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चुनाव से पहले सख्ती तेज: जब्ती का आंकड़ा 650 करोड़ रुपये के पार, पश्चिम बंगाल सबसे आगे
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब्ती के मामले में पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहा, जहां करीब 319 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने आगामी विधानसभा और उपचुनावों से पहले बड़ी कार्रवाई करते हुए नकदी, शराब, ड्रग्स और अन्य प्रलोभनों की जब्ती को तेज कर दिया है. आयोग के मुताबिक अब तक कुल जब्ती 650 करोड़ रुपये के आंकड़े को पार कर चुकी है, जो चुनावी उल्लंघनों पर सख्त निगरानी को दर्शाता है.
निर्वाचन आयोग ने बताया कि 26 फरवरी को इलेक्ट्रॉनिक सीज़र मैनेजमेंट सिस्टम लागू होने के बाद से प्रवर्तन एजेंसियों ने करीब 651.5 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की है. इस कदम का उद्देश्य चुनावों में मतदाताओं को प्रलोभन से मुक्त रखना और निष्पक्ष मतदान सुनिश्चित करना है.
इन राज्यों में होने हैं चुनाव
आयोग ने 15 मार्च को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों का कार्यक्रम घोषित किया था. इसके साथ ही छह राज्यों में उपचुनाव भी प्रस्तावित हैं. सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आचार संहिता का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं.
पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा जब्ती
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जब्ती के मामले में पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहा, जहां करीब 319 करोड़ रुपये की सामग्री जब्त की गई. इसके बाद तमिलनाडु में 170 करोड़ रुपये और असम में 97 करोड़ रुपये की जब्ती दर्ज की गई.
जब्त की गई वस्तुओं में 53.2 करोड़ रुपये नकद, लगभग 79.3 करोड़ रुपये की शराब, 230 करोड़ रुपये की ड्रग्स, 58 करोड़ रुपये के कीमती धातु और 231 करोड़ रुपये से अधिक के मुफ्त उपहार व अन्य सामान शामिल हैं.
निगरानी के लिए बड़ी तैनाती
निर्वाचन आयोग ने बताया कि शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 5,100 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड तैनात किए गए हैं, जो 100 मिनट के भीतर प्रतिक्रिया देते हैं. इसके अलावा 5,200 से ज्यादा स्टैटिक सर्विलांस टीमें प्रमुख स्थानों पर अचानक जांच कर रही हैं.
आयोग ने चुनाव वाले राज्यों और आसपास के क्षेत्रों में मुख्य सचिवों, पुलिस प्रमुखों और अन्य एजेंसियों के साथ कई समीक्षा बैठकें भी की हैं, ताकि चुनाव हिंसा और डराने-धमकाने की घटनाओं से मुक्त रह सकें.
नागरिकों के लिए शिकायत व्यवस्था
आम नागरिकों को परेशानी से बचाने के लिए जिला स्तर पर शिकायत समितियां बनाई गई हैं. साथ ही मतदाताओं और राजनीतिक दलों से अपील की गई है कि वे आचार संहिता के उल्लंघन की जानकारी आयोग के C-Vigil मोबाइल ऐप के जरिए दें.
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