होम / बिजनेस / ट्रंप-शी बैठक से दुनिया को राहत के संकेत, अमेरिका-चीन ने तनाव घटाने पर बनाई सहमति

ट्रंप-शी बैठक से दुनिया को राहत के संकेत, अमेरिका-चीन ने तनाव घटाने पर बनाई सहमति

बैठक का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को “रणनीतिक स्थिरता” के दायरे में बनाए रखने पर सहमति जताई. इसका मतलब है कि अब अमेरिका और चीन सीधे टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा की नीति अपनाएंगे.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 4 months ago

बीजिंग में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच गुरुवार को हुई अहम बैठक को वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है. लंबे समय से व्यापार, ताइवान और सुरक्षा जैसे मुद्दों पर तनाव झेल रहे दोनों देशों ने अब रिश्तों को स्थिर बनाने और संवाद बढ़ाने पर जोर दिया है. हालांकि कई संवेदनशील मुद्दों पर मतभेद अब भी कायम हैं, लेकिन इस बैठक से दुनिया को यह संकेत जरूर मिला है कि दोनों महाशक्तियां टकराव कम करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती हैं.

अमेरिका-चीन रिश्तों में ‘रणनीतिक स्थिरता’ पर जोर

बैठक का सबसे बड़ा नतीजा यह रहा कि दोनों देशों ने अपने संबंधों को “रणनीतिक स्थिरता” के दायरे में बनाए रखने पर सहमति जताई. इसका मतलब है कि अब अमेरिका और चीन सीधे टकराव बढ़ाने के बजाय बातचीत और नियंत्रित प्रतिस्पर्धा की नीति अपनाएंगे. दोनों देशों ने यह भी माना कि मौजूदा विवादों को तुरंत खत्म करना संभव नहीं है, लेकिन उन्हें बेहतर तरीके से संभालने और संवाद जारी रखने की जरूरत है.

व्यापार वार्ता में दिखे सकारात्मक संकेत

बैठक से पहले दोनों देशों के आर्थिक अधिकारियों के बीच हुई बातचीत को सकारात्मक बताया गया. अमेरिका की ओर से स्कॉट बेसेंट और चीन की तरफ से ही लीफेंग ने व्यापार वार्ता में हिस्सा लिया. चीन ने संकेत दिया कि वह अपने बाजार को विदेशी कंपनियों के लिए और ज्यादा खोल सकता है. वहीं अमेरिका ने भी दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंध मजबूत करने पर जोर दिया. इससे वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल देखने को मिला.

कृषि, पर्यटन और निवेश पर भी बनी सहमति

इस शिखर सम्मेलन में सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि कृषि, पर्यटन और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. अमेरिका ने चीन से कृषि उत्पादों की खरीद बढ़ाने की मांग की, जबकि दोनों देशों ने निवेश और बाजार पहुंच को आसान बनाने पर भी बातचीत की.

इसके अलावा अमेरिका ने चीन से फेंटानिल बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की सप्लाई रोकने में सहयोग मांगा. यह मुद्दा लंबे समय से अमेरिका के लिए चिंता का कारण बना हुआ है.

ऊर्जा सुरक्षा और होर्मुज स्ट्रेट पर अहम चर्चा

बैठक में वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा रही. दोनों देशों ने माना कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है और इसे खुला रहना चाहिए. चीन ने इस क्षेत्र के सैन्यीकरण का विरोध किया और संकेत दिया कि वह ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका से तेल आयात बढ़ा सकता है. साथ ही दोनों देशों ने इस बात पर भी सहमति जताई कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहिए.

ताइवान मुद्दे पर अब भी कायम है तनाव

रिश्तों में सुधार की कोशिशों के बावजूद ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील बना हुआ है. शी जिनपिंग ने साफ कहा कि अगर इस मुद्दे को गलत तरीके से संभाला गया तो दोनों देशों के बीच गंभीर टकराव की स्थिति पैदा हो सकती है.

चीन ताइवान को अपनी संप्रभुता का हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका इस मुद्दे पर संतुलित लेकिन सतर्क रुख अपनाता है. यही वजह है कि भविष्य में भी यह मुद्दा अमेरिका-चीन संबंधों में सबसे बड़ी चुनौती बना रह सकता है.

दुनिया की नजर अब अगले कदम पर

विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप और शी जिनपिंग की यह बैठक फिलहाल तनाव कम करने की दिशा में सकारात्मक शुरुआत है. हालांकि व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और ताइवान जैसे मुद्दों पर असली परीक्षा आने वाले महीनों में होगी.

फिलहाल वैश्विक बाजार और निवेशक इस बात पर नजर बनाए हुए हैं कि दोनों देशों के बीच हुई सहमति कितनी तेजी से जमीन पर उतरती है और इसका दुनिया की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ता है.
 


टैग्स
सम्बंधित खबरें

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

2 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

2 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

3 hours ago

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

4 hours ago

पावर प्लांट्स में सिर्फ 9 दिन का कोयला, 42% घटा स्टॉक; लॉजिस्टिक्स बनी बड़ी चुनौती

बिजली की बढ़ती मांग और परिवहन संबंधी दिक्कतों के चलते थर्मल पावर प्लांट्स में कोयले का दबाव बढ़ा, 190 में से 51 प्लांट्स में स्टॉक गंभीर स्तर पर

6 hours ago


बड़ी खबरें

बकाया टैक्स पर गिरफ्तारी नहीं, संपत्ति कुर्क कर होगी वसूली; CBDT ने नियमों में किया बदलाव

सीबीडीटी ने 17 सितंबर को जारी अधिसूचना के जरिए आयकर नियम, 2026 के नियम 225 में संशोधन किया है. यह नियम टैक्स बकाया की वसूली की प्रक्रिया से संबंधित है.

4 hours ago

सेबी का कमोडिटी सौदा: विदेशी लाते हैं पैसा, भारतीय ब्रोकर उठाते हैं जोखिम

सेबी भारत के फिजिकली सेटल्ड कमोडिटी कॉन्ट्रैक्ट्स में विदेशी फंड्स चाहता है. वे डिलीवरी नहीं ले सकते. इसलिए अगर कोई फंड समय रहते बाहर निकलने में विफल रहता है, तो उसकी पोजीशन बाजार बंद होने के बाद अपने आप एक भारतीय ब्रोकर की खुद की बुक्स में चली जाती है. फंड "किसी भी आगे के अधिकार, टाइटल, दायित्व या एक्सपोजर" से मुक्त हो जाता है. ब्रोकर यह सब अपने ऊपर ले लेता है. SEBI इसे एक सुरक्षा उपाय कहता है.

2 hours ago

20 वर्षों में भारत की GDP 38 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकती है: अजीत डोभाल

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने कहा कि अगले दो दशकों में भारत का आर्थिक विस्तार नई पीढ़ी के स्नातकों के लिए अवसर पैदा कर सकता है.

2 hours ago

सरकारी जमीन और बिल्डिंग्स से जुटाए जाएंगे ₹5,000 करोड़ से ज्यादा, NLMC ने तेज की एसेट मॉनेटाइजेशन प्रक्रिया

NLMC बोर्ड ने 5,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की अतिरिक्त जमीन और बिल्डिंग संपत्तियों के मॉनेटाइजेशन की सिफारिश की है.

3 hours ago

भारत के फॉरेक्स रिजर्व में 4.924 अरब डॉलर की गिरावट, 10 हफ्तों की बढ़त पर लगा ब्रेक

विदेशी मुद्रा आस्तियां देश के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा होती हैं. डॉलर में व्यक्त FCA में यूरो, पाउंड और येन जैसी गैर-अमेरिकी मुद्राओं की विनिमय दरों में होने वाले बदलाव का असर भी शामिल होता है.

10 hours ago