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हाईकोर्ट ने दिया किरायेदारों के पक्ष में बड़ा फैसला, इसकी थी बहुत जरूरत
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने किरायेदारों के पक्ष में एक ऐसा फैसला किया है, जिसका असर पूरे देश में और छोटी अदालतों द्वारा दिए जाने वाले निर्णयों पर भविष्य में पड़ सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
नई दिल्लीः उत्तराखंड हाईकोर्ट ने किरायेदारों के पक्ष में एक ऐसा फैसला किया है, जिसका असर पूरे देश में और छोटी अदालतों द्वारा दिए जाने वाले निर्णयों पर भविष्य में पड़ सकता है. इस फैसले का लाभ उन किरायेदारों को मिलेगा, जो किसी ऐसी कॉलोनी या फिर हाउसिंग सोसाइटी में रहते हैं, जहां पर पहले से एक रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (आरडब्लूए) या फिर अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन का गठन हो चुका है.
चुनाव में भाग लेने की दी अनुमति
उत्तराखंड HC ने उन कॉलोनियों के सभी किरायेदारों को प्रबंधन समिति के चुनावों में भाग लेने की अनुमति दी है जिनके पास रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) हैं. अदालत ने पाया कि किरायेदार सेवाओं के लिए भुगतान करते हैं, इसलिए उन्हें अपनी पसंद के आरडब्ल्यूए सदस्यों को चुनने का भी अधिकार है. अभी तक केवल फ्लैट या घर के मालिक को ही वोट देने की अनुमति है.
इस केस में दिया फैसला
अदालत ने 15 सितंबर को टिहरी गढ़वाल जिले की नई टिहरी में डीकॉन रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी से संबंधित एक मामले की सुनवाई के बाद निर्देश दिया. याचिकाकर्ता के वकील दुष्यंत मैनाली ने बताया, “यह एक ऐतिहासिक फैसला है जो देश भर में सभी निचली अदालतों पर बाध्यकारी होगा. यह अपनी तरह का पहला निर्णय है जिससे मदद मिलने की संभावना है. किरायेदारों की संख्या बहुत अधिक है, खासकर एनसीआर और मेट्रो शहरों में जहां वे अक्सर इस बात की शिकायत करते हैं.
डीकॉन रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसाइटी ने फैसला किया था कि एक किरायेदार जिसका नाम नितिन देव है वो प्रबंध समिति के गठन के लिए चुनाव में भाग लेने का हकदार नहीं है. इसके बाद देव ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
डबल बेंच ने की थी सुनवाई
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति रमेश चंद्र खुल्बे की डबल बेंच ने मामले की सुनवाई के बाद कहा, “यह कहना कि केवल रजिस्टर्ड मालिक को ही वोट देने का अधिकार होगा, गलत है. ऐसा इसलिए क्योंकि किरायेदार जब एक सोसाइटी या कॉलोनी में रहता है तो फिर वो सब तरह के शुल्क देता है. इसलिए उसका पहले हक बनता है कि वो चुनाव में वोट डाले.
न्यायाधीशों ने आदेश में कहा, “यदि पंजीकृत फ्लैट का मालिक निवासी नहीं है, तो समाज के उद्देश्यों की उपलब्धियों को सुनिश्चित करने में उसकी कोई हिस्सेदारी नहीं होगी। स्थिति यह है कि जिन किरायेदारों के हितों की रक्षा के लिए समाज द्वारा पूर्वोक्त उद्देश्यों को प्राप्त करने की कोशिश की जाती है, उनका सोसाइटी के प्रबंधन में कहना नहीं होना विरोधाभासी होगा. इसलिए, हम निर्देश देते हैं कि मामले में पंजीकृत फ्लैट मालिक स्वयं कॉलोनी के निवासी हैं, तभी वो वोट दे सकते हैं. अन्यथा उनकी जगह घर या फ्लैट में रह रहे किरायेदार को वोट देने का अधिकार होगा.
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