफिसिट बढ़ने की आशंका: Icra
अक्टूबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट USD 41.7 बिलियन रहा, जो पिछले वर्ष के USD 26.2 बिलियन से काफी अधिक है
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago
भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट अक्टूबर 2025 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. Icra की एक थीमैटिक रिपोर्ट के अनुसार यह अभूतपूर्व घाटा दिसंबर तिमाही में देश के करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) को sharply बढ़ा सकता है, भले ही नवंबर और दिसंबर में मामूली सुधार की उम्मीद जताई गई है. अक्टूबर 2025 में भारत का मर्चेंडाइज ट्रेड डेफिसिट USD 41.7 बिलियन रहा, जो पिछले वर्ष के USD 26.2 बिलियन से काफी अधिक है. यह उछाल आयात में 16.6 प्रतिशत की तेज़ वृद्धि के कारण आया, जो बढ़कर USD 76.1 बिलियन तक पहुंच गया. वहीं, निर्यात 12 प्रतिशत घटकर USD 34.4 बिलियन रह गया. Icra ने आयात उछाल का बड़ा कारण सोने के आयात में तीन गुना वृद्धि को बताया, जो अक्टूबर में USD 14.7 बिलियन तक पहुंच गया. त्योहारों की मांग और ऊंची कीमतों के बीच सट्टा खरीदारी इसकी वजह मानी गई है. नॉन-ऑयल नॉन-गोल्ड आयात भी 12.4 प्रतिशत बढ़कर USD 46.5 बिलियन रहा, जो घरेलू मांग की मजबूती दर्शाता है. दूसरी तरफ, ऑयल और नॉन-ऑयल दोनों श्रेणियों के निर्यात में गिरावट आई. नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट्स 12 प्रतिशत घटे, जिसकी वजह शुरुआती त्योहारों की टाइमिंग और अमेरिका द्वारा लगाए गए steep टैरिफ का असर रहा. Icra का कहना है कि इस असाधारण व्यापार असंतुलन के चलते Q3 FY2026 में CAD काफी बढ़ सकता है और GDP के 2.4–2.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, जबकि सितंबर तिमाही के लिए 1.8 प्रतिशत का अनुमान था. यदि अमेरिका का 50 प्रतिशत टैरिफ मार्च 2026 तक जारी रहता है तो FY2026 में CAD-to-GDP अनुपात लगभग 1.2 प्रतिशत रहने का अनुमान है. ऐतिहासिक अक्टूबर घाटे के बावजूद Icra का अनुमान है कि नवंबर और दिसंबर में व्यापार अंतर कुछ “कूल” होगा, क्योंकि सोने के आयात में क्रमिक कमी आएगी और त्योहारों के बाद निर्यात में सुधार दिखेगा. कमोडिटी मांग के सामान्य होने और आउटवर्ड शिपमेंट्स के बढ़ने से ट्रेड प्रेशर में अस्थायी राहत मिल सकती है, हालांकि पूरे वर्ष की चुनौती बरकरार है. अक्टूबर में अमेरिका—जो भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है—को निर्यात 8.6 प्रतिशत घटा, जबकि सितंबर में 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई थी. ऊंचे टैरिफ के चलते प्रतिस्पर्धा क्षमता प्रभावित हुई है. नॉन-US बाजारों को निर्यात भी तेज़ी से 12.5 प्रतिशत घटा. FY2026 की शुरुआत में अमेरिकी आयातकों द्वारा अग्रिम खरीदारी के कारण निर्यात तेज़ था, लेकिन हालिया गिरावट ने समग्र गति को कमजोर कर दिया है. अक्टूबर का एकमात्र उजला पक्ष इलेक्ट्रॉनिक सामान रहा, जिसने 19 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की और व्यापक निर्यात गिरावट को आंशिक सहारा दिया. FY2026 के पहले सात महीनों में कुल निर्यात सिर्फ 0.6 प्रतिशत बढ़कर USD 254.3 बिलियन रहा. वहीं इलेक्ट्रॉनिक्स 37.8 प्रतिशत बढ़े. इलेक्ट्रॉनिक्स को छोड़कर भारत के आउटबाउंड शिपमेंट्स इस अवधि में 2.4 प्रतिशत घट गए.
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