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महंगाई के मौसम में TV देखना हो सकता है सस्ता, TRAI ने की ये सिफारिश
ट्राई का कहना है कि DTH ऑपरेटर्स के लिए लाइसेंस शुल्क खत्म कर दिया जाना चाहिए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
केबल TV देखने वालों को आने वाले समय में अच्छी खबर मिल सकती है. दरअसल, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI ने सरकार से एक सिफारिश की है. यदि इस सिफरिश पर अमल हो जाता है, तो DTH (Direct to Home) ऑपरेटरों को लाइसेंस शुल्क का भुगतान नहीं करना होगा. जाहिर है इसका कुछ न कुछ फायदा वह ग्राहकों को भी पहुंचाएंगे, ताकि उनका यूजर बेस मजबूत हो. यानी आने वाले समय में आपके लिए महंगाई के मौसम में TV देखना सस्ता हो सकता है.
TRAI ने दिया ये हवाला
टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने सरकार को भेजी अपनी सिफारिश में कहा है कि DTH ऑपरेटरों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-2027 से लाइसेंस शुल्क समाप्त कर देना चाहिए, ताकि वह लॉन्ग टर्म में अच्छा परफॉर्म कर पाएं. ट्राई का कहना है कि आने वाले तीन वर्षों में डायरेक्ट-टू-होम यानी DTH ऑपरेटरों के लिए लाइसेंस शुल्क को शून्य तक लाया जाना चाहिए. हालांकि, सरकार इस सिफारिश पर क्या रुख अख्तियार करती है, ये आने वाला वक्त ही बताएगा लेकिन यदि इसे स्वीकार किया जाता है, तो केबल TV देखने वाले आम दर्शकों को भी इसका फायदा मिलेगा.
पिछड़ रहा है DTH सेक्टर
TRAI ने सरकार को लिखे पत्र में कहा है कि DTH प्लेटफॉर्म को अन्य रेगुलेटेड और नॉन-रेगुलेटेड वितरण प्लेटफॉर्म जैसे कि मल्टी-सिस्टम ऑपरेटर्स (MSOs), हेडएंड इन द स्काई (HITS) ऑपरेटर्स, IPTV प्रदाताओं, DD फ्री डिश और OTT सेवाओं के समान माना जाना चाहिए, जो किसी भी लाइसेंस शुल्क का भुगतान नहीं करते. गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में, DTH सेक्टर, DD फ्री डिश, प्रसार भारती के मुफ्त डीटीएच प्लेटफॉर्म और OTT प्लेटफॉर्म के कारण पिछड़ता जा रहा है. मार्च 2023 तक, 4 पे-DTH Platforms का एक्टिव सब्सक्राइबर बेस 65.25 मिलियन था.
सालाना इतने करोड़ का भुगतान
ट्राई ने अपनी सिफारिश में कहा है कि जब तक लाइसेंस शुल्क शून्य नहीं हो जाता, DTH लाइसेंस शुल्क वर्तमान में 8% से घटाकर एग्जेस्टेड ग्रॉस रिवेन्यु (AGR) का 3% कर दिया जाए. ट्राई की सिफारिश पर डिशटीवी के एक प्रवक्ता का कहना है कि लाइसेंस शुल्क का मुद्दा पिछले काफी समय से लंबित है. हम TRAI के शुक्रगुजार हैं कि उसने हमारी आवाज को बल दिया. एक अनुमान के मुताबिक, प्राइवेट DTH ऑपरेटर लाइसेंस शुल्क के रूप में सालाना 1000 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान करते हैं.
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